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प्रसंग

मध्य 2024 में, ईरान की संसद (मजलिस) ने उस विधेयक की समीक्षा शुरू की है, जो देश को नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने का अधिकार देगा। यदि यह कदम लागू होता है, तो यह वैश्विक नाभिकीय अप्रसार व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा और मध्य पूर्व समेत अन्य क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा सकता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – नाभिकीय अप्रसार, संधियां और वैश्विक सुरक्षा
  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां और नाभिकीय नीतियां
  • निबंध: वैश्विक शांति और सुरक्षा पर नाभिकीय संधियों का प्रभाव

ईरान की नाभिकीय प्रतिबद्धताओं का कानूनी ढांचा

नाभिकीय हथियार अप्रसार संधि (NPT) 1968 में हस्ताक्षरित और 1970 से लागू, अंतरराष्ट्रीय नाभिकीय अप्रसार व्यवस्था की आधारशिला है। ईरान ने इसे एक गैर-नाभिकीय हथियार राज्य (NNWS) के रूप में स्वीकारा, जिसमें उसने नाभिकीय हथियार विकसित न करने का वचन दिया और शांतिपूर्ण नाभिकीय तकनीक के लिए IAEA की निगरानी में रहने का अधिकार रखा।

  • NPT का Article X असाधारण परिस्थितियों में तीन महीने का नोटिस देकर संधि से बाहर निकलने की अनुमति देता है।
  • ईरान के घरेलू कानून में संधि से वापसी को स्पष्ट रूप से विनियमित नहीं किया गया है, लेकिन संसद की मंजूरी जरूरी है।
  • 2015 का JCPOA, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2231 ने अनुमोदित किया, NPT से आगे जाकर ईरान पर अतिरिक्त नाभिकीय प्रतिबंध लगाए।

ईरान का नाभिकीय कार्यक्रम और आर्थिक प्रभाव

ईरान की नाभिकीय गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से गहराई से जुड़ी हैं, जिनका उसके आर्थिक हालात पर बड़ा असर पड़ा है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2019 में नाभिकीय अप्रसार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के कारण देश की GDP में 6% की गिरावट आई।

  • JCPOA के बाद (2016) कुछ प्रतिबंधों में छूट मिलने से ईरान ने लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल निर्यात बढ़ाया (International Energy Agency, IEA)।
  • 2018 में अमेरिका के JCPOA से बाहर निकलने के बाद प्रतिबंध पुनः लागू हुए, जिससे ईरान के तेल निर्यात में 80% से अधिक की कटौती हुई और सरकारी राजस्व में भारी गिरावट आई।
  • ईरान विश्व तेल आपूर्ति का लगभग 4% हिस्सा रखता है (OPEC डेटा), इसलिए नए प्रतिबंध या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
  • NPT से संभावित वापसी से नए प्रतिबंध लगने का खतरा है, जो ईरान को आर्थिक रूप से और अधिक अलग-थलग कर सकता है।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संस्थान

  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA): NPT और JCPOA के तहत ईरान की नाभिकीय अनुपालन की निगरानी करती है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC): ईरान की नाभिकीय गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंधों और प्रस्तावों को लागू करता है।
  • ईरानी संसद (मजलिस): वापसी विधेयक पर विचार कर रही है।
  • JCPOA संयुक्त आयोग: ईरान और P5+1 देशों सहित बहुपक्षीय निगरानी तंत्र।

तथ्य और घटनाक्रम

  • ईरान 1970 से NPT का सदस्य है (IAEA आधिकारिक रिकॉर्ड)।
  • JCPOA जुलाई 2015 में ईरान और P5+1 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन, जर्मनी) के बीच तय हुआ।
  • अमेरिका ने मई 2018 में JCPOA से वापसी की, जिसके बाद प्रतिबंध पुनः लागू हुए और ईरान के तेल निर्यात में 80% की कमी आई (IEA, 2019)।
  • 2021 की शुरुआत में ईरान ने यूरेनियम की शुद्धता 60% तक बढ़ा दी, जो JCPOA की सीमा 3.67% से कहीं अधिक है (IAEA रिपोर्ट)।
  • प्रमुख NPT गैर-सदस्य देशों में भारत, पाकिस्तान, इजरायल, और उत्तर कोरिया शामिल हैं।
  • Article X के तहत असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए तीन महीने का नोटिस देकर संधि से बाहर निकलना संभव है (NPT पाठ, 1968)।

तुलनात्मक अध्ययन: ईरान बनाम उत्तर कोरिया की NPT वापसी

पहलू ईरान उत्तर कोरिया
वापसी का वर्ष 2024 में प्रस्तावित (विचाराधीन) 2003 (आधिकारिक वापसी)
वापसी का कारण प्रतिबंधों और JCPOA टूटने के कारण राष्ट्रीय हितों पर खतरा सुरक्षा चिंताएं और नाभिकीय हथियार विकसित करने की इच्छा
वापसी के बाद नाभिकीय विकास यूरेनियम संवर्धन बढ़ा, लेकिन कोई पुष्टि परमाणु परीक्षण नहीं 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया नए प्रतिबंध और कूटनीतिक दबाव कड़े प्रतिबंध और कूटनीतिक अलगाव
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, हथियार दौड़ का खतरा पूर्वी एशिया अस्थिर, हथियार दौड़ की चिंताएं बढ़ीं

