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Governance · Exam Notes

2025-26 में भारत ने 6.05 GW की रिकॉर्ड पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी: नीति, आर्थिक और संस्थागत विश्लेषण

नीति सुधारों और राज्यों की सक्रिय भूमिका के चलते भारत ने 2025-26 में पवन ऊर्जा क्षेत्र में 6.05 GW की अभूतपूर्व वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे कुल क्षमता 56 GW से ऊपर पहुंच गई। यह विकास भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को सशक्त करता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है, हालांकि ग्रिड इंटीग्रेशन और बुनियादी ढांचे में चुनौतियां बनी हुई हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

नीति सुधारों और राज्यों की सक्रिय भूमिका के चलते भारत ने 2025-26 में पवन ऊर्जा क्षेत्र में 6.05 GW की अभूतपूर्व वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे कुल क्षमता 56 GW से ऊपर पहुंच गई। यह विकास भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को सशक्त करता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है, हालांकि ग्रिड इंटीग्रेशन और बुनियादी ढांचे में चुनौतियां बनी हुई हैं।

2025-26 में भारत की अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में 6.05 GW की नई क्षमता जोड़ी, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। यह 2024-25 में जोड़ी गई 4.14 GW क्षमता से 46% अधिक है, और मार्च 2026 तक कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW से ऊपर पहुंच गई है (MNRE, 2026)। गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने इस नई क्षमता का 60% से अधिक हिस्सा जोड़ा, जो राज्यों की निर्णायक भूमिका को दर्शाता है। यह तेजी सीधे लक्षित नीति सुधारों, ग्रिड की बेहतर तैयारी और प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ तंत्र का परिणाम है, जो भारत को उसके महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: ऊर्जा – नवीकरणीय ऊर्जा पहल, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धाराएं, और राष्ट्रीय विद्युत नीति।
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश प्रवृत्तियां और रोजगार सृजन।
  • निबंध: भारत का ऊर्जा संक्रमण और जलवायु प्रतिबद्धताएं।

पवन ऊर्जा विकास के लिए कानूनी और नीति ढांचा

इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 (सेंट्रल एक्ट 36 ऑफ 2003) के तहत सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) और राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERCs) को सेक्शन 61 और 86 के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ निर्धारण और रिन्यूएबल पर्चेस ऑब्लिगेशन (RPO) लागू करने का अधिकार दिया गया है। एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट, 2001 (सेंट्रल एक्ट 52 ऑफ 2001) ऊर्जा दक्षता को अनिवार्य करता है और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करता है। राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 और टैरिफ नीति 2016 नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन और प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ खोज के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय (MNRE) सेक्टरल नीतियों को बनाता और लागू करता है, जिसमें सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना शामिल है।

  • इलेक्ट्रिसिटी एक्ट सेक्शन 61 और 86: नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नियामक अधिकार।
  • एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट: ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय विद्युत नीति और टैरिफ नीति: नवीकरणीय समावेशन और टैरिफ सुधार के लिए ढांचा।
  • MNRE और SECI: नीति निर्माण और परियोजना सुविधा।

पवन ऊर्जा विस्तार के आर्थिक पहलू

वित्तीय वर्ष 2025-26 में पवन ऊर्जा क्षेत्र में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ (MNRE रिपोर्ट, 2026), जो नीति स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ के कारण निवेशकों का विश्वास दर्शाता है। पवन ऊर्जा के टैरिफ औसतन 2.5-3.0 रुपये प्रति यूनिट रहे, जिससे यह पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के मुकाबले किफायती साबित हुई। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 2.5% का योगदान देता है (इकोनॉमिक सर्वे 2025-26) और इस क्षेत्र में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध हैं (MNRE, 2026)। भारत 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें पवन ऊर्जा का हिस्सा 140 GW से अधिक होगा। पवन ऊर्जा की बढ़ती क्षमता ने कोयले के आयात को सालाना लगभग 1 करोड़ टन तक घटाया है, जिससे व्यापार घाटा कम हुआ है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है (CEA, 2026)।

