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Governance · Exam Notes

भारत की Pax Silica भागीदारी और डिजिटल उपनिवेशवाद के खतरे

भारत ने 2026 में अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica पहल में शामिल होकर AI और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित की। निवेश और सप्लाई स्थिरता के वादे के साथ यह पश्चिमी डिजिटल मानकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता बढ़ाकर डिजिटल उपनिवेशवाद को भी बढ़ावा दे सकता है, जिससे भारत की डेटा संप्रभुता और घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता पर सवाल उठते हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारत ने 2026 में अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica पहल में शामिल होकर AI और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित की। निवेश और सप्लाई स्थिरता के वादे के साथ यह पश्चिमी डिजिटल मानकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता बढ़ाकर डिजिटल उपनिवेशवाद को भी बढ़ावा दे सकता है, जिससे भारत की डेटा संप्रभुता और घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता पर सवाल उठते हैं।

Pax Silica और भारत की भागीदारी का परिचय

Pax Silica एक अमेरिकी नेतृत्व वाली रणनीतिक गठबंधन है, जिसे दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मकसद सिलिकॉन और AI सप्लाई चेन को मजबूत और नवाचार-आधारित बनाना है। इसके संस्थापक सदस्य ऑस्ट्रेलिया, इजरायल, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और UAE हैं। भारत ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट के दौरान इस पहल में औपचारिक रूप से शामिल होकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई (MEA आधिकारिक विज्ञप्ति, 2026)। यह गठबंधन 2023 में सेमीकंडक्टर उत्पादन में 15% की गिरावट (WSTS) के कारण वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर निर्माण और AI तकनीकी मानकों पर समन्वय करता है।

भारत की भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसके इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का बिल 76 अरब डॉलर था (वाणिज्य मंत्रालय), और AI बाजार 2027 तक 7.8 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना रखता है (NASSCOM)। हालांकि, इस साझेदारी से पश्चिमी नियंत्रण वाले डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानकों पर निर्भरता बढ़ने का खतरा भी है, जो डिजिटल उपनिवेशवाद को गहरा कर सकता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – AI शासन, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, डेटा संप्रभुता
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, तकनीकी कूटनीति
  • निबंध: डिजिटल उपनिवेशवाद और भारत की तकनीकी संप्रभुता

डिजिटल उपनिवेशवाद क्या है?

डिजिटल उपनिवेशवाद एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें विकसित देश या बहुराष्ट्रीय कंपनियां विकासशील देशों के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्रवाह और तकनीकी मानकों को नियंत्रित करती हैं। पारंपरिक उपनिवेशवाद के विपरीत, यह नियंत्रण क्षेत्रीय कब्जे के बजाय डेटा, एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म के माध्यम से होता है। इससे विदेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भरता बढ़ती है, जो देश की नवाचार क्षमता और नीति स्वतंत्रता को सीमित करता है।

  • विकासशील देशों की 60% से अधिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर विदेशी MNCs के नियंत्रण में है (UNCTAD डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2025)।
  • डिजिटल उपनिवेशवाद डेटा स्टोरेज, क्लाउड सेवाओं, AI एल्गोरिदम और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के नियंत्रण के रूप में प्रकट होता है।
  • यह डेटा संप्रभुता को कमजोर करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है।

भारत का डिजिटल संप्रभुता पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारतीय संविधान का Article 246 संसद को व्यापार और वाणिज्य पर कानून बनाने का अधिकार देता है, जिसमें डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। Information Technology Act, 2000 की धारा 43A संवेदनशील डेटा की सुरक्षा में चूक पर मुआवजा देने का प्रावधान करती है, जबकि धारा 72A गैरकानूनी सूचना प्रकटीकरण पर दंड निर्धारित करती है।

लंबित Personal Data Protection Bill, 2019 डेटा संप्रभुता और निजता के लिए व्यापक ढांचा स्थापित करने का प्रयास करता है, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का Justice K.S. Puttaswamy (Retd.) vs Union of India (2017) में निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देना डेटा शासन की मजबूती की जरूरत को रेखांकित करता है।

