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शहरी चुनौती निधि (UCF) का परिचय

शहरी चुनौती निधि (UCF) को आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने 2024 में एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया है, जिसका मकसद शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से ₹1,00,000 करोड़ का बजट रखा गया है। इसका लक्ष्य शहरी बुनियादी ढांचे में ₹4 लाख करोड़ के निवेश को बढ़ावा देना है। योजना में चुनौती आधारित प्रतिस्पर्धात्मक चयन की व्यवस्था है, जिससे केवल बैंक योग्य और परिवर्तनकारी परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाएगा, ताकि शहरी विकास में लंबे समय से मौजूद निवेश की कमी को दूर किया जा सके।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: 74वें संविधान संशोधन के तहत शहरी शासन सुधार, शहरी बुनियादी ढांचे के लिए नवाचारी वित्तपोषण के तरीके।
  • GS पेपर 3: बुनियादी ढांचे का वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी साझेदारी, वित्तीय संघवाद।
  • निबंध: शहरीकरण और सतत विकास, शहरी बुनियादी ढांचे में संस्थागत सुधारों की भूमिका।

संवैधानिक और कानूनी ढांचा

शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को संविधान के अनुच्छेद 243Q के तहत अधिकार प्राप्त हैं, जो 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा स्थापित किया गया। यह अनुच्छेद उनके गठन, शक्तियों और जिम्मेदारियों को परिभाषित करता है। UCF योजना MoHUA की नीतिगत रूपरेखा के अंतर्गत संचालित होती है और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (JNNURM) के दिशानिर्देशों के अनुरूप है। यह मॉडल म्युनिसिपल लॉ (2019) की भी प्रतिबिंबित करती है, जो ULBs को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने को प्रोत्साहित करता है। इसके अलावा, इस निधि की उधारी और वित्तीय प्रबंधन फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) एक्ट, 2003 के तहत वित्तीय अनुशासन और स्थिरता सुनिश्चित करता है।

  • अनुच्छेद 243Q: ULBs के अधिकार और कार्य निर्धारित करता है।
  • JNNURM: शहरी बुनियादी ढांचे के लिए वित्तपोषण और सुधारों का ढांचा।
  • मॉडल म्युनिसिपल लॉ (2019): वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
  • FRBM एक्ट (2003): सरकारी उधारी के लिए वित्तीय अनुशासन के नियम निर्धारित करता है।

आर्थिक पहलू और वित्तीय संरचना

UCF की ₹1,00,000 करोड़ की केंद्रीय सहायता से 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में ₹4 लाख करोड़ के निवेश को जुटाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य नीति आयोग (2022) द्वारा अनुमानित $1.2 ट्रिलियन के शहरी बुनियादी ढांचे के अंतर को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वित्तपोषण संरचना के तहत कम से कम 50% धनराशि बाजार आधारित स्रोतों जैसे ऋण, नगर निगम बॉन्ड और सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) से आनी चाहिए, 25% केंद्रीय सहायता के रूप में और शेष 25% राज्यों, ULBs या अतिरिक्त उधार से जुटाई जाएगी।

  • लक्षित शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र: जल आपूर्ति, स्वच्छता, शहर पुनर्विकास और विकास केंद्र।
  • जल और स्वच्छता क्षेत्र में मौजूदा वित्तीय अंतर 30-40% के बीच है (MoHUA वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।
  • नगर निगम बॉन्ड का हिस्सा शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में 1% से भी कम है (SEBI रिपोर्ट, 2023)।
  • चुनौती आधारित प्रतिस्पर्धात्मक चयन से केवल बैंक योग्य परियोजनाओं को वित्त मिलेगा, जिससे NPA की समस्या कम होगी।
  • ULBs की क्रेडिट योग्यता में सुधार की उम्मीद, जिससे बाजार से बेहतर वित्तपोषण संभव होगा।

प्रमुख संस्थागत भूमिकाएं

UCF योजना की सफलता के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम करती हैं ताकि नीति, वित्तपोषण और क्रियान्वयन में समन्वय बना रहे:

  • MoHUA: नीति निर्धारण, योजना का क्रियान्वयन और निगरानी।
  • शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): परियोजनाओं की पहचान, कार्यान्वयन और सह-वित्तपोषण।
  • नीति आयोग: निवेश योजना और नीति सलाह।
  • SEBI: नगर निगम बॉन्ड और बाजार उपकरणों के लिए नियामक पर्यवेक्षण।
  • राज्य वित्त आयोग: राज्य स्तरीय बजट आवंटन और निगरानी।
  • स्मार्ट सिटी मिशन: UCF के उद्देश्यों के साथ तालमेल में शहरी विकास की अन्य पहलें।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत का UCF बनाम सिंगापुर का URA

पहलू भारत: शहरी चुनौती निधि (UCF) सिंगापुर: शहरी पुनर्विकास प्राधिकरण (URA)
वित्तपोषण मॉडल चुनौती आधारित प्रतिस्पर्धा; 50% बाजार वित्तपोषण; 25% केंद्रीय सहायता; 25% राज्य/ULBs चुनौती आधारित वित्तपोषण, मजबूत PPP; 2020 तक 90% से अधिक बाजार वित्तपोषण
बाजार भागीदारी कम नगर निगम बॉन्ड बाजार (<1% वित्तपोषण); उभरते PPP परिपक्व बॉन्ड बाजार; व्यापक निजी क्षेत्र की भागीदारी
ULBs की वित्तीय स्वायत्तता सीमित क्रेडिट योग्यता; सीमित स्वायत्तता उच्च वित्तीय स्वायत्तता; मजबूत क्रेडिट रेटिंग
परियोजना चयन प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती के माध्यम से बैंक योग्य परियोजनाएं सामरिक शहरी योजना, एकीकृत बाजार तंत्र
निवेश का पैमाना 5 वर्षों में ₹4 लाख करोड़ का लक्ष्य 1990 के दशक से लगातार उच्च मूल्य निवेश

मुख्य चुनौतियां और सीमाएं

यद्यपि UCF की योजना नवाचारी है, फिर भी कई ULBs की वित्तीय स्वायत्तता और क्रेडिट योग्यता सीमित है, जिससे वे बाजार से प्रभावी वित्त जुटाने में असमर्थ हैं। विशेषकर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के छोटे शहरों के ULBs के पास तकनीकी क्षमता की कमी होती है, जिसके कारण वे बैंक योग्य परियोजनाएं तैयार नहीं कर पाते, जिससे चुनौती आधारित चयन प्रक्रिया में उनका बाहर रहना संभव है। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच विकास में असमानता बढ़ने का खतरा है। ₹5,000 करोड़ के क्रेडिट र repayments गारंटी तंत्र से छोटे शहरों और पहाड़ी व पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए वित्तीय पहुंच में सुधार होता है, लेकिन क्षमता निर्माण अभी भी जरूरी है।

  • कई ULBs के लिए सीमित क्रेडिट रेटिंग से नगर निगम बॉन्ड जारी करने में बाधा।
  • छोटे ULBs में तकनीकी और संस्थागत क्षमता की कमी।
  • बैंक योग्य परियोजनाओं की कमी के कारण छोटे शहरों का प्रतिस्पर्धात्मक वित्तपोषण से वंचित रहना।
  • ULBs स्तर पर क्षमता निर्माण और वित्तीय सुधार की आवश्यकता।

महत्व और आगे का रास्ता

  • UCF शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में अनुदान आधारित से बाजार आधारित मॉडल की ओर बदलाव का प्रतीक है, जो वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देता है।
  • ULBs की क्रेडिट योग्यता को बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण और क्रेडिट रेटिंग तंत्र महत्वपूर्ण हैं।
  • नगर निगम बॉन्ड बाजार के विस्तार के लिए नियामक सहूलियत और निवेशकों का विश्वास जरूरी है।
  • UCF को स्मार्ट सिटी मिशन जैसी अन्य शहरी विकास पहलों के साथ जोड़कर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
  • छोटे ULBs को तकनीकी सहायता और क्रेडिट गारंटी के जरिए समावेशी विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न

