ग्रेट निकोबार द्वीप के मसौदा मास्टर प्लान का अवलोकन
ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) के मसौदा मास्टर प्लान को 2055 तक इस द्वीप को एक रणनीतिक आर्थिक केंद्र में बदलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह योजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 2022 में स्टेज-1 पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद लागू की जा रही है और इसका क्रियान्वयन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO) द्वारा किया जा रहा है। योजना में पर्यटन आधारित विकास, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 MVA गैस और सौर ऊर्जा संयंत्र, और द्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित गालथेया बे में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) शामिल है, जो एक निर्जन क्षेत्र है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: बुनियादी ढांचा विकास, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आर्थिक विकास
- GS पेपर 1: द्वीपों का भूगोल, जनजातीय अधिकार और स्वदेशी समुदाय
- निबंध: द्वीपीय क्षेत्रों में विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन
परियोजना के तहत कानूनी और संवैधानिक ढांचे
यह परियोजना कई कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती है जो शासन, पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं। संविधान के अनुच्छेद 243G और 243W अंडमान और निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय शासन को सशक्त बनाते हैं। पर्यावरणीय मंजूरी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3 और 5), पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006, और कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) अधिसूचना, 2019 के तहत दी जाती है। वन संरक्षण के लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (धारा 2) का पालन अनिवार्य है। विशेष रूप से, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (स्वदेशी जनजातियों का संरक्षण) विनियमन, 1956 शॉम्पेन और निकोबार जनजातियों जैसे स्वदेशी समुदायों की सुरक्षा करता है, जिनका आवास परियोजना क्षेत्र से ओवरलैप करता है।
- 2022 में स्टेज-1 पर्यावरण मंजूरी (MoEFCC आधिकारिक अधिसूचना)
- CRZ अधिसूचना 2019 के तहत गालथेया बे में तटीय क्षेत्र के नियम लागू
- 1956 के विनियमन के तहत जनजातीय आवास की सुरक्षा अनिवार्य
- केंद्र शासित प्रदेश प्रावधानों के तहत अंडमान और निकोबार प्रशासन द्वारा स्थानीय शासन
आर्थिक घटक और रणनीतिक महत्व
मास्टर प्लान का लक्ष्य ग्रेट निकोबार को एक क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिसमें बुनियादी ढांचे और पर्यटन को एकीकृत किया गया है। ICTT का उद्देश्य दक्षिण एशियाई प्रमुख बंदरगाहों जैसे कोलंबो और सिंगापुर से बाजार हिस्सेदारी लेना है, जो वार्षिक 40 मिलियन TEUs से अधिक हैं (UNCTAD, 2023)। 450 MVA का पावर प्लांट गैस और सौर ऊर्जा का संयोजन है, जो 2055 तक बढ़ती जनसंख्या 3.36 लाख के लिए स्थायी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। पर्यटन को मुख्य आर्थिक चालक माना गया है, जिसमें 15-20% वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है (पर्यटन मंत्रालय, 2023)। अनुमानित निवेश 10,000 करोड़ रुपये से अधिक है (ANIIDCO रिपोर्ट, 2023)।
- गालथेया बे में ICTT का लक्ष्य कोलंबो (7 मिलियन TEUs) और सिंगापुर (37 मिलियन TEUs) से ट्रांसशिपमेंट बाजार हिस्सेदारी लेना है
- अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कनेक्टिविटी बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए
- पावर प्लांट ऊर्जा सुरक्षा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ संयोजन
- 2055 तक 336,000 की अनुमानित जनसंख्या वृद्धि के कारण बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक
संस्थागत भूमिकाएँ और समन्वय
ANIIDCO एक अर्ध-सरकारी एजेंसी है जो व्यावसायिक विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ पर्यटन और मत्स्य पालन के लिए जिम्मेदार है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरणीय मंजूरी और अनुपालन की निगरानी करता है। पर्यटन मंत्रालय पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देता है, जबकि बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ICTT के विकास की देखरेख करता है। अंडमान और निकोबार प्रशासन स्थानीय शासन और नियामक निगरानी प्रदान करता है, जिससे एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित होता है।
