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Economy · Exam Notes

रणनीतिक व्यापार समझौतों के माध्यम से भारत का इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला में समेकन मजबूत करना

वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत का इंडो-पैसिफिक देशों को माल निर्यात 150 अरब डॉलर तक पहुंचा, फिर भी वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी केवल 1.5% है। ASEAN CEPA जैसे रणनीतिक व्यापार समझौते और PLI योजनाएं भारत की इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला में बेहतर समेकन के लिए अहम हैं, जो आर्थिक मजबूती और भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाएंगी।
02 May 2026 1 min read GS Paper III
Economy
Exam relevance
GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

परिचय: भारत का इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला में रणनीतिक प्रवेश

वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत का इंडो-पैसिफिक देशों के साथ व्यापार लगभग 150 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो उसके कुल माल निर्यात का करीब 40% है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र विश्व की आधी से अधिक GDP और 60% वैश्विक व्यापार का केंद्र है (वर्ल्ड बैंक, 2023), जिससे यह वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत की वैश्विक मूल्य श्रृंखला (GVC) में हिस्सेदारी केवल 1.5% है, जो चीन के 25% के मुकाबले काफी कम है (OECD TiVA डेटा, 2023)। इस परिप्रेक्ष्य में, भारत रणनीतिक व्यापार समझौतों और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण के जरिए इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला में अपनी भागीदारी बढ़ाकर आर्थिक मजबूती और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की व्यापार कूटनीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति
  • GS3: अर्थव्यवस्था – विदेशी व्यापार नीति, वैश्विक मूल्य श्रृंखला, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
  • निबंध: इंडो-पैसिफिक आर्थिक संरचना में भारत की भूमिका और व्यापार समेकन

भारत के व्यापार समेकन के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचा

भारत की व्यापार नीति Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 के तहत संचालित होती है, जिसमें सेक्शन 3 केंद्रीय सरकार को आयात-निर्यात नियंत्रित करने का अधिकार देता है। कस्टम प्रक्रियाएं और शुल्क Customs Act, 1962 (सेक्शन 12 और 28) के अंतर्गत आते हैं, जो व्यापार सुगमता और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को प्रभावित करते हैं। संविधान के Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जो व्यापार समझौतों के लिए कानूनी आधार है। Special Economic Zones Act, 2005 (सेक्शन 4 और 6) निर्यात उन्मुख औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करता है, जो क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखला में समेकन के लिए जरूरी है।

  • Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992: केंद्रीय सरकार को व्यापार नीति और आयात-निर्यात नियंत्रण का अधिकार।
  • Customs Act, 1962: कस्टम शुल्क और प्रक्रियाएं जो व्यापार सुगमता को प्रभावित करती हैं।
  • Article 253, Constitution: अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए संसद को कानून बनाने का अधिकार।
  • Special Economic Zones Act, 2005: निर्यात केंद्र और औद्योगिक क्लस्टर के विकास को बढ़ावा।

इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला समेकन के आर्थिक पहलू

भारत का इंडो-पैसिफिक व्यापार में हिस्सा महत्वपूर्ण है, लेकिन वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में कम है। क्षेत्र को 150 अरब डॉलर के निर्यात के बावजूद भारत की GVC भागीदारी सिर्फ 1.5% है, जो मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में सीमित समेकन दर्शाती है (OECD TiVA डेटा, 2023)। सरकार की Production Linked Incentive (PLI) योजनाएं, जिनके लिए 2023 में लगभग INR 1.97 लाख करोड़ (~24 अरब डॉलर) आवंटित किए गए हैं, विनिर्माण प्रतिस्पर्धा और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए हैं। ASEAN के साथ Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) का लक्ष्य 2026 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाना है (MEA, 2023)। हालांकि, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत GDP का 13-14% है, जो वैश्विक औसत 8-10% से अधिक है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता प्रभावित होती है (NITI Aayog, 2023)।

  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र: विश्व GDP का 50% से अधिक, वैश्विक व्यापार का 60% से अधिक (वर्ल्ड बैंक, 2023)।
  • भारत की GVC हिस्सेदारी: 1.5% बनाम चीन का 25% (OECD TiVA डेटा, 2023)।
  • PLI योजनाएं: 2023 में INR 1.97 लाख करोड़ (~24 अरब डॉलर) आवंटन।
  • भारत-ASEAN CEPA: 2026 तक 200 अरब डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य।
  • लॉजिस्टिक्स लागत: भारत 13-14% GDP, वैश्विक औसत 8-10% (NITI Aayog, 2023)।