📝 प्रारंभिक अभ्यास
शहरी चुनौती निधि (UCF) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. UCF परियोजना के कम से कम 50% वित्तपोषण को ऋण और बॉन्ड जैसे बाजार स्रोतों से आना अनिवार्य करता है।
  2. AMRUT 2.0 के तहत वित्तपोषित सभी शहरी बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं UCF के अंतर्गत आती हैं।
  3. UCF वित्त मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है और MoHUA से स्वतंत्र है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि UCF में कम से कम 50% वित्तपोषण बाजार स्रोतों से होना अनिवार्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि AMRUT 2.0 जैसी योजनाओं के अंतर्गत पहले से वित्तपोषित परियोजनाएं UCF में शामिल नहीं हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि UCF MoHUA के अंतर्गत संचालित होती है, वित्त मंत्रालय के अंतर्गत नहीं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
UCF के अंतर्गत क्रेडिट र repayments गारंटी तंत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह सभी शहरी स्थानीय निकायों को उनकी जनसंख्या के आकार से स्वतंत्र रूप से कवर करता है।
  2. यह छोटे शहरों और पहाड़ी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वित्तीय पहुंच बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है।
  3. इस तंत्र का बजट ₹5,000 करोड़ है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि यह तंत्र केवल 1 लाख से कम आबादी वाले और पहाड़ी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के शहरों को लक्षित करता है, सभी ULBs को नहीं। कथन 2 और 3 UCF के दिशानिर्देशों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

शहरी चुनौती निधि (UCF) भारत के शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की वित्तीय सीमाओं को कैसे दूर करने का प्रयास करती है? इसके सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें और इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - शहरी शासन और स्थानीय निकाय
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के शहरी स्थानीय निकाय, जैसे रांची और जमशेदपुर, UCF के वित्तीय सशक्तिकरण से लाभान्वित होंगे, खासकर जल आपूर्ति और स्वच्छता क्षेत्रों में जहाँ वित्तीय अंतर है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड में शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में UCF की भूमिका, सीमित ULB क्षमता से जुड़ी चुनौतियां, और राज्य स्तर पर समन्वय एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शहरी चुनौती निधि का मुख्य उद्देश्य क्या है?

UCF का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को बढ़ाना है, जिसके लिए यह केंद्रीय सहायता, बाजार आधारित वित्तपोषण और राज्य/ULB योगदान के मिश्रण से बैंक योग्य शहरी बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में निवेश को प्रेरित करता है।

शहरी स्थानीय निकायों को कौन सा संवैधानिक प्रावधान अधिकार देता है?

संविधान का अनुच्छेद 243Q, जो 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत शामिल किया गया है, शहरी स्थानीय निकायों के गठन, शक्तियों और जिम्मेदारियों को परिभाषित करता है।

UCF यह कैसे सुनिश्चित करता है कि केवल व्यवहार्य परियोजनाओं को वित्त मिले?

UCF में चुनौती आधारित प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया है, जो केवल बैंक योग्य और परिणामोन्मुख परियोजनाओं को वित्तपोषित करती है, जिससे गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPA) का जोखिम कम होता है।

UCF के संदर्भ में SEBI की भूमिका क्या है?

SEBI नगर निगम बॉन्ड के लिए नियामक पर्यवेक्षण प्रदान करता है, जो UCF के तहत बाजार आधारित वित्तपोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और ULBs को पूंजी बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद करता है।

UCF के अंतर्गत क्रेडिट र repayments गारंटी तंत्र छोटे शहरों का कैसे समर्थन करता है?

₹5,000 करोड़ के क्रेडिट र repayments गारंटी तंत्र से 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों और पहाड़ी तथा पूर्वोत्तर राज्यों के शहरों को ऋण और बाजार निधि तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए वित्तीय गारंटी दी जाती है।

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