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भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट 2025: चुनौतियाँ और रणनीतिक निहितार्थ

ISSAR-2025 का परिचय

भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट 2025 (ISSAR-2025) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बेंगलुरु में आयोजित दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ऑन स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस (SMOPS-2026) के उद्घाटन सत्र में जारी किया। ISSAR-2025 विश्व और भारत के अंतरिक्ष पर्यावरण की व्यापक समीक्षा प्रस्तुत करता है, जिसमें मेगा-कॉन्स्टेलेशनों की तीव्र तैनाती के कारण अंतरिक्ष में भीड़ और टकराव के जोखिमों में वृद्धि को उजागर किया गया है। यह रिपोर्ट भारत के विकसित होते हुए अंतरिक्ष सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कक्षा में अपने रणनीतिक संसाधनों की रक्षा के लिए मजबूत स्पेस स्थिति जागरूकता (SSA) क्षमताओं की आवश्यकता पर जोर देती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और सुरक्षा
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष कूटनीति और संधियाँ
  • निबंध: अंतरिक्ष सुरक्षा और शासन में उभरती चुनौतियाँ

ISSAR-2025 के प्रमुख निष्कर्ष

  • अंतरिक्ष भीड़ और टकराव चेतावनियाँ: 2025 में विश्व स्तर पर लगभग 160,000 निकट संपर्क चेतावनियाँ दर्ज की गईं, जिनमें से 150,000 से अधिक भारतीय उपग्रहों से संबंधित थीं। यह वृद्धि मुख्य रूप से स्टारलिंक और कूपर जैसे मेगा-कॉन्स्टेलेशनों की त्वरित तैनाती के कारण हुई है, जो टकराव से बचाव के प्रयासों को जटिल बनाती हैं।
  • टकराव से बचाव के संचालन (CAMs): भारतीय उपग्रहों ने लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 14 CAMs किए, जिनमें NISAR मिशन शामिल है, भूस्थिर कक्षा (GEO) में 4 और चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के लिए 2 विशेष कक्षा समायोजन किए गए। कक्षा संचालन के अनुकूलन तकनीकों का उपयोग बढ़ा है, जिससे समर्पित CAMs की जरूरत कम हुई है, जो SSA के बेहतर समन्वय को दर्शाता है।
  • उड़ान और उपग्रह तैनाती रिकॉर्ड: 2025 में विश्वभर में 328 लॉन्च प्रयास हुए, जो अब तक का सबसे अधिक है, जिनमें से 315 सफल रहे। कुल 4,198 सक्रिय उपग्रह जोड़े गए, जिससे 4,651 नए अंतरिक्ष वस्तुओं की संख्या हुई, जो अंतरिक्ष के तेजी से वाणिज्यीकरण और उपयोग को दर्शाता है।
  • वायुमंडलीय पुनःप्रवेश: 2025 में कुल 1,911 वस्तुएं पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गईं, जिनमें 1,002 अंतरिक्ष यान, 657 मलबा, 108 रॉकेट अवशेष और 144 अज्ञात वस्तुएं शामिल हैं। यह संख्या 2024 की तुलना में कम है, जिसका कारण कम डिऑर्बिटिंग गतिविधियाँ और सौर गतिविधि में कमी है।
  • उपग्रह समूहों का विस्तार: मेगा-कॉन्स्टेलेशन का विस्तार जारी है, 2025 के अंत तक 9,396 स्टारलिंक उपग्रह कक्षा में बने हुए थे। सक्रिय उपग्रहों की संख्या अब अंतरिक्ष मलबे के बराबर हो रही है, जिससे समन्वय और टकराव जोखिम प्रबंधन और जटिल होता जा रहा है।

भारत में SSA के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत के अंतरिक्ष कार्यों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनी उपकरणों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। Outer Space Treaty 1967, जिसे भारत ने अनुमोदित किया है, अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और गैर-स्वामित्व के मूल सिद्धांत स्थापित करता है। घरेलू स्तर पर, Indian Telegraph Act 1885 के सेक्शन 3 में संशोधन के तहत उपग्रह संचार को नियंत्रित किया जाता है, जो सरकार को अंतरिक्ष आधारित संचार अवसंरचना पर निगरानी का अधिकार देता है। वर्तमान में मसौदे में मौजूद Space Activities Bill एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें SSA और मलबा प्रबंधन भी शामिल हैं। इसके अलावा, Disaster Management Act 2005 के प्रावधान अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन नीतियों के लिए लागू होते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के मामले सीधे SSA से संबद्ध नहीं हैं, पर संविधान के Article 51 के तहत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का प्रावधान भारत की अंतरिक्ष कूटनीति के लिए आधार प्रदान करता है।

  • ISRO: अंतरिक्ष मिशनों और SSA डेटा उत्पादन की मुख्य एजेंसी।
  • IN-SPACe: निजी क्षेत्र की भागीदारी को नियंत्रित और प्रोत्साहित करता है।
  • DRDO: अंतरिक्ष सुरक्षा और SSA क्षमताओं में सहयोग करता है।
  • ISAC: उपग्रह संचालन और टकराव से बचाव के संचालन करता है।
  • UN COPUOS: अंतरराष्ट्रीय मंच जो अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और यातायात प्रबंधन के नियम विकसित करता है।

ISSAR-2025 के आर्थिक पहलू

भारत का अंतरिक्ष बजट 2024-25 के लिए लगभग ₹13,949 करोड़ है, जो ISRO की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार SSA और अंतरिक्ष सुरक्षा में बढ़ती निवेश को दर्शाता है। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2023 में $469 अरब मूल्य की थी, जिसमें 8% की अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर है। 2025 में 4,198 सक्रिय उपग्रहों के जुड़ने से वाणिज्यीकरण और बाजार विस्तार की गति स्पष्ट होती है। भारत का निजी क्षेत्र, Department of Space के NewSpace India Limited (NSIL) के तहत, तेजी से सक्रिय होता जा रहा है, जो व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ नियामक अनुपालन सुनिश्चित करता है।

भारत की SSA क्षमताओं की तुलना अमेरिका से

मापदंड भारत संयुक्त राज्य अमेरिका
ट्रैकिंग अवसंरचना विकसित हो रहे देशी रडार और ऑप्टिकल सेंसर; सीमित कवरेज Space Surveillance Network (SSN) जो 27,000+ वस्तुओं का वैश्विक ट्रैकिंग करता है
जोड़-तोड़ चेतावनियाँ (2025) लगभग 160,000 निकट संपर्क चेतावनियाँ विश्व स्तर पर, 150,000+ भारतीय उपग्रहों से संबंधित लगभग 20,000 जोड़-तोड़ चेतावनियाँ वार्षिक
कानूनी ढांचा मसौदा Space Activities Bill; Indian Telegraph Act (संशोधित); कोई बाध्यकारी STM कानून नहीं Space Policy Directive-3 (2018) जो मलबा हटाने और टकराव से बचाव को अनिवार्य करता है
टकराव से बचाव संचालन 2025 में 20+ CAMs (LEO और GEO) किए गए SSN और US Space Command के माध्यम से नियमित CAMs का समन्वय
अंतरराष्ट्रीय सहयोग UN COPUOS में सक्रिय; द्विपक्षीय डेटा साझाकरण समझौते उभर रहे हैं स्थापित वैश्विक साझेदारी और डेटा साझाकरण नेटवर्क

भारत के अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन में महत्वपूर्ण खामियां

भारत के पास वर्तमान में अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन (STM) और सक्रिय मलबा निवारण के लिए कोई व्यापक, कानूनी रूप से बाध्यकारी राष्ट्रीय ढांचा नहीं है। अमेरिका के Space Policy Directive-3 (2018) के विपरीत, जो सक्रिय मलबा हटाने और टकराव से बचाव के प्रोटोकॉल अनिवार्य करता है, भारत का नियामक ढांचा अभी भी खंडित है। यह खामी निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों पर नियंत्रण सीमित करती है जो भारतीय कक्षा क्षेत्रों में काम करते हैं। साथ ही, देशी ट्रैकिंग अवसंरचना विकासशील है, जिससे वास्तविक समय SSA क्षमताओं में बाधा आती है। कानूनी उपकरणों को मजबूत करना और सेंसर नेटवर्क का विस्तार करना आवश्यक है ताकि इन कमजोरियों को दूर किया जा सके।

महत्व और आगे का रास्ता

  • देशी SSA अवसंरचना को उन्नत रडार और ऑप्टिकल सेंसर तैनात करके बेहतर बनाएं ताकि ट्रैकिंग की सटीकता और कवरेज बढ़े।
  • Space Activities Bill को शीघ्रता से पारित करें ताकि STM और मलबा प्रबंधन के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचा स्थापित हो सके।
  • अंतरराष्ट्रीय डेटा साझाकरण समझौतों का विस्तार करें और UN COPUOS जैसे बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भागीदारी करें ताकि वैश्विक अंतरिक्ष यातायात नियमों का निर्माण हो।
  • निजी क्षेत्र के हितधारकों को मजबूत नियामक व्यवस्था के अंतर्गत लाएं ताकि SSA प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
  • स्वायत्त टकराव से बचाव तकनीकों और AI-आधारित पूर्वानुमान विश्लेषण में अनुसंधान निवेश करें ताकि जोखिम आकलन बेहतर हो सके।

स्पेस स्थिति जागरूकता (SSA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. SSA में अंतरिक्ष वस्तुओं की गति का पता लगाना और भविष्यवाणी करना शामिल है ताकि टकराव से बचा जा सके।
  2. SSA और स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट (STM) कानूनी रूप से समानार्थी हैं और एक ही अंतरराष्ट्रीय संधियों द्वारा नियंत्रित हैं।
  3. भारत वर्तमान में पूरी तरह स्वायत्त SSA नेटवर्क संचालित करता है जो US Space Surveillance Network के बराबर है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि SSA में अंतरिक्ष वस्तुओं की ट्रैकिंग और भविष्यवाणी शामिल है। कथन 2 गलत है क्योंकि SSA और STM संबंधित हैं लेकिन भिन्न हैं; STM में नियामक और यातायात प्रबंधन शामिल है जो SSA के ट्रैकिंग कार्य से अलग है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत की SSA क्षमताएं विकसित हो रही हैं लेकिन अभी पूरी तरह स्वायत्त या US SSN के समान नहीं हैं।

Outer Space Treaty 1967 के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. यह परमाणु हथियारों को अंतरिक्ष में रखने पर प्रतिबंध लगाता है।
  2. भारत ने Outer Space Treaty को अनुमोदित किया है।
  3. यह संधि हस्ताक्षरकर्ता राज्यों को सक्रिय मलबा हटाने का निर्देश देती है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि संधि अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती पर रोक लगाती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत ने इस संधि को अनुमोदित किया है। कथन 3 गलत है क्योंकि संधि सक्रिय मलबा हटाने का निर्देश नहीं देती।

मुख्य प्रश्न

मेगा-कॉन्स्टेलेशनों की तेजी से वृद्धि से भारत की अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता क्षमताओं को होने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भारत को अपनी SSA प्रणाली को मजबूत करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए, सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में कई ISRO ग्राउंड स्टेशन और अनुसंधान केंद्र हैं जो SSA डेटा संग्रह में योगदान देते हैं।
  • मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय SSA प्रयासों में क्षेत्रीय अवसंरचना की भूमिका और अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर क्षमता निर्माण का महत्व।
स्पेस स्थिति जागरूकता (SSA) क्या है?

SSA का मतलब है अंतरिक्ष वस्तुओं जैसे उपग्रह और मलबे की गति का पता लगाना, ट्रैक करना और भविष्यवाणी करना ताकि टकराव से बचा जा सके और सुरक्षित अंतरिक्ष संचालन सुनिश्चित हो सके। इसमें रडार, ऑप्टिकल सेंसर और उपग्रह टेलीमेट्री से डेटा संग्रह शामिल है।

Indian Telegraph Act 1885 अंतरिक्ष गतिविधियों से कैसे संबंधित है?

Indian Telegraph Act की धारा 3 सरकार को उपग्रह संचार को नियंत्रित करने का अधिकार देती है, जिसमें लाइसेंसिंग और स्पेक्ट्रम आवंटन शामिल हैं, जो अंतरिक्ष आधारित संचार अवसंरचना के प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

मेगा-कॉन्स्टेलेशन क्या हैं और वे क्यों जोखिम पैदा करते हैं?

मेगा-कॉन्स्टेलेशन हजारों उपग्रहों का बड़ा नेटवर्क होते हैं जो विश्वव्यापी इंटरनेट कवरेज प्रदान करने के लिए तैनात किए जाते हैं। इनकी तेजी से तैनाती से अंतरिक्ष भीड़ बढ़ती है और टकराव के जोखिम बढ़ जाते हैं, जिससे SSA और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन जटिल हो जाता है।

भारत के लिए Space Activities Bill का क्या महत्व है?

Space Activities Bill भारत में अंतरिक्ष संचालन को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें लाइसेंसिंग, जवाबदेही, SSA और मलबा प्रबंधन शामिल हैं, जो मौजूदा नियामक खामियों को दूर करेगा।

भारत की SSA क्षमता अमेरिका से कैसे तुलना करती है?

भारत की SSA क्षमताएं विकसित हो रही हैं और देशी अवसंरचना उभर रही है, जबकि अमेरिका का Space Surveillance Network (SSN) 27,000 से अधिक वस्तुओं को ट्रैक करता है और हजारों जोड़-तोड़ चेतावनियां वार्षिक जारी करता है।

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