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Governance · Exam Notes

2047 तक भारत के 100 GWe परमाणु ऊर्जा लक्ष्य के लिए थोरियम एक रणनीतिक ऊर्जा संसाधन

भारत का 2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के माध्यम से पूरा करने पर निर्भर है। तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, SHANTI Act 2025 जैसे विधायी सुधार थोरियम रिएक्टर के विकास को तेज करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारत का 2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के माध्यम से पूरा करने पर निर्भर है। तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, SHANTI Act 2025 जैसे विधायी सुधार थोरियम रिएक्टर के विकास को तेज करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

भारत की थोरियम आधारित परमाणु महत्वाकांक्षा का परिचय

भारत 2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जो अपने विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाते हुए एक उन्नत तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के जरिये पूरा किया जाएगा। एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 केंद्र सरकार को परमाणु ऊर्जा विनियमन का अधिकार देता है, जबकि हाल ही में पारित SHANTI Act 2025 थोरियम रिएक्टर विकास को तेज करने के लिए नियामक मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाता है। भारत थोरियम भंडार के मामले में विश्व के शीर्ष तीन देशों में शामिल है, जिनका मुख्य केंद्र केरल और ओडिशा हैं, जो थोरियम को घरेलू ईंधन के रूप में यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, और तकनीकी विकास
  • GS पेपर 2: संविधानिक प्रावधान और परमाणु ऊर्जा से जुड़ा नियामक ढांचा
  • निबंध: भारत का ऊर्जा संक्रमण और सतत विकास

भारत के थोरियम भंडार और भौगोलिक केंद्र

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA), 2023 के अनुसार भारत के पास लगभग 846,000 टन मोनाजाइट रेत है जिसमें थोरियम पाया जाता है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक केरल और ओडिशा में इन भंडारों का 70% से अधिक हिस्सा स्थित है। यह प्रचुरता भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की रणनीतिक आवश्यकता को मजबूत करती है, जिसमें थोरियम आधारित रिएक्टर तीसरे चरण में हैं, जिन्हें 2035 तक व्यावसायिक रूप से चालू करने की उम्मीद है।

  • थोरियम मुख्य रूप से भारत के तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट रेत में पाया जाता है।
  • इसका निष्कर्षण ऊर्जा-सघन प्रक्रिया है, जो यूरेनियम खनन की तुलना में 20-30% अधिक ऊर्जा खपत करता है (BARC तकनीकी रिपोर्ट, 2023)।
  • थोरियम निष्कर्षण से उत्पन्न कचरे का प्रबंधन पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है।

तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम और थोरियम का उपयोग

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम, जिसे होमी भाभा ने विकसित किया था, परमाणु तकनीकों को क्रमशः लागू कर थोरियम की क्षमता का दोहन करता है। पहला चरण प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) का उपयोग करता है, जो प्लूटोनियम-239 का उत्पादन करते हैं। दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) का उपयोग करता है, जो अधिक फिसाइल सामग्री उत्पन्न करते हैं। तीसरे चरण में थोरियम को एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर (AHWR) में उपयोग करने की योजना है, जो थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित कर एक सतत ईंधन चक्र सुनिश्चित करेगा।

  • पहला चरण: प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले PHWR, प्लूटोनियम-239 उत्पन्न करते हैं।
  • दूसरा चरण: FBR थोरियम से प्लूटोनियम और यूरेनियम-233 पैदा करते हैं।
  • तीसरा चरण: AHWR यूरेनियम-233 और थोरियम ईंधन का उपयोग, 2035 तक अपेक्षित।
  • थोरियम का लाभ: अधिक प्रचुरता और कम दीर्घकालिक रेडियोधर्मी कचरा।

आर्थिक और तकनीकी चुनौतियां

2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा हासिल करने के लिए अनुमानित निवेश 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है (Department of Atomic Energy, 2024)। थोरियम निष्कर्षण और रिएक्टर अनुसंधान एवं विकास में यूरेनियम की तुलना में अधिक पूंजी और परिचालन लागत लगती है। थोरियम प्रसंस्करण में 30% तक अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे ऊर्जा वापसी अवधि बढ़ जाती है (Bhabha Atomic Research Centre रिपोर्ट्स)। इसके अलावा, थोरियम रिएक्टर तकनीक, विशेषकर AHWR, अभी प्रयोगात्मक चरण में है और व्यावसायिक स्तर पर विस्तार अभी प्रदर्शित नहीं हुआ है।

