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राजस्थान एसीबी ने जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया

जून 2024 में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े टेंडर घोटाले के आरोप में पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया। यह मामला केंद्र की प्रमुख योजना के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं के ठेकों में अनियमितताओं से जुड़ा है। इस गिरफ्तारी ने बड़े सरकारी कार्यक्रमों में सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया की प्रणालीगत कमजोरियों को उजागर किया है, जो शासन की विश्वसनीयता और सेवा वितरण समयसीमा को प्रभावित करती हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – भ्रष्टाचार विरोधी ढांचे, सार्वजनिक खरीद सुधार, प्रमुख योजनाओं का क्रियान्वयन
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – धन का कुशल उपयोग, ग्रामीण अवसंरचना विकास
  • निबंध: सार्वजनिक सेवा वितरण में शासन और पारदर्शिता

भ्रष्टाचार और खरीद प्रक्रिया के लिए कानूनी ढांचा

जांच Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 7, 8, और 13 के तहत की जा रही है, जो सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार को अपराध मानती हैं। राज्य स्तर पर Rajasthan Lokayukta and Deputy Lokayukta Act, 1973 एसीबी जैसी एजेंसियों को भ्रष्टाचार की जांच का अधिकार देता है। जल जीवन मिशन के तहत सार्वजनिक खरीद General Financial Rules (GFR) 2017 के अनुरूप होनी चाहिए, जो पारदर्शी टेंडरिंग प्रक्रिया सुनिश्चित करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के Vineet Narain v. Union of India (1998) मामले में दिए गए फैसले के अनुसार भ्रष्टाचार के मामलों में शीघ्र और प्रभावी जांच अनिवार्य है, जो एसीबी की त्वरित कार्रवाई का कानूनी आधार है।

  • Prevention of Corruption Act, 1988: धारा 7 (आपराधिक कदाचार), धारा 8 (सरकारी कर्मचारियों द्वारा कदाचार), धारा 13 (रिश्वतखोरी)
  • Rajasthan Lokayukta Act, 1973: राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार जांच के अधिकार
  • General Financial Rules 2017: पारदर्शी और निष्पक्ष सार्वजनिक खरीद के नियम
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: Vineet Narain बनाम भारत संघ (1998) में भ्रष्टाचार जांच के समयसीमा संबंधी निर्देश

जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के आर्थिक प्रभाव

जल जीवन मिशन का बजट ₹3.6 लाख करोड़ (2020-25) है, जिसका उद्देश्य 2024 तक 18 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यशील नल कनेक्शन देना है। राजस्थान को लगभग ₹13,000 करोड़ आवंटित हैं। टेंडर घोटाले के कारण परियोजनाओं की लागत 10-15% तक बढ़ जाती है, जिससे राजस्थान में ₹1,300-1,950 करोड़ की धनराशि का संभावित गबन होता है। इससे धन के कुशल उपयोग में बाधा आती है और सार्वभौमिक ग्रामीण जल आपूर्ति के लक्ष्य में देरी होती है। जल शक्ति मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023 के अनुसार राजस्थान में केवल 65% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन कार्यरत हैं, जो राष्ट्रीय औसत 70% से कम है, जिसका एक कारण खरीद प्रक्रिया में अनियमितताएं और लागत वृद्धि है।

  • जल जीवन मिशन का कुल बजट: ₹3.6 लाख करोड़ (2020-25) – जल शक्ति मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2023
  • राजस्थान का आवंटन: लगभग ₹13,000 करोड़
  • भ्रष्टाचार से लागत वृद्धि का अनुमान: 10-15% (Transparency International India, 2023)
  • राजस्थान में ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन: 65% बनाम राष्ट्रीय औसत 70% (NSSO 2022)
  • खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण ग्रामीण जल परियोजनाओं में 18% देरी (CAG रिपोर्ट 2023)

संस्थागत भूमिका और जवाबदेही तंत्र

राजस्थान एसीबी राज्य स्तर की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की जांच की मुख्य एजेंसी है, जिसमें जल जीवन मिशन के टेंडर भी शामिल हैं। जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्धारण और कार्यान्वयन की देखरेख करता है, जबकि Department of Drinking Water and Sanitation (DDWS) ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं का नोडल विभाग है। Central Vigilance Commission (CVC) केंद्र स्तर पर भ्रष्टाचार रोकथाम की निगरानी करता है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) सरकारी खर्चों का ऑडिट करता है और अनियमितताओं को उजागर करता है। राजस्थान लोकायुक्त राज्य स्तर पर स्वतंत्र भ्रष्टाचार विरोधी पर्यवेक्षण प्रदान करता है।