  • पवन ऊर्जा में 30,000 करोड़ रुपये का निवेश (वित्तीय वर्ष 2025-26)।
  • 2.5-3.0 रुपये प्रति यूनिट के बीच टैरिफ, जिससे किफायती ऊर्जा उपलब्ध।
  • नवीकरणीय ऊर्जा का GDP में लगभग 2.5% योगदान।
  • पवन ऊर्जा क्षेत्र में 1 लाख से अधिक रोजगार।
  • पवन ऊर्जा के कारण कोयले के आयात में सालाना 1 करोड़ टन की कमी।

पवन ऊर्जा विकास में संस्थागत भूमिकाएं

भारत में पवन ऊर्जा विकास के लिए कई संस्थान समन्वय करते हैं। MNRE नीति निर्माण और क्रियान्वयन का नेतृत्व करता है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) डेटा संग्रह और ग्रिड योजना करता है। CERC टैरिफ और बाजार संचालन का नियमन करता है, जबकि SERCs राज्य स्तर पर RPO और टैरिफ निर्णय लागू करते हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ विंड एनर्जी (NIWE) संसाधन आकलन और तकनीकी शोध करता है। SECI पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया और परियोजना क्रियान्वयन में मदद करता है, जिससे लागत प्रभावी क्षमता वृद्धि सुनिश्चित होती है।

  • MNRE: नीति निर्माण और क्रियान्वयन।
  • CEA: डेटा संग्रह और ग्रिड योजना।
  • CERC: टैरिफ नियमन और बाजार निगरानी।
  • SERCs: राज्य स्तर पर टैरिफ और RPO लागू करना।
  • NIWE: पवन संसाधन आकलन और अनुसंधान।
  • SECI: प्रतिस्पर्धात्मक बोली और परियोजना सुविधा।

भारत की विद्युत क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा

पैरामीटरमूल्य (2025-26)स्रोत
कुल स्थापित विद्युत क्षमता509.6 GWCEA, 2025
गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता262.74 GW (51.5%)CEA, 2025
पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता56+ GWMNRE, 2026
सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता132.85 GWMNRE, 2025
जीवाश्म ईंधन क्षमता244.80 GW (49%)CEA, 2025
कोयला विद्युत उत्पादन में योगदान74%CEA, 2025

पवन ऊर्जा में भारत और चीन की तुलना

विश्व में पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में चीन अग्रणी है, जिसकी स्थापित क्षमता 330 GW से अधिक है (Global Wind Energy Council, 2025), जो भारत की 56 GW से काफी अधिक है। हालांकि, भारत ने 2025-26 में 6.05 GW की वार्षिक वृद्धि दर्ज कराई है, जो विश्व में सबसे तेज विकास दरों में से एक है। चीन की ताकत उसके एकीकृत विनिर्माण तंत्र और बड़े पैमाने पर ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं में है, जहां भारत अभी पीछे है। भारत का ध्यान मुख्य रूप से ऑनशोर पवन ऊर्जा और उभरते हुए ऑफशोर प्रोजेक्ट्स पर है, जो भविष्य में विस्तार और तकनीकी हस्तांतरण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

पहलूभारतचीन
स्थापित पवन क्षमता56+ GW330+ GW
वार्षिक वृद्धि (2025-26)6.05 GWलगभग 40 GW
ऑफशोर पवन क्षमताप्रारंभिक (कुछ परियोजनाएं)महत्वपूर्ण (विश्व में अग्रणी)
विनिर्माण तंत्रविकसित हो रहा हैअत्यंत एकीकृत
नीति फोकसऑनशोर पवन और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्सऑनशोर और ऑफशोर पवन

ग्रिड इंटीग्रेशन और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में चुनौतियां

रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत ग्रिड इंटीग्रेशन में संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है। जिन राज्यों में पवन संसाधन अधिक हैं, वहां ट्रांसमिशन नेटवर्क पर्याप्त नहीं होने के कारण बिजली कटौती और परियोजना विलंब होते हैं। विकसित देशों के मुकाबले भारत की नवीकरणीय ऊर्जा निकासी क्षमता सीमित है, खासकर दूर-दराज या संसाधन संपन्न क्षेत्रों में। यह बाधा स्थापित क्षमता के पूर्ण उपयोग में रुकावट डालती है और ग्रिड आधुनिकीकरण तथा रियल-टाइम डिस्पैच तंत्र में समन्वित निवेश की जरूरत है।

