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Economy · Exam Notes

भारत में श्रम संहिताएँ और अनौपचारिकता की चुनौती: विश्लेषण और प्रभाव

भारत ने 2019-2020 के बीच 29 केंद्र सरकार के श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेकित किया ताकि नियमन को सरल बनाया जा सके और 80% से अधिक श्रमिकों को प्रभावित करने वाली अनौपचारिकता से निपटा जा सके। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 2029-30 तक औपचारिककरण 75.5% तक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे 7.7 मिलियन नए रोजगार सृजित होंगे और GDP में 1.25% का योगदान होगा। फिर भी, प्रवर्तन में कमी और सामाजिक सुरक्षा कवरेज अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।
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GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

In brief

भारत ने 2019-2020 के बीच 29 केंद्र सरकार के श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेकित किया ताकि नियमन को सरल बनाया जा सके और 80% से अधिक श्रमिकों को प्रभावित करने वाली अनौपचारिकता से निपटा जा सके। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 2029-30 तक औपचारिककरण 75.5% तक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे 7.7 मिलियन नए रोजगार सृजित होंगे और GDP में 1.25% का योगदान होगा। फिर भी, प्रवर्तन में कमी और सामाजिक सुरक्षा कवरेज अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।

भारत की श्रम संहिताओं और अनौपचारिकता का परिचय

2019-2020 में भारत ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं में समेकित किया: कोड ऑन वेजेस, 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020, और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020। इन संहिताओं का मकसद जटिल नियामक ढांचे को सरल बनाना और भारत के श्रम बाजार में व्याप्त अनौपचारिकता को दूर करना है, जहां 80% से अधिक श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं (PLFS 2023)। चूंकि श्रम विषय राज्य सूची के अंतर्गत आता है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग आवश्यक है ताकि इन संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (श्रम सुधार, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा)
  • GS पेपर 2: राजनीति (केंद्र-राज्य संबंध, श्रम से संबंधित संवैधानिक प्रावधान)
  • निबंध: श्रम बाजार सुधार और समावेशी विकास

श्रम संहिताओं का समेकन और मुख्य प्रावधान

इन चार श्रम संहिताओं ने कई कानूनों को एकीकृत कर अनुपालन बोझ को कम करने और नियामक स्पष्टता बढ़ाने का काम किया है। कोड ऑन वेजेस, 2019 में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (धारा 15) की व्यवस्था है, जो राज्यों में न्यूनतम मजदूरी को समान करने में मदद करती है और वेतन असमानता को कम करती है। इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 ट्रेड यूनियनों, विवाद निवारण, छंटनी और पुनः नियुक्ति (धारा 25-29) को नियंत्रित करता है, जिससे नियोक्ता की लचीलापन और श्रमिकों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित हो। ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 कार्यस्थल सुरक्षा मानकों को समेकित करता है (धारा 3-15), जबकि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 अनौपचारिक, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों का विस्तार करता है (धारा 2(77), 42-48), जो पहले की योजनाओं से काफी बड़ा कदम है।

  • कोड ऑन वेजेस के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन राज्यों में मजदूरी असमानता को कम करता है।
  • इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड विवाद निवारण को सरल बनाता है और छंटनी के नियमों को स्पष्ट करता है।
  • ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड कार्यस्थल की सुरक्षा मानकों को मजबूत करता है।
  • सोशल सिक्योरिटी कोड अनौपचारिक, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को प्रोविडेंट फंड, ESIC और मातृत्व लाभ जैसे लाभ देता है।

आर्थिक प्रभाव और श्रम बाजार का औपचारिककरण

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इन सुधारों के कारण श्रम बाजार में औपचारिककरण 60.4% से बढ़कर 75.5% तक पहुंच सकता है, जिससे 7.7 मिलियन नए रोजगार पैदा होंगे और 2029-30 तक GDP में 1.25% का योगदान होगा। वर्तमान में औपचारिक क्षेत्र में रोजगार केवल 10-12% है (PLFS 2023), जो अनौपचारिकता की गंभीरता को दर्शाता है। अनौपचारिक क्षेत्र GDP में लगभग 45% का योगदान करता है (CMIE 2024), जो इसकी आर्थिक अहमियत को दर्शाता है, हालांकि इसमें सुरक्षा कमजोर है।

  • आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, औपचारिककरण 60.4% से 75.5% तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • लगभग 7.7 मिलियन नए रोजगार सृजित होंगे।
  • श्रम सुधार 2029-30 तक GDP में 1.25% का योगदान देंगे।
  • अनौपचारिक क्षेत्र में लगभग 90% श्रमिक काम करते हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की स्थिरता नहीं मिलती।
  • कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी के तहत सामाजिक सुरक्षा विस्तार की अनुमानित वार्षिक लागत 50,000 करोड़ रुपये है (मंत्रालय श्रम)।

संस्थागत ढांचा और प्रवर्तन की चुनौतियां

श्रम और रोजगार मंत्रालय (MoLE) नीति निर्धारण और प्रवर्तन की देखरेख करता है, जबकि राज्य श्रम विभाग निरीक्षण और क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं। श्रम न्यायालय और औद्योगिक न्यायाधिकरण विवादों का निपटारा करते हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ वर्कर्स एजुकेशन (CBWE) श्रमिकों के अधिकारों और प्रशिक्षण को बढ़ावा देता है। हालांकि, राज्यों में प्रवर्तन क्षमता अलग-अलग है, जो संहिताओं की प्रभावशीलता को सीमित करता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) डेटा संग्रह करता है और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) तकनीकी सहायता देता है।

  • MoLE नीतियां बनाता है और क्रियान्वयन की निगरानी करता है।
  • राज्य श्रम विभाग निरीक्षण और अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।
  • श्रम न्यायालय और औद्योगिक न्यायाधिकरण विवादों का समाधान करते हैं।
  • CBWE श्रमिक शिक्षा और जागरूकता बढ़ाता है।
  • राज्यों में प्रवर्तन की कमी औपचारिककरण की प्रगति में बाधा है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: ब्राजील के श्रम सुधारों से सीख

ब्राजील ने 2017 में 100 से अधिक श्रम कानूनों को सरल किया, जिससे पांच वर्षों में औपचारिक रोजगार में 5% की वृद्धि हुई और GDP में 0.8% का योगदान मिला। यह अनुभव श्रम कानूनों के समेकन से होने वाले लाभों को दर्शाता है, लेकिन प्रवर्तन और सामाजिक सुरक्षा कवरेज की चुनौतियों को भी उजागर करता है। भारत का बड़ा अनौपचारिक श्रमिक वर्ग और संघीय ढांचा अतिरिक्त बाधाएं हैं।

पहलूभारतब्राजील
श्रम कानूनों का समेकन29 कानूनों को 4 संहिताओं में100+ कानूनों का सरलीकरण
औपचारिक रोजगार में वृद्धि15.1 प्रतिशत अंक (60.4% से 75.5%) का अनुमान5% वृद्धि 5 वर्षों में
GDP वृद्धि में योगदान2029-30 तक 1.25% (अनुमानित)5 वर्षों में 0.8%
सामाजिक सुरक्षा कवरेजगिग और अनौपचारिक श्रमिकों तक विस्तारधीरे-धीरे विस्तार, सीमित अनौपचारिक कवरेज
प्रवर्तन की चुनौतियांराज्य स्तर पर क्षमता की कमीक्षेत्रीय प्रवर्तन में असमानता

अनौपचारिकता से निपटने में महत्वपूर्ण कमियां

कोड बनने के बावजूद, निरीक्षण क्षमता की कमी और राजनीतिक कारणों से कई राज्यों में प्रवर्तन कमजोर है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज भले ही कागज पर बढ़ी हो, लेकिन अनौपचारिक और गिग श्रमिकों तक लाभ पहुंचाने में बाधाएं हैं। ठेका श्रम का उपयोग बढ़ रहा है, फैक्ट्रियों में स्थायी श्रमिकों का हिस्सा 2011 के 61% से घटकर 2023 में 47% रह गया है, जिससे असुरक्षा बनी रहती है। ये कमियां संहिताओं को वास्तविक औपचारिककरण और समावेशी विकास तक पहुंचने से रोकती हैं।

  • राज्यों में प्रवर्तन क्षमता में व्यापक अंतर है, जो अनुपालन को प्रभावित करता है।
  • सामाजिक सुरक्षा लाभ अनौपचारिक और गिग श्रमिकों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंचते।
  • ठेका श्रम का बढ़ता उपयोग नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करता है।
  • श्रमिक जागरूकता और शिकायत निवारण तंत्र अभी भी अपर्याप्त हैं।

