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Governance · Exam Notes

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस: उत्पत्ति, कानूनी ढांचा और भारत में वर्तमान प्रासंगिकता

1 min read GS Paper II

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस का परिचय

हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस, 1886 में अमेरिका के श्रमिकों की आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग पर हुई हड़ताल की याद दिलाता है। यह दिवस, जिसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, विश्वभर में श्रमिक अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। भारत में पहली बार श्रमिक दिवस 1923 में चेन्नई में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान के आयोजन में मनाया गया, जो वैश्विक श्रमिक आंदोलन के साथ मेल खाता है। यह दिन बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच श्रमिकों की भलाई और चुनौतियों को उजागर करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 1: सामाजिक सशक्तिकरण और श्रमिकों के अधिकार।
  • GS पेपर 2: भारत में ILO जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका।
  • GS पेपर 3: श्रमिक कल्याण योजनाएं, औद्योगिक संबंध और श्रम कानून।
  • निबंध: श्रमिक अधिकार और आर्थिक विकास।

ऐतिहासिक संदर्भ और वैश्विक ढांचा

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना 1919 में वर्साय की संधि के तहत हुई, जो वैश्विक श्रम मानकों को निर्धारित करने वाली प्रमुख यूएन एजेंसी है। यह 1946 में यूएन की पहली विशेष एजेंसी बना। भारत इसका संस्थापक सदस्य है। ILO की त्रिपक्षीय संरचना में सरकारें, नियोक्ता और श्रमिक शामिल हैं, जो श्रम नीतियों पर सहमति बनाने में मदद करती है। यह 187 सदस्य देशों के साथ दुनियाभर में सम्मानजनक कार्य को बढ़ावा देता है।

  • 1 मई 1886: अमेरिका में आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग पर श्रमिकों की हड़ताल से अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुरुआत हुई (स्रोत: ILO ऐतिहासिक अभिलेख)।
  • ILO ने कार्य समय, वेतन, व्यावसायिक सुरक्षा और विवाद समाधान पर कन्वेंशन्स निर्धारित किए हैं।
  • ILO के अनुसार, हर साल विश्व में लगभग 2.78 मिलियन कार्य संबंधित मौतें होती हैं, जो व्यावसायिक खतरों की गंभीरता दर्शाती हैं (ILO ग्लोबल अनुमान 2021)।

भारत में कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत के श्रम कानून Article 43 पर आधारित हैं, जो राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांतों का हिस्सा है और राज्य को श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी और मानवतापूर्ण कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। प्रमुख कानूनों में शामिल हैं:

  • फैक्ट्री अधिनियम, 1948 (धारा 51-60): कारखानों में कार्य समय, सुरक्षा और स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है।
  • औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (धारा 2(k), 10, 17): औद्योगिक विवादों के समाधान के लिए प्रावधान।
  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948: विभिन्न क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करता है।
  • वेतन संहिता, 2019: पूर्व के वेतन कानूनों को समेकित कर कवरेज और प्रवर्तन को बढ़ाता है।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 (धारा 3-7): श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को संबोधित करता है।

न्यायिक निर्णय जैसे ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (1985) ने Article 21 के तहत जीवन के अधिकार में आजीविका के अधिकार को शामिल किया है, जो श्रमिक सुरक्षा को मजबूत करता है।

भारत में श्रम के आर्थिक पहलू

भारत की श्रम शक्ति का अधिकांश हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में है, जहां 80% से अधिक श्रमिक संगठित क्षेत्र के बाहर काम करते हैं, जो GDP में लगभग 45% का योगदान देते हैं (आर्थिक सर्वेक्षण 2023)। संगठित श्रम शक्ति लगभग 10% (~47 मिलियन श्रमिक) है, जैसा कि 2019-20 के पिरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे से पता चलता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय का 2023-24 का बजट आवंटन ₹6,000 करोड़ है, जो कल्याण योजनाओं और प्रवर्तन के लिए है।

  • वेतन संहिता लागू होने के बाद न्यूनतम मजदूरी कवरेज में 15% की वृद्धि हुई (लेबर ब्यूरो रिपोर्ट 2023)।
  • 2018 से 2022 के बीच कार्यस्थल दुर्घटनाओं में 12% की कमी आई है, जो सुरक्षा उपायों में सुधार दर्शाता है (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2023)।
  • 2010-2020 के बीच वैश्विक श्रम उत्पादकता में औसतन 1.5% वार्षिक वृद्धि हुई (ILO ग्लोबल उत्पादकता रिपोर्ट 2021)।

प्रमुख संस्थान जो श्रमिक कल्याण को संचालित करते हैं

  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): अंतरराष्ट्रीय श्रम मानक तय करता है और सम्मानजनक कार्य को बढ़ावा देता है।
  • श्रम और रोजगार मंत्रालय (MoLE): भारत में नीतियां बनाता है और श्रम कानूनों को लागू करता है।
  • लेबर ब्यूरो: श्रम आंकड़े एकत्र और विश्लेषण करता है।
  • केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड (CBWE): श्रमिक शिक्षा और जागरूकता बढ़ाता है।
  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO): संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रबंधित करता है।
  • राष्ट्रीय श्रम आयोग (NCL): श्रम कल्याण और सुधारों पर सलाह देता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और जर्मनी