- ANIIDCO की स्थापना 1988 में कंपनी अधिनियम के तहत; संसाधन विकास और पर्यटन प्रबंधन करता है
- MoEFCC पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करता है और अनुपालन की निगरानी करता है
- पर्यटन मंत्रालय पर्यटन को बढ़ावा देता है और बुनियादी ढांचे का विकास करता है
- बंदरगाह मंत्रालय ICTT संचालन और समुद्री कनेक्टिविटी का प्रबंधन करता है
- स्थानीय प्रशासन नियामक प्रवर्तन और जनजातीय कल्याण सुनिश्चित करता है
पर्यावरणीय और जनजातीय चिंताएँ
यह योजना ग्रेट निकोबार बायोस्फियर रिजर्व के कारण पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील है, जो जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। बुनियादी ढांचे पर जोर से आवास के विखंडन का खतरा है, जिससे स्थानीय प्रजातियों और जनजातीय आजीविका को नुकसान हो सकता है। शॉम्पेन और निकोबार जनजातियों के आवास क्षेत्र परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं, जो 1956 के जनजातीय संरक्षण विनियमन के तहत चिंता का विषय है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि संरक्षण उपाय पर्याप्त नहीं हुए तो दीर्घकालिक सामाजिक और पर्यावरणीय संघर्ष हो सकते हैं, जिससे परियोजना में देरी हो सकती है।
- ग्रेट निकोबार बायोस्फियर रिजर्व में अनोखे वनस्पति और जीव-जंतु हैं, जिनका कड़ाई से संरक्षण आवश्यक
- जनजातीय आवास क्षेत्र परियोजना क्षेत्र से ओवरलैप, विस्थापन का खतरा
- 1956 के विनियमन का उल्लंघन संभव यदि जनजातीय परामर्श और आवास सुरक्षा पर्याप्त न हो
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन ने आवास हानि और प्रदूषण के जोखिम बताए हैं
तुलनात्मक दृष्टिकोण: सिंगापुर का जुरोंग द्वीप और चांगी हवाई अड्डा
सिंगापुर का जुरोंग द्वीप, जो एक पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित हुआ है, और चांगी हवाई अड्डा इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे बुनियादी ढांचा और पर्यटन मिलकर एक वैश्विक आर्थिक केंद्र बना सकते हैं। सिंगापुर का बंदरगाह सालाना 37 मिलियन TEUs संभालता है (मैरिटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर, 2023), जो ग्रेट निकोबार के अनुमानित स्तर से कहीं अधिक है। हालांकि, सिंगापुर का मॉडल व्यापक शहरीकरण और न्यूनतम पारिस्थितिक प्रतिबंधों पर आधारित है, जबकि ग्रेट निकोबार को नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
| पहलू | ग्रेट निकोबार द्वीप | सिंगापुर |
|---|---|---|
| बंदरगाह क्षमता (TEUs) | गालथेया बे में ICTT, दक्षिण एशिया के 40 मिलियन TEUs बाजार का हिस्सा लेने का प्रयास | सालाना 37 मिलियन TEUs |
| प्रमुख आर्थिक चालक | पर्यटन आधारित विकास और बुनियादी ढांचे का संयोजन | पेट्रोकेमिकल हब और हवाई कनेक्टिविटी |
| पर्यावरणीय प्रतिबंध | उच्च – बायोस्फियर रिजर्व और जनजातीय आवास | कम – अत्यधिक शहरीकृत द्वीप |
| शासन व्यवस्था | केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और जनजातीय संरक्षण | केंद्रीकृत शासन वाला नगर-राज्य |
मसौदा मास्टर प्लान में प्रमुख कमियाँ
मास्टर प्लान में स्वदेशी जनजातीय आवास और जैव विविधता की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। जनजातीय परामर्श की प्रक्रिया का अभाव 1956 के जनजातीय संरक्षण विनियमन के उल्लंघन का खतरा पैदा करता है। पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय ग्रेट निकोबार बायोस्फियर रिजर्व पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए अपर्याप्त दिखते हैं। ये कमियाँ कानूनी विवाद, सामाजिक अशांति और परियोजना की देरी का कारण बन सकती हैं, जिससे योजना की स्थिरता और रणनीतिक उद्देश्य प्रभावित होंगे।
- जनजातीय सहमति और आवास संरक्षण के लिए अपर्याप्त तंत्र
- वन संरक्षण और CRZ नियमों का उल्लंघन संभव
- आवास विखंडन और जैव विविधता हानि का जोखिम
- सामाजिक और पर्यावरणीय संघर्ष, परियोजना में देरी का खतरा
महत्त्व और आगे का रास्ता
ग्रेट निकोबार मास्टर प्लान बंगाल की खाड़ी में भारत के रणनीतिक समुद्री और पर्यटन बुनियादी ढांचे को विकसित करने का दुर्लभ अवसर प्रस्तुत करता है। हालांकि, आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के साथ पारिस्थितिक और जनजातीय अधिकारों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। जनजातीय भागीदारी को मजबूत करना, पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय बढ़ाना और अनुकूलन प्रबंधन अपनाना आवश्यक होगा। नवीकरणीय ऊर्जा और सतत पर्यटन प्रथाओं को शामिल करके पर्यावरणीय जोखिम कम किए जा सकते हैं। इस परियोजना की सफलता द्वीप के विशिष्ट सामाजिक-पर्यावरणीय संदर्भ के साथ विकास के सामंजस्य पर निर्भर करेगी।
