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Governance · Exam Notes

RBI के नए डिजिटल भुगतान सुरक्षा उपाय: नियामक ढांचा और प्रभाव का विश्लेषण

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2024 में डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी रोकने के लिए ₹10,000 से ऊपर के लेनदेन में 1 घंटे की देरी, संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण, और ग्राहक नियंत्रण में लेनदेन सीमा जैसे उपाय प्रस्तावित किए हैं। ये कदम Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत लागू किए जाएंगे और धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को 20% तक कम करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे भारत के बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजार में सुरक्षा और सुविधा का संतुलन बना रहे।
1 min read GS Paper II
Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2024 में डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी रोकने के लिए ₹10,000 से ऊपर के लेनदेन में 1 घंटे की देरी, संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण, और ग्राहक नियंत्रण में लेनदेन सीमा जैसे उपाय प्रस्तावित किए हैं। ये कदम Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत लागू किए जाएंगे और धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को 20% तक कम करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे भारत के बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजार में सुरक्षा और सुविधा का संतुलन बना रहे।

परिचय: RBI का डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी रोकने का प्रस्ताव

जून 2024 में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक चर्चा पत्र जारी किया जिसमें डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी कम करने के लिए कुछ नियामक कदमों का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें ₹10,000 से अधिक के लेनदेन पर अनिवार्य 1 घंटे की देरी, संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण, और ग्राहक द्वारा नियंत्रित लेनदेन सीमाएं शामिल हैं। इन उपायों का मकसद धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना और भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में उपयोगकर्ता सुविधा को बनाए रखना है।

भारत में वित्तीय वर्ष 2023 में डिजिटल भुगतान का लेनदेन 50 अरब से पार हो गया, जिसका मूल्य लगभग $1.4 ट्रिलियन है (NPCI वार्षिक रिपोर्ट 2023)। इसके बावजूद, वित्तीय वर्ष 2023 में डिजिटल धोखाधड़ी से ₹1,200 करोड़ का नुकसान हुआ (RBI वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, जून 2023), जिससे कड़े नियामक कदमों की जरूरत महसूस हो रही है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन), साइबर सुरक्षा (धोखाधड़ी रोकथाम के उपाय)
  • GS पेपर 2: RBI और भुगतान प्रणाली का नियमन
  • निबंध: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार और सुरक्षा का संतुलन

RBI के उपायों के लिए कानूनी और नियामक आधार

प्रस्तावित सुरक्षा उपाय Payment and Settlement Systems Act, 2007 (PSS Act) के तहत आते हैं, खासकर धारा 10 और 18, जो RBI को भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार देते हैं। साथ ही, Information Technology Act, 2000 (IT Act) की धारा 43A (डेटा सुरक्षा) और 66C (पहचान चोरी) साइबर अपराध से जुड़े प्रावधानों के रूप में इस ढांचे को पूरा करती हैं।

इसके अलावा, RBI Master Direction on Digital Payment Security Controls (2023) प्रमाणीकरण और लेनदेन नियंत्रण के लिए क्रियान्वयन दिशा-निर्देश प्रदान करता है। ये सभी कानूनी साधन मिलकर RBI को समय-स्थगित भुगतान, अतिरिक्त प्रमाणीकरण, और लेनदेन सीमाएं लागू करने में सक्षम बनाते हैं।

RBI के प्रस्तावित सुरक्षा उपायों की मुख्य विशेषताएँ

  • ₹10,000 से ऊपर के लेनदेन के लिए 1 घंटे की देरी: ₹10,000 से अधिक के लेनदेन को अस्थायी रूप से डेबिट किया जाएगा, लेकिन निपटान केवल एक घंटे बाद होगा, इस दौरान ग्राहक लेनदेन रद्द कर सकता है। इसका उद्देश्य अनधिकृत भुगतान धोखाधड़ी को रोकना है।
  • वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण: इन समूहों के उच्च-मूल्य के लेनदेन में विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा प्रमाणीकरण आवश्यक होगा, ताकि उनका शोषण न हो सके।
  • ग्राहक-नियंत्रित भुगतान स्विच और सीमाएं: ग्राहक अपने खाते स्तर पर डिजिटल भुगतान मोड चालू या बंद कर सकते हैं और लेनदेन सीमा निर्धारित कर सकते हैं, जिससे डेबिट लेनदेन पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।
  • बिना उन्नत जांच के खातों पर वार्षिक ₹25 लाख का क्रेडिट कैप: धोखाधड़ी की रकम धोने के लिए म्यूल खातों के उपयोग को रोकने के लिए, इस सीमा से ऊपर के क्रेडिट को “शैडो क्रेडिट” माना जाएगा और सत्यापन के बाद ही जारी किया जाएगा।
  • किल स्विच सुविधा: ग्राहक तुरंत अपने खाते पर सभी डिजिटल भुगतान बंद कर सकते हैं। पुनः सक्रियण के लिए कड़ी प्रमाणीकरण या बैंक में व्यक्तिगत रूप से जाना आवश्यक होगा, जिससे अनधिकृत डिजिटल लेनदेन रोका जा सके।

