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Governance · Exam Notes

समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र ने 2026 के लिए टार बॉल प्रबंधन नियम प्रस्तावित किए

केंद्र सरकार ने 2026 में भारत के तटीय क्षेत्रों में टार बॉल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहला समर्पित नियामक ढांचा पेश किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत बनाए गए इन नियमों में टार बॉल के जीवनचक्र की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय नुकसान और मत्स्य तथा पर्यटन क्षेत्र की आर्थिक हानि को कम करना है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

केंद्र सरकार ने 2026 में भारत के तटीय क्षेत्रों में टार बॉल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहला समर्पित नियामक ढांचा पेश किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत बनाए गए इन नियमों में टार बॉल के जीवनचक्र की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय नुकसान और मत्स्य तथा पर्यटन क्षेत्र की आर्थिक हानि को कम करना है।

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 का परिचय

साल 2026 में भारत सरकार ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत पहली बार टार बॉल प्रबंधन नियम प्रस्तावित किए हैं, जो टार बॉल के जीवनचक्र को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। टार बॉल वे अर्धठोस तेल के ठोस टुकड़े होते हैं जो भारत के विस्तृत तटीय क्षेत्रों में समुद्री प्रदूषण का कारण बनते हैं। ये नियम मुख्य रूप से तेल संस्थानों, जहाजों और तेल परिवहन गतिविधियों से उत्पन्न टार बॉल प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं, जो देशभर में 1,000 से अधिक पंजीकृत तेल इकाइयों को कवर करते हैं। यह नियामक ढांचा भारत में पहली बार है और इसका उद्देश्य पर्यावरणीय क्षति को कम करना, समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना तथा मत्स्य और पर्यटन क्षेत्र में आर्थिक नुकसान को घटाना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण – समुद्री प्रदूषण, पर्यावरण कानून (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986), अंतरराष्ट्रीय संधियाँ (MARPOL)
  • GS पेपर 1: भूगोल – भारतीय तटरेखा और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र
  • निबंध: पर्यावरणीय शासन और सतत विकास

टार बॉल का स्वरूप और प्रभाव

टार बॉल चिपचिपे, अर्धठोस तेल के टुकड़े होते हैं जो चिपचिपे हाइड्रोकार्बन के समुद्री मलबे के साथ जुड़ने से बनते हैं। इनका आकार मटर के दाने से लेकर बास्केटबॉल जितना हो सकता है और ये अपनी अर्धठोस प्रकृति के कारण समुद्री पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) 2023

  • पिछले पांच वर्षों में भारत के 7,500 किमी तटरेखा का 70% से अधिक हिस्सा टार बॉल जमाव की रिपोर्ट कर चुका है (राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, 2023)।
  • टार बॉल समुद्री तटों को गंदा कर पर्यटन को प्रभावित करते हैं और तटीय अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • जहाज और तेल संस्थान भारतीय जल में लगभग 60% टार बॉल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, 2023)।

कानूनी और संस्थागत ढांचा

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (EPA) की धारा 3 के तहत बनाया गया है, जो केंद्रीय सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है। ये नियम मौजूदा कानूनों जैसे कि मैरिटाइम जोन ऑफ इंडिया (विदेशी जहाजों द्वारा मछली पकड़ने के नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के साथ तालमेल रखते हैं, जो समुद्री क्षेत्राधिकार और प्रदूषण नियंत्रण को नियंत्रित करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, ये नियम इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के MARPOL कन्वेंशन के Annex I के अनुरूप हैं, जो जहाजों से तेल प्रदूषण को नियंत्रित करता है। नियमों में कई एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट की गई है:

  • MoEFCC: नीति निर्धारण और प्रवर्तन।
  • CPCB: निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और डेटा संग्रह।
  • DG Shipping: जहाजों और तेल परिवहन सुविधाओं की देखरेख।
  • भारतीय तटरक्षक बल: समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया और प्रवर्तन।
  • सीमेंट निर्माता संघ: टार बॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग के लिए उद्योग साझेदार।

