अपडेट

परिप्रेक्ष्य: आधुनिक संघर्षों में ड्रोन युद्ध का उदय

2010 के दशक की शुरुआत से अनमैंड एरियल व्हीकल्स (UAVs), लूटरिंग म्यूनिशन्स और ड्रोन स्वॉर्म्स ने युद्धक्षेत्रों का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध, नागोर्नो-काराबाख और गाजा पट्टी जैसे हालिया संघर्षों ने सस्ते ड्रोन की क्षमताओं को उजागर किया है, जो एयर डिफेंस को भारी संख्या में दबाकर पारंपरिक सेनाओं को असमान नुकसान पहुंचाते हैं। भारत की वर्तमान सैन्य स्थिति, जिसमें करीब 300 UAVs हैं और काउंटर-ड्रोन नीति बिखरी हुई है, इन बदलती खतरों के सामने रणनीतिक निरोधक क्षमता और ऑपरेशनल तत्परता बनाए रखने के लिए तुरंत अनुकूलन की मांग करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा तकनीक, सुरक्षा चुनौतियां और रक्षा खरीद
  • GS पेपर 3: विज्ञान और तकनीक – उभरती सैन्य तकनीकें
  • निबंध: राष्ट्रीय सुरक्षा पर उभरती तकनीकों का प्रभाव

ड्रोन युद्ध पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत में ड्रोन युद्ध कई कानूनों के तहत नियंत्रित है। Defence of India Act, 1962 युद्धकालीन शक्तियों के साथ UAV नियंत्रण का अधिकार सरकार को देता है। Arms Act, 1959 हथियारों को नियंत्रित करता है, जिसमें सशस्त्र ड्रोन भी शामिल हैं। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी चुनौतियां Information Technology Act, 2000 (Sections 66F और 69) के तहत आती हैं, जो ड्रोन से जुड़े हैकिंग और इंटरसेप्शन खतरों से निपटती हैं। रक्षा तकनीक की खरीद, जिसमें UAVs शामिल हैं, Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के अनुसार होती है। संविधान के Article 246 के तहत संसद को रक्षा पर पूर्ण विधायी अधिकार प्राप्त है, जिससे केंद्र सरकार बिना राज्यों के हस्तक्षेप के नीति बना सकती है। अब तक सुप्रीम कोर्ट ने ड्रोन युद्ध की कानूनी स्थिति पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं दिया है, जो इस क्षेत्र में कानून की शुरुआत को दर्शाता है।

आर्थिक पहलू: बजट और स्वदेशी उत्पादन

भारत का रक्षा बजट 2023-24 में ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें से 25% पूंजीगत खर्च UAV और मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए निर्धारित है (Union Budget 2023-24)। घरेलू ड्रोन बाजार 15.6% की CAGR से बढ़कर 2025 तक $885 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (FICCI-EY Report 2022)। 'Make in India' और Defence Innovation Organisation (DIO) के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर UAV आयात निर्भरता जो वर्तमान में 70% है, कम करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी (DRDO Annual Report 2023)। काउंटर-ड्रोन सिस्टम का बाजार 2027 तक $250 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो हर साल 20% की दर से बढ़ रहा है।

ड्रोन युद्ध में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

  • DRDO: स्वदेशी UAV, लूटरिंग म्यूनिशन्स और काउंटर-ड्रोन तकनीकों का विकास करता है।
  • Indian Air Force (IAF): ड्रोन के ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और ड्रोन स्वॉर्म के खिलाफ वायु रक्षा करता है।
  • Indian Navy (IN): समुद्री ड्रोन निगरानी और काउंटर-ड्रोन रक्षा प्रणाली संचालित करता है।
  • Ministry of Defence (MoD): नीति निर्माण, खरीद और सेवाओं के बीच समन्वय करता है।
  • Defence Innovation Organisation (DIO): स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है और ड्रोन तकनीक में नवाचार को तेज करता है।
  • Directorate General of Aeronautical Quality Assurance (DGAQA): UAV सिस्टम की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

