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Governance · Exam Notes

भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में वृद्धि: नीतिगत प्रभाव और जारी चुनौतियाँ

भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जो आयुष्मान भारत जैसे योजनाओं के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार और जेब खर्च में कमी के कारण संभव हुई है। सरकारी खर्च में वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता के बावजूद ग्रामीण इलाकों में गुणवत्ता, समानता और वित्तीय सुरक्षा की चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जो आयुष्मान भारत जैसे योजनाओं के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार और जेब खर्च में कमी के कारण संभव हुई है। सरकारी खर्च में वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता के बावजूद ग्रामीण इलाकों में गुणवत्ता, समानता और वित्तीय सुरक्षा की चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच के रुझान का अवलोकन

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 80वें राउंड सर्वेक्षण (2023) से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में काफी सुधार हुआ है, जिसमें जेब खर्च (OOPE) में कमी और स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार का विशेष योगदान है। आयुष्मान भारत – पीएम-जय जैसी सरकारी योजनाएँ और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बढ़ता खर्च इस प्रगति में सहायक रहे हैं। हालांकि, गुणवत्ता और समान सेवा वितरण में, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में, असमानताएँ अब भी बरकरार हैं।

स्वास्थ्य सेवा की पहुँच के लिए संवैधानिक और कानूनी आधार

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य का अधिकार माना है, जो राज्य को सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने का दायित्व देता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) और वित्तीय जोखिम संरक्षण को प्राथमिकता देती है।
  • क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत स्वास्थ्य प्रदाताओं का पंजीकरण और मानकीकरण अनिवार्य है, जिससे गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
  • आयुष्मान भारत – पीएम-जय योजना, जो 2018 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा शुरू की गई, प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा देती है, जो द्वितीयक और तृतीयक देखभाल के लिए है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 लागू हैं, जो त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधन जुटाने में मदद करते हैं।

आर्थिक संकेतक और सरकारी खर्च

सरकारी स्वास्थ्य व्यय 2023 में GDP का 2.1% तक पहुंच गया है (इकोनॉमिक सर्वे 2024), जो वित्तीय प्राथमिकता में वृद्धि दर्शाता है। PM-JAY योजना को वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में ₹6,400 करोड़ आवंटित किए गए, जो वित्तीय संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत का स्वास्थ्य बाजार 2023 में $372 बिलियन का है (IBEF 2024), जो 16-17% की CAGR से बढ़ रहा है, मुख्य रूप से बढ़ती मांग और बीमा कवरेज के कारण।

  • जेब खर्च में कमी: NSO के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर शून्य OOPE दर्ज हुआ है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 50% से अधिक मरीज ₹1,100 से कम OOPE करते हैं।
  • स्वास्थ्य बीमा कवरेज: ग्रामीण इलाकों में यह 12.9% से बढ़कर 45.5% और शहरी इलाकों में 8.9% से 31.8% हो गया है (NSO 2023), जो बेहतर वित्तीय जोखिम संरक्षण दर्शाता है।
  • स्वास्थ्य सेवा लेने का रुझान: बीमारियों की रिपोर्टिंग ग्रामीण क्षेत्रों में 6.8% से 12.2% और शहरी क्षेत्रों में 9.1% से 14.9% तक बढ़ी है, जो स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा उपयोग में वृद्धि का संकेत है।
  • मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल: संस्थागत प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में 95.6% और शहरी क्षेत्रों में 97.8% तक पहुंच गया है, जो प्रशिक्षित जन्म सहायक की उपलब्धता में सुधार दर्शाता है।

स्वास्थ्य सेवा में संस्थागत भूमिकाएँ

  • NSO: व्यापक घरेलू स्वास्थ्य उपभोग सर्वेक्षण करता है और महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
  • MoHFW: स्वास्थ्य नीतियाँ बनाता है और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की देखरेख करता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA): PM-JAY और अन्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को लागू करता है।
  • राज्य स्वास्थ्य विभाग: राज्य स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवा वितरण के लिए जिम्मेदार हैं।
  • इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI): स्वास्थ्य बीमा प्रदाताओं और उत्पादों का नियमन करता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (NIHFW): क्षमता निर्माण और स्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम थाईलैंड

परिमाणभारत (2023)थाईलैंड (2020)
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (कवरेज प्रतिशत)ग्रामीण 45.5%, शहरी 31.8% (स्वास्थ्य बीमा कवरेज)99% से अधिक (यूनिवर्सल कवरेज स्कीम)
स्वास्थ्य व्यय में जेब खर्च का प्रतिशतमहत्वपूर्ण कमी; सार्वजनिक सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर शून्य OOPE; निजी क्षेत्र में अभी भी उच्च15% से कम
सरकारी स्वास्थ्य व्यय (% GDP)2.1%लगभग 3.8%
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालीगुणवत्ता और उपलब्धता में असमानता, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कमीमजबूत और एकीकृत प्राथमिक देखभाल नेटवर्क
वित्तीय संरक्षण तंत्रPM-JAY द्वितीयक और तृतीयक देखभाल कवरेज प्रदान करता हैUCS के तहत प्राथमिक देखभाल सहित व्यापक कवरेज