आर्थिक तर्क और प्रभाव का मूल्यांकन

भारत का डिजिटल भुगतान बाजार विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला है, वित्तीय वर्ष 2023 में 50 अरब से अधिक लेनदेन हुए (NPCI वार्षिक रिपोर्ट 2023)। हालांकि, RBI की रिपोर्ट के अनुसार ₹1,200 करोड़ का धोखाधड़ी नुकसान (वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, जून 2023) उपभोक्ता विश्वास और वित्तीय स्थिरता को कमजोर करता है।

₹10,000 से ऊपर के लेनदेन पर 1 घंटे की देरी लागू करने से धोखाधड़ी के नुकसान में 15-20% तक कमी आने की संभावना है, क्योंकि यह अनधिकृत भुगतान को पहचानने और उलटने का समय देता है। बिना उन्नत जांच के खातों पर वार्षिक क्रेडिट कैप म्यूल खातों को लक्षित करता है, जो धोखाधड़ी की रकम धोने में इस्तेमाल होते हैं।

डिजिटल भुगतान सुरक्षा में संस्थागत भूमिकाएं

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): भुगतान प्रणालियों का लाइसेंसिंग, नियमन और पर्यवेक्षण करने वाला केंद्रीय नियामक।
  • National Payments Corporation of India (NPCI): UPI और IMPS जैसे खुदरा भुगतान सिस्टम संचालित करता है और धोखाधड़ी रोकथाम के तकनीकी समाधान लागू करता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): साइबर सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना पर नीतियां बनाता है।
  • साइबर अपराध इकाइयां: डिजिटल धोखाधड़ी मामलों की जांच और अभियोजन करती हैं।

तुलनात्मक अध्ययन: RBI बनाम UK Financial Conduct Authority (FCA)

विशेषताRBI प्रस्ताव (भारत)FCA नियमन (यूके)
उच्च-मूल्य लेनदेन पर समय विलंब₹10,000 (~£100) से ऊपर लेनदेन पर 1 घंटे की देरीउच्च-मूल्य भुगतान पर 24 घंटे की देरी और “confirmation of payee” अनिवार्य
प्रमाणीकरणवरिष्ठ नागरिकों/दिव्यांगों के लिए विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त प्रमाणीकरणमल्टी-फैक्टर प्रमाणीकरण और confirmation of payee से 2022 में 40% तक धोखाधड़ी में कमी
ग्राहक नियंत्रणलेखा स्तर पर स्विच ऑन/ऑफ सुविधा और लेनदेन सीमाएंग्राहक नियंत्रण सीमित; भुगतानकर्ता/प्राप्तकर्ता सत्यापन पर ध्यान
धोखाधड़ी नुकसान प्रभाव15-20% तक धोखाधड़ी में कमी का अनुमानअधिकृत भुगतान धोखाधड़ी में 40% कमी

महत्वपूर्ण कमियां और चुनौतियां

  • RBI का समय विलंब मुख्य रूप से उच्च-मूल्य लेनदेन को लक्षित करता है, जबकि कम-मूल्य और उच्च-आवृत्ति वाले भुगतान, जो डिजिटल धोखाधड़ी का बड़ा हिस्सा हैं, पर प्रभावी नहीं हो सकता।
  • रीयल-टाइम धोखाधड़ी पहचान के लिए AI आधारित असामान्यता पहचान प्रणाली आवश्यक है, जो वर्तमान प्रस्तावों में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है।
  • ग्राहक जागरूकता और डिजिटल साक्षरता कमजोर है, जिससे प्रमाणीकरण और लेनदेन नियंत्रण की प्रभावशीलता सीमित होती है।
  • डिजिटल भुगतान के बड़े पैमाने और सीमा-पार साइबर अपराध की जटिलताओं के कारण प्रवर्तन में चुनौतियां बनी रहती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • RBI के उपाय धोखाधड़ी रोकथाम और उपयोगकर्ता सुविधा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक संतुलित नियामक नवाचार हैं, जो डिजिटल भुगतान प्रणालियों में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।
  • समय विलंब और प्रमाणीकरण उपायों के साथ AI आधारित रीयल-टाइम निगरानी और असामान्यता पहचान को जोड़ा जाना चाहिए।
  • ग्राहक जागरूकता कार्यक्रमों और डिजिटल साक्षरता को मजबूत करना प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है।
  • RBI, NPCI, MeitY और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना धोखाधड़ी की समय पर पहचान और अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप के अनुसार लेनदेन सीमाओं और प्रमाणीकरण प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा और समायोजन जरूरी है।

