Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu

Governance · Exam Notes

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस: भारत की टीकाक्रण यात्रा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस हर साल 16 मार्च को मनाया जाता है, जो 1995 में भारत में पहली बार ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक देने की याद दिलाता है। यह दिन देश में टीकाकरण के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है। महामारी रोग अधिनियम और यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम जैसे कानूनी और नीतिगत आधारों के सहारे भारत ने चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों को खत्म किया है, 90% से अधिक टीकाकरण कवरेज हासिल की है और विश्व की 60% वैक्सीन सप्लाई करता है। हालांकि, समान टीका पहुंच और टीका हिचकिचाहट जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।
1 min read GS Paper II
Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस हर साल 16 मार्च को मनाया जाता है, जो 1995 में भारत में पहली बार ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक देने की याद दिलाता है। यह दिन देश में टीकाकरण के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है। महामारी रोग अधिनियम और यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम जैसे कानूनी और नीतिगत आधारों के सहारे भारत ने चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों को खत्म किया है, 90% से अधिक टीकाकरण कवरेज हासिल की है और विश्व की 60% वैक्सीन सप्लाई करता है। हालांकि, समान टीका पहुंच और टीका हिचकिचाहट जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

परिचय और पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस हर साल 16 मार्च को मनाया जाता है ताकि 1995 में भारत के पल्स पोलियो प्रोग्राम के तहत पहली बार ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) दी गई याद ताजा की जा सके। यह दिन भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक मील का पत्थर है, जो देश की टीकाकरण के जरिए रोगों को खत्म करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा शुरू किया गया था और बाद में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान में तब्दील हो गया, जिसे 1985 में शुरू किया गया था।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, टीकाकरण पर सरकारी नीतियां
  • GS पेपर 3: स्वास्थ्य में विज्ञान और तकनीक, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना
  • निबंध: भारत में टीकाकरण की भूमिका और सार्वजनिक स्वास्थ्य में बदलाव

टीकाकरण के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

भारत में टीकाकरण की कोशिशें महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत कानूनी रूप से मजबूत हैं, खासकर इसके सेक्शन 2 के तहत जो राज्यों को महामारी के दौरान विशेष कदम उठाने का अधिकार देता है। राष्ट्रीय वैक्सीन नीति, 2011 वैक्सीन के शोध, विकास और वितरण के लिए रणनीतिक दिशा-निर्देश प्रदान करती है। यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) 1985 में शुरू हुआ, जो सभी वर्गों में टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रूप से काम करता है। साथ ही, स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना जाता है, जो राज्य की जिम्मेदारी को टीकाकरण सेवाएं देने के लिए मजबूती देता है।

  • महामारी रोग अधिनियम, 1897: महामारी के दौरान टीकाकरण लागू करने में राज्य सरकारों को अधिकार देता है।
  • राष्ट्रीय वैक्सीन नीति, 2011: देश में वैक्सीन विकास और समान पहुंच पर जोर।
  • यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP): टीबी, पोलियो, डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, खसरा, हेपेटाइटिस बी सहित अन्य वैक्सीन्स शामिल।
  • अनुच्छेद 21, भारतीय संविधान: न्यायिक व्याख्याओं के तहत जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य और टीकाकरण का समावेश।

भारत के टीकाकरण कार्यक्रम के आर्थिक पहलू

भारत का वैक्सीन बाजार 2023 में लगभग 3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2030 तक इसकी वार्षिक वृद्धि दर 15% रहने का अनुमान है (India Brand Equity Foundation, 2024)। केंद्रीय बजट 2024-25 में स्वास्थ्य और टीकाकरण के लिए ₹35,000 करोड़ (~4.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए गए। भारत ने 2023 तक 200 करोड़ से अधिक कोविड-19 वैक्सीन की खुराक का उत्पादन किया, जो विश्व की लगभग 60% वैक्सीन मांग को पूरा करता है (WHO, 2023)। पल्स पोलियो प्रोग्राम, जो अपने चरम पर लगभग ₹1,000 करोड़ प्रति वर्ष खर्च करता था, पोलियो से जुड़े स्वास्थ्य खर्च और उत्पादकता हानि को रोककर भारी आर्थिक बचत करता है।

  • वैक्सीन बाजार का आकार: 2023 में 3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर, 2030 तक 15% CAGR।
  • सरकारी बजट आवंटन: 2024-25 में स्वास्थ्य और टीकाकरण के लिए ₹35,000 करोड़।
  • कोविड-19 वैक्सीन उत्पादन: 2023 तक 200 करोड़ से अधिक खुराक, वैश्विक आपूर्ति का 60%।
  • पल्स पोलियो का लागत-लाभ: ₹1,000 करोड़ वार्षिक लागत के मुकाबले अरबों की बचत।

भारत के टीकाकरण तंत्र में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

टीकाकरण के क्षेत्र में कई संस्थाएं नीति निर्धारण, शोध, विनियमन और उत्पादन में सहकार्य करती हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) नीतियां बनाता और लागू करता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) वैक्सीन के शोध और क्लीनिकल ट्रायल करता है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) वैक्सीन की मंजूरी और गुणवत्ता मानकों को नियंत्रित करता है। नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (NTAGI) टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए तकनीकी सलाह देता है। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को सप्लाई करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वैश्विक दिशानिर्देश और रोग उन्मूलन के लिए प्रमाणपत्र प्रदान करता है।