व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला समेकन में संस्थागत भूमिका

विदेश मंत्रालय (MEA) इंडो-पैसिफिक देशों के साथ व्यापार और रणनीतिक समझौतों के वार्ता और क्रियान्वयन का नेतृत्व करता है। Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) विनिर्माण और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां बनाता है, जिसमें PLI योजनाएं शामिल हैं। नीति आयोग आपूर्ति श्रृंखला सुधार और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे पर नीति सलाह देता है। क्षेत्रीय और बहुपक्षीय संस्थाएं जैसे ASEAN, OECD, और WTO व्यापार सहयोग और डेटा विश्लेषण के लिए आवश्यक ढांचा प्रदान करती हैं, जो भारत के समेकन प्रयासों में महत्वपूर्ण हैं।

  • MEA: व्यापार कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की वार्ता।
  • DPIIT: औद्योगिक नीति, निर्यात प्रोत्साहन, PLI योजना प्रबंधन।
  • नीति आयोग: लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला समेकन पर नीति सुझाव।
  • ASEAN: क्षेत्रीय आर्थिक समूह जो व्यापार सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • OECD और WTO: डेटा और बहुपक्षीय व्यापार नियमों का ढांचा।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम वियतनाम इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला समेकन में

पैरामीटरभारतवियतनाम
GVC भागीदारी1.5%30%
प्रमुख व्यापार समझौतेASEAN के साथ CEPA, सीमित RCEP भागीदारीCPTPP, RCEP, कई FTA के सदस्य
इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र निर्यात वृद्धि (5 वर्ष)मध्यम, लॉजिस्टिक्स बाधाओं के कारण सीमित20% वृद्धि
लॉजिस्टिक्स लागत (% GDP)13-14%लगभग 10%
औद्योगिक प्रोत्साहनPLI योजनाएं (~24 अरब डॉलर)मजबूत FDI प्रोत्साहन, निर्यात क्षेत्र

वियतनाम ने Comprehensive and Progressive Agreement for Trans-Pacific Partnership (CPTPP) और Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) में भागीदारी के जरिए इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र निर्यात में पांच वर्षों में 20% की वृद्धि हुई है (ASEAN सचिवालय, 2023)। इसके विपरीत, भारत की प्रगति धीमी रही है, जिसका कारण उच्च लॉजिस्टिक्स लागत और कम क्षेत्रीय व्यापार समझौते हैं।

भारत के मूल्य श्रृंखला समेकन में बाधाएं

भारत की आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना बिखरी हुई है और लॉजिस्टिक्स लागत (GDP का 13-14%) अधिक होने से मध्यवर्ती वस्तुओं के व्यापार में प्रतिस्पर्धा कम होती है। अनुपालन और नियामक जटिलताएं भी सहज समेकन में बाधा हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तुलना में भारत के पास कम व्यापक क्षेत्रीय व्यापार समझौते हैं, जिससे बाजार पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला संबंध सीमित हैं। मजबूत विनिर्माण क्षमता के बावजूद ये संरचनात्मक चुनौतियां भारत को मूल्य श्रृंखला में अधिक हिस्सेदारी लेने से रोकती हैं।

  • उच्च लॉजिस्टिक्स और अनुपालन लागत निर्यात लागत बढ़ाती है।
  • बिखरी हुई आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना दक्षता कम करती है।
  • सीमित क्षेत्रीय व्यापार समझौते बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पहुंच को रोकते हैं।
  • नियामक जटिलताएं व्यापार सुगमता धीमी करती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरा समेकन भारत की वैश्विक झटकों के प्रति आर्थिक मजबूती बढ़ाएगा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक ताकत बढ़ाएगा। प्राथमिकताएं हैं: मल्टीमॉडल परिवहन और डिजिटल कस्टम सुगमता में निवेश कर लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, ASEAN CEPA से आगे क्षेत्रीय व्यापार समझौतों का विस्तार करना, और नियामक सुधारों से अनुपालन सरल बनाना। PLI योजनाओं के साथ विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार और लक्षित निर्यात प्रोत्साहन जरूरी हैं। MEA, DPIIT और नीति आयोग के बीच बेहतर समन्वय से व्यापार कूटनीति और घरेलू सुधारों को एकीकृत करना आवश्यक होगा।