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 के मुख्य प्रावधान

  • जीवनचक्र प्रबंधन: नियम टार बॉल के उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित निपटान की जिम्मेदारी तय करते हैं।
  • तेल सुविधाओं की परिभाषा: कच्चे या ईंधन तेल के अन्वेषण, निष्कर्षण, परिवहन और हैंडलिंग में शामिल इकाइयों को ‘तेल सुविधाएं’ माना गया है और उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • आपदा वर्गीकरण: तटीय क्षेत्रों में टार बॉल प्रदूषण की घटनाओं को राज्य सरकारों द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य आपदा घोषित करना अनिवार्य होगा, जिससे समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय होगा।
  • टार बॉल का पुन: उपयोग: नियम टार बॉल को सीमेंट उत्पादन में वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग करने को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे fossile ईंधन आयात में 2-3% की वार्षिक कमी और प्रति टन सीमेंट 5-7% CO2 उत्सर्जन में कमी संभव है (सीमेंट निर्माता संघ, 2024)।
  • निगरानी और रिपोर्टिंग: तेल सुविधाओं और जहाजों द्वारा टार बॉल घटनाओं की अनिवार्य रिपोर्टिंग, जिसका निरीक्षण CPCB और DG Shipping करेंगे।

टार बॉल प्रदूषण और प्रबंधन के आर्थिक पहलू

टार बॉल से समुद्री प्रदूषण के कारण भारत के पर्यटन और मत्स्य क्षेत्र को सालाना लगभग 9 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है (MoEFCC, 2023)। सफाई की लागत भी भारी होती है, जो स्थान और तरीकों के अनुसार ₹50,000 से ₹1,00,000 प्रति टन तक हो सकती है (CPCB, 2023)।

2023 में 5 बिलियन डॉलर के मूल्य के साथ भारतीय समुद्री तेल परिवहन बाजार 4.5% की CAGR से बढ़ रहा है (IBEF रिपोर्ट, 2024)। टार बॉल प्रदूषण इस बाजार की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है और नियामक अनुपालन लागत बढ़ा सकता है। लेकिन सीमेंट उद्योग में टार बॉल के वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग से आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिल सकते हैं, जिससे fossile ईंधन आयात कम होगा और कार्बन उत्सर्जन घटेगा।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम अमेरिका

पहलूभारत (टार बॉल प्रबंधन नियम 2026)संयुक्त राज्य अमेरिका (Oil Pollution Act 1990)
कानूनी आधारपर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986Oil Pollution Act, 1990
नियामक प्राधिकरणMoEFCC, CPCB, DG Shipping, तटरक्षक बलEnvironmental Protection Agency (EPA)
टार बॉल प्रबंधन का दायरापहली बार समर्पित नियम; जीवनचक्र प्रबंधन सहित पुन: उपयोगतेल रिसाव प्रतिक्रिया में टार बॉल सफाई और दायित्व प्रावधान शामिल
सामुदायिक भागीदारीसार्वजनिक जागरूकता और भागीदारी के स्पष्ट प्रावधान नहींसार्वजनिक रिपोर्टिंग और हितधारक सहभागिता शामिल
प्रभावटार बॉल प्रदूषण में कमी का अनुमान; ईंधन पुन: उपयोग से आर्थिक लाभकार्यान्वयन के बाद एक दशक में तटीय टार बॉल घटनाओं में 40% कमी (EPA, 2020)

पहचाने गए अंतर और चुनौतियां

  • प्रस्तावित नियमों में सामुदायिक भागीदारी और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं, जो तटीय सफाई और समय पर रिपोर्टिंग के लिए जरूरी हैं।
  • कई मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय में कठिनाई हो सकती है, खासकर आपदा घोषणा और प्रतिक्रिया में।
  • 1,000 से अधिक तेल सुविधाओं के निगरानी और प्रवर्तन के लिए मजबूत संस्थागत क्षमता और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 एक महत्वपूर्ण नियामक खामियों को भरते हैं, जो पहले भारत में इस विशेष और स्थायी प्रदूषक को नियंत्रित नहीं करते थे।
  • मौजूदा तेल रिसाव आपात योजना और अंतरराष्ट्रीय संधियों के साथ समेकन से भारत की समुद्री पर्यावरणीय शासन मजबूत होती है।
  • भविष्य में सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता को शामिल करने से प्रवर्तन और सफाई की प्रभावशीलता बढ़ेगी।
  • उद्योगों में टार बॉल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना पर्यावरणीय लक्ष्यों को आर्थिक प्रोत्साहनों के साथ जोड़ता है, जो सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना और निगरानी तकनीक में निवेश प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक होगा।

