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Governance · Exam Notes

भारत की ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता की रणनीति: नीति, अर्थव्यवस्था और रक्षा के आयाम

ड्रोन नियम 2021 और रक्षा खरीद प्रक्रिया 2023 के तहत भारत ने 2026 तक 38,500 से अधिक UAV पंजीकृत किए हैं और ₹500 करोड़ के R&D बजट के साथ ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से बढ़ाया है। हालांकि तकनीकी खामियां बनी हुई हैं, लेकिन SVAMITVA एवं PMFBY जैसे कार्यक्रमों में ड्रोन के इस्तेमाल से आर्थिक लाभ दिख रहे हैं और नीति समर्थन से देश की स्वदेशी ड्रोन निर्माण की रणनीति मजबूत हो रही है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

ड्रोन नियम 2021 और रक्षा खरीद प्रक्रिया 2023 के तहत भारत ने 2026 तक 38,500 से अधिक UAV पंजीकृत किए हैं और ₹500 करोड़ के R&D बजट के साथ ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से बढ़ाया है। हालांकि तकनीकी खामियां बनी हुई हैं, लेकिन SVAMITVA एवं PMFBY जैसे कार्यक्रमों में ड्रोन के इस्तेमाल से आर्थिक लाभ दिख रहे हैं और नीति समर्थन से देश की स्वदेशी ड्रोन निर्माण की रणनीति मजबूत हो रही है।

परिचय: भारत के ड्रोन निर्माण का परिदृश्य और रणनीतिक आवश्यकता

भारत में ड्रोन नियम, 2021 के लागू होने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के नेतृत्व में ड्रोन निर्माण क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। फरवरी 2026 तक देश में 38,500 से अधिक ड्रोन पंजीकृत हो चुके हैं और करीब 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणित किए जा चुके हैं (DGCA वार्षिक रिपोर्ट, 2026)। यह तेजी रक्षा मंत्रालय की 2026 की उस पहल के अनुरूप है, जिसमें ड्रोन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की बात कही गई है। यह कदम मेक इन इंडिया और डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 के तहत स्वदेशी UAV उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा तकनीक, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा विकास
  • GS पेपर 3: कृषि और संबद्ध क्षेत्र (PMFBY में ड्रोन का उपयोग)
  • निबंध: उभरती तकनीकें और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता

ड्रोन निर्माण और संचालन के लिए कानूनी एवं नियामक ढांचा

ड्रोन नियम, 2021 के तहत निदेशालय सामान्य नागरिक उड्डयन (DGCA) ड्रोन के संचालन, लाइसेंसिंग और प्रमाणन को नियंत्रित करता है। ये नियम ड्रोन पंजीकरण को यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) के जरिए सरल बनाते हैं और पायलट लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हैं, जिससे नागरिक ड्रोन के नियंत्रित उपयोग को बढ़ावा मिलता है। सैन्य UAVs के लिए डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 लागू होता है, जो मेक इन इंडिया पहल के तहत स्वदेशी निर्माण को अनिवार्य करता है।

ड्रोन का प्रमाणन एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 की धारा 3 के अंतर्गत होता है, जिसमें UAV को विमान माना गया है और इसके लिए प्रकार और उत्पादन प्रमाणन जरूरी है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों की सुरक्षा करता है, जिसमें UAV से संबंधित नवाचार भी शामिल हैं। 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले ने ड्रोन की निजता और हवाई क्षेत्र संबंधी नियमों को स्पष्ट किया, जिससे शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन संचालन का कानूनी आधार मजबूत हुआ है।

  • DGCA: प्रमाणन, पायलट लाइसेंसिंग और प्रशिक्षण संस्थानों की मंजूरी।
  • MoCA: नीति निर्धारण और नियामक निगरानी।
  • DRDO: स्वदेशी सैन्य UAV विकास।
  • DIPP: मेक इन इंडिया के तहत ड्रोन निर्माण को बढ़ावा।
  • NITI Aayog: उभरती तकनीकों पर रणनीतिक सलाह।
  • ISRO: ड्रोन के नेविगेशन और संचार तकनीकों का समर्थन।

