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Governance · Exam Notes

राजनीतिक नेतृत्व में महिलाएं: संवैधानिक प्रावधान, प्रतिनिधित्व और वैश्विक तुलना

भारत की लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 14% और राज्य विधानसभाओं में 9% है, जबकि स्थानीय शासन में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण संवैधानिक रूप से सुनिश्चित है। विश्व स्तर पर महिलाओं की संसद में हिस्सेदारी 27.5% है और वे सामाजिक नीति मंत्रालयों में प्रमुख हैं, लेकिन मुख्य शक्तिशाली मंत्रालयों से बाहर हैं। भारत का वैश्विक रैंकिंग में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 143वां स्थान है, जो उच्च राजनीतिक स्तर पर विधायी आरक्षण की आवश्यकता को दर्शाता है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारत की लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 14% और राज्य विधानसभाओं में 9% है, जबकि स्थानीय शासन में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण संवैधानिक रूप से सुनिश्चित है। विश्व स्तर पर महिलाओं की संसद में हिस्सेदारी 27.5% है और वे सामाजिक नीति मंत्रालयों में प्रमुख हैं, लेकिन मुख्य शक्तिशाली मंत्रालयों से बाहर हैं। भारत का वैश्विक रैंकिंग में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 143वां स्थान है, जो उच्च राजनीतिक स्तर पर विधायी आरक्षण की आवश्यकता को दर्शाता है।

विश्व और भारत में महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व का अवलोकन

2026 तक, विश्व में संसद की कुल सीटों में महिलाओं का हिस्सा केवल 27.5% और कैबिनेट पदों में 22.4% है, यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं की स्थिति पर 70वीं आयोग की बैठक (CSW70) से मिली है। लैंगिक समानता के अंतरराष्ट्रीय संकल्पों के बावजूद, महिलाओं की राजनीतिक नेतृत्व में कम हिस्सेदारी विशेष रूप से रक्षा और गृह मंत्रालय जैसे शक्तिशाली विभागों में बनी हुई है। भारत की स्थिति भी इसी वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जहां 18वीं लोकसभा में महिलाएं केवल 14% हैं और राज्य विधानसभाओं में लगभग 9% (चुनाव आयोग भारत, 2024) हैं। यह निरंतर कम प्रतिनिधित्व सामाजिक और संरचनात्मक बाधाओं को दर्शाता है जो महिलाओं को निर्णायक पदों तक पहुंचने से रोकती हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: राजनीति (संवैधानिक प्रावधान, Representation of People Act, पंचायत राज), सामाजिक न्याय (लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण)
  • निबंध: लैंगिकता और शासन, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी

भारत में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारतीय संविधान का Article 15(3) महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव की अनुमति देता है ताकि समानता को बढ़ावा दिया जा सके। 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) के तहत पंचायत राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को Articles 243D और 243T में संस्थागत रूप दिया गया है। Representation of the People Act, 1951 चुनावी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, लेकिन संसद या राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट ने राजबाला बनाम हरियाणा राज्य (2016) मामले में स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण को वैध ठहराया, जिससे जमीनी स्तर पर संवैधानिक सुरक्षा मजबूत हुई।

  • Article 15(3): महिलाओं के लिए सकारात्मक कार्रवाई की अनुमति।
  • Articles 243D और 243T: स्थानीय शासन में 33% महिलाओं का आरक्षण अनिवार्य।
  • Representation of the People Act, 1951: चुनाव नियंत्रित करता है, संसद/राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले: स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का समर्थन (राजबाला बनाम हरियाणा, 2016)।

महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सांख्यिकीय चित्र

सूचकांकवैश्विक औसत (2026)भारत (2024)रवांडा (2024)
संसद में महिलाएं (%)27.5%14% (लोकसभा), 9% (राज्य विधानसभा)60% (निचली सभा)
कैबिनेट में महिलाएं (%)22.4%लगभग 12%लगभग 40%
महिला राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री28 देश0 (2024 तक)1 (राष्ट्रपति)
संसदीय सभापति महिलाएं (%)19.9%1 (लोकसभा अध्यक्ष)1 (निचली सभा)

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का आर्थिक प्रभाव

अध्ययन बताते हैं कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च में वृद्धि होती है, जो मानव विकास सूचकांकों में सुधार लाती है (विश्व बैंक, 2023)। भारत ने 2023-24 के बजट में महिलाओं के लिए लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन संसद और कार्यपालिका में महिलाओं की कम उपस्थिति नीतिगत प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन को सीमित करती है। विश्व स्तर पर, जहां महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अधिक है, वहां GDP विकास दर 15% तक अधिक पाई गई है, जो लैंगिक समावेशन के आर्थिक लाभ को दर्शाता है।

  • महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि से सामाजिक क्षेत्र में खर्च बढ़ता है।
  • भारत का महिलाओं के लिए बजट आवंटन: 1.5 लाख करोड़ रुपये (2023-24)।
  • वैश्विक GDP वृद्धि में 15% तक लाभ महिलाओं की बढ़ी भागीदारी से।
  • मुख्य मंत्रालयों में कम प्रतिनिधित्व के कारण नीति प्रभाव सीमित।

महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व को प्रभावित करने वाले संस्थागत पहलू

महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति प्रभाव को कई संस्थान प्रभावित करते हैं। संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं की स्थिति आयोग (CSW) वैश्विक प्रगति की निगरानी करता है और मानक निर्धारित करता है। भारत में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) कल्याण योजनाएं बनाता और लागू करता है, जबकि चुनाव आयोग (ECI) चुनाव प्रक्रिया का संचालन करता है। इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) विश्व की विधानसभाओं में महिलाओं के आंकड़े प्रदान करता है। इसके बावजूद, महिलाओं की पहुंच मुख्य शक्तिशाली मंत्रालयों तक सीमित है; जहां 90% लैंगिक समानता मंत्रालय और 73% परिवार कल्याण मंत्रालय महिलाओं के पास हैं, वहीं रक्षा, गृह और आर्थिक मंत्रालय पुरुषों के प्रभुत्व में हैं।