  • लॉजिस्टिक्स अवसंरचना में निवेश कर लागत को वैश्विक औसत (8-10%) के करीब लाना।
  • RCEP में शामिल होना और CPTPP जैसे समझौतों की खोज के साथ क्षेत्रीय व्यापार समझौतों का विस्तार।
  • व्यापार सुगमता के लिए नियामक और अनुपालन फ्रेमवर्क को सरल बनाना।
  • MEA, DPIIT और नीति आयोग के बीच नीति समन्वय को बढ़ाना।
  • PLI योजनाओं का उपयोग निर्यात बुनियादी ढांचे के विकास के साथ करना।

भारत की व्यापार नीति ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 केंद्रीय सरकार को आयात-निर्यात नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
  2. Customs Act, 1962 में व्यापार सुगमता से संबंधित कस्टम प्रक्रियाएं शामिल नहीं हैं।
  3. संविधान के Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 केंद्रीय सरकार को आयात-निर्यात नियंत्रित करने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Customs Act, 1962 में कस्टम प्रक्रियाएं और व्यापार सुगमता के प्रावधान शामिल हैं (सेक्शन 12 और 28)। कथन 3 सही है क्योंकि Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है।

भारत के इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखला समेकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत की लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक औसत से अधिक है, जो आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को प्रभावित करती है।
  2. भारत की GVC भागीदारी वियतनाम से अधिक है क्योंकि उसके पास कई व्यापार समझौते हैं।
  3. Production Linked Incentive (PLI) योजना विनिर्माण प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP का 13-14% है, जो वैश्विक औसत 8-10% से अधिक है। कथन 2 गलत है क्योंकि वियतनाम की GVC भागीदारी 30% है, जो भारत के 1.5% से कहीं अधिक है, इसका कारण व्यापक व्यापार समझौते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि PLI योजना विनिर्माण प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का उद्देश्य रखती है।

मुख्य प्रश्न

भारत के लिए इंडो-पैसिफिक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरा समेकन करने की चुनौतियां और अवसर क्या हैं? रणनीतिक व्यापार समझौते और घरेलू सुधार भारत की क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला संरचना में स्थिति को कैसे मजबूत कर सकते हैं? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और व्यापार नीति
  • झारखंड कोण: झारखंड के खनिज और औद्योगिक आधार को बेहतर निर्यात बुनियादी ढांचे और इंडो-पैसिफिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में समेकन से लाभ हो सकता है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की आपूर्ति श्रृंखला संबंधी संभावनाएं, अवसंरचना आवश्यकताएं और राष्ट्रीय व्यापार नीति में भूमिका पर प्रकाश डालना।
भारत की वैश्विक मूल्य श्रृंखला में वर्तमान हिस्सेदारी चीन की तुलना में कैसी है?

भारत की वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भागीदारी लगभग 1.5% है, जबकि चीन की हिस्सेदारी लगभग 25% है, जो मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में भारत की कम समेकन को दर्शाता है (OECD TiVA डेटा, 2023)।

भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लागू करने का अधिकार किस कानूनी प्रावधान से मिलता है?

भारतीय संविधान के Article 253 से संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए आवश्यक कानून बनाने का अधिकार मिलता है, जिसमें व्यापार समझौते भी शामिल हैं।

भारत की Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

PLI योजनाओं का उद्देश्य विनिर्माण प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, निर्यात बढ़ाना और निवेश आकर्षित करना है, जिसके लिए 2023 में लगभग INR 1.97 लाख करोड़ (~24 अरब डॉलर) आवंटित किए गए हैं।

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक औसत से कैसे तुलना करती है?

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13-14% है, जो वैश्विक औसत 8-10% से काफी अधिक है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता और निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है (NITI Aayog, 2023)।

ASEAN-India CEPA भारत की इंडो-पैसिफिक व्यापार रणनीति में क्या भूमिका निभाता है?

ASEAN के साथ Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) का उद्देश्य 2026 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक बढ़ाना है, जो भारत के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में गहरे आर्थिक समेकन के लिए एक प्रमुख ढांचा है।

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