  • राजस्थान एसीबी: राज्य परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की जांच
  • जल शक्ति मंत्रालय: जल जीवन मिशन के लिए केंद्रीय नीति और कार्यान्वयन प्राधिकरण
  • DDWS: ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं का नोडल विभाग
  • CVC: भ्रष्टाचार रोकथाम के लिए शीर्ष निगरानी संस्था
  • CAG: सरकारी खर्चों का ऑडिट और अनियमितताओं की पहचान
  • राजस्थान लोकायुक्त: राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल

तुलनात्मक अध्ययन: भारत का जल जीवन मिशन और ब्राजील का Água para Todos कार्यक्रम

भारत का जल जीवन मिशन और ब्राजील का ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम Água para Todos दोनों ही खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और देरी जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। ब्राजील में प्रारंभिक टेंडर अनियमितताओं के कारण परियोजनाओं का विस्तार दो साल तक रुका रहा। ब्राजील ने ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम मॉनिटरिंग अपनाकर तीन वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में 40% की कमी लाई, जिससे लागत दक्षता और सेवा वितरण बेहतर हुआ। भारत के जल जीवन मिशन में अभी तक इस तरह के एकीकृत डिजिटल खरीद और निगरानी प्रणाली का व्यापक स्तर पर अभाव है, जो मनमानी और अनियमितताओं की देर से पहचान को बढ़ावा देता है।

पहलू भारत: जल जीवन मिशन ब्राजील: Água para Todos
कार्यक्रम उद्देश्य 2024 तक 18 करोड़ ग्रामीण परिवारों को पीने योग्य जल उपलब्ध कराना देशव्यापी ग्रामीण जल आपूर्ति का विस्तार
बजट ₹3.6 लाख करोड़ (2020-25) USD 2 बिलियन के बराबर (2015-2020)
खरीद चुनौतियां टेंडर अनियमितताओं के कारण 18% परियोजना देरी प्रारंभिक टेंडर अनियमितताओं से 2 वर्ष की देरी
भ्रष्टाचार विरोधी उपाय सीमित रियल-टाइम ई-प्रोक्योरमेंट इंटीग्रेशन ई-प्रोक्योरमेंट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से 40% भ्रष्टाचार में कमी
सेवा वितरण पर प्रभाव राजस्थान में 65% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन (राष्ट्रीय औसत से कम) सुधारों के बाद ग्रामीण जल पहुंच में उल्लेखनीय सुधार

खरीद प्रक्रिया और भ्रष्टाचार नियंत्रण में संरचनात्मक कमजोरियां

राज्य स्तर पर स्वतंत्र ऑडिट और नागरिक शिकायत निवारण तंत्र से जुड़ी पूरी तरह से एकीकृत पारदर्शी ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली का अभाव टेंडर में मनमानी और लागत वृद्धि को बढ़ावा देता है। इस संरचनात्मक कमी के कारण अनियमितताओं की पहचान में देरी होती है। राजस्थान एसीबी द्वारा पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि व्यापक सुधार भी जरूरी हैं।

  • राज्य स्तर पर रियल-टाइम, पारदर्शी ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम का अभाव
  • स्वतंत्र ऑडिट और शिकायत निवारण के साथ अपर्याप्त समन्वय
  • कमज़ोर निगरानी के कारण टेंडर में मनमानी
  • अनियमितताओं की देर से पहचान और कानूनी कार्रवाई

आगे का रास्ता: जल जीवन मिशन में शासन और पारदर्शिता को मजबूत बनाना

  • राज्यव्यापी ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म लागू करें, जो केंद्रीय डेटाबेस से जुड़ा हो और रियल-टाइम मॉनिटरिंग करे
  • स्वतंत्र ऑडिट तंत्र को एकीकृत करें और लोकायुक्त को सक्रिय निगरानी का अधिकार दें
  • नागरिक शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित करें, जिसमें जवाब देने की अनिवार्य समयसीमा हो
  • एसीबी और अन्य निगरानी एजेंसियों की क्षमता बढ़ाएं ताकि जटिल खरीद मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके
  • टेंडर पुरस्कार और परियोजना प्रगति की नियमित सार्वजनिक सूचना जारी करना अनिवार्य करें ताकि पारदर्शिता बढ़े

Prevention of Corruption Act, 1988 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. धारा 7 सरकारी कर्मचारियों द्वारा आपराधिक कदाचार से संबंधित है।
  2. धारा 13 सरकारी कर्मचारियों से रिश्वतखोरी को अपराध बनाती है।
  3. यह अधिनियम राज्य लोकायुक्तों को भ्रष्टाचार की जांच का अधिकार देता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; धारा 7 आपराधिक कदाचार को संबोधित करती है। कथन 2 सही है; धारा 13 रिश्वतखोरी पर लागू होती है। कथन 3 गलत है; Prevention of Corruption Act लोकायुक्तों को जांच का अधिकार नहीं देता; ये अधिकार अलग राज्य कानूनों जैसे Rajasthan Lokayukta Act से आते हैं।

जल जीवन मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इसका लक्ष्य 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को कार्यशील नल कनेक्शन प्रदान करना है।
  2. इसका कार्यान्वयन केवल राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, केंद्रीय निगरानी नहीं होती।
  3. इसकी सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया General Financial Rules 2017 के अनुसार होती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है; जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक सार्वभौमिक ग्रामीण नल कनेक्शन देना है। कथन 2 गलत है; जल शक्ति मंत्रालय केंद्रीय निगरानी करता है। कथन 3 सही है; सार्वजनिक खरीद GFR 2017 के तहत होती है।

मेन प्रश्न

जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं में सार्वजनिक खरीद में भ्रष्टाचार शासन और सेवा वितरण को कैसे प्रभावित करता है? ऐसे चुनौतियों को कम करने के लिए संस्थागत सुधारों का सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और लोक प्रशासन
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में भी जल जीवन मिशन लागू है, जहां ₹4,000 करोड़ से अधिक का आवंटन है; गुमला और लातेहार जैसे जिलों में खरीद प्रक्रिया की अनियमितताओं के कारण ग्रामीण जल परियोजनाओं में देरी हुई है।
  • मेन पॉइंटर: राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र, लोकायुक्त की भूमिका, और पारदर्शी खरीद प्रक्रिया के महत्व को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
राजस्थान के जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले में भ्रष्टाचार जांच के लिए कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं?

Prevention of Corruption Act, 1988 (धारा 7, 8, 13) सरकारी कर्मचारियों के कदाचार और रिश्वतखोरी को नियंत्रित करता है। साथ ही Rajasthan Lokayukta and Deputy Lokayukta Act, 1973 राज्य एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच का अधिकार देता है।

जल जीवन मिशन के तहत राजस्थान का बजट आवंटन कितना है?

राजस्थान को 2020-25 के लिए लगभग ₹13,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यशील नल कनेक्शन प्रदान किए जा सकें।

राजस्थान में जल जीवन मिशन के उद्देश्यों पर भ्रष्टाचार का क्या प्रभाव पड़ता है?

भ्रष्टाचार के कारण परियोजना लागत 10-15% तक बढ़ जाती है, जिससे ₹1,300-1,950 करोड़ का संभावित गबन होता है, और नल कनेक्शन वाले ग्रामीण घरों का अनुपात 65% रह जाता है, जो राष्ट्रीय औसत 70% से कम है।

जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार और खरीद प्रक्रिया की निगरानी कौन-कौन से संस्थान करते हैं?

मुख्य संस्थान हैं: राजस्थान एसीबी, जल शक्ति मंत्रालय, Department of Drinking Water and Sanitation, Central Vigilance Commission, Comptroller and Auditor General of India, और राजस्थान लोकायुक्त।

ब्राजील के Água para Todos कार्यक्रम से भारत जल जीवन मिशन को क्या सीख मिल सकती है?

ब्राजील ने ई-प्रोक्योरमेंट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग अपनाकर भ्रष्टाचार में 40% कमी लाई, जिससे लागत दक्षता और सेवा वितरण बेहतर हुए। भारत को भी ऐसे डिजिटल और निगरानी तंत्र अपनाने चाहिए ताकि पारदर्शिता मजबूत हो।