प्रगति के बावजूद गंभीर चुनौतियाँ

  • गुणवत्ता और उपलब्धता: विशेषीकृत और तृतीयक देखभाल में असमानता, ग्रामीण इलाकों में कुशल पेशेवरों और अवसंरचना की कमी।
  • वित्तीय संरक्षण में कमी: स्वास्थ्य बीमा कवरेज के बावजूद, खासकर निजी और अस्पतालीन देखभाल में OOPE कम नहीं हो पाया है।
  • असमानताएँ: शहरी-ग्रामीण और राज्यों के बीच पहुँच, गुणवत्ता और स्वास्थ्य परिणामों में अंतर।
  • डेटा की सीमाएँ: वास्तविक समय और विभाजित डेटा की कमी लक्षित हस्तक्षेपों में बाधा डालती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य नीतियाँ, सरकारी योजनाएँ (आयुष्मान भारत), स्वास्थ्य का संवैधानिक अधिकार।
  • GS पेपर 3: स्वास्थ्य व्यय का आर्थिक प्रभाव, बीमा क्षेत्र का नियमन।
  • निबंध: स्वास्थ्य सेवा पहुँच और वित्तीय सुरक्षा में सरकार की भूमिका।

स्वास्थ्य सेवा पहुँच को बेहतर बनाने के लिए आगे का रास्ता

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को GDP के 2.5% से ऊपर बढ़ाकर अवसंरचना और मानव संसाधन को मजबूत करें।
  • PM-JAY कवरेज का विस्तार करें और प्राथमिक देखभाल सेवाओं को शामिल करके OOPE को व्यापक रूप से कम करें।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यबल की कमी को प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण के जरिये दूर करें।
  • गुणवत्ता और समानता की निगरानी के लिए डेटा प्रणालियों में सुधार करें।
  • क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम के तहत नियामक तंत्र को मजबूत कर गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करें।

प्रैक्टिस सवाल

भारत में स्वास्थ्य सेवा पहुँच के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. आयुष्मान भारत – पीएम-जय केवल बाह्य रोगी देखभाल के लिए कवरेज प्रदान करता है।
  2. सार्वजनिक बाह्य रोगी सुविधाओं में जेब खर्च में काफी कमी आई है।
  3. संविधान के अनुच्छेद 21 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार के रूप में व्याख्यायित किया है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि PM-JAY द्वितीयक और तृतीयक अस्पतालीन देखभाल के लिए कवरेज देता है, बाह्य रोगी देखभाल के लिए नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि NSO के आंकड़े सार्वजनिक बाह्य रोगी सुविधाओं में शून्य OOPE दिखाते हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 21 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वास्थ्य के अधिकार के रूप में माना गया है।

भारत में स्वास्थ्य बीमा कवरेज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 2017 से 2023 के बीच 15% से कम से 45% से अधिक हो गया है।
  2. स्वास्थ्य बीमा कवरेज के बढ़ने से अस्पतालीन देखभाल में जेब खर्च पूरी तरह समाप्त हो गया है।
  3. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) स्वास्थ्य बीमा प्रदाताओं का नियमन करती है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 NSO 80वें राउंड सर्वे के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि बीमा के बावजूद अस्पतालीन देखभाल में OOPE बनी हुई है। कथन 3 सही है क्योंकि IRDAI बीमा क्षेत्र का नियमन करती है।

मेन्स प्रश्न

आयुष्मान भारत जैसी सरकारी पहलों का भारत में स्वास्थ्य सेवा पहुँच और वित्तीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ा है? समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में कौन-कौन सी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, उनका मूल्यांकन करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राज्य स्वास्थ्य योजनाएँ।
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में PM-JAY को आदिवासी और ग्रामीण आबादी पर केंद्रित कर लागू किया गया है; फिर भी दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना अपर्याप्त है।
  • मेन्स पॉइंटर: झारखंड में स्वास्थ्य सेवा पहुँच की राज्य-विशिष्ट चुनौतियाँ, आदिवासी स्वास्थ्य कवरेज में PM-JAY की भूमिका, और ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना सुधार की रणनीतियाँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

स्वास्थ्य सेवा पहुँच में अनुच्छेद 21 का क्या महत्व है?

अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार के रूप में व्याख्यायित किया है, जो राज्य को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का दायित्व देता है।

आयुष्मान भारत ने जेब खर्च पर क्या प्रभाव डाला है?

आयुष्मान भारत – पीएम-जय ने द्वितीयक और तृतीयक अस्पतालीन देखभाल में प्रति परिवार ₹5 लाख तक की बीमा सुरक्षा प्रदान कर जेब खर्च कम किया है, लेकिन निजी और तृतीयक देखभाल में OOPE अभी भी बनी हुई है।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पहुँच में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, अवसंरचना की अपर्याप्तता और सीमित विशेषीकृत सेवाओं के कारण लोग निजी प्रदाताओं पर निर्भर होते हैं, जिससे जेब खर्च बढ़ जाता है।

ग्रामीण और शहरी भारत में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में क्या अंतर है?

NSO 2023 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 12.9% से बढ़कर 45.5% हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.9% से 31.8% तक पहुंचा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की बेहतर पहुँच दर्शाता है लेकिन शहरी क्षेत्रों में भी अंतर मौजूद है।

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम स्वास्थ्य सेवा पहुँच में क्या भूमिका निभाता है?

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010, स्वास्थ्य प्रदाताओं को मानकीकृत करता है, जिससे न्यूनतम गुणवत्ता मानक और जवाबदेही सुनिश्चित होती है, जो सेवा वितरण में सुधार लाता है।

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