RBI के प्रस्तावित ₹10,000 से ऊपर के डिजिटल भुगतान पर 1 घंटे की देरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह देरी सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन पर लागू होती है, चाहे राशि कोई भी हो।
  2. देरी के दौरान भुगतानकर्ता के पास लेनदेन रद्द करने का विकल्प होता है।
  3. यह देरी अनधिकृत भुगतान धोखाधड़ी को कम करने के लिए है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि देरी केवल ₹10,000 से ऊपर के लेनदेन पर लागू होती है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि भुगतानकर्ता देरी के दौरान लेनदेन रद्द कर सकता है, और यह उपाय अनधिकृत भुगतान धोखाधड़ी को कम करने के लिए है।

RBI के डिजिटल भुगतान सुरक्षा उपायों के कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Payment and Settlement Systems Act, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
  2. Information Technology Act, 2000 में डिजिटल भुगतान से संबंधित पहचान चोरी के प्रावधान शामिल हैं।
  3. RBI Master Direction on Digital Payment Security Controls संसद द्वारा पारित एक संवैधानिक कानून है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि RBI Master Direction एक नियामक दिशा-निर्देश है, संसद द्वारा पारित संवैधानिक कानून नहीं।

मेन प्रश्न

डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में पेश किए गए समय-स्थगित भुगतान और उन्नत प्रमाणीकरण उपायों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम के संदर्भ में इन उपायों के संभावित लाभ और सीमाओं पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (Governance और साइबर सुरक्षा), पेपर 3 (आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन)
  • झारखंड संदर्भ: झारखंड के शहरी और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान का बढ़ता उपयोग धोखाधड़ी के जोखिम को बढ़ाता है; स्थानीय बैंक और सहकारी संस्थाओं को RBI के नए सुरक्षा उपायों के साथ तालमेल बैठाना होगा।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड में डिजिटल धोखाधड़ी के वित्तीय समावेशन पर प्रभाव और राज्य स्तरीय प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका पर उत्तर तैयार करें।
RBI को डिजिटल भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार किस आधार पर प्राप्त है?

Payment and Settlement Systems Act, 2007, विशेषकर धारा 10 और 18, RBI को भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित और पर्यवेक्षित करने का अधिकार देता है ताकि उनकी सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित हो सके।

₹10,000 से ऊपर के लेनदेन पर 1 घंटे की देरी कैसे काम करती है?

₹10,000 से अधिक के लेनदेन को अस्थायी रूप से डेबिट किया जाता है, लेकिन निपटान केवल 1 घंटे बाद होता है, इस दौरान ग्राहक अनधिकृत भुगतान को रोकने के लिए लेनदेन रद्द कर सकता है।

बिना उन्नत जांच के खातों पर वार्षिक ₹25 लाख के क्रेडिट कैप का उद्देश्य क्या है?

यह सीमा म्यूल खातों के उपयोग को रोकने के लिए है, जिनके माध्यम से डिजिटल धोखाधड़ी की रकम धोयी जाती है। ₹25 लाख से ऊपर के क्रेडिट “शैडो क्रेडिट” के रूप में रखे जाते हैं और सत्यापन के बाद ही जारी होते हैं।

डिजिटल भुगतान सुरक्षा उपायों को लागू करने और प्रवर्तन के लिए मुख्य संस्थान कौन-कौन से हैं?

RBI भुगतान प्रणालियों का नियमन करता है; NPCI खुदरा भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर संचालित करता है; MeitY साइबर सुरक्षा नीतियां बनाता है; साइबर अपराध इकाइयां डिजिटल धोखाधड़ी मामलों की जांच करती हैं।

RBI के प्रस्तावित उपाय UK के FCA नियमों से कैसे तुलना करते हैं?

UK के FCA के तहत 24 घंटे की देरी और भुगतानकर्ता पुष्टिकरण प्रणाली लागू है, जिससे अधिकृत भुगतान धोखाधड़ी में 40% कमी आई है। RBI एक घंटे की देरी और अतिरिक्त प्रमाणीकरण का प्रस्ताव करता है, जिसका लक्ष्य धोखाधड़ी में 15-20% की कमी लाना है।

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