आगे का रास्ता: श्रम संहिताओं के प्रभाव को बढ़ाना

  • राज्यों में निरीक्षण और प्रवर्तन को क्षमता विकास और तकनीक के जरिए मजबूत करें।
  • अनौपचारिक और गिग श्रमिकों तक लक्षित पहुंच के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करें।
  • औपचारिक रोजगार अनुबंध को बढ़ावा दें और ठेका श्रम पर सख्त नियंत्रण लागू करें।
  • CBWE और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें।
  • संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत बनाएं ताकि समान क्रियान्वयन हो सके।

कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देता है।
  2. यह सभी राज्यों में समान राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन अनिवार्य करता है।
  3. यह प्रोविडेंट फंड और कर्मचारी राज्य बीमा से संबंधित प्रावधानों को समेकित करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को शामिल किया गया है (धारा 2(77), 42-48)। कथन 2 गलत है क्योंकि समान राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन कोड ऑन वेजेस, 2019 के तहत है, न कि सोशल सिक्योरिटी कोड में। कथन 3 सही है क्योंकि यह कोड प्रोविडेंट फंड और कर्मचारी राज्य बीमा के प्रावधानों को समेकित करता है।

भारत में श्रम बाजार के औपचारिककरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. PLFS 2023 के अनुसार औपचारिक क्षेत्र में लगभग 60% श्रमिक कार्यरत हैं।
  2. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद औपचारिककरण 75.5% तक बढ़ेगा।
  3. CMIE 2024 के अनुसार अनौपचारिक क्षेत्र GDP में लगभग 45% का योगदान देता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि PLFS 2023 के अनुसार औपचारिक क्षेत्र में रोजगार केवल 10-12% है, 60% नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 औपचारिककरण 75.5% तक बढ़ने का अनुमान लगाता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि CMIE 2024 के अनुसार अनौपचारिक क्षेत्र GDP में लगभग 45% योगदान देता है।

मुख्य प्रश्न

भारत की चार श्रम संहिताओं का श्रम बाजार में अनौपचारिकता की चुनौती से निपटने पर प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। क्रियान्वयन में प्रमुख कमियों पर चर्चा करें और उनकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास), पेपर 3 (गवर्नेंस और सामाजिक मुद्दे)
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के खनन और कृषि क्षेत्रों में बड़ा अनौपचारिक श्रमिक वर्ग है, जो श्रम संहिताओं के तहत सामाजिक सुरक्षा और औपचारिककरण से लाभान्वित हो सकता है।
  • मुख्य बिंदु: राज्य स्तर पर प्रवर्तन की चुनौतियों और झारखंड के अनौपचारिक क्षेत्रों में अनुकूलित क्रियान्वयन रणनीतियों की जरूरत पर जोर।
कोड ऑन वेजेस, 2019 के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन का महत्व क्या है?

राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (धारा 15) राज्यों में न्यूनतम मजदूरी के लिए एक बेंचमार्क तय करता है, जो वेतन असमानता को कम करता है और पूरे देश में मजदूरी को मानकीकृत करता है।

श्रम संहिताएं गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के अधिकारों को कैसे संबोधित करती हैं?

कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है (धारा 2(77), 42-48), जिससे उन्हें प्रोविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलते हैं।

श्रम संहिताओं के प्रवर्तन में मुख्य बाधाएं क्या हैं?

प्रवर्तन राज्यों में निरीक्षण क्षमता की कमी, राजनीतिक और आर्थिक बाधाओं, और श्रमिक जागरूकता के अभाव के कारण कमजोर है, जिससे अनुपालन कम होता है और औपचारिककरण बाधित होता है।

श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन में श्रम और रोजगार मंत्रालय की भूमिका क्या है?

मंत्रालय नीतियां बनाता है, क्रियान्वयन की निगरानी करता है, राज्य श्रम विभागों के साथ समन्वय करता है और CBWE जैसे संस्थानों के माध्यम से श्रमिक शिक्षा और प्रवर्तन की देखरेख करता है।

भारत के श्रम सुधारों की तुलना ब्राजील के 2017 के श्रम सुधारों से कैसे की जा सकती है?

दोनों देशों ने जटिल श्रम कानूनों को सरल किया ताकि औपचारिककरण बढ़े। ब्राजील में पांच वर्षों में औपचारिक रोजगार में 5% की वृद्धि और 0.8% GDP वृद्धि हुई, जबकि भारत में औपचारिककरण और GDP योगदान अधिक होने का अनुमान है, लेकिन भारत को बड़े अनौपचारिक क्षेत्र और प्रवर्तन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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