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Governance · Exam Notes

सीमांकन और महिलाओं के लिए आरक्षण: 106वें संशोधन अधिनियम, 2023 का क्रियान्वयन

संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन करना जरूरी है। 2029 से पहले इसे लागू करने के लिए सीमांकन प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है, लेकिन इससे पुरानी जनसांख्यिकीय जानकारी, 84वें संशोधन के तहत सीमांकन पर लगी रोक, और बढ़ती प्रशासनिक लागत जैसे कई मुद्दे भी सामने आते हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन करना जरूरी है। 2029 से पहले इसे लागू करने के लिए सीमांकन प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है, लेकिन इससे पुरानी जनसांख्यिकीय जानकारी, 84वें संशोधन के तहत सीमांकन पर लगी रोक, और बढ़ती प्रशासनिक लागत जैसे कई मुद्दे भी सामने आते हैं।

परिचय: सीमांकन और महिलाओं के आरक्षण

संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रक्रिया के तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले यह व्यवस्था लागू हो सके। लेकिन 2021 की जनगणना में देरी और 84वें संशोधन के तहत 2026 तक सीमांकन पर लगी रोक से कानूनी और जनसांख्यिकीय चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: राजनीति (संवैधानिक संशोधन, चुनावी सुधार, महिलाओं का प्रतिनिधित्व)
  • GS पेपर 1: भारतीय समाज (महिला सशक्तिकरण, जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियां)
  • निबंध: भारत में महिलाओं का आरक्षण और चुनावी सुधार

संवैधानिक और कानूनी ढांचा

106वें संशोधन ने अनुच्छेद 81 और 170 में संशोधन कर संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान जोड़ा है। सीमांकन अधिनियम, 2002 के तहत दशकीय जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारित की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के सीमांकन आयोग मामले में यह स्पष्ट किया कि सीमांकन एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जो न्यायिक समीक्षा से मुक्त है, लेकिन इसे समान जनसंख्या प्रतिनिधित्व के संवैधानिक निर्देशों का पालन करना होता है। 84वें संशोधन (2001) ने 2026 तक सीटों की संख्या को स्थिर रखा है, जो 106वें संशोधन के सीटों के विस्तार से टकराता है।

  • अनुच्छेद 81: लोकसभा की संरचना और सीमांकन के मानदंड।
  • अनुच्छेद 170: राज्य विधानसभाओं की संरचना और सीमांकन।
  • सीमांकन अधिनियम, 2002: सीमांकन आयोगों के गठन का कानूनी आधार।
  • संविधान (84वां संशोधन) अधिनियम, 2001: 2001 की जनगणना के आधार पर 2026 तक सीमांकन पर रोक।
  • संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023: महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और सीटों में वृद्धि।

सीमांकन: प्रक्रिया और चुनौतियां

सीमांकन का मकसद जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं इस तरह तय करना है कि सभी क्षेत्रों का समान प्रतिनिधित्व हो। पिछला सीमांकन 2001 की जनगणना पर आधारित था और 2026 तक स्थगित है। सरकार ने 2021 की जनगणना के स्थगित होने के कारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग कर सीमांकन करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि इससे जनसांख्यिकीय सटीकता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं क्योंकि दशक भर में जनसंख्या में बदलाव हो चुका होता है।

  • 2011 की जनगणना में भारत की जनसंख्या 1.21 अरब दर्ज की गई थी (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया)।
  • 2011 के बाद जनसंख्या वृद्धि और प्रवासन से निर्वाचन क्षेत्रों में असंतुलन हो सकता है।
  • सीमांकन में समान जनसंख्या के साथ भौगोलिक और प्रशासनिक पहलुओं का भी ध्यान रखना होता है।
  • लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने से चुनावी जटिलता और खर्च बढ़ेंगे।