  • CSW: वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता की निगरानी एवं वकालत।
  • MWCD: भारत में महिला कल्याण नीतियों का क्रियान्वयन।
  • ECI: चुनावों का संचालन और नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
  • IPU: विश्व की विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर आंकड़े।
  • महिलाएं सामाजिक नीति मंत्रालयों में केंद्रित; मुख्य मंत्रालय पुरुषों के नियंत्रण में।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम रवांडा में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व

पहलूभारतरवांडा
संवैधानिक आरक्षणकेवल पंचायत राज और नगरीय निकायों में 33% आरक्षण; संसद/राज्य विधानसभाओं में कोई आरक्षण नहींसंसद में महिलाओं के लिए 30% संवैधानिक आरक्षण, जो अक्सर अधिक होता है
निचली सभा में महिलाएं14%60%
कैबिनेट में महिलाएंलगभग 12%लगभग 40%
नीति पर प्रभावमुख्य मंत्रालयों में सीमित प्रभाव; सामाजिक कल्याण पर ध्यानआर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों सहित व्यापक प्रभाव

महत्वपूर्ण अंतर: राष्ट्रीय और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण की अनुपस्थिति

भारत में संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था महिलाओं के लिए केवल स्थानीय शासन स्तर पर आरक्षण सुनिश्चित करती है, जबकि संसद और राज्य विधानसभाओं में कोई विधायी आरक्षण नहीं है। यह अंतर उच्च राजनीतिक स्तरों पर नेतृत्व की कमी को बनाए रखता है। रवांडा जैसे देशों के विपरीत, जहां आरक्षण ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को पूरी तरह बदल दिया है। कई नीतिगत विश्लेषण इस महत्वपूर्ण भेद को नजरअंदाज करते हैं और स्थानीय स्तर के आरक्षण को राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के साथ मिलाकर महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व की वास्तविकता को छुपा देते हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए विधायी आरक्षण लागू किया जाए ताकि नेतृत्व की कमी को दूर किया जा सके।
  • राजनीतिक स्तर पर महिलाओं के लिए क्षमता विकास और नेतृत्व प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
  • राजनीतिक दलों को अधिक महिलाओं को जीतने योग्य सीटों पर उम्मीदवार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को जागरूकता अभियानों और लैंगिक संवेदनशीलता के माध्यम से दूर किया जाए।
  • महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और नीति प्रभाव की बेहतर निगरानी और आंकड़ों का संग्रह सुनिश्चित किया जाए।

भारत में महिलाओं के राजनीतिक आरक्षण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Article 243D पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य करता है।
  2. Representation of the People Act, 1951 लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने राजबाला बनाम हरियाणा राज्य (2016) में स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण को वैध ठहराया।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि Article 243D पंचायत राज संस्थाओं में 33% महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Representation of the People Act, 1951 लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं देता। कथन 3 सही है; सुप्रीम कोर्ट ने राजबाला बनाम हरियाणा (2016) में स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण को मान्यता दी।

वैश्विक राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. 2026 तक विश्व में संसद की सीटों में महिलाओं का हिस्सा 50% से अधिक है।
  2. महिलाओं को अधिकतर लैंगिक समानता और परिवार कल्याण मंत्रालयों में नियुक्त किया जाता है।
  3. वर्तमान में केवल 28 देशों में महिला राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है; विश्व में संसद की सीटों में महिलाओं का हिस्सा 27.5% है, 50% से अधिक नहीं। कथन 2 सही है; महिलाएं मुख्य रूप से लैंगिक समानता और परिवार कल्याण मंत्रालयों में केंद्रित हैं। कथन 3 सही है; वर्तमान में केवल 28 देशों में महिला राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व के कारण बनने वाले संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करें। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के शासन पर प्रभाव का मूल्यांकन करें और उच्च राजनीतिक स्तरों पर उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय राजनीति और शासन, सामाजिक न्याय एवं महिला सशक्तिकरण
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू है, लेकिन राज्य विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है, जो राष्ट्रीय प्रवृत्ति को दर्शाता है।
  • मेन प्वाइंटर: स्थानीय स्तर पर आरक्षण और राज्य विधानसभा में विधायी आरक्षण के अभाव के बीच अंतर को उजागर करें; झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं से जुड़ी सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं पर चर्चा करें।
भारत में स्थानीय शासन में महिलाओं के आरक्षण के लिए कौन से संवैधानिक अनुच्छेद जिम्मेदार हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243D और 243T पंचायत राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करते हैं, जो 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) के तहत लागू हैं।

क्या Representation of the People Act, 1951 संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करता है?

नहीं, Representation of the People Act, 1951 चुनावी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, लेकिन लोकसभा या राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण प्रावधान नहीं करता।

भारत की लोकसभा में वर्तमान में महिलाओं का प्रतिशत कितना है?

18वीं लोकसभा (2024) के अनुसार, महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 14% है, जो राष्ट्रीय संसदों में वैश्विक औसत 27.5% से कम है।

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव होता है?

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च में वृद्धि होती है, जिससे मानव विकास सूचकांक बेहतर होता है। विश्व स्तर पर जहां महिलाओं की भागीदारी अधिक है, वहां GDP विकास दर 15% तक अधिक पाई गई है (विश्व बैंक, 2023)।

राजबाला बनाम हरियाणा राज्य (2016) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का महत्व क्या था?

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया, जिससे 73वें और 74वें संशोधनों को मजबूती मिली और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।

Sources and further reading

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