  • भारत की अधूरी डेटा लोकलाइजेशन नीति महत्वपूर्ण डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को विदेशी नियंत्रण के लिए कमजोर छोड़ती है।
  • कानूनी कमियां सीमापार डेटा प्रवाह और AI तकनीक के उपयोग में डेटा संप्रभुता के प्रवर्तन में बाधा डालती हैं।

सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन में आर्थिक दांव

वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2025 में लगभग 600 अरब डॉलर का है, जिसमें AI चिप की मांग 20% CAGR से बढ़ रही है (McKinsey Global Semiconductor Report 2026)। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात वित्त वर्ष 2023-24 में कुल आयात का 27% था (वाणिज्य मंत्रालय), जो विदेशी हार्डवेयर पर भारी निर्भरता दर्शाता है।

Pax Silica अगले पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित कर सप्लाई चेन की मजबूती चाहता है। भारत की AI बाजार विकास क्षमता इसे रणनीतिक रूप से आकर्षक बनाती है, लेकिन यह पश्चिमी साझेदारों द्वारा नियंत्रित सप्लाई चेन पर निर्भरता भी बढ़ाती है।

  • 2023 में सप्लाई चेन बाधाओं के कारण वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन में 15% की गिरावट आई (WSTS)।
  • भारत की घरेलू चिप निर्माण क्षमता 5% से कम है, जबकि चीन की 40% है (चीन उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, 2025)।
  • Pax Silica साझेदारों से निवेश भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन तकनीकी और नीति संबंधी शर्तें भी हो सकती हैं।

डिजिटल संप्रभुता और AI रणनीति में संस्थागत भूमिका

NITI आयोग AI नीति निर्माण और नवाचार रणनीतियों का समन्वय करता है। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा शासन नीतियों को लागू करता है। National Security Council Secretariat (NSCS) रणनीतिक तकनीकी सुरक्षा मामलों की देखरेख करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, US Department of Commerce Pax Silica पहल का नेतृत्व करता है, जबकि World Semiconductor Trade Statistics (WSTS) नीति निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण बाजार डेटा प्रदान करता है।

  • इन संस्थानों के बीच समन्वय सप्लाई चेन सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
  • भारत की नीति संरचना में डिजिटल उपनिवेशवाद को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र की कमी है, भले ही रणनीतिक साझेदारी हों।

तुलनात्मक अध्ययन: Pax Silica बनाम चीन की डिजिटल सिल्क रोड

पहलPax Silica (भारत और साझेदार)चीन की डिजिटल सिल्क रोड
शुरुआतदिसंबर 20252015
फोकसAI सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर खनिज, मानक सुरक्षास्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर नियंत्रण
घरेलू चिप निर्माण क्षमता (2025)<5% (भारत)40%
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रणपश्चिमी साझेदारों में साझा; भारत मानकों पर निर्भरराज्य-नेतृत्व वाला नियंत्रण, आत्मनिर्भरता पर जोर
डिजिटल उपनिवेशवाद का खतरापश्चिमी मानकों और निवेश पर निर्भरता के कारण उच्चस्वदेशी क्षमता और नियंत्रण के कारण कम

नीतिगत कमियां और जोखिम

भारत की अधूरी डेटा संप्रभुता नीति और कम घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता, Pax Silica की सप्लाई चेन सुरक्षा के बावजूद, डिजिटल उपनिवेशवाद के खतरे को बढ़ाती हैं। सप्लाई चेन मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्वायत्तता की जरूरत अक्सर छूट जाती है।

  • लंबित Personal Data Protection Bill के कारण व्यापक डेटा शासन में देरी।
  • कम स्वदेशी चिप निर्माण रणनीतिक स्वतंत्रता को सीमित करता है।
  • पश्चिमी तकनीकी मानकों पर निर्भरता नीति संतुलन को खतरे में डालती है।

आगे का रास्ता

  • Personal Data Protection Bill को शीघ्र लागू कर डेटा संप्रभुता के स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
  • घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण में भारी निवेश कर बाहरी निर्भरताओं को कम किया जाए।
  • Pax Silica में तकनीकी हस्तांतरण और मानक निर्धारण में भारत की भूमिका सुनिश्चित की जाए।
  • NITI आयोग, MeitY और NSCS के बीच बेहतर समन्वय से एकीकृत डिजिटल सुरक्षा नीति तैयार की जाए।
  • डिजिटल उपनिवेशवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति विकसित कर स्वदेशी नवाचार और इन्फ्रास्ट्रक्चर नियंत्रण को बढ़ावा दिया जाए।