ड्रोन स्वॉर्म संतृप्ति खतरे: हालिया संघर्षों के आंकड़े

300 से अधिक ड्रोन एक साथ तैनात कर स्वॉर्म संतृप्ति हमले विश्व के उन्नत वायु रक्षा तंत्रों को भारी रूप से प्रभावित कर चुके हैं (CSIS Report 2023)। रूस-यूक्रेन युद्ध में 1,200 से अधिक FPV ड्रोन ने 500 से ज्यादा बख्तरबंद वाहनों को निष्क्रिय किया (IISS Military Balance 2023)। नागोर्नो-काराबाख युद्ध में 75% युद्ध हताहत लूटरिंग म्यूनिशन्स के कारण हुए (SIPRI 2021)। भारत के पास वर्तमान में 300 UAVs हैं, जिन्हें 2030 तक 1,000 तक बढ़ाने की योजना है (MoD Annual Report 2023)। मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियां जैसे कि आकाश मिसाइल की रीलोडिंग में 30 सेकंड लगते हैं, जो तेज ड्रोन स्वॉर्म के खिलाफ अपर्याप्त हैं (DRDO Technical Bulletin 2023)।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और इज़राइल की ड्रोन युद्ध रणनीतियां

पहलूभारतइज़राइल
ड्रोन बेड़े का आकारलगभग 300 UAVs; 2030 तक 1,000 का लक्ष्यहजारों UAVs, जिसमें युद्ध और निगरानी दोनों भूमिकाएं
काउंटर-ड्रोन सिस्टमविभाजित; स्वदेशी प्रणालियों का विकास जारीएकीकृत बहु-स्तरीय सिस्टम: Iron Dome, Drone Dome
इंटरसेप्शन सफलता दरडेटा उपलब्ध नहीं; स्वॉर्म के खिलाफ सीमितस्वॉर्म हमलों के खिलाफ लगभग 90% सफलता (Israel MoD 2023)
ऑपरेशनल इंटीग्रेशनसेवा-स्तरीय अलग प्रयास; कोई एकीकृत नीति नहींराडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काइनेटिक इंटरसेप्टर्स का संयुक्त कमांड
स्वदेशी उत्पादन70% आयात निर्भरता; Make in India पहलें जारीउच्च स्वदेशी R&D और उत्पादन क्षमता

भारत की ड्रोन युद्ध रणनीति में प्रमुख कमियां

  • सेना, नौसेना, वायु सेना और नागरिक एजेंसियों को जोड़ने वाली एकीकृत काउंटर-ड्रोन नीति का अभाव।
  • विभाजित ऑपरेशनल जिम्मेदारियां स्वॉर्म संतृप्ति खतरों का जवाब देने में देरी करती हैं।
  • स्वदेशी उत्पादन क्षमता सीमित होने से आयात निर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला कमजोर बनी रहती है।
  • मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियां कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) वाले ड्रोन और तेज स्वॉर्म के खिलाफ पर्याप्त रूप से अनुकूलित नहीं हैं।
  • ड्रोन पहचान और नष्ट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में निवेश कम है।