आर्थिक पहलू: बाजार आकार, निवेश और क्षेत्रीय समावेशन

वैश्विक ड्रोन बाजार 2025 में $30 बिलियन से अधिक था और 2030 तक $90–100 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (उद्योग अनुमान, 2026)। भारत का घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें 38,500 से अधिक ड्रोन और 244 DGCA-स्वीकृत प्रशिक्षण संस्थान हैं, शुरुआती दौर में है लेकिन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने 2025-26 के रक्षा बजट में UAV अनुसंधान एवं विकास और निर्माण के लिए ₹500 करोड़ आवंटित किए हैं, जो वित्तीय समर्थन का संकेत है।

घरेलू स्टार्टअप्स ने 2023 से अब तक $150 मिलियन से अधिक की वेंचर कैपिटल निवेश आकर्षित किया है, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। ड्रोन को SVAMITVA और PMFBY जैसे प्रमुख योजनाओं में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण भूमि मानचित्रण की सटीकता 25% बढ़ी है और फसल बीमा दावा निपटान समय में 30% की कमी आई है (पंचायती राज और कृषि मंत्रालय, 2025)।

परिमाणभारत (2026)चीन (2025)
वैश्विक सैन्य UAV बाजार हिस्सेदारी~5%70%
पंजीकृत ड्रोन38,500+लगभग 1 मिलियन (अनुमानित)
DGCA प्रमाणित पायलट39,890सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं
सरकारी R&D बजट (UAV के लिए)₹500 करोड़ (2025-26)$2 बिलियन से अधिक (2025)
मुख्य उद्योग खिलाड़ीस्टार्टअप्स + DRDO + ISRO समर्थनDJI, CASC, राज्य समर्थित समूह
तकनीकी फोकसमूल UAV, सीमित AI एकीकरणउन्नत AI, 5G, वर्टिकल इंटीग्रेशन

भारत के ड्रोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख कमियां

भारत को उच्च प्रदर्शन वाले सेंसर, AI चिप्स और एकीकृत संचार मॉड्यूल जैसे उन्नत घटकों में महत्वपूर्ण कमी का सामना है। इस कमी के कारण आयात पर निर्भरता बनी हुई है, जो रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित करता है। इसके विपरीत, चीन और अमेरिका में राज्य समर्थित R&D क्लस्टर के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह से एकीकृत है, जो तेज नवाचार और निर्यात क्षमता सुनिश्चित करता है।

भारत का उद्योग संरचना खंडित है, उच्च स्तरीय घटक निर्माण सीमित है और AI का समावेश अभी आरंभिक स्तर पर है, जिससे वैश्विक मानकों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। DRDO और ISRO जैसे अनुसंधान संस्थानों से बौद्धिक संपदा सृजन और तकनीकी हस्तांतरण अभी भी पर्याप्त नहीं है, जिससे स्वदेशी नवाचार का प्रसार बाधित हो रहा है।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • ₹500 करोड़ से अधिक स्वदेशी R&D फंडिंग बढ़ाकर AI चिप्स और सेंसर जैसे महत्वपूर्ण घटकों का विकास करना।
  • स्टार्टअप्स को DRDO और ISRO के साथ जोड़ने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि तकनीकी हस्तांतरण और पैमाना बढ़ सके।
  • DIPP और मेक इन इंडिया के तहत प्रोत्साहन और क्लस्टर विकास के जरिए सप्लाई चेन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
  • कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचा निगरानी में ड्रोन के उपयोग को बढ़ाकर मांग और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
  • स्वायत्त और स्वार्म ड्रोन समेत उन्नत UAV के परीक्षण और तैनाती के लिए नियामक ढांचे को अपडेट करना।
  • ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के अनुरूप कौशल विकास और पायलट प्रशिक्षण में निवेश करना।

