Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu

Environment and Ecology Notes · Exam Notes

ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF): वन वित्त का नया मॉडल और वैश्विक महत्व

1 min read GS Paper III

ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF): परिचय और महत्व

ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) की शुरुआत 2023 में ब्राजील के बेलम में आयोजित COP30 सम्मेलन में हुई। यह एक अभिनव वित्तीय तंत्र है जिसका मकसद केवल वनों की कटाई को कम करना नहीं बल्कि खड़े ट्रॉपिकल जंगलों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। ब्राजील के नेतृत्व में और नॉर्वे के $3 बिलियन समेत कुल $5.5 बिलियन से अधिक प्रारंभिक प्रतिबद्धताओं के साथ, TFFF एक प्रदर्शन-आधारित निवेश मॉडल पेश करता है जो वित्तीय लाभ के साथ सतत वन संरक्षण सुनिश्चित करता है। इसमें आदिवासी और स्थानीय समुदायों (IPLCs) को कम से कम 20% भुगतान देने का प्रावधान है, जो वन प्रबंधन में उनकी अहम भूमिका और जलवायु वित्त में न्यायसंगत हिस्सेदारी को मान्यता देता है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – वन संरक्षण वित्तीय तंत्र, पर्यावरणीय शासन में आदिवासी अधिकार
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – जलवायु समझौते, UNFCCC, पेरिस समझौता
  • निबंध: जलवायु वित्तीय मॉडल और सतत विकास

भारत के लिए कानूनी और संवैधानिक संदर्भ

भारत सीधे TFFF में भाग नहीं लेता, लेकिन देश में वन संरक्षण और आदिवासी अधिकारों को लेकर मजबूत घरेलू कानूनी ढांचा मौजूद है। Forest Conservation Act, 1980 (धारा 2) वन भूमि के उपयोग और उसके परिवर्तन को कड़ाई से नियंत्रित करता है। Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006 (धारा 3-6) आदिवासी समुदायों के वन भूमि अधिकारों को मान्यता देता है, जो TFFF के IPLCs पर जोर से मेल खाता है। इसके अलावा, Environment Protection Act, 1986 (धारा 3) केंद्र सरकार को वन संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, Paris Agreement (2015) के तहत UNFCCC वन संबंधित जलवायु वित्तीय ढांचे की नींव रखता है, जिसमें TFFF जैसे तंत्र शामिल हैं।

TFFF के आर्थिक पहलू

TFFF का वित्तीय ढांचा पारंपरिक दातृ-आधारित जलवायु फंडों से पूरी तरह अलग है। जहां Green Climate Fund (GCF) जैसे पारंपरिक फंड मुख्यतः अनुदान देते हैं और वित्तीय लाभ नहीं देते, वहीं TFFF एक प्रदर्शन आधारित निवेश सुविधा है जो निवेशकों को वित्तीय लाभ प्रदान करती है। यह मॉडल निजी पूंजी को सार्वजनिक फंड के साथ आकर्षित कर वन वित्त की स्थिरता और विस्तार को बढ़ावा देता है।

  • प्रारंभिक प्रतिबद्धताएं $5.5 बिलियन से अधिक हैं, जिसमें नॉर्वे का योगदान $3 बिलियन है (COP30, 2023)।
  • कम से कम 20% प्रदर्शन भुगतान IPLCs को दिए जाते हैं, जिससे उनके जीवन स्तर और वन प्रबंधन में सुधार संभव है।
  • ट्रॉपिकल जंगल वैश्विक स्तर पर लगभग $150 बिलियन की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करते हैं (वर्ल्ड बैंक, 2023)।
  • अमेज़न वर्षावन में नौ देशों में फैले 5.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अनुमानित 100 बिलियन मीट्रिक टन कार्बन संग्रहित है (FAO, 2022)।

संस्थागत संरचना और हितधारक

TFFF एक बहु-हितधारक शासन मॉडल के तहत संचालित होता है। प्रमुख संस्थान हैं:

  • ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF): ब्राजील द्वारा शुरू किया गया तंत्र जो खड़े जंगलों के संरक्षण पर केंद्रित है।
  • संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC): अंतरराष्ट्रीय जलवायु शासन और COP प्रक्रियाओं की देखरेख करता है।
  • नॉर्वेजियन सरकार: सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता, जो नॉर्वे की जलवायु वित्तीय नेतृत्व को दर्शाता है।
  • आदिवासी और स्थानीय समुदाय (IPLCs): कम से कम 20% भुगतान के अनिवार्य प्राप्तकर्ता, जो समावेशन और न्याय सुनिश्चित करते हैं।
  • अमेज़न कोऑपरेशन ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (ACTO): अमेज़न बेसिन क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाली संस्था।

तुलनात्मक विश्लेषण: TFFF बनाम अन्य वन वित्तीय तंत्र

विशेषताट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF)ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF)नॉर्वे की इंटरनेशनल क्लाइमेट एंड फॉरेस्ट इनिशिएटिव (NICFI)
वित्तीय मॉडलप्रदर्शन आधारित, लाभकारी निवेशमुख्यतः अनुदान आधारित, लाभहीनप्रदर्शन आधारित अनुदान, वनों की कटाई कम करने पर केंद्रित
फोकसखड़े ट्रॉपिकल जंगलों का संरक्षणव्यापक जलवायु शमन और अनुकूलन परियोजनाएंवन कटाई में कमी और वन शासन
आदिवासी भागीदारीकम से कम 20% भुगतान अनिवार्यकोई स्पष्ट अनिवार्य हिस्सा नहींसमुदाय की भागीदारी को समर्थन, लेकिन कम कड़ाई से
भौगोलिक क्षेत्रमुख्यतः अमेज़न बेसिन और ट्रॉपिकल फॉरेस्ट देशवैश्विकवैश्विक ट्रॉपिकल फॉरेस्ट देश
लाभांशनिवेशकों को वित्तीय लाभकोई वित्तीय लाभ नहींकोई वित्तीय लाभ नहीं

TFFF द्वारा संबोधित महत्वपूर्ण खामियां

अधिकांश वन वित्तीय तंत्र वनों की कटाई कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन खड़े जंगलों के संरक्षण को सीधे पुरस्कृत नहीं करते। साथ ही आदिवासी और स्थानीय समुदायों को वित्तीय लाभ कम या नहीं मिलता। TFFF इन खामियों को दूर करता है:

  • खड़े जंगलों के संरक्षण को पुरस्कृत करता है, जो कार्बन अवशोषण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • कम से कम 20% भुगतान IPLCs को देना अनिवार्य करता है, जिससे न्याय और स्थानीय संरक्षण मजबूत होता है।
  • प्रदर्शन आधारित लाभांश के जरिए पारंपरिक दान पर निर्भरता कम कर सतत निवेश आकर्षित करता है।

चुनौतियां और चिंताएं

अपने नवाचार के बावजूद, TFFF के सामने कुछ चुनौतियां हैं:

  • IPLCs को भुगतान की पारदर्शिता और न्यायसंगत वितरण के लिए मजबूत शासन और निगरानी आवश्यक है।
  • खड़े जंगलों के संरक्षण की पुष्टि और प्रदर्शन मापन जटिल हो सकता है, खासकर कटाई में कमी से अलग पहचान में।
  • सूक्ष्म वन आश्रित समुदायों के लिए वित्तीय तंत्र में समावेशन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है यदि बड़े निवेशकों को प्राथमिकता दी जाए।
  • अमेज़न बेसिन के बाहर के कुछ ट्रॉपिकल फॉरेस्ट देशों की सीमित भागीदारी।

आगे का रास्ता और महत्व

  • TFFF मॉडल को कांगो बेसिन और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे अन्य ट्रॉपिकल फॉरेस्ट क्षेत्रों में विस्तार देना।
  • वैश्विक और घरेलू स्तर पर कानूनी ढांचे को मजबूत करना ताकि TFFF के आदिवासी अधिकारों और संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप बनाया जा सके।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही तंत्र को बेहतर बनाकर IPLCs के साथ न्यायसंगत लाभ वितरण सुनिश्चित करना।
  • मौजूदा जलवायु वित्तीय तंत्रों के साथ TFFF का समन्वय बढ़ाकर प्रभाव को बढ़ावा देना।
  • भारत को TFFF से सीख लेकर अपने वन वित्त और आदिवासी समुदायों की भागीदारी के लिए रणनीतियों को विकसित करना चाहिए।

ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. TFFF मुख्यतः अनुदान आधारित वित्तपोषण प्रदान करता है जिसमें वित्तीय लाभ नहीं होता।
  2. TFFF प्रदर्शन आधारित भुगतान का कम से कम 20% आदिवासी और स्थानीय समुदायों को देना अनिवार्य करता है।
  3. TFFF केवल वनों की कटाई कम करने के बजाय खड़े जंगलों के संरक्षण को पुरस्कृत करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि TFFF प्रदर्शन आधारित निवेश मॉडल है जो वित्तीय लाभ देता है, केवल अनुदान नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि TFFF में IPLCs को कम से कम 20% भुगतान देना अनिवार्य है और यह खड़े जंगलों के संरक्षण पर केंद्रित है।

भारत के वन संबंधित कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Forest Conservation Act, 1980, वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तन को नियंत्रित करता है।
  2. Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006, व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है।
  3. Environment Protection Act, 1986, राज्य सरकारों को केंद्र सरकार से स्वतंत्र रूप से वन संरक्षण के लिए अधिकार देता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 3 गलत है क्योंकि Environment Protection Act, 1986, केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकार देता है, न कि राज्य सरकारों को स्वतंत्र रूप से।

मेन प्रश्न

ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) किस प्रकार वैश्विक वन वित्तीय तंत्रों में बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है? इसके संभावित लाभ और चुनौतियों की समीक्षा करें और सुझाव दें कि भारत TFFF से क्या सीख लेकर अपने वन संरक्षण नीतियों में कैसे लागू कर सकता है। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और वन संरक्षण
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड में व्यापक वन क्षेत्र और बड़ी आदिवासी आबादी है जिनके अधिकार Forest Rights Act, 2006 के तहत सुरक्षित हैं, जो TFFF के IPLCs पर जोर से मेल खाता है।
  • मेन पॉइंटर: TFFF के प्रदर्शन आधारित वित्त और आदिवासी भागीदारी मॉडल को झारखंड के वन शासन और आदिवासी कल्याण से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
TFFF को पारंपरिक वन वित्तीय तंत्रों से क्या अलग करता है?

TFFF प्रदर्शन आधारित निवेश मॉडल है जो वित्तीय लाभ देता है, जबकि पारंपरिक फंड ज्यादातर अनुदान आधारित होते हैं। यह आदिवासी समुदायों को कम से कम 20% भुगतान देना अनिवार्य करता है और केवल वनों की कटाई कम करने की बजाय खड़े जंगलों के संरक्षण पर केंद्रित है।

TFFF आदिवासी समुदायों को वन वित्त से कैसे लाभान्वित करता है?

TFFF के तहत कम से कम 20% प्रदर्शन आधारित भुगतान सीधे आदिवासी और स्थानीय समुदायों को दिया जाता है, जिससे उनकी देखभाल की भूमिका को मान्यता मिलती है और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित होता है।

भारत में वन संरक्षण से जुड़े कानूनी ढांचे क्या हैं?

भारत में मुख्य कानून हैं: Forest Conservation Act, 1980 जो वन भूमि के उपयोग को नियंत्रित करता है; Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006 जो आदिवासी अधिकारों को मान्यता देता है; और Environment Protection Act, 1986 जो केंद्र सरकार को वन संरक्षण के लिए अधिकार देता है।

खड़े जंगलों का संरक्षण जलवायु लक्ष्यों के लिए क्यों जरूरी है?

खड़े जंगल कार्बन सिंक के रूप में काम करते हैं और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 25% अवशोषित करते हैं (IPCC AR6, 2023)। उनका संरक्षण जैव विविधता और जलवायु शमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

TFFF का पेरिस समझौते से क्या संबंध है?

TFFF पेरिस समझौते के तहत UNFCCC द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्तीय ढांचे के अंतर्गत काम करता है, जो देशों को उनके वन संबंधित जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करता है।

Sources and further reading

Tags:EnvironmentEnvironment and Ecology NotesUPSC Notes