आगे का रास्ता: रणनीतिक और ऑपरेशनल आवश्यकताएं

  • डिटेक्शन, जैमिंग और काइनेटिक इंटरसेप्शन को शामिल करते हुए एक व्यापक, संयुक्त सेवा काउंटर-ड्रोन नीति बनाएं।
  • AI, EW और सेंसर फ्यूजन तकनीकों का उपयोग कर किफायती काउंटर-ड्रोन सिस्टम के स्वदेशी विकास को तेज करें।
  • तेज-गति वाले स्वॉर्म हमलों से निपटने के लिए पुरानी वायु रक्षा प्रणालियों को तेज फायरिंग और स्वचालित खतरा प्रतिक्रिया से अपग्रेड करें।
  • सिविल एविएशन, साइबर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों सहित विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाएं ताकि ड्रोन खतरे का समग्र प्रबंधन हो सके।
  • Defence Innovation Organisation की भूमिका बढ़ाएं ताकि स्टार्टअप्स और MSMEs को ड्रोन तकनीक में तेजी से समाधान विकसित करने में मदद मिल सके।
  • रक्षा बजट में UAVs और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए पूंजीगत व्यय का आवंटन बढ़ाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के ड्रोन युद्ध नियामक ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Defence of India Act, 1962 युद्धकालीन शक्तियों सहित ड्रोन तैनाती को नियंत्रित करता है।
  2. Arms Act, 1959 अनमैंड एरियल व्हीकल्स पर लागू नहीं होता।
  3. Information Technology Act, 2000 ड्रोन से जुड़े साइबर खतरों को संबोधित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि Defence of India Act, 1962 युद्धकालीन शक्तियों के तहत ड्रोन उपयोग को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Arms Act, 1959 UAVs सहित हथियारों को नियंत्रित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि IT Act, 2000 ड्रोन से जुड़े साइबर खतरों को संबोधित करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ड्रोन स्वॉर्म संतृप्ति हमलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. स्वॉर्म हमले एक साथ सैकड़ों ड्रोन तैनात कर वायु रक्षा को भारी करते हैं।
  2. भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली बड़ी ड्रोन स्वॉर्म को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए पर्याप्त रीलोड समय रखती है।
  3. इज़राइल का Drone Dome सिस्टम स्वॉर्म के खिलाफ लगभग 90% इंटरसेप्शन सफलता प्राप्त करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि स्वॉर्म संतृप्ति हमलों में सैकड़ों ड्रोन शामिल होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि आकाश मिसाइल का 30 सेकंड रीलोड समय स्वॉर्म के खिलाफ अपर्याप्त है। कथन 3 सही है, जैसा कि इज़राइल MoD के आंकड़ों से पता चलता है।

मुख्य प्रश्न

भारत के लिए उन्नत ड्रोन युद्ध क्षमताओं और काउंटर-स्वॉर्म संतृप्ति खतरों को अपनी सैन्य नीति में शामिल करने में चुनौतियां और रणनीतिक आवश्यकताओं का विश्लेषण करें। चर्चा करें कि स्वदेशी तकनीक और संस्थागत सुधार भारत की रक्षा तैयारी को इस क्षेत्र में कैसे मजबूत कर सकते हैं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आंतरिक सुरक्षा, रक्षा और तकनीक
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड में कई रक्षा निर्माण इकाइयां और DRDO लैब्स हैं जो UAV विकास में योगदान देती हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और तकनीकी हस्तांतरण प्रभावित होता है।
  • मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय ड्रोन रणनीति को राज्य स्तर के रक्षा उद्योग विकास और सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत के UAV बेड़े का वर्तमान आकार और भविष्य के लक्ष्य क्या हैं?

भारत वर्तमान में लगभग 300 UAVs संचालित करता है और 2030 तक इसे 1,000 इकाइयों तक बढ़ाने की योजना है (MoD Annual Report 2023)।

स्वदेशी ड्रोन विकास में कौन सी भारतीय संस्था अग्रणी है?

Defence Research and Development Organisation (DRDO) भारत में स्वदेशी UAV और काउंटर-ड्रोन तकनीक विकास की अगुआई करता है।

भारत में ड्रोन युद्ध को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधान कौन से हैं?

ड्रोन युद्ध को Defence of India Act, 1962; Arms Act, 1959; Information Technology Act, 2000; और Defence Procurement Procedure 2020 के तहत नियंत्रित किया जाता है।

ड्रोन स्वॉर्म के खिलाफ भारत की मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियां कितनी प्रभावी हैं?

आकाश मिसाइल जैसी प्रणालियों का 30 सेकंड का रीलोड समय तेज ड्रोन स्वॉर्म संतृप्ति हमलों से निपटने के लिए अपर्याप्त है (DRDO Technical Bulletin 2023)।

भारत इज़राइल की ड्रोन रक्षा रणनीति से क्या सीख सकता है?

इज़राइल एकीकृत बहु-स्तरीय ड्रोन रक्षा प्रणाली का उपयोग करता है जिसमें राडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काइनेटिक इंटरसेप्टर्स शामिल हैं, जो लगभग 90% इंटरसेप्शन सफलता प्राप्त करती है। भारत इस मॉडल को अपनाकर असममित ड्रोन खतरों का मुकाबला कर सकता है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us