पहलूभारतजर्मनी
कार्य समयकोई एक समान वैधानिक कार्य सप्ताह नहीं; क्षेत्र-विशेष कानूनों द्वारा नियंत्रित1972 के वर्क्स कॉन्स्टिट्यूशन एक्ट के तहत 35-40 घंटे का वैधानिक कार्य सप्ताह
श्रम कानून प्रवर्तनकानून बिखरे हुए हैं और अनौपचारिक क्षेत्र में प्रवर्तन चुनौतिपूर्ण हैमजबूत प्रवर्तन और सामाजिक संवाद के तंत्र मौजूद हैं
औद्योगिक विवादकमजोर सामूहिक सौदेबाजी के कारण अधिक विवादयूरोप में सबसे कम औद्योगिक विवाद दर (Statistisches Bundesamt, 2022)
सामूहिक सौदेबाजीमुख्य रूप से संगठित क्षेत्र तक सीमितमजबूत और कानूनी रूप से स्थापित सामूहिक सौदेबाजी अधिकार
सामाजिक सुरक्षासंगठित श्रमिकों के लिए EPFO और अन्य योजनाएं; अनौपचारिक क्षेत्र ज्यादातर बाहरव्यापक सामाजिक सुरक्षा और सार्वभौमिक कवरेज

भारत के श्रम ढांचे में प्रमुख कमियां

  • 80% से अधिक श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, जिन्हें कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती।
  • श्रम कानूनों का विखंडन प्रभावी प्रवर्तन और अनुपालन में बाधा है।
  • नीतिगत ध्यान मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र पर केंद्रित है, अनौपचारिक श्रमिकों की अनदेखी होती है।
  • श्रमिकों में जागरूकता और शिक्षा की कमी उनके अधिकारों के लिए संघर्ष को कमजोर करती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • संस्थानात्मक क्षमता निर्माण के जरिए सभी क्षेत्रों, खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और औपचारिककरण प्रोत्साहनों से सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार।
  • CBWE और नागरिक समाज की भागीदारी से श्रमिक शिक्षा और अधिकार जागरूकता बढ़ाना।
  • श्रमिक, नियोक्ता और सरकार के बीच सामाजिक संवाद को बढ़ावा देकर औद्योगिक विवाद कम करना।
  • श्रम कानूनों की नियमित समीक्षा और समेकन कर विखंडन कम करना और स्पष्टता बढ़ाना।

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुरुआत अमेरिका में आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग पर हड़ताल से हुई थी।
  2. भारत में पहला श्रमिक दिवस 1923 में चेन्नई में मनाया गया था।
  3. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन विश्व युद्ध के बाद यूएन की विशेष एजेंसी के रूप में स्थापित हुआ था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस 1886 की अमेरिकी हड़ताल को याद करता है। कथन 2 भी सही है; भारत में पहला श्रमिक दिवस 1923 में चेन्नई में मनाया गया था। कथन 3 गलत है क्योंकि ILO की स्थापना 1919 में हुई थी, जो विश्व युद्ध से पहले है, और यह 1946 में यूएन की विशेष एजेंसी बना।

भारत के श्रम कानूनों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. वेतन संहिता, 2019 न्यूनतम मजदूरी और बोनस भुगतान से संबंधित कानूनों को समेकित करती है।
  2. फैक्ट्री अधिनियम, 1948 सभी श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।
  3. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 नियोक्ता और श्रमिकों के बीच विवाद समाधान के लिए प्रावधान करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; वेतन संहिता, 2019 वेतन संबंधी कानूनों को समेकित करती है। कथन 2 गलत है; फैक्ट्री अधिनियम केवल उन कारखानों पर लागू होता है जहां 10 या अधिक श्रमिक पावर के साथ और 20 या अधिक बिना पावर के काम करते हैं। कथन 3 सही है; औद्योगिक विवाद अधिनियम विवाद समाधान के लिए प्रावधान करता है।

मेन प्रश्न

भारत के श्रम कानूनों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस का महत्व और अनौपचारिक क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें। नीति सुधार इन चुनौतियों को कैसे दूर कर सकते हैं? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और सामाजिक न्याय), पेपर 3 (आर्थिक विकास और श्रम कल्याण)
  • झारखंड दृष्टिकोण: खनन और कृषि क्षेत्रों में उच्च अनौपचारिक श्रम शक्ति; राज्य-विशिष्ट श्रम कल्याण योजनाएं जैसे MGNREGA केंद्रीय श्रम संरक्षणों को पूरा करती हैं।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड के अनौपचारिक क्षेत्र की चुनौतियां, सामाजिक सुरक्षा विस्तार की जरूरत, और केंद्रीय श्रम कानूनों के कार्यान्वयन में राज्य की भूमिका।
अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस की उत्पत्ति क्या है?

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुरुआत 1886 में अमेरिका के श्रमिकों द्वारा आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग पर हुई हड़ताल से हुई, जिसे हर साल 1 मई को मनाया जाता है।

भारत में श्रम कल्याण के लिए कौन सा संवैधानिक प्रावधान जिम्मेदार है?

Article 43, जो राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांतों का हिस्सा है, राज्य को श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी और मानवतापूर्ण कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।

वेतन संहिता, 2019 का महत्व क्या है?

वेतन संहिता, 2019 न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान और बोनस से संबंधित कानूनों को समेकित करती है, जिससे वेतन नियमों में सुधार और कवरेज बढ़ाने का लक्ष्य है।

अनौपचारिक क्षेत्र भारत के श्रम परिदृश्य को कैसे प्रभावित करता है?

भारत की श्रम शक्ति का 80% से अधिक हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में है, जिसे पर्याप्त कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती, जिससे श्रम कल्याण और नीति प्रवर्तन में चुनौतियां आती हैं।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की भूमिका क्या है?

ILO अंतरराष्ट्रीय श्रम मानक तय करता है, सम्मानजनक कार्य को बढ़ावा देता है और सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

Sources and further reading

Tags:Governance