सीमांकन और आरक्षण के आर्थिक प्रभाव

सीमांकन और महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए भारी बजट की जरूरत होगी। सीमांकन आयोग की कार्यवाही, मतदाता सूची का अद्यतन और चुनावी व्यवस्थाओं का विस्तार कई सौ करोड़ रुपये तक खर्च बढ़ा सकता है। UN Women की रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से बेहतर शासन और आर्थिक समावेशन होता है, जिससे GDP वृद्धि में 0.5-1% तक सुधार हो सकता है। लेकिन सीटों की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक खर्च भी बढ़ेगा।

  • अनुमानित खर्चों में सीमांकन आयोग के खर्च, मतदाता शिक्षण और चुनाव प्रबंधन शामिल हैं।
  • महिलाओं का प्रतिनिधित्व सामाजिक कल्याण और आर्थिक नीतियों में सुधार से जुड़ा है।
  • विधायिका के आकार में वृद्धि से वेतन, आधारभूत संरचना और सहायक कर्मियों के लिए संसाधनों की मांग बढ़ेगी।

प्रमुख संस्थाएं

  • सीमांकन आयोग: जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने वाली स्वतंत्र संस्था।
  • चुनाव आयोग: चुनावों का संचालन और आरक्षण नीतियों का पालन सुनिश्चित करता है।
  • गृह मंत्रालय: जनगणना संचालन और आंकड़ों की उपलब्धता का समन्वय करता है।
  • भारतीय संसद: संवैधानिक संशोधनों को पारित करता है और सीमांकन प्रक्रियाओं को मंजूरी देता है।

महिला आरक्षण और सीटों की वृद्धि: आंकड़ों का सारांश

परिमाण106वें संशोधन से पहले106वें संशोधन के बाद
लोकसभा सीटें543816
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटेंकोई नहीं (वास्तव में 78 सीटें, 14.4%)273 (33%)
सीमांकन का आधार2001 की जनगणना (2026 तक स्थगित)2011 की जनगणना (प्रस्तावित)
जनसंख्या आंकड़े1.02 अरब (2001 की जनगणना)1.21 अरब (2011 की जनगणना)

तुलनात्मक दृष्टिकोण: रवांडा में महिलाओं का आरक्षण

रवांडा के संविधान में 2003 से संसद में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य है। सीटों के पुनर्गठन और आरक्षण के जरिए रवांडा ने 2018 तक निचली सदन में 61.3% महिला प्रतिनिधित्व हासिल किया (इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन)। यह दिखाता है कि आरक्षण के लिए शीघ्र और बाध्यकारी नियमों के साथ सीमांकन महत्वपूर्ण होता है।

  • रवांडा की नीति में आरक्षित सीटें और अनुपातात्मक प्रतिनिधित्व शामिल हैं।
  • भारत का मॉडल सीमांकन और सीटों के विस्तार पर आधारित है, जिसमें देरी है।
  • रवांडा का अनुभव बताता है कि समय पर सीमांकन आरक्षण के लिए जरूरी है।

संवैधानिक टकराव और मुख्य चुनौतियां

2011 की जनगणना पर निर्भरता वर्तमान जनसांख्यिकी को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं कर सकती, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन हो सकता है और समान जनसंख्या वाले निर्वाचन क्षेत्रों के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है। 84वें संशोधन के तहत 2026 तक सीमांकन पर लगी रोक और 106वें संशोधन के तहत सीटों में वृद्धि के बीच टकराव है। इसे सुलझाने के लिए कानूनी स्पष्टता और राजनीतिक सहमति जरूरी है ताकि न्यायिक विवादों से बचा जा सके और लोकतांत्रिक वैधता बनी रहे।

  • 2011 के बाद शहरीकरण और राज्यों के बीच प्रवासन हुआ है।
  • 84वें और 106वें संशोधनों के बीच कानूनी अस्पष्टता बनी हुई है।
  • सीटें कम होने वाले राज्यों से राजनीतिक विरोध हो सकता है।

आगे की राह

  • सीमांकन के लिए नवीनतम विश्वसनीय जनगणना डेटा का उपयोग करें, जिसमें समयबद्धता और सटीकता का संतुलन हो।
  • संवैधानिक टकराव को संसद में चर्चा या न्यायिक व्याख्या के जरिए स्पष्ट करें।
  • सीमांकन में पारदर्शिता और हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि विश्वास बना रहे।
  • सीमांकन आयोग और चुनाव प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित करें।
  • आरक्षण के साथ-साथ महिला विधायकों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम भी लागू करें ताकि शासन में प्रभाव बढ़े।

संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है।
  2. आरक्षण लागू करने के लिए सीमांकन 2021 की जनगणना पर आधारित होना चाहिए।
  3. इस संशोधन के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि संशोधन महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि सीमांकन 2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तावित है, 2021 की जनगणना स्थगित होने के कारण। कथन 3 सही है क्योंकि संशोधन के तहत लोकसभा की सीटें 816 हो जाएंगी।

भारत के सीमांकन आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह एक स्थायी संवैधानिक संस्था है जो सीमांकन के लिए जिम्मेदार है।
  2. इसके आदेशों को कानून का दर्जा प्राप्त है और उन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  3. यह नवीनतम जनगणना के आधार पर सीमांकन करता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 गलत है क्योंकि सीमांकन आयोग हर जनगणना के बाद अस्थायी रूप से गठित होता है, स्थायी नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि इसके आदेशों को कानून का दर्जा प्राप्त होता है और वे न्यायिक समीक्षा से मुक्त होते हैं। कथन 3 आंशिक रूप से सही है क्योंकि आयोग उपलब्ध नवीनतम जनगणना डेटा का उपयोग करता है, जो कभी-कभी पुराना हो सकता है।

मुख्य प्रश्न

2011 की जनगणना के आधार पर सीमांकन को तेज करने में आने वाली चुनौतियों और उनके प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें, ताकि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत महिलाओं के 33% आरक्षण को लागू किया जा सके।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय राजनीति और शासन (चुनावी सुधार, महिलाओं का प्रतिनिधित्व)
  • झारखंड संदर्भ: 106वें संशोधन के तहत झारखंड विधानसभा में भी महिलाओं के लिए आरक्षण होगा, जिससे स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों में सीमांकन की जरूरत पड़ेगी।
  • मुख्य बिंदु: सीमांकन और महिलाओं के आरक्षण का झारखंड की राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन पर प्रभाव।
2011 की जनगणना पुरानी होने के बावजूद इसका सीमांकन में उपयोग क्यों किया जा रहा है?

2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण 2030 के बाद स्थगित हो गई है, इसलिए 2011 की जनगणना ही सीमांकन के लिए सबसे विश्वसनीय उपलब्ध आंकड़ा है। हालांकि इससे जनसांख्यिकीय सटीकता प्रभावित हो सकती है, लेकिन 106वें संशोधन के तहत महिलाओं के आरक्षण को 2029 से पहले लागू करने के लिए यह जरूरी है।

84वें और 106वें संशोधनों के बीच क्या संवैधानिक टकराव है?

84वें संशोधन ने 2001 की जनगणना के आधार पर 2026 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या स्थिर रखी है। जबकि 106वें संशोधन सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करता है, जिससे दोनों संशोधनों के बीच टकराव उत्पन्न होता है कि क्या 2026 से पहले यह रोक हटाई जा सकती है।

सीमांकन का राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?

सीमांकन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं इस तरह तय करता है कि जनसंख्या के आधार पर समान प्रतिनिधित्व हो। इससे क्षेत्रीय और सामाजिक समूहों के बीच राजनीतिक शक्ति का संतुलन प्रभावित होता है, जिससे चुनावी संभावनाएं और संसाधन आवंटन बदल सकते हैं।

सीमांकन आयोग की भूमिका क्या है?

सीमांकन आयोग सरकार द्वारा गठित होता है और जनगणना के आंकड़ों के आधार पर संसद और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करता है। इसके निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं और न्यायिक समीक्षा के अधीन नहीं होते।

महिलाओं के आरक्षण से शासन पर क्या असर पड़ता है?

UN Women सहित कई अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से शासन में सुधार, सामाजिक कल्याण नीतियों और आर्थिक समावेशन में वृद्धि होती है, जो GDP वृद्धि में 0.5-1% तक योगदान दे सकता है।

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