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Governance · Exam Notes

दिल्ली ने ढाका से 2,800 अवैध प्रवासियों की जांच तेज करने का आग्रह किया: कानूनी और सुरक्षा पहलू

साल 2024 में भारत ने बांग्लादेश से 2,800 कथित अवैध प्रवासियों की जांच तेज करने का अनुरोध किया है, जिनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया लंबित है। जांच में देरी से भारत के विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत प्रवासन कानून लागू करने में बाधा आती है और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है। भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (2015) और बेहतर डेटा साझा करने के तंत्र से इस समस्या का समाधान संभव है।
08 May 2026 1 min read GS Paper II
Governance
Exam relevance
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

अवैध प्रवासियों की जांच में देरी: संदर्भ और वर्तमान स्थिति

साल 2024 में भारत सरकार ने औपचारिक रूप से बांग्लादेश से अनुरोध किया है कि वह 2,800 कथित अवैध प्रवासियों की पहचान और जांच प्रक्रिया को तेज करे, जिनका प्रत्यर्पण लंबित है। ये व्यक्ति मुख्य रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा के पास पाए गए हैं, जिसकी कुल लंबाई 4,096 किलोमीटर है, जिसमें से 2,217 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाई गई है (BSF वार्षिक रिपोर्ट 2023)। बांग्लादेश की ओर से जांच में हो रही देरी भारत के प्रवासन कानूनों के क्रियान्वयन और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में बाधा डालती है, खासकर संवेदनशील सीमा राज्यों और दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों में।

इस मुद्दे की अहमियत द्विपक्षीय सहयोग में निहित है, जो भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (2015) और अन्य राजनयिक प्रोटोकॉल के तहत आधारित है। समय पर जांच न होने से प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती, जिससे कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें पैदा होती हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – प्रवासन कानून, द्विपक्षीय समझौते, आंतरिक सुरक्षा
  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां – सीमा प्रबंधन, अवैध प्रवासन का प्रभाव
  • निबंध: भारत-बांग्लादेश संबंध, सीमा सुरक्षा, और प्रवासन नीतियां

अवैध प्रवासन पर संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारतीय संविधान के Article 355 के तहत केंद्र सरकार को राज्यों की रक्षा बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से करनी होती है, जिसमें अवैध प्रवासन भी शामिल है। अवैध प्रवासियों के प्रबंधन के लिए मुख्य कानून Foreigners Act, 1946 है, खासकर इसके Sections 3 और 9, जो अधिकारियों को बिना वैध दस्तावेजों वाले विदेशी नागरिकों का पता लगाने, हिरासत में लेने और प्रत्यर्पित करने का अधिकार देते हैं।

Passport (Entry into India) Act, 1920 इस प्रक्रिया को प्रवेश और निकास नियमों के माध्यम से पूरा करता है। नागरिकता से जुड़े मामले Citizenship Act, 1955 द्वारा नियंत्रित होते हैं, जिसमें Sections 3 और 5 नागरिकता प्राप्ति और निरस्तीकरण की परिभाषा देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने Sarbananda Sonowal v. Union of India (2005) मामले में अवैध प्रवासियों के प्रत्यर्पण में राज्य की अधिकारिता को दोहराया है, जिससे कार्यपालिका की प्रवासन कानूनों के क्रियान्वयन में भूमिका स्पष्ट होती है।

  • भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (2015): अवैध प्रवासियों की पहचान, जांच और प्रत्यर्पण के लिए प्रोटोकॉल प्रदान करता है।
  • Foreigners Regional Registration Offices (FRRO): विदेशी नागरिकों का पंजीकरण और उनके प्रवास की निगरानी करते हैं।
  • Border Security Force (BSF): सीमा की सुरक्षा करता है और पहचान व हिरासत में सहायता करता है।

भारत पर अवैध प्रवासन का आर्थिक प्रभाव

अवैध प्रवासन से वित्तीय और सामाजिक दोनों तरह के बड़े बोझ पैदा होते हैं। गृह मंत्रालय ने 2023-24 में सीमा प्रबंधन और प्रवासन नियंत्रण के लिए लगभग ₹3,500 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। अनियंत्रित प्रवासन शहरी बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण प्रणालियों पर दबाव डालता है, खासकर दिल्ली में जहां प्रवासी असंगठित श्रमिकों का 60% हिस्सा हैं (NSSO 2017-18)।