डिजिटल उपनिवेशवाद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. डिजिटल उपनिवेशवाद मुख्य रूप से डिजिटल साधनों से विदेशी शक्तियों द्वारा भौतिक क्षेत्रों के नियंत्रण को दर्शाता है।
  2. इसमें विकासशील देशों द्वारा विदेशी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानकों पर निर्भरता शामिल है।
  3. डिजिटल उपनिवेशवाद राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि डिजिटल उपनिवेशवाद भौतिक क्षेत्रों के नियंत्रण की बजाय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा के नियंत्रण से जुड़ा है। कथन 2 और 3 सही हैं, जो निर्भरता और संप्रभुता के जोखिमों को दर्शाते हैं।

भारत के डेटा शासन पर कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Information Technology Act, 2000 में डेटा सुरक्षा में विफलता पर मुआवजे का प्रावधान है।
  2. Personal Data Protection Bill, 2019 पूरी तरह से लागू और कार्यान्वित हो चुका है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि IT Act की धारा 43A डेटा सुरक्षा में चूक पर मुआवजा देने का प्रावधान करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि Personal Data Protection Bill अभी लंबित है। कथन 3 सही है, जैसा कि 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया।

मुख्य प्रश्न

डिजिटल उपनिवेशवाद के संदर्भ में अमेरिकी नेतृत्व वाली Pax Silica पहल में भारत की भागीदारी का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। संवैधानिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें और भारत की डिजिटल संप्रभुता की रक्षा के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय संबंध)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन, जो सेमीकंडक्टर के लिए आवश्यक हैं, भारत की सप्लाई चेन सुरक्षा में इसे रणनीतिक राज्य बनाते हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के खनिज योगदान, स्थानीय इन्फ्रास्ट्रक्चर चुनौतियां, और राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता लक्ष्यों के साथ राज्य-स्तरीय नीति समन्वय की आवश्यकता पर उत्तर तैयार करें।
Pax Silica पहल का उद्देश्य क्या है?

Pax Silica का उद्देश्य सहयोगी देशों के बीच समन्वय कर सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित सिलिकॉन और AI सप्लाई चेन बनाना है, ताकि महत्वपूर्ण खनिज और सेमीकंडक्टर निर्माण में निर्भरताओं और बाधाओं को कम किया जा सके।

डिजिटल उपनिवेशवाद और डिजिटल विभाजन में क्या अंतर है?

डिजिटल उपनिवेशवाद विदेशी शक्तियों द्वारा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा नियंत्रण के कारण निर्भरता और संप्रभुता सीमित करता है, जबकि डिजिटल विभाजन डिजिटल तकनीकों और कनेक्टिविटी तक असमान पहुंच को दर्शाता है।

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कानून बनाने का संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?

भारतीय संविधान का Article 246 संसद को व्यापार और वाणिज्य पर कानून बनाने का अधिकार देता है, जिसमें डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और संबंधित नीतियां शामिल हैं।

भारत के लिए Personal Data Protection Bill, 2019 क्यों महत्वपूर्ण है?

यह बिल डेटा संप्रभुता, निजता और सीमापार डेटा प्रवाह के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा स्थापित करने का प्रयास करता है, जो AI और वैश्विक डेटा आदान-प्रदान के युग में भारत की डिजिटल स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जरूरी है।

चीन की डिजिटल सिल्क रोड और Pax Silica में क्या अंतर है?

चीन की डिजिटल सिल्क रोड स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर नियंत्रण पर केंद्रित है, जिसने 2025 तक 40% घरेलू चिप निर्माण क्षमता हासिल की है, जबकि Pax Silica पश्चिमी साझेदारों के साथ बहुपक्षीय सप्लाई चेन सुरक्षा पर निर्भर है, जहां भारत की घरेलू क्षमता 5% से कम है।

Sources and further reading

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