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Governance · Exam Notes

भारत का खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र: निर्यात संभावनाएं और संरचनात्मक चुनौतियां

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र में 5 लाख से अधिक लोग काम करते हैं और यह 2.5 अरब डॉलर के घरेलू बाजार की सेवा करता है, लेकिन 700 अरब डॉलर के वैश्विक खेल सामान बाजार में इसका योगदान 0.1% से भी कम है। संरचनात्मक कमियां, विखंडित क्लस्टर और कमजोर निर्यात प्रोत्साहन के कारण भारत की क्षमता सीमित है, भले ही विदेशी व्यापार नीति 2023-28 और मेक इन इंडिया के तहत नीतिगत प्रोत्साहन मौजूद हों।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र में 5 लाख से अधिक लोग काम करते हैं और यह 2.5 अरब डॉलर के घरेलू बाजार की सेवा करता है, लेकिन 700 अरब डॉलर के वैश्विक खेल सामान बाजार में इसका योगदान 0.1% से भी कम है। संरचनात्मक कमियां, विखंडित क्लस्टर और कमजोर निर्यात प्रोत्साहन के कारण भारत की क्षमता सीमित है, भले ही विदेशी व्यापार नीति 2023-28 और मेक इन इंडिया के तहत नीतिगत प्रोत्साहन मौजूद हों।

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र का परिचय

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा मेरठ (उत्तर प्रदेश) और जलंधर (पंजाब) जैसे क्लस्टरों में केंद्रित है, जहां 2023 के वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 5 लाख से अधिक लोग रोजगार पाते हैं। इस क्षेत्र का घरेलू बाजार लगभग 2.5 अरब डॉलर का है, जिसमें खेल उपकरणों का हिस्सा लगभग 0.5 अरब डॉलर है। इतने बड़े घरेलू आधार के बावजूद, वित्तीय वर्ष 2023 में भारत के खेल सामान का निर्यात केवल 150 मिलियन डॉलर रहा, जो वैश्विक बाजार के 0.1% से भी कम है (NITI Aayog 2026)। यह क्षेत्र विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होता है, और निर्यात प्रोत्साहन के लिए विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2023-28 में प्रावधान हैं। गुणवत्ता नियंत्रण के लिए कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की IS 1757 प्रमाणन आवश्यक है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – विनिर्माण क्षेत्र, निर्यात संवर्द्धन, MSMEs
  • GS पेपर 2: सरकारी नीतियां – विदेशी व्यापार नीति, मेक इन इंडिया
  • निबंध: भारत की आर्थिक वृद्धि में विनिर्माण की भूमिका

वैश्विक बाजार की स्थिति और भारत की जगह

2024 में वैश्विक खेल सामान बाजार का मूल्य 700 अरब डॉलर था, जो 2036 तक 1 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंचने का अनुमान है, इसका कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और खेलों में भागीदारी में वृद्धि है (NITI Aayog 2026)। इसी में से खेल उपकरण खंड का मूल्य 2024 में 140 अरब डॉलर था, जो 2036 तक 283 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। भारत का निर्यात 150 मिलियन डॉलर है, जो इस बड़े बाजार के मुकाबले नगण्य है और क्षेत्र की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। वैश्विक बाजार में चीन का दबदबा है, जिसके पास 40% से अधिक हिस्सेदारी है और वह सालाना 30 अरब डॉलर से अधिक के खेल उपकरण निर्यात करता है। इसके पीछे एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला, उन्नत अनुसंधान एवं विकास और चीन की मेक्ड इन चाइना 2025 जैसी सशक्त सरकारी नीतियां हैं।

  • वैश्विक खेल सामान बाजार: 700 अरब डॉलर (2024), 1 ट्रिलियन डॉलर (2036 अनुमान)
  • खेल उपकरण खंड: 140 अरब डॉलर (2024), 283 अरब डॉलर (2036 अनुमान)
  • भारत का खेल सामान निर्यात: 150 मिलियन डॉलर (FY 2023)
  • चीन का खेल उपकरण निर्यात: 30 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक
  • भारत का वैश्विक निर्यात में हिस्सा: <0.1%