  • MoHFW: नीति निर्माण और देशव्यापी क्रियान्वयन।
  • ICMR: वैक्सीन शोध और परीक्षण।
  • CDSCO: वैक्सीन अनुमोदन का नियामक प्राधिकरण।
  • NTAGI: टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए तकनीकी सलाह।
  • SII: विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक।
  • WHO: वैश्विक टीकाकरण मानक और रोग प्रमाणन।

रोग उन्मूलन और टीकाकरण कवरेज पर प्रभाव और आंकड़े

भारत ने टीकाकृत होने योग्य रोगों के उन्मूलन और नियंत्रण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। चेचक भारत में 1977 तक खत्म हो चुका था, और WHO ने 1980 में इसका वैश्विक उन्मूलन प्रमाणित किया। आखिरी पोलियो का मामला 2011 में दर्ज हुआ था, जिसके बाद 2014 में WHO ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया। मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन 2015 में WHO की पुष्टि के साथ हुआ। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार UIP के तहत प्रमुख वैक्सीन का कवरेज 90% से ऊपर है। भारत ने 2023 तक 200 करोड़ से अधिक कोविड-19 वैक्सीन की खुराक दी, जिससे वैश्विक महामारी नियंत्रण में मदद मिली।

  • चेचक उन्मूलन: भारत में 1977; WHO ने 1980 में वैश्विक प्रमाणन दिया।
  • पोलियो उन्मूलन: आखिरी मामला 2011; WHO ने 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया।
  • मातृ और नवजात टेटनस: 2015 में WHO द्वारा उन्मूलित घोषित।
  • टीकाकरण कवरेज: प्रमुख वैक्सीन के लिए 90% से अधिक (NFHS-5)।
  • कोविड-19 टीकाकरण: 200 करोड़ से अधिक खुराक दी गई (MoHFW, 2023)।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम नाइजीरिया पोलियो उन्मूलन में

भारत की पोलियो उन्मूलन सफलता की तुलना नाइजीरिया से करें तो फर्क साफ नजर आता है, जहां अभी भी पोलियो के मामले आते हैं। इसका कारण वैक्सीन हिचकिचाहट और कमजोर कोल्ड चेन व्यवस्था है। भारत के पल्स पोलियो प्रोग्राम ने व्यापक समुदाय सहभागिता, घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान और मजबूत कोल्ड चेन नेटवर्क के जरिए बड़ी आबादी और विविध भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की। वहीं नाइजीरिया में कमजोर अवसंरचना और सामाजिक विरोध के कारण पोलियो अभी खत्म नहीं हो पाया है।

पहलूभारतनाइजीरिया
आखिरी पोलियो मामला20112023 तक अभी भी मामले दर्ज
कार्यक्रम का तरीकाघर-घर टीकाकरण, व्यापक जागरूकता अभियानसीमित पहुंच, असंगठित अभियान
कोल्ड चेन अवसंरचनामजबूत और पूरे देश में फैली हुईकमजोर और असंगत
टीका हिचकिचाहटसमुदाय सहभागिता से नियंत्रितगलत जानकारी और अविश्वास के कारण अधिक
जनसंख्या और भौगोलिकता1.4 अरब, विविध भौगोलिक क्षेत्रलगभग 2.2 करोड़, कम विविध लेकिन चुनौतीपूर्ण

भारत के टीकाकरण क्षेत्र की चुनौतियां और कमी

कुल मिलाकर उच्च कवरेज के बावजूद, भारत में समान टीका पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में अवसंरचनात्मक कमियां, जैसे कोल्ड चेन की खराब देखभाल और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, समस्या बनी हुई है। गलत जानकारी से पैदा हुई टीका हिचकिचाहट भी विशेषकर हाशिए पर रहने वाले समुदायों में बड़ी बाधा है। ये कमियां टीकाकृत होने योग्य रोगों के पुनरुत्थान का खतरा पैदा करती हैं और राष्ट्रीय टीकाकरण लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं।

  • दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक कमियां।
  • कोल्ड चेन की देखभाल में दिक्कतें, जिससे वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित।
  • गलत जानकारी और सांस्कृतिक कारणों से टीका हिचकिचाहट।
  • स्वास्थ्य कर्मियों का असमान वितरण, जिससे पहुंच सीमित।

महत्व और आगे का रास्ता

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस भारत की टीकाकरण के जरिए सार्वजनिक स्वास्थ्य में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है, जो नीति, नवाचार और वैश्विक वैक्सीन नेतृत्व के सामंजस्य का परिणाम है। टीकाकरण कवरेज को बनाए रखना और सुधारना है तो अवसंरचना मजबूत करनी होगी, समुदाय में जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि हिचकिचाहट कम हो, और भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता का घरेलू व वैश्विक जरूरतों के लिए बेहतर इस्तेमाल करना होगा। टीका पहुंच में असमानताओं को दूर करना राष्ट्रीय उपलब्धियों को मजबूत करने और रोगों के पुनरुत्थान को रोकने के लिए जरूरी है।