भारत के ड्रोन नियामक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ड्रोन नियम, 2021, रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।
  2. एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 की धारा 3 UAV प्रमाणन पर लागू होती है।
  3. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980, ड्रोन तकनीकों की सुरक्षा करता है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि ड्रोन नियम, 2021, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं, रक्षा मंत्रालय के नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि एयरक्राफ्ट एक्ट की धारा 3 UAV प्रमाणन को नियंत्रित करती है और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980, ड्रोन से जुड़ी रक्षा तकनीकों की सुरक्षा करता है।

भारतीय सरकारी योजनाओं में ड्रोन के समावेशन के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. SVAMITVA योजना के तहत ग्रामीण भूमि मानचित्रण की सटीकता में ड्रोन ने 25% सुधार किया है।
  2. PMFBY के तहत फसल बीमा दावा प्रक्रिया में ड्रोन ने 30% समय की बचत की है।
  3. इन योजनाओं में ड्रोन मुख्यतः शहरी यातायात प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाते हैं।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि SVAMITVA में ड्रोन ने मानचित्रण की सटीकता बढ़ाई है और PMFBY में दावा निपटान की प्रक्रिया तेज की है। कथन 3 गलत है क्योंकि इन योजनाओं में ड्रोन का मुख्य उपयोग शहरी यातायात प्रबंधन में नहीं होता।

मुख्य प्रश्न

रक्षा तैयारी और आर्थिक विकास के संदर्भ में भारत की ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता की पहल का महत्व बताएं। मुख्य चुनौतियां क्या हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – रक्षा तकनीक और आर्थिक विकास
  • झारखंड दृष्टिकोण: खनिज अन्वेषण, वन निगरानी और झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि बीमा योजनाओं में ड्रोन के संभावित उपयोग।
  • मुख्य बिंदु: ड्रोन तकनीक से संसाधन मानचित्रण और बीमा दक्षता में सुधार को जोड़कर राज्य के विकास लक्ष्यों से संबंधित उत्तर तैयार करें।
भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में DGCA की भूमिका क्या है?

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन प्रमाणन, पायलट लाइसेंसिंग और प्रशिक्षण संस्थानों को मंजूरी देता है। यह भारत में नागरिक ड्रोन के लिए सुरक्षा और संचालन मानकों का पालन सुनिश्चित करता है।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 स्वदेशी ड्रोन निर्माण को कैसे समर्थन देता है?

DPP 2023 मेक इन इंडिया पहल के तहत घरेलू निर्माताओं से खरीद को प्राथमिकता देता है, जो रक्षा उपयोग के लिए UAV के स्वदेशी उत्पादन को अनिवार्य बनाता है। यह आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।

SVAMITVA और PMFBY जैसी योजनाओं में ड्रोन के समावेशन से क्या आर्थिक लाभ हुए हैं?

SVAMITVA में ड्रोन ने ग्रामीण भूमि मानचित्रण की सटीकता 25% तक बढ़ाई है, जिससे संपत्ति रिकॉर्ड डिजिटलीकरण में मदद मिली है, जबकि PMFBY में ड्रोन ने फसल बीमा दावा प्रक्रिया का समय 30% तक घटाया है, जिससे कृषि बीमा में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

ड्रोन निर्माण में भारत किन तकनीकी खामियों का सामना कर रहा है?

भारत में उच्च प्रदर्शन वाले सेंसर, AI चिप्स और एकीकृत संचार मॉड्यूल जैसे उन्नत घटकों का उत्पादन सीमित है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी रहती है और स्वदेशी नवाचार तथा निर्यात क्षमता प्रभावित होती है।

2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का ड्रोन संचालन पर क्या प्रभाव पड़ा?

इस फैसले ने ड्रोन की निजता और हवाई क्षेत्र संबंधी नियमों को स्पष्ट किया, जिससे शहरी क्षेत्रों में ड्रोन उपयोग के लिए कानूनी सीमाएं तय हुईं और नागरिक ड्रोन के संचालन में सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बना।

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