क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला कानूनी और नीतिगत ढांचा

यह क्षेत्र विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के अधीन काम करता है, जो निर्यात संवर्द्धन के लिए विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2023-28 का कानूनी आधार प्रदान करता है। FTP में ड्यूटी बैक, निर्यात संवर्द्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं, जो खेल उपकरण निर्माताओं को अप्रत्यक्ष रूप से सहायता देते हैं। 2014 में शुरू हुई मेक इन इंडिया पहल घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें खेल सामान भी शामिल है। गुणवत्ता नियंत्रण कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 के तहत अनिवार्य है, और BIS प्रमाणन (IS 1757) उत्पाद मानकों का पालन सुनिश्चित करता है, जो निर्यात प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है।

  • विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992: निर्यात-आयात नियमन
  • विदेशी व्यापार नीति 2023-28: निर्यात प्रोत्साहन, ड्यूटी बैक, EPCG योजना
  • मेक इन इंडिया (2014): घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा
  • कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009: उत्पाद माप और लेबलिंग मानक
  • BIS प्रमाणन (IS 1757): खेल सामान के लिए गुणवत्ता मानक

विकास में बाधक संरचनात्मक चुनौतियां

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र में कई संरचनात्मक कमियां हैं। क्लस्टर विखंडित हैं और एकीकृत नहीं हैं, जिससे पैमाने की अर्थव्यवस्था सीमित होती है। तकनीकी अपनाने की दर कम है, कई इकाइयां पारंपरिक उत्पादन विधियों पर निर्भर हैं, जिससे गुणवत्ता और नवाचार प्रभावित होता है। गुणवत्ता मानकों का पालन असंगत है, जो वैश्विक खरीदारों का भरोसा कम करता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग और मार्केटिंग कमजोर है, जिससे भारत प्रीमियम बाजारों में पैठ नहीं बना पा रहा। निर्यात सुविधा तंत्र मौजूद होने के बावजूद जागरूकता की कमी और नौकरशाही बाधाओं के कारण इसका पूरा लाभ नहीं उठाया जा रहा।

  • विखंडित निर्माण क्लस्टर पैमाना और दक्षता कम करते हैं
  • उन्नत तकनीक अपनाने की दर कम
  • गुणवत्ता मानकों का असंगत पालन
  • कमजोर वैश्विक ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियां
  • निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का कम उपयोग, प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण

क्षेत्र के विकास में संस्थागत भूमिका

इस क्षेत्र के विकास में कई संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। Sports Goods Export Promotion Council (SGEPC) निर्यात संवर्द्धन में मदद करता है और निर्माताओं को वैश्विक बाजार से जोड़ता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय विदेशी व्यापार नीति लागू करता है और निर्यात प्रोत्साहन देखता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) गुणवत्ता प्रमाणन सुनिश्चित करता है। युवा मामले और खेल मंत्रालय खेल अवसंरचना और विकास में सहयोग करता है, जो उपकरणों की मांग को बढ़ावा देता है। मेक इन इंडिया पहल विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में मदद करती है, जबकि NITI Aayog नीति अनुसंधान और निर्यात रणनीतियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

  • SGEPC: निर्यात सुविधा और बाजार कनेक्शन
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय: नीति कार्यान्वयन और निर्यात प्रोत्साहन
  • BIS: गुणवत्ता प्रमाणन और मानक पालन
  • युवा मामले और खेल मंत्रालय: खेल विकास और अवसंरचना
  • मेक इन इंडिया: विनिर्माण क्षमता विकास
  • NITI Aayog: नीति अनुसंधान और रणनीतिक सलाह

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन खेल उपकरण निर्माण

पैरामीटरभारतचीन
वैश्विक बाजार हिस्सेदारी<0.1%~40%
वार्षिक निर्यात (USD)~150 मिलियन (FY 2023)>30 अरब
निर्माण क्लस्टरविखंडित (मेरठ, जलंधर)एकीकृत, बड़े पैमाने पर
तकनीकी अपनानाकम से मध्यमउच्च, उन्नत R&D के साथ
सरकारी समर्थनFTP प्रोत्साहन, PLI योजना (₹10,683 करोड़ वस्त्र/संबंधित)मेड इन चाइना 2025, आक्रामक निर्यात सब्सिडी
गुणवत्ता मानक पालनअसंगतकठोर और समान
वैश्विक ब्रांडिंगकमजोरमजबूत, मान्यता प्राप्त ब्रांड

आगे का रास्ता: नीति और संस्थागत सुधार

  • क्लस्टर एकीकरण को बढ़ावा दें ताकि पैमाने की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बढ़े।
  • लक्षित सब्सिडी और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी उन्नयन को सुविधाजनक बनाएं।
  • BIS मानकों के पालन को मजबूत करें और गुणवत्ता प्रमाणन को प्रोत्साहित करें ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हो।
  • निर्यात संवर्द्धन को आसान बनाएं, प्रक्रियाओं को सरल करें और MSMEs में FTP और PLI योजनाओं की जागरूकता बढ़ाएं।
  • ब्रांडिंग और मार्केटिंग पहलों को समर्थन दें ताकि भारत की वैश्विक खेल उपकरण पहचान मजबूत हो।
  • NITI Aayog की नीति सिफारिशों का उपयोग करते हुए क्षेत्र विशेष निर्यात रणनीतियां बनाएं।

अभ्यास प्रश्न

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह क्षेत्र विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होता है।
  2. खेल सामान के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन IS 1757 के तहत अनिवार्य है।
  3. भारत वैश्विक खेल उपकरण निर्यात का 10% से अधिक हिस्सा रखता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 निर्यात नियमों को नियंत्रित करता है। कथन 2 सही है क्योंकि IS 1757 के तहत BIS प्रमाणन गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। कथन 3 गलत है; भारत का वैश्विक निर्यात में हिस्सा 0.1% से कम है।

खेल उपकरण निर्माण के संदर्भ में मेक इन इंडिया पहल के बारे में विचार करें:

  1. यह 2014 में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।
  2. यह पहल सीधे खेल उपकरण निर्माताओं को निर्यात सब्सिडी देती है।
  3. यह विनिर्माण क्षेत्रों में तकनीक अपनाने और कौशल विकास को बढ़ावा देती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 सही है; मेक इन इंडिया 2014 में शुरू हुई। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह तकनीक और कौशल को बढ़ावा देती है। कथन 2 गलत है क्योंकि मेक इन इंडिया सीधे निर्यात सब्सिडी नहीं देती; निर्यात प्रोत्साहन FTP के तहत आते हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत के खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र को जो संरचनात्मक चुनौतियां आ रही हैं, उनका विश्लेषण करें और वैश्विक बाजार में इसकी निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (आर्थिक विकास और औद्योगिक वृद्धि)
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के उभरते खेल सामान निर्माण इकाइयां और मेरठ-जलंधर जैसे क्लस्टर विकास की संभावनाएं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड में खेल उपकरण निर्माण के माध्यम से औद्योगिक विविधीकरण का अवसर, राज्य MSME नीतियों और कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ उठाना।
Sports Goods Export Promotion Council (SGEPC) की भूमिका क्या है?

SGEPC भारतीय खेल सामान निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ता है, व्यापार मेलों का आयोजन करता है और निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार की जानकारी प्रदान करता है।

विदेशी व्यापार नीति 2023-28 खेल उपकरण निर्यात को कैसे समर्थन देती है?

FTP 2023-28 निर्यात प्रोत्साहन जैसे ड्यूटी बैक, EPCG योजनाएं और सरल प्रक्रियाएं प्रदान करती है, जो खेल उपकरण निर्यातकों की लागत कम कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाती हैं।

खेल उपकरण निर्यातकों के लिए BIS प्रमाणन क्यों जरूरी है?

IS 1757 के तहत BIS प्रमाणन यह सुनिश्चित करता है कि खेल सामान निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें, जो सख्त अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वीकार्यता और व्यापार बाधाओं से बचाव के लिए जरूरी है।

भारत और चीन के खेल उपकरण निर्माण में मुख्य अंतर क्या हैं?

चीन के पास एकीकृत क्लस्टर, उन्नत R&D, मजबूत सरकारी समर्थन (मेड इन चाइना 2025) और 30 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात है, जबकि भारत का क्षेत्र विखंडित, तकनीक अपनाने में कम और निर्यात मात्र 150 मिलियन डॉलर है।

PLI योजना से खेल उपकरण क्षेत्र को क्या लाभ होता है?

हालांकि यह योजना सीधे खेल उपकरण के लिए नहीं है, वस्त्र और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ₹10,683 करोड़ की PLI योजना घरेलू उत्पादन और तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहित कर खेल उपकरण निर्माताओं को अप्रत्यक्ष लाभ देती है।

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