  • अल्पसंसाधित क्षेत्रों में कोल्ड चेन और स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करें।
  • समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाएं और गलत जानकारी का मुकाबला करें।
  • देशी वैक्सीन उत्पादन को सस्ते और सुलभ टीकाकरण के लिए बढ़ावा दें।
  • सतत निगरानी और तेजी से प्रतिक्रिया प्रणाली बनाए रखें।

यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. UIP 1985 में शुरू हुआ था, जिसमें शुरू में छह रोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण दिया जाता था।
  2. UIP में टीबी, पोलियो, खसरा और हेपेटाइटिस बी के लिए वैक्सीन शामिल हैं।
  3. UIP महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत लागू किया जाता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि UIP 1985 में शुरू हुआ था और शुरू में छह रोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण प्रदान करता था। कथन 2 भी सही है क्योंकि UIP में टीबी, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस बी सहित कई वैक्सीन शामिल हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि UIP स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक कार्यक्रम है, जो सीधे महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत लागू नहीं होता।

भारत में रोग उन्मूलन और समाप्ति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. चेचक भारत में 1980 से पहले ही खत्म हो चुका था।
  2. भारत को WHO ने 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया था।
  3. मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन 2015 के बाद हासिल हुआ।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि चेचक भारत में 1977 तक खत्म हो चुका था, जो WHO के 1980 के वैश्विक प्रमाणन से पहले था। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत को 2014 में WHO ने पोलियो मुक्त घोषित किया। कथन 3 गलत है क्योंकि मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन 2015 में WHO द्वारा प्रमाणित किया गया था, न कि उसके बाद।

प्रैक्टिस मेन प्रश्न

भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के महत्व पर चर्चा करें। भारत की टीकाकृत होने योग्य रोगों के उन्मूलन में योगदान देने वाले प्रमुख संस्थागत, कानूनी और आर्थिक कारकों का विश्लेषण करें। समान टीका पहुंच सुनिश्चित करने के लिए शेष चुनौतियों को दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – स्वास्थ्य और परिवार कल्याण; पेपर 3 – स्वास्थ्य में विज्ञान और तकनीक
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में टीका पहुंच की चुनौतियां राष्ट्रीय स्तर की समान हैं; कोल्ड चेन अवसंरचना और जागरूकता अभियान अहम हैं।
  • मेन प्वाइंटर: राज्य-विशिष्ट टीकाकरण कवरेज डेटा, आदिवासी जिलों की चुनौतियां, और सरकार की टीका पहुंच बढ़ाने की पहल पर जोर दें।
भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का महत्व क्या है?

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस, जो 16 मार्च को मनाया जाता है, 1995 में पल्स पोलियो प्रोग्राम के तहत पहली ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक देने की याद दिलाता है। यह दिन भारत की टीकाकरण में उपलब्धियों और टीकाकृत होने योग्य रोगों को खत्म करने की प्रतिबद्धता को उजागर करता है।

भारत ने किन रोगों को टीकाकरण के जरिए खत्म या समाप्त किया है?

भारत ने 1977 तक चेचक खत्म कर दिया था और 2014 में WHO ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया। साथ ही, 2015 में मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन भी WHO द्वारा प्रमाणित किया गया।

भारत के टीकाकरण कार्यक्रमों को कानूनी रूप से कौन-कौन से प्रावधान समर्थन देते हैं?

महामारी रोग अधिनियम, 1897 राज्यों को महामारी के दौरान टीकाकरण लागू करने का अधिकार देता है। राष्ट्रीय वैक्सीन नीति, 2011 वैक्सीन विकास के लिए मार्गदर्शन करती है, जबकि यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (1985) इसका कार्यान्वयन करता है। स्वास्थ्य का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत आता है।

भारत वैश्विक वैक्सीन आपूर्ति में कैसे योगदान देता है?

भारत मात्रा के हिसाब से विश्व की लगभग 60% वैक्सीन का उत्पादन करता है, जिसमें 2023 तक 200 करोड़ से अधिक कोविड-19 वैक्सीन की खुराक शामिल है, इसलिए इसे “दुनिया की दवा की दुकान” कहा जाता है।

भारत के टीकाकरण कवरेज में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

चुनौतियों में दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों में असमान पहुंच, कोल्ड चेन अवसंरचना की कमियां, गलत जानकारी के कारण टीका हिचकिचाहट, और स्वास्थ्य कर्मियों का असमान वितरण शामिल हैं।

Sources and further reading

Academic supportNeed guidance for this examination?

Speak to LearnPro about the relevant course, notes, test series or answer-writing programme.

Ask LearnPro
Continue preparation

Read, revise and practise this subject

LearnPro Editorial Team

LearnPro prepares civil-services notes in simple language with syllabus relevance, factual review and links to primary references where available. Academic direction is provided by Rajan Kumar, Director, LearnPro Civil Services. For changing examination dates and vacancies, the official commission notification always prevails.