  • उच्च पवन क्षमता वाले राज्यों में ट्रांसमिशन बाधाएं।
  • ग्रिड सीमाओं के कारण बार-बार बिजली कटौती।
  • उन्नत ग्रिड प्रबंधन और पूर्वानुमान उपकरणों की आवश्यकता।
  • क्षमता वृद्धि के साथ ट्रांसमिशन तैयारी सुनिश्चित करने में नीति की कमी।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • 2025-26 में 6.05 GW की वृद्धि भारत के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने का संकेत है।
  • गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में राज्य स्तर की सक्रिय भूमिका नीति क्रियान्वयन में विकेंद्रीकरण की अहमियत दर्शाती है।
  • ग्रिड इंटीग्रेशन की चुनौतियों को दूर करना विकास को बनाए रखने और क्षमता के अध:प्रयोग से बचने के लिए जरूरी है।
  • ऑफशोर पवन ऊर्जा का विस्तार और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएगा।
  • नीति स्पष्टता, टैरिफ सुधार और निवेश सुविधा जारी रखना आवश्यक है ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे।

भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 राज्य विद्युत नियामक आयोगों को रिन्यूएबल पर्चेस ऑब्लिगेशन लागू करने का अधिकार देता है।
  2. भारत में पवन ऊर्जा के टैरिफ वर्तमान में औसतन 5 रुपये प्रति यूनिट से अधिक हैं।
  3. भारत की संचयी पवन क्षमता 2026 में 56 GW को पार कर गई।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि SERCs को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत RPO लागू करने का अधिकार है। कथन 2 गलत है क्योंकि पवन टैरिफ औसतन 2.5-3.0 रुपये प्रति यूनिट हैं, 5 रुपये से अधिक नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि संचयी क्षमता 2026 में 56 GW से अधिक हो गई।

भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है।
  2. इस लक्ष्य में पवन ऊर्जा का योगदान 140 GW से अधिक होगा।
  3. 2030 तक कोयला विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत बना रहेगा।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 MNRE के लक्ष्यों के अनुसार सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत कोयले पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के हिस्से को बढ़ाने की योजना बना रहा है, इसलिए 2030 तक कोयला प्रमुख स्रोत नहीं रहेगा।

मुख्य प्रश्न

2025-26 में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि के पीछे के कारणों की जांच करें और इस विकास को बनाए रखने के लिए किन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है, इस पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – ऊर्जा और पर्यावरण; नवीकरणीय ऊर्जा नीतियां।
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड में पवन क्षमता सीमित है लेकिन सौर और जल संसाधन महत्वपूर्ण हैं; पवन ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति से राज्य की नवीकरणीय रणनीतियों को सीख मिल सकती है।
  • मुख्य बिंदु: संस्थागत भूमिकाओं, नीति सुधारों और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को झारखंड के ऊर्जा मिश्रण और संभावनाओं के संदर्भ में उजागर करें।
पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 का क्या महत्व है?

इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 CERC और SERCs को टैरिफ निर्धारण और रिन्यूएबल पर्चेस ऑब्लिगेशन लागू करने का अधिकार देता है, जिससे पवन ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा विकास के लिए अनुकूल नियामक माहौल बनता है।

2025-26 में 6.05 GW पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में किन राज्यों का योगदान सबसे अधिक था?

गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने 2025-26 में 60% से अधिक पवन ऊर्जा वृद्धि का योगदान दिया है (MNRE राज्यवार डेटा, 2026)।

भारत में पवन ऊर्जा के टैरिफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे हैं?

भारत में पवन ऊर्जा के टैरिफ औसतन 2.5-3.0 रुपये प्रति यूनिट हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और प्रमुख पवन ऊर्जा बाजारों के बराबर हैं।

भारत में पवन ऊर्जा के ग्रिड इंटीग्रेशन की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में संसाधन संपन्न राज्यों में अपर्याप्त ट्रांसमिशन नेटवर्क, बिजली कटौती, परियोजना विलंब और स्थापित क्षमता का अध:प्रयोग शामिल हैं।

भारत की पवन ऊर्जा क्षमता की तुलना चीन से कैसे होती है?

चीन की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 330 GW से अधिक है, जो भारत के 56 GW से काफी अधिक है, लेकिन भारत की वार्षिक वृद्धि दर 2025-26 में 6.05 GW विश्व में सबसे तेज़ में से एक है।

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