कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 का परिचय
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 को भारत में कीटनाशकों के नियमन को आधुनिक बनाने के लिए कीटनाशक अधिनियम, 1968 की जगह लाया गया है। इसका मकसद कीटनाशकों के निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपयोग को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है, जिसमें पंजीकरण, लाइसेंसिंग और सुरक्षा मूल्यांकन (धारा 4-15) के प्रावधानों को मजबूत किया गया है। यह विधेयक 2023 की शुरुआत में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किया गया था और उद्योग के हितधारकों का ध्यान आकर्षित किया है। यह विधेयक पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के साथ भी जुड़ा है, जो कीटनाशक अवशेष सीमा और पर्यावरणीय सुरक्षा से संबंधित हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: कृषि (कीटनाशक नियंत्रण, कृषि रसायन उद्योग), अर्थव्यवस्था (व्यापार और उद्योग नियमन)
- GS पेपर 2: राजनीति (विधायी ढांचा, केंद्र-राज्य संबंध)
- निबंध: सतत कृषि और पर्यावरणीय नियमन
कानूनी और संवैधानिक ढांचा
यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 246(3) से अपनी विधायी अधिकारिता प्राप्त करता है, जो संसद को कृषि और व्यापार मामलों में कानून बनाने का अधिकार देता है। यह पुरानी कीटनाशक अधिनियम, 1968 को बदलकर कीटनाशक नियंत्रण को एक ही कानून के तहत समेकित करता है। मुख्य प्रावधानों में कीटनाशकों का अनिवार्य पंजीकरण, निर्माताओं और विक्रेताओं का लाइसेंसिंग, और सेंट्रल कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) द्वारा कड़ी सुरक्षा जांच शामिल है। विधेयक में पर्यावरण निगरानी के लिए सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और खाद्य उत्पादों में अवशेष निगरानी के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के साथ समन्वय का प्रावधान भी है।
- धारा 4-15: कीटनाशक और विक्रेताओं का पंजीकरण और लाइसेंसिंग
- हानिकारक कीटनाशकों के रिटर्न और प्रतिबंध के प्रावधान
- अनुपालन न करने पर जुर्माना और जेल की सजा
- स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों के वैज्ञानिक मूल्यांकन का आदेश
आर्थिक प्रभाव और उद्योग की चिंताएं
भारत के कीटनाशक बाजार का मूल्य 2022 में लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 6.5% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (FICCI रिपोर्ट 2023)। कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान लगभग 17.5% है (इकोनॉमिक सर्वे 2023)। कृषि रसायन निर्यात वित्त वर्ष 22 में 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा (DGCI&S)। उद्योग संगठनों, विशेषकर कीटनाशक निर्माता और फॉर्मुलेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) ने बढ़े हुए अनुपालन खर्च को लेकर चिंता जताई है, जो परीक्षण और लाइसेंसिंग नियमों के कड़े होने से 15-20% तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा है कि राज्य प्राधिकरणों और पर्यावरण एजेंसियों के साथ नियामक ओवरलैप से प्रशासनिक बोझ बढ़ सकता है, जिससे घरेलू उत्पादन और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।
- अनिवार्य वैज्ञानिक परीक्षण और लाइसेंसिंग के कारण अनुपालन लागत में वृद्धि
- कीटनाशक पंजीकरण में संभावित देरी से बाजार उपलब्धता प्रभावित
- केंद्र-राज्य समन्वय के अस्पष्ट प्रावधानों से नियामक विखंडन का खतरा
- वैश्विक बाजार दबाव के बीच निर्यात प्रतिस्पर्धा पर असर
कीटनाशक नियंत्रण में संस्थागत भूमिकाएं
विधेयक कई संस्थाओं की भूमिकाओं को औपचारिक रूप देता है ताकि कीटनाशक शासन प्रभावी हो सके। CIBRC पंजीकरण और सुरक्षा मूल्यांकन की शीर्ष संस्था बनी रहेