Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu

Governance · Exam Notes

2026 SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक: यूरेशिया में बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाना

2026 की SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक किर्गिज़स्तान में हुई, जिसमें यूरेशिया क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। SCO के सहमति आधारित ढांचे के सामने भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोहरे मानदंडों की चुनौतियां हैं। 2023 में SCO की अध्यक्षता करने वाली भारत की सक्रिय भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण में उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
1 min read GS Paper II
Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

2026 की SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक किर्गिज़स्तान में हुई, जिसमें यूरेशिया क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। SCO के सहमति आधारित ढांचे के सामने भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोहरे मानदंडों की चुनौतियां हैं। 2023 में SCO की अध्यक्षता करने वाली भारत की सक्रिय भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण में उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

2026 SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक का परिचय

2026 शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक किर्गिज़स्तान में आयोजित हुई, जिसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान समेत 10 सदस्य देशों के रक्षा मंत्री शामिल हुए। बैठक में यूरेशिया क्षेत्र में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की अहमियत पर जोर दिया गया। साथ ही, सदस्यों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोहरे मानदंडों से उत्पन्न चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया, जो एकजुट सुरक्षा प्रयासों में बाधा डालती हैं।

SCO रक्षा सहयोग का कानूनी और संवैधानिक आधार

SCO एक अंतरसरकारी संगठन है, जिसके सदस्य देशों के संविधान में सीधे कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं हैं। भारत की भागीदारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत आती है, जो संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। SCO का कानूनी ढांचा मुख्यतः SCO चार्टर (2002) द्वारा संचालित होता है, जो संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और गैर-दखलअंदाजी के सिद्धांतों पर आधारित है। इसके अलावा, SCO के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) के चैप्टर VII से वैधता प्राप्त है, जो शांति के लिए खतरे के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा उपायों को मान्यता देता है।

  • अनुच्छेद 253, भारतीय संविधान: SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए घरेलू कानून बनाने की अनुमति देता है।
  • SCO चार्टर (2002): संगठन का कानूनी आधार स्थापित करता है, जिसमें पारस्परिक सम्मान और गैर-दखलअंदाजी पर जोर है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर चैप्टर VII: सामूहिक आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान करता है।

SCO रक्षा सहयोग के आर्थिक पहलू

SCO के सदस्य देश विश्व GDP का लगभग 30% हिस्सा और विश्व की करीब 40% जनसंख्या को शामिल करते हैं, जो इसे एक महत्वपूर्ण आर्थिक समूह बनाता है (SCO सचिवालय, 2023)। 2023 में इस क्षेत्र का संयुक्त व्यापार वॉल्यूम 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था, जबकि पिछले पांच वर्षों में SCO के अंदर व्यापार में 8% वार्षिक वृद्धि रही है (SCO आर्थिक बुलेटिन, 2024)। रक्षा बजट में भी वृद्धि हुई है, भारत ने 2023-24 में रक्षा आधुनिकीकरण के लिए INR 5,25,000 करोड़ (~70 अरब डॉलर) आवंटित किए, जो क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • SCO सदस्य देशों का वैश्विक GDP में 30% योगदान।
  • विश्व की 40% आबादी (~3.2 अरब लोग) SCO में शामिल (विश्व बैंक, 2023)।
  • 2023 में SCO के भीतर व्यापार का वॉल्यूम 5 ट्रिलियन डॉलर, 8% CAGR पांच वर्षों में।
  • भारत का रक्षा बजट: INR 5,25,000 करोड़ (~70 अरब डॉलर) 2023-24 में।

SCO रक्षा सहयोग की संस्थागत संरचना

SCO की संस्थागत रूपरेखा में बीजिंग स्थित SCO सचिवालय शामिल है, जो बहुपक्षीय पहलों का समन्वय करता है, और ताशकंद स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) है, जो आतंकवाद-विरोधी समन्वय में विशेषज्ञता रखती है। सदस्य देशों के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा सहयोग को लागू करते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार प्रदान करती है, जो SCO के प्रयासों को पूरा करती है। भारत का रक्षा मंत्रालय (MoD) SCO रक्षा संवाद और संयुक्त अभ्यासों में सक्रिय भूमिका निभाता है।

  • SCO सचिवालय (बीजिंग): बैठकों और नीतियों के क्रियान्वयन का समन्वय।
  • RATS (ताशकंद): आतंकवाद विरोधी सहयोग और खुफिया साझा करना।
  • राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय: घरेलू स्तर पर SCO निर्णयों को लागू करना।
  • UNSC: सामूहिक सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी वैधता।
  • भारतीय MoD: SCO रक्षा मंचों और अभ्यासों में भारत का प्रतिनिधित्व।

SCO का विकास और सदस्यता

SCO की शुरुआत 1996 में शंघाई फाइव के रूप में हुई थी, जिसमें कज़ाखस्तान, चीन, किर्गिज़स्तान, रूस और ताजिकिस्तान शामिल थे, जिनका मुख्य फोकस सीमा निर्धारण और सैन्यीकरण समाप्ति था। 2001 में उज़्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद इसे SCO नाम दिया गया। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, और 2023 तक सदस्य संख्या 10 हो गई। भारत ने 2023 में SCO की अध्यक्षता संभाली, जो यूरेशियाई सुरक्षा में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाता है।

पहलूशंघाई फाइव (1996)SCO (2023)
सदस्यकज़ाखस्तान, चीन, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तानउपरोक्त + उज़्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस
फोकससीमा निर्धारण, सैन्यीकरण समाप्तिक्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, आर्थिक सहयोग
आबादी~200 मिलियन~3.2 अरब (40% वैश्विक आबादी)
व्यापार वॉल्यूमसीमित आंतरिक व्यापार5 ट्रिलियन USD (2023)
निर्णय प्रक्रियासहमति आधारितसहमति आधारित, कोई बाध्यकारी सामूहिक रक्षा नहीं

NATO के सामूहिक रक्षा तंत्र से तुलना

NATO के विपरीत, जिसके पास 1949 के उत्तर अटलांटिक संधि के अनुच्छेद 5 के तहत बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान है, SCO सहमति के आधार पर चलता है और इसमें बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताएं नहीं हैं। इससे सदस्य देशों की संप्रभुता बनी रहती है, लेकिन खतरों के खिलाफ त्वरित और समन्वित सैन्य कार्रवाई की क्षमता सीमित होती है।

विशेषताNATOSCO
स्थापना वर्ष19492001 (SCO चार्टर)
सदस्य31 (2024 तक)10
सामूहिक रक्षाअनुच्छेद 5 के तहत बाध्यकारीगैर-बाध्यकारी, सहमति आधारित
निर्णय प्रक्रियाबहुमत वोटिंग, बाध्यकारी प्रतिबद्धताएंसर्वसम्मति
मुख्य फोकसबाहरी आक्रमण के खिलाफ सैन्य रक्षाआतंकवाद विरोध, उग्रवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा

SCO रक्षा सहयोग में चुनौतियां और कमियां

SCO का सहमति आधारित निर्णय मॉडल सुरक्षा खतरों के प्रति प्रतिक्रिया में देरी या कमजोर प्रभाव पैदा करता है। प्रमुख सदस्यों—विशेषकर चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान—के बीच रणनीतिक हितों में मतभेद एकजुट कार्रवाई को जटिल बनाते हैं। भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आतंकवाद की परिभाषा में दोहरे मानदंड प्रभावी आतंकवाद विरोधी सहयोग में बाधक हैं। साथ ही, बाध्यकारी सामूहिक रक्षा तंत्र की कमी SCO को त्वरित खतरों का सामना करने में सीमित करती है।

  • सहमति मॉडल निर्णय प्रक्रिया धीमी करता है और क्रियान्वयन कमजोर बनाता है।
  • रणनीतिक प्रतिस्पर्धाएं (भारत-पाकिस्तान, चीन-भारत) विश्वास कम करती हैं।
  • आतंकवाद की परिभाषा में दोहरे मानदंड सहयोग को रोकते हैं।
  • बाध्यकारी सामूहिक रक्षा न होने से त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया सीमित।

भारत के लिए 2026 बैठक का महत्व

2023 में SCO की अध्यक्षता और 2026 की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत की सक्रिय भागीदारी यूरेशियाई सुरक्षा संरचना को आकार देने की उसकी रणनीतिक मंशा को दर्शाती है। यह मंच भारत को अफगानिस्तान और पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाले आतंकवादी खतरों को बहुपक्षीय संवाद के माध्यम से संबोधित करने का मौका देता है। SCO के जरिए भारत चीन-रूस के प्रभाव का संतुलन बनाते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।

  • भारत को प्रभावित करने वाले आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के मुद्दों पर चर्चा का मंच।
  • मध्य एशियाई देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने का अवसर।
  • यूरेशिया में भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत होती है।
  • भारत की Act East और Central Asia नीतियों का समर्थन।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – क्षेत्रीय समूह, भारत की विदेश नीति, सुरक्षा सहयोग
  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा – आतंकवाद, सीमा प्रबंधन
  • निबंध: भारत की सुरक्षा रणनीति में बहुपक्षवाद

आगे का रास्ता: SCO की सुरक्षा क्षमता बढ़ाना

  • संप्रभुता बनाए रखते हुए तेज निर्णय लेने की प्रक्रियाएं संस्थागत बनाना।
  • आतंकवाद की एक समान परिभाषा विकसित करना ताकि दोहरे मानदंड समाप्त हों।
  • RATS के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया साझा करना बढ़ाना।
  • भारत-पाकिस्तान और चीन-भारत तनाव कम करने के लिए विश्वास निर्माण उपायों को प्रोत्साहित करना।
  • सुरक्षा सहयोग के आधार को मजबूत करने के लिए आर्थिक एकीकरण का लाभ उठाना।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. SCO की शुरुआत 1996 में शंघाई फाइव के रूप में सीमा निर्धारण पर केंद्रित थी।
  2. भारत और पाकिस्तान 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने।
  3. SCO के पास NATO के अनुच्छेद 5 जैसी औपचारिक सामूहिक रक्षा धारा है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि SCO की शुरुआत शंघाई फाइव के रूप में 1996 में हुई थी। कथन 2 भी सही है; भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने। कथन 3 गलत है; SCO के पास NATO के अनुच्छेद 5 जैसी बाध्यकारी सामूहिक रक्षा धारा नहीं है।

SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. RATS का मुख्यालय ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में है।
  2. यह 2004 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यासों का समन्वय कर चुका है।
  3. RATS संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अंतर्गत काम करता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; RATS ताशकंद में स्थित है। कथन 2 भी सही है; 2004 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त अभ्यास किए हैं। कथन 3 गलत है; RATS SCO का अंग है और UNSC के अंतर्गत नहीं आता।

मेन्स प्रश्न

“2026 SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक का यूरेशिया में बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने में क्या महत्व है? SCO में भारत की भूमिका उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं को कैसे दर्शाती है?”

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की रणनीतिक उद्योग भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में योगदान देते हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भारत की प्रतिबद्धता का अप्रत्यक्ष समर्थन करता है।
  • मेन्स पॉइंटर: भारत के बहुपक्षीय जुड़ाव को घरेलू रक्षा क्षमताओं और क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
शंघाई सहयोग संगठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना और यूरेशिया में आर्थिक एवं सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना है।

2023 तक SCO के पूर्ण सदस्य कौन-कौन से देश हैं?

10 पूर्ण सदस्य हैं: चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान।

SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की भूमिका क्या है?

RATS SCO सदस्यों के बीच आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समन्वय करता है, जिसमें खुफिया साझा करना, संयुक्त अभ्यास और आतंकवाद तथा उग्रवाद से लड़ने के लिए संचालन शामिल हैं।

भारत का संवैधानिक ढांचा SCO में उसकी भागीदारी को कैसे समर्थन देता है?

भारत की भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 253 के अनुरूप है, जो संसद को SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।

SCO और NATO के रक्षा प्रतिबद्धताओं में क्या अंतर है?

NATO के अनुच्छेद 5 के तहत बाध्यकारी सामूहिक रक्षा होती है, जबकि SCO सहमति आधारित है और इसमें बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताएं नहीं हैं, जिससे त्वरित संयुक्त सैन्य कार्रवाई सीमित होती है।

Sources and further reading

Academic supportNeed guidance for this examination?

Speak to LearnPro about the relevant course, notes, test series or answer-writing programme.

Ask LearnPro
Related preparation

More on Governance

View all Governance Notes for UPSC →
Continue preparation

Read, revise and practise this subject

LearnPro Editorial Team

LearnPro prepares civil-services notes in simple language with syllabus relevance, factual review and links to primary references where available. Academic direction is provided by Rajan Kumar, Director, LearnPro Civil Services. For changing examination dates and vacancies, the official commission notification always prevails.