- 1956 के विनियमन के तहत जनजातीय परामर्श और आवास संरक्षण को संस्थागत बनाना
- CRZ और वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना
- लगातार पर्यावरण निगरानी के साथ चरणबद्ध विकास अपनाना
- पारिस्थितिक संवेदनशीलता के अनुरूप सतत पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देना
- कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना
ग्रेट निकोबार द्वीप के मसौदा मास्टर प्लान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल ऐसे स्थान पर बनाया जाएगा जहां पहले से मानव बस्ती है।
- परियोजना को EIA अधिसूचना, 2006 के तहत स्टेज-1 पर्यावरण मंजूरी मिली है।
- 1956 का जनजातीय संरक्षण विनियमन ग्रेट निकोबार के स्वदेशी जनजातियों पर लागू होता है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि ICTT गालथेया बे में बनाया जाएगा, जो निर्जन क्षेत्र है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि परियोजना को EIA अधिसूचना, 2006 के तहत स्टेज-1 मंजूरी मिली है और 1956 का विनियमन क्षेत्र के स्वदेशी जनजातियों की सुरक्षा करता है।
ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में संस्थागत भूमिकाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- ANIIDCO परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है।
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल की देखरेख पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवे मंत्रालय करता है।
- अंडमान और निकोबार प्रशासन स्थानीय शासन और नियामक निगरानी का प्रबंधन करता है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि पर्यावरणीय मंजूरी MoEFCC द्वारा दी जाती है, ANIIDCO द्वारा नहीं। कथन 2 और 3 पोर्ट्स मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन की भूमिकाओं के संदर्भ में सही हैं।
मुख्य प्रश्न
ग्रेट निकोबार द्वीप के मसौदा मास्टर प्लान का मूल्यांकन करें कि यह भारत की रणनीतिक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में कितना सक्षम है और पारिस्थितिक संवेदनशीलता तथा जनजातीय अधिकारों से जुड़े कौन-कौन से चुनौतियाँ सामने आती हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं, सुझाव दें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और पर्यावरण), पेपर 3 (बुनियादी ढांचा और आर्थिक विकास)
- झारखंड कोण: झारखंड के जनजातीय शासन मुद्दे और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास ग्रेट निकोबार में जनजातीय अधिकारों और पारिस्थितिक संतुलन के प्रबंधन के लिए समानताएं प्रस्तुत करते हैं।
- मुख्य बिंदु: संवैधानिक सुरक्षा, पर्यावरण कानून और सतत बुनियादी ढांचा विकास पर आधारित उत्तर तैयार करें।
ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में ANIIDCO की भूमिका क्या है?
ANIIDCO अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली कार्यकारी एजेंसी है। यह ICTT, पावर प्लांट और टाउनशिप विकास जैसी परियोजनाओं का प्रबंधन करता है।
ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को कौन-कौन से पर्यावरण कानून नियंत्रित करते हैं?
यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3 और 5), पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006, कोस्टल रेगुलेशन जोन अधिसूचना, 2019, और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (धारा 2) के तहत नियंत्रित होती है।
1956 का जनजातीय संरक्षण विनियमन परियोजना को कैसे प्रभावित करता है?
यह विनियमन शॉम्पेन और निकोबार जैसे स्वदेशी जनजातियों के अधिकारों और आवास की सुरक्षा करता है। परियोजना को उनके आवासों की रक्षा करनी होगी और जनजातीय सहमति प्राप्त करनी होगी ताकि इस कानून का पालन हो सके।
अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल गालथेया बे में क्यों बनाया जा रहा है?
गालथेया बे ग्रेट निकोबार के दक्षिण-पूर्वी तट पर एक निर्जन स्थान है, जिसे विस्थापन और मानव संघर्ष को कम करने के लिए चुना गया है, साथ ही ICTT के लिए रणनीतिक समुद्री कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के अनुमानित आर्थिक लाभ क्या हैं?
यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन के आंकड़ों में 15-20% वार्षिक वृद्धि लाने, और दक्षिण एशियाई ट्रांसशिपमेंट बाजार का हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखती है, जो आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान देगा।