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ये नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए हैं।
  2. ये नियम स्पष्ट रूप से सामुदायिक भागीदारी और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को अनिवार्य करते हैं।
  3. इनमें टार बॉल को सीमेंट उत्पादन में वैकल्पिक ईंधन के रूप में पुन: उपयोग के प्रावधान शामिल हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत प्रस्तावित हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि नियमों में अभी सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। कथन 3 सही है क्योंकि नियम टार बॉल को सीमेंट उत्पादन में वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग करने को प्रोत्साहित करते हैं।

टार बॉल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. टार बॉल समुद्री पर्यावरण में मौसम के प्रभाव से बने ठोस तेल के टुकड़े होते हैं।
  2. ये केवल समुद्री जैव विविधता को प्रभावित करते हैं और मानव स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं डालते।
  3. भारतीय जल में टार बॉल प्रदूषण में जहाज और तेल संस्थान आधे से अधिक योगदान देते हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; टार बॉल अर्धठोस या ठोस टुकड़े होते हैं जो मौसम के प्रभाव से बनते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि टार बॉल में जहरीले प्रदूषक होते हैं जो समुद्री जीवन और मानव स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करते हैं। कथन 3 सही है; जहाज और तेल सुविधाएं लगभग 60% टार बॉल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।

मेन प्रश्न

भारत में समुद्री प्रदूषण से निपटने में टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 के महत्व पर चर्चा करें। अपने उत्तर में कानूनी ढांचा, आर्थिक प्रभाव और कार्यान्वयन की चुनौतियों का विश्लेषण करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड भौगोलिक रूप से समुद्र से दूर है, लेकिन टार बॉल प्रदूषण राष्ट्रीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की आर्थिक और पर्यावरणीय नीतियों को प्रभावित करता है।
  • मेन पॉइंटर: राष्ट्रीय पर्यावरण नीतियों को उनके व्यापक आर्थिक और पारिस्थितिक प्रभावों से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, जिसमें अंतर-राज्यीय और तटीय प्रबंधन की चुनौतियां शामिल हों।
टार बॉल क्या हैं और ये कैसे बनते हैं?

टार बॉल अर्धठोस या ठोस तेल के टुकड़े होते हैं जो समुद्री पर्यावरण में चिपचिपे हाइड्रोकार्बन समुद्री मलबे के साथ मिलकर भौतिक और रासायनिक मौसमीय प्रक्रियाओं के कारण बनते हैं।

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 किस कानूनी अधिनियम के तहत प्रस्तावित हैं?

ये नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत प्रस्तावित हैं, जो केंद्रीय सरकार को पर्यावरण प्रदूषकों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

टार बॉल के पुन: उपयोग से क्या आर्थिक लाभ मिलते हैं?

टार बॉल को सीमेंट उत्पादन में वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने से fossile ईंधन के आयात में 2-3% की वार्षिक कमी आ सकती है और प्रति टन सीमेंट 5-7% CO2 उत्सर्जन में कमी संभव है, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ होते हैं।

टार बॉल प्रबंधन नियम लागू करने के लिए कौन-सी भारतीय एजेंसियां जिम्मेदार हैं?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping), और भारतीय तटरक्षक बल मुख्य रूप से लागू करने और प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।

टार बॉल प्रबंधन नियम 2026 में कौन-सी प्रमुख कमी है?

नियमों में फिलहाल सामुदायिक भागीदारी और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं, जो तटीय सफाई और रिपोर्टिंग के लिए जरूरी हैं।

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