अप्रमाणित प्रवासी कम-कुशल नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे मजदूरी दबाव में आती है और स्थानीय असंगठित श्रमिकों में बेरोजगारी बढ़ती है। हालांकि, आर्थिक पारस्परिक निर्भरता enforcement को जटिल बनाती है: भारत-बांग्लादेश के बीच FY2023 में $18 बिलियन का व्यापार और रेमिटेंस हुआ (वाणिज्य मंत्रालय), इसलिए आर्थिक संबंधों को प्रभावित किए बिना कूटनीतिक संवाद जरूरी है।

अवैध प्रवासन प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाएं

  • गृह मंत्रालय (MHA): प्रवासन नीति बनाता है, प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी करता है और बजट आवंटित करता है।
  • विदेश मंत्रालय (MEA): बांग्लादेश के साथ जांच व प्रत्यर्पण पर कूटनीतिक वार्ता करता है।
  • सीमा सुरक्षा बल (BSF): सीमा सुरक्षा करता है, अवैध प्रवेश की पहचान करता है और हिरासत में सहायता करता है।
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA): अवैध प्रवासन से जुड़े सुरक्षा खतरों, जैसे आतंकवाद, की जांच करती है।
  • Foreigners Regional Registration Office (FRRO): विदेशी नागरिकों का पंजीकरण और कानूनी स्थिति की निगरानी करता है।
  • बांग्लादेश गृह मंत्रालय: ढाका की ओर से पहचान सत्यापन और प्रत्यर्पण की जिम्मेदारी संभालता है।

अवैध प्रवासन और सीमा प्रबंधन के आंकड़े

मापदंडभारतबांग्लादेश / तुलनात्मक आंकड़े
भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई4,096 किमी (2,217 किमी बाड़ लगी)साझा सीमा, द्विपक्षीय गश्त
भारत में अनुमानित अवैध प्रवासी1.9 मिलियन (जनगणना 2011, गृह मंत्रालय रिपोर्ट)जांच लंबित मामले: 2,800 (2024)
सीमा प्रबंधन के लिए बजट₹3,500 करोड़ (वित्त वर्ष 2023-24)सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं
सीमा पार व्यापार का आयतन$18 बिलियन (वित्त वर्ष 2023)परस्पर लाभकारी आर्थिक संबंध
दिल्ली में प्रवासियों का असंगठित श्रमिक हिस्सा60% (NSSO 2017-18)प्रासंगिक नहीं

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-बांग्लादेश और अमेरिका-मेक्सिको प्रवासन जांच

भारत-बांग्लादेश की जांच प्रक्रिया की तुलना में अमेरिका-मेक्सिको की प्रणाली अधिक उन्नत है। अमेरिका Immigration and Nationality Act (INA) 1965, Section 235(b) के तहत बायोमेट्रिक डेटा साझा करता है और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को 30% तेज करता है, जबकि भारत-बांग्लादेश प्रणाली में यह सुविधा सीमित है।

भारत-बांग्लादेश के बीच वास्तविक समय में बायोमेट्रिक डेटा आदान-प्रदान की कमी से पहचान और प्रत्यर्पण में देरी होती है। अमेरिका-मेक्सिको प्रणाली तकनीक और कानूनी ढांचे को मिलाकर प्रवासन प्रवर्तन को सुव्यवस्थित करती है, जो भारत के लिए एक आदर्श मॉडल हो सकता है।

पहलूभारत-बांग्लादेशअमेरिका-मेक्सिको
जांच तंत्रमैनुअल/दस्तावेज आधारित, देरीरियल-टाइम बायोमेट्रिक डेटा साझा करना
कानूनी ढांचाForeigners Act, Land Boundary Agreement (2015)Immigration and Nationality Act (INA) 1965, Section 235(b)
प्रत्यर्पण की गतिजांच में देरी के कारण धीमी30% तेज प्रत्यर्पण
तकनीक का उपयोगसीमित बायोमेट्रिक एकीकरणउन्नत बायोमेट्रिक और डेटा साझा करना

जांच में अड़चन दूर करने के उपाय

  • पहचान जांच तेज करने के लिए द्विपक्षीय वास्तविक समय बायोमेट्रिक डेटा साझा करने वाला मंच स्थापित करें।
  • बांग्लादेश की समयबद्ध सहयोग सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के माध्यम से कूटनीतिक संवाद मजबूत करें।
  • FRRO और BSF की क्षमता बढ़ाएं, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के साथ बेहतर पहचान और दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करें।
  • Foreigners Act और Land Boundary Agreement जैसे कानूनी ढांचे का उपयोग कर जांच के लिए समयसीमा निर्धारित करें।
  • सुरक्षा आवश्यकताओं और आर्थिक निर्भरता के बीच संतुलन बनाएं, ताकि सीमा पार व्यापार और रेमिटेंस के रास्ते खुले रहें।