NPT ढांचे में मुख्य कमियां

  • संधि में वापसी की धमकी को रोकने या प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए कोई कड़ाई से लागू होने वाला तंत्र नहीं है।
  • राजनीतिक विवाद और बचाव के कारण कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंध सीमित प्रभावी हैं।
  • इससे संधि की निवारक क्षमता कमजोर होती है और वैश्विक अप्रसार प्रयासों को नुकसान पहुंचता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • ईरान की संभावित NPT से वापसी दशकों पुरानी बहुपक्षीय नाभिकीय अप्रसार व्यवस्था को कमजोर कर सकती है।
  • यह क्षेत्रीय नाभिकीय हथियार दौड़ को बढ़ावा दे सकती है और मध्य पूर्व की सुरक्षा को अस्थिर कर सकती है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कूटनीतिक संवाद मजबूत करना होगा और प्रतिबंधों से आगे के प्रभावी उपाय तलाशने होंगे।
  • सभी JCPOA पक्षों, विशेषकर अमेरिका को शामिल करते हुए बहुपक्षीय वार्ताओं को पुनर्जीवित करना जरूरी है ताकि तनाव कम किया जा सके।
  • भारत और अन्य क्षेत्रीय देश इस विकास को बारीकी से निगरानी करें क्योंकि इसका वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर होगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. NPT राज्यों को नाभिकीय हथियार रखने वाले और गैर-नाभिकीय हथियार रखने वाले के रूप में वर्गीकृत करता है, जो संधि पर हस्ताक्षर के समय हथियारों के आधार पर होता है।
  2. NPT का Article X राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए छह महीने का नोटिस देकर वापसी की अनुमति देता है।
  3. भारत और पाकिस्तान NPT के हस्ताक्षरकर्ता हैं।
  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 1 और 2
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि NPT हस्ताक्षर के समय हथियार रखने वाले राज्यों को नाभिकीय हथियार राज्य के रूप में मानता है। कथन 2 गलत है क्योंकि वापसी के लिए तीन महीने का नोटिस आवश्यक है, छह महीने का नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत और पाकिस्तान NPT के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. JCPOA 2015 में ईरान और P5+1 देशों के बीच हस्ताक्षरित हुई थी।
  2. 2018 के बाद अमेरिका JCPOA में शामिल रहा।
  3. JCPOA ईरान के यूरेनियम संवर्धन को 3.67% शुद्धता तक सीमित करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; JCPOA 2015 में ईरान और P5+1 के बीच हुआ था। कथन 2 गलत है क्योंकि अमेरिका 2018 में JCPOA से बाहर हो गया। कथन 3 सही है; JCPOA यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित करता है।

मुख्य प्रश्न

ईरान की नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) से संभावित वापसी के वैश्विक अप्रसार प्रयासों और मध्य पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभावों का विश्लेषण करें। (250 शब्द)

नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) क्या है?

NPT एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो 1968 में हस्ताक्षरित और 1970 से लागू है। इसका उद्देश्य नाभिकीय हथियारों के प्रसार को रोकना, निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा के उपयोग को सुगम बनाना है। यह राज्यों को नाभिकीय हथियार रखने वाले और गैर-नाभिकीय हथियार रखने वाले में बांटता है और उनके लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय करता है।

NPT का Article X क्या कहता है?

Article X किसी भी पक्ष को असाधारण घटनाओं के कारण अपनी सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों को खतरा होने पर तीन महीने का नोटिस देकर संधि से बाहर निकलने की अनुमति देता है, जिसे अन्य पक्षों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सूचित करना आवश्यक है।

JCPOA क्या है?

JCPOA 2015 में ईरान और P5+1 देशों के बीच एक बहुपक्षीय समझौता है, जिसमें ईरान के नाभिकीय कार्यक्रम पर सीमाएं लगाई गईं और इसके बदले प्रतिबंधों में छूट दी गई, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 ने मंजूरी दी।

अमेरिका के JCPOA से बाहर निकलने का ईरान पर क्या प्रभाव पड़ा?

2018 में अमेरिका के बाहर निकलने के बाद प्रतिबंध पुनः लागू हुए, जिससे ईरान के तेल निर्यात में 80% की गिरावट आई और उसकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा, जिससे JCPOA की प्रभावशीलता कमजोर हुई।

कौन से देश NPT पर हस्ताक्षर नहीं करते?

भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया प्रमुख गैर-सदस्य देश हैं।

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