Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Answer Writing Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu
Home Current Affairs All Articles
UPSC
UPSC NOTES
STATE PSC
OPTIONAL SUBJECTS
CURRENT AFFAIRS
DAILY EDITORIAL
COURSES
DOWNLOAD NOTES
PYQ Papers Mains Answer Writing WhatsApp Counselling Call +91 91025 57680 Online Courses

Post

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् प्रस्ताव 1701 के तहत इजरायल-लेबनान युद्धविराम विस्तार: विश्लेषण और प्रभाव

इजरायल-लेबनान युद्धविराम विस्तार का सिंहावलोकन

अप्रैल 2024 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) ने इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी, जो मूलतः UNSC प्रस्ताव 1701 (2006) के तहत स्थापित किया गया था। यह युद्धविराम इजरायल रक्षा बल (IDF) और लेबनानी शिया सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष रोकने का प्रयास करता है, साथ ही संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (UNIFIL) को तैनात कर युद्धविराम की निगरानी की जाती है। इस विस्तार से इजरायल-लेबनान सीमा पर जारी अस्थिरता का संकेत मिलता है, जो इस संवेदनशील क्षेत्र में शांति की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।

  • युद्धविराम विस्तार अवधि: 3 सप्ताह (The Hindu, अप्रैल 2024)
  • UNIFIL के सैनिकों की संख्या: लगभग 10,000 (UN Peacekeeping, 2024)
  • हिज़्बुल्लाह के सैनिक: अनुमानित 25,000 सक्रिय लड़ाके (International Crisis Group, 2023)

यह विस्तार अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थानों की भूमिका को उजागर करता है, साथ ही उन सीमाओं को भी दिखाता है जहां गैर-राज्यीय सशस्त्र समूहों के लिए प्रभावी निरस्त्रीकरण प्रावधान न होने के कारण युद्धविराम लागू करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर II: अंतरराष्ट्रीय संबंध – शांति स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, गैर-राज्यीय समूहों का प्रभाव, UNSC प्रस्ताव
  • GS पेपर III: सुरक्षा – संघर्ष प्रबंधन, सीमा सुरक्षा, रक्षा व्यय
  • निबंध: मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया और संघर्ष समाधान

युद्धविराम का कानूनी एवं संस्थागत ढांचा

यह युद्धविराम UNSC प्रस्ताव 1701 (2006) पर आधारित है, जो संघर्ष विराम, हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण और UNIFIL की तैनाती के माध्यम से अनुपालन की निगरानी करता है। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) के अनुच्छेद 2(4) द्वारा समर्थित है, जो किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता पर बल प्रयोग या धमकी को रोकता है। साथ ही, जिनेवा कन्वेंशन्स (1949) युद्ध के दौरान नागरिकों और सैनिकों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं।

  • UNSC प्रस्ताव 1701 लेबनान के सभी सशस्त्र समूहों, विशेषकर हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की मांग करता है
  • UNIFIL का कार्य युद्धविराम की निगरानी, लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) का समर्थन और मानवीय सहायता सुनिश्चित करना है
  • हिज़्बुल्लाह का गैर-राज्यीय सशस्त्र समूह के रूप में होना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लागू करने में जटिलता पैदा करता है

लेबनानी सरकार की हिज़्बुल्लाह पर सीमित नियंत्रण क्षमता प्रस्ताव 1701 के पूर्ण क्रियान्वयन में बाधा है, जो संघर्ष समाधान के प्रयासों में एक बड़ा अंतराल पैदा करता है।

इजरायल-लेबनान संघर्ष और युद्धविराम के आर्थिक प्रभाव

संघर्ष और युद्धविराम की अस्थिरता ने लेबनान की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद 2019 से 2023 के बीच लगभग 20% घट चुका है (विश्व बैंक, 2023)। संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण की लागत लगभग 3 अरब डॉलर आंकी गई है (UNDP लेबनान, 2023)। वहीं, इजरायल का 2023 का रक्षा बजट 24 अरब डॉलर था, जिसमें से करीब 5 अरब डॉलर उत्तरी सीमा सुरक्षा के लिए आवंटित हैं (इजरायल वित्त मंत्रालय, 2023)। लंबे समय तक अस्थिरता से व्यापार और बंदरगाह गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, लेबनानी कस्टम्स के अनुसार संघर्ष के दौरान बंदरगाह के माध्यम से माल की आवाजाही में 30% की गिरावट हुई।

  • लेबनान का GDP सिकुड़ाव: 20% गिरावट (2019-2023)
  • संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण लागत: 3 अरब डॉलर
  • इजरायल रक्षा बजट: कुल 24 अरब डॉलर; उत्तरी सीमा सुरक्षा के लिए 5 अरब डॉलर
  • लेबनानी बंदरगाह गतिविधि में गिरावट: 30% संघर्ष के दौरान

ये आर्थिक दबाव मानवीय संकट को बढ़ाते हैं और स्थायी शांति के लिए संसाधनों को विकास की बजाय सुरक्षा और पुनर्निर्माण में लगाने के कारण चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।

मुख्य पक्ष और युद्धविराम में उनकी भूमिका

इस युद्धविराम में कई संस्थागत और गैर-राज्यीय पक्ष शामिल हैं, जिनकी भूमिकाएँ और हित अलग-अलग हैं। UNIFIL शांति स्थापना और निगरानी के माध्यम से युद्धविराम को लागू करता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् कानूनी अधिकार और राजनीतिक समर्थन प्रदान करता है। हिज़्बुल्लाह, लगभग 25,000 सशस्त्र लड़ाकों के साथ, निरस्त्रीकरण का विरोध करता है। IDF कड़ी सीमा सुरक्षा बनाए रखता है। लेबनानी सशस्त्र बल (LAF) का दक्षिणी लेबनान में सीमित नियंत्रण है। संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त शरणार्थी (UNHCR) संघर्ष से विस्थापित लोगों की मानवीय जरूरतों का प्रबंधन करता है।

  • UNIFIL: शांति स्थापना, निगरानी, LAF और IDF के साथ समन्वय
  • UNSC: युद्धविराम का प्रावधान, सैनिक तैनाती का अनुमोदन
  • हिज़्बुल्लाह: निरस्त्रीकरण का विरोध करता सशस्त्र गैर-राज्यीय समूह
  • IDF: इजरायली सीमा सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई
  • LAF: दक्षिणी लेबनान में सीमित संप्रभुता लागू करना
  • UNHCR: विस्थापितों के लिए मानवीय सहायता

तुलनात्मक विश्लेषण: इजरायल-लेबनान बनाम भारत-पाकिस्तान युद्धविराम समझौते

पहलू इजरायल-लेबनान युद्धविराम भारत-पाकिस्तान युद्धविराम (LoC)
कानूनी ढांचा UNSC प्रस्ताव 1701 (2006), संयुक्त राष्ट्र चार्टर सिमला समझौता (1972), द्विपक्षीय युद्धविराम समझौते
गैर-राज्यीय समूह हिज़्बुल्लाह (सशस्त्र, गैर-राज्यीय) सशस्त्र समूह सक्रिय लेकिन आधिकारिक तौर पर अस्वीकार किए गए
शांति स्थापना बल UNIFIL (~10,000 सैनिक) कोई संयुक्त राष्ट्र शांति सेना नहीं; द्विपक्षीय निगरानी
युद्धविराम उल्लंघन बार-बार झड़पें, निरस्त्रीकरण अधूरा समझौतों के बावजूद नियमित उल्लंघन
राजनीतिक संवाद सीमित, हिज़्बुल्लाह की भूमिका के कारण ठप आंतरिम, सीमा पार आतंकवाद से प्रभावित

दोनों युद्धविराम यह दर्शाते हैं कि व्यापक राजनीतिक संवाद और लागू होने वाले निरस्त्रीकरण के बिना ये केवल अस्थायी विराम हैं, स्थायी शांति समाधान नहीं।

महत्वपूर्ण अंतराल: गैर-राज्यीय समूहों का निरस्त्रीकरण

हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण के लिए प्रभावी उपायों की कमी स्थायी शांति का सबसे बड़ा रोड़ा है। राज्यीय समूहों के विपरीत, हिज़्बुल्लाह लेबनान में काफी स्वायत्तता से कार्य करता है और राजनीतिक-सैन्य समर्थन प्राप्त है। यह युद्धविराम की मजबूती को कमजोर करता है और UNIFIL की निगरानी क्षमता को जटिल बनाता है। युद्धविराम वार्ताओं में मुख्य रूप से राज्यीय पक्षों पर ध्यान दिया गया है, जबकि सशस्त्र गैर-राज्यीय समूहों की जटिल वास्तविकता को अंतरराष्ट्रीय कानून प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाता।

  • हिज़्बुल्लाह का सशस्त्र होना UNSC प्रस्ताव 1701 के प्रवर्तन में बाधा
  • लेबनानी सरकार की सीमित नियंत्रण क्षमता निरस्त्रीकरण में बाधा
  • UNIFIL के पास सीधे निरस्त्रीकरण का अधिकार नहीं
  • गैर-राज्यीय समूहों की भागीदारी संघर्ष समाधान को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जटिल बनाती है

महत्व और आगे का रास्ता

  • युद्धविराम विस्तार शांति की नाजुकता और सभी पक्षों सहित गैर-राज्यीय समूहों की भागीदारी के साथ निरंतर कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत को दर्शाता है।
  • UNIFIL के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए प्रवर्तन प्रावधानों को मजबूत करना और खुफिया साझेदारी बढ़ाना निगरानी को प्रभावी बना सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लेबनानी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए लेबनानी सशस्त्र बलों को समर्थन देना चाहिए ताकि दक्षिणी लेबनान पर नियंत्रण स्थापित हो सके।
  • दीर्घकालिक शांति के लिए हिज़्बुल्लाह की भूमिका, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक पुनर्निर्माण पर राजनीतिक संवाद आवश्यक है।
  • मानवीय सहायता को बढ़ाकर सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करना और संघर्ष के कारणों को घटाना जरूरी है।

इजरायल-लेबनान युद्धविराम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. UNSC प्रस्ताव 1701 हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण का प्रावधान करता है।
  2. UNIFIL के पास गैर-राज्यीय सशस्त्र समूहों को जबरन निरस्त्रीकृत करने का अधिकार है।
  3. 2024 में युद्धविराम विस्तार तीन सप्ताह के लिए किया गया था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि UNSC प्रस्ताव 1701 हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि UNIFIL के पास जबरन निरस्त्रीकरण का अधिकार नहीं है। कथन 3 सही है, 2024 में युद्धविराम विस्तार तीन सप्ताह के लिए किया गया था।

UNIFIL और उसके कार्यक्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. UNIFIL की स्थापना UNSC प्रस्ताव 1701 के तहत 2006 में हुई थी।
  2. 2024 तक UNIFIL की सैनिक संख्या लगभग 10,000 है।
  3. UNIFIL सीधे लेबनानी संप्रभुता को सभी सशस्त्र समूहों पर लागू करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं; UNIFIL की स्थापना प्रस्ताव 1701 के तहत हुई और इसकी सैनिक संख्या लगभग 10,000 है। कथन 3 गलत है क्योंकि UNIFIL के पास सशस्त्र समूहों पर सीधे संप्रभुता लागू करने का अधिकार नहीं है।

मुख्य प्रश्न

UNSC प्रस्ताव 1701 के तहत इजरायल-लेबनान युद्धविराम लागू करने में संयुक्त राष्ट्र को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? शांति प्रयासों को जटिल बनाने में गैर-राज्यीय समूहों की भूमिका पर चर्चा करें और ऐसे संदर्भों में संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना मिशनों की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर II – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना ढांचे की समझ झारखंड के उम्मीदवारों के लिए भारत की संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भूमिका को समझने में सहायक है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन में संलग्न हैं।
  • मुख्य बिंदु: भारत के संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में योगदान, गैर-राज्यीय समूहों द्वारा उत्पन्न चुनौतियाँ, और भारत की सीमा संघर्षों के लिए प्रासंगिक सबक पर उत्तर तैयार करें।
UNSC प्रस्ताव 1701 क्या है?

UNSC प्रस्ताव 1701, जो 2006 में अपनाया गया था, इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम, लेबनान के सभी सशस्त्र समूहों सहित हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण, और UNIFIL की तैनाती के माध्यम से युद्धविराम की निगरानी का प्रावधान करता है।

UNIFIL का कार्यक्षेत्र क्या है?

UNIFIL का कार्यक्षेत्र युद्धविराम की निगरानी, दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सशस्त्र बलों का समर्थन, मानवीय सहायता को सुविधाजनक बनाना, और क्षेत्र में बिना अनुमति के सशस्त्र व्यक्तियों की गतिविधि को रोकना शामिल है।

हिज़्बुल्लाह युद्धविराम के लिए चुनौती क्यों माना जाता है?

हिज़्बुल्लाह लगभग 25,000 लड़ाकों के साथ एक शक्तिशाली गैर-राज्यीय सशस्त्र समूह है, जो लेबनान में स्वायत्त रूप से कार्य करता है और निरस्त्रीकरण का विरोध करता है, जिससे युद्धविराम की स्थिरता कमजोर होती है।

संघर्ष ने लेबनान की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया है?

लेबनान का GDP 2019-2023 के बीच लगभग 20% घटा है, पुनर्निर्माण की लागत लगभग 3 अरब डॉलर है, और संघर्ष के दौरान बंदरगाह गतिविधि में 30% की गिरावट आई है, जो आर्थिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

इजरायल-लेबनान युद्धविराम की तुलना भारत-पाकिस्तान LoC युद्धविराम से कैसे की जा सकती है?

दोनों युद्धविराम अस्थिर हैं, बार-बार उल्लंघन होते हैं, गैर-राज्यीय समूहों की भागीदारी और लागू निरस्त्रीकरण की कमी के कारण ये केवल अस्थायी शांति प्रदान करते हैं, बिना व्यापक राजनीतिक समाधान के।

Call WhatsApp Join Batch Download Syllabus