Foreigners Act, 1946 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह सरकार को अवैध प्रवासियों का पता लगाने, हिरासत में लेने और प्रत्यर्पित करने का अधिकार देता है।
  2. यह अधिनियम भारतीय नागरिकता के मानदंड निर्धारित करता है।
  3. धारा 3 और 9 विशेष रूप से हिरासत और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि Foreigners Act अवैध प्रवासियों का पता लगाने, हिरासत और प्रत्यर्पण का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि नागरिकता के मानदंड Citizenship Act, 1955 में निर्धारित हैं, Foreigners Act में नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि धारा 3 और 9 हिरासत और प्रत्यर्पण से संबंधित हैं।

भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (LBA) 2015 के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. LBA अवैध प्रवासियों की जांच और प्रत्यर्पण के लिए प्रोटोकॉल प्रदान करता है।
  2. इस समझौते में पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का प्रावधान शामिल है।
  3. LBA नागरिकता मामलों में Citizenship Act, 1955 से ऊपर है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि LBA में जांच और प्रत्यर्पण के प्रोटोकॉल शामिल हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि बाड़ लगाना एक अलग सुरक्षा उपाय है, जो LBA द्वारा अनिवार्य नहीं है। कथन 3 गलत है क्योंकि LBA नागरिकता अधिनियम को अधिमान्य नहीं करता।

मुख्य प्रश्न

बांग्लादेश द्वारा अवैध प्रवासियों की जांच में देरी से भारत की आंतरिक सुरक्षा और प्रवासन प्रवर्तन पर क्या चुनौतियां आती हैं? इन चुनौतियों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे और द्विपक्षीय तंत्रों की समीक्षा करें और जांच व प्रत्यर्पण प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और आंतरिक सुरक्षा
  • झारखंड संदर्भ: झारखंड की सीमाएं पश्चिम बंगाल और बिहार के माध्यम से बांग्लादेश से जुड़ी हैं; अवैध प्रवासन क्षेत्रीय सुरक्षा और संसाधन आवंटन को प्रभावित करता है।
  • मुख्य बिंदु: संवैधानिक प्रावधान, केंद्र-राज्य समन्वय और झारखंड में बेहतर सीमा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दें।
अवैध प्रवासन प्रबंधन में Article 355 की क्या भूमिका है?

Article 355 केंद्र सरकार को राज्यों की बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से सुरक्षा करने का अधिकार देता है, जिसमें अवैध प्रवासन भी शामिल है, जिससे केंद्र को सीमा सुरक्षा और प्रवासन प्रवर्तन में हस्तक्षेप का अधिकार मिलता है।

भारत में अवैध प्रवासियों की पहचान और प्रत्यर्पण का प्रबंधन कौन सा अधिनियम करता है?

Foreigners Act, 1946 अवैध प्रवासियों के पता लगाने, हिरासत में लेने और प्रत्यर्पण का प्रावधान करता है, जिसमें धारा 3 और 9 विशेष रूप से इन प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।

भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता प्रवासन नियंत्रण में कैसे मदद करता है?

2015 का यह समझौता अवैध प्रवासियों की जांच और प्रत्यर्पण के लिए प्रोटोकॉल प्रदान करता है, जिससे सीमा पार प्रवासन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।

प्रवासन जांच में बायोमेट्रिक डेटा साझा करना क्यों महत्वपूर्ण है?

बायोमेट्रिक डेटा साझा करने से वास्तविक समय में पहचान की पुष्टि होती है, जिससे प्रत्यर्पण में देरी कम होती है और सटीकता बढ़ती है, जैसा कि अमेरिका-मेक्सिको प्रणाली में देखा गया है।

दिल्ली में अवैध प्रवासन से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां क्या हैं?

अवैध प्रवासन दिल्ली के असंगठित श्रम बाजार पर दबाव डालता है, जहां प्रवासी श्रमिकों की हिस्सेदारी 60% है, जिससे कम-कुशल नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और शहरी बुनियादी ढांचे व सामाजिक सेवाओं पर बोझ बढ़ता है।

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