  • उच्च प्रारंभिक पूंजी व्यय और लंबी प्रतीक्षा अवधि।
  • यूरेनियम-233 उत्पादन और संबंधित रेडियोधर्मिता के प्रबंधन में तकनीकी जटिलताएं।
  • SHANTI Act 2025 के तहत नियामक और सुरक्षा ढांचे का विकास।
  • वर्तमान में परमाणु ऊर्जा भारत की कुल बिजली में केवल 3.22% योगदान देती है (Central Electricity Authority, 2024), जिसे 2047 तक 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

थोरियम विकास के लिए संस्थागत ढांचा

Department of Atomic Energy (DAE) परमाणु नीति बनाता है और कार्यान्वयन की निगरानी करता है। Bhabha Atomic Research Centre (BARC) थोरियम रिएक्टरों पर अनुसंधान का नेतृत्व करता है। Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) परमाणु ऊर्जा उत्पादन और संचालन का प्रबंधन करता है। Atomic Energy Regulatory Board (AERB) सुरक्षा और नियामक मानकों को लागू करता है। SHANTI Act 2025 तेज मंजूरी प्रक्रिया लागू करता है, जिसके तहत थोरियम रिएक्टर परियोजनाओं को 180 दिनों के भीतर मंजूरी मिलनी चाहिए।

  • DAE: नीति और कार्यक्रम की निगरानी।
  • BARC: थोरियम ईंधन चक्र और रिएक्टर तकनीक पर अनुसंधान।
  • NPCIL: परमाणु संयंत्र निर्माण और संचालन।
  • AERB: सुरक्षा विनियमन और लाइसेंसिंग।
  • SHANTI Act 2025: थोरियम रिएक्टर के व्यावसायीकरण को तेज करना।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत की थोरियम रणनीति बनाम फ्रांस का यूरेनियम आधारित परमाणु कार्यक्रम

पहलूभारत (थोरियम रणनीति)फ्रांस (यूरेनियम रणनीति)
ईंधन संसाधनप्रचुर थोरियम भंडार (846,000 टन)सीमित यूरेनियम भंडार, आयात पर निर्भर
रिएक्टर तकनीकतीन-चरणीय कार्यक्रम, AHWR विकासाधीनपरिपक्व यूरेनियम-ईंधन रिएक्टर (PWR), व्यावसायिक
बिजली में हिस्सेदारी3.22% (2023), 2047 तक 25% लक्ष्यलगभग 70% परमाणु से (2023)
व्यावसायीकरण समयसीमा2035 तक थोरियम रिएक्टर, अभी प्रयोगात्मकयूरेनियम रिएक्टर दशकों से संचालन में
आर्थिक चुनौतियांउच्च अनुसंधान एवं निष्कर्षण लागत, ऊर्जा-सघन प्रसंस्करणकम ईंधन चक्र लागत, पर आयात निर्भरता

भारत की थोरियम परमाणु नीति में महत्वपूर्ण कमी

थोरियम के प्रचुर भंडार के बावजूद, भारत की परमाणु नीति थोरियम निष्कर्षण और रिएक्टर विकास की आर्थिक व्यवहार्यता और विस्तार की चुनौतियों को कम आंकती है। इससे व्यावसायिक अपनाने में देरी और सीमित क्षमता वृद्धि हुई है। थोरियम प्रसंस्करण की ऊर्जा-सघन प्रकृति और यूरेनियम-233 उत्पादन की तकनीकी जटिलताओं के कारण निरंतर अनुसंधान एवं विकास निवेश और नीति समर्थन की जरूरत है, जो केवल विधायी सुधारों से पूरा नहीं हो सकता।

  • पूंजी और परिचालन लागत का कम आकलन।
  • व्यावसायिक स्तर पर थोरियम रिएक्टर के विकास में धीमी प्रगति।
  • अनुसंधान, नियामक और संचालन संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता।

महत्व और आगे का रास्ता

  • थोरियम का उपयोग भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम कर सकता है।
  • SHANTI Act 2025 के तहत AHWR के विकास को तेज करना आवश्यक है।
  • थोरियम अनुसंधान और पायलट परियोजनाओं के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाने से व्यावसायीकरण में तेजी आएगी।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी मजबूत करने से तकनीक विकास और लागत दक्षता में सुधार होगा।
  • थोरियम निष्कर्षण और रिएक्टर संचालन के साथ प्रभावी कचरा प्रबंधन नीतियां लागू करनी होंगी।

भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. पहले चरण में थोरियम आधारित एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर (AHWR) का उपयोग होता है।
  2. दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्लूटोनियम का उपयोग करते हैं।
  3. तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित करते हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले PHWR का उपयोग होता है, AHWR नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्लूटोनियम का उपयोग करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि तीसरे चरण में थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित करने वाले थोरियम आधारित रिएक्टर लगाए जाते हैं।

थोरियम और यूरेनियम ईंधन चक्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. थोरियम ईंधन चक्र यूरेनियम की तुलना में कम दीर्घकालिक रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न करता है।
  2. थोरियम फिसाइल है और बिना रूपांतरण के श्रृंखला प्रतिक्रिया कायम रख सकता है।
  3. यूरेनियम-233 थोरियम-232 से उन्नत रिएक्टरों में पैदा होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि थोरियम चक्र कम दीर्घकालिक कचरा उत्पन्न करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि थोरियम फर्टाइल है, फिसाइल नहीं, और इसे यूरेनियम-233 में परिवर्तित करना पड़ता है। कथन 3 सही है क्योंकि यूरेनियम-233 थोरियम-232 से पैदा होता है।

मुख्य प्रश्न

भारत के 2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने में थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा की क्षमता का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इसमें तकनीकी, आर्थिक और नियामक चुनौतियों पर चर्चा करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (ऊर्जा और पर्यावरण)
  • झारखंड का कोण: झारखंड में यूरेनियम खनन भारत के परमाणु ईंधन आपूर्ति में योगदान देता है; थोरियम की भूमिका समझना भविष्य में परमाणु ईंधन स्रोतों में बदलाव को दर्शाता है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के यूरेनियम संसाधनों को भारत के थोरियम की ओर बदलाव के साथ जोड़कर उत्तर तैयार करें, जो सतत परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
भारत की परमाणु ऊर्जा नीति में SHANTI Act 2025 का क्या महत्व है?

SHANTI Act 2025 थोरियम रिएक्टर विकास को तेज करने के लिए एक विधायी ढांचा प्रदान करता है, जिसमें नियामक मंजूरी 180 दिनों के भीतर दी जानी अनिवार्य है, ताकि थोरियम आधारित परमाणु तकनीक के व्यावसायीकरण को तेजी से बढ़ावा दिया जा सके।

भारत के लिए थोरियम को यूरेनियम के मुकाबले अधिक सतत क्यों माना जाता है?

भारत में थोरियम अधिक प्रचुर है और यह कम दीर्घकालिक रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न करता है। इसका उपयोग आयातित यूरेनियम पर निर्भरता कम करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और सततता बढ़ती है।

थोरियम निष्कर्षण में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

थोरियम निष्कर्षण ऊर्जा-सघन प्रक्रिया है, जो यूरेनियम खनन की तुलना में 20-30% अधिक ऊर्जा खपत करता है, और इससे पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम थोरियम का कैसे उपयोग करता है?

यह कार्यक्रम पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करता है, दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से फिसाइल सामग्री उत्पन्न करता है, और तीसरे चरण में थोरियम आधारित एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर लगाकर थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित करता है, जिससे सतत ईंधन चक्र संभव होता है।

2023 में भारत की कुल बिजली में परमाणु ऊर्जा का कितना प्रतिशत योगदान था?

2023 में भारत की कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का लगभग 3.22% योगदान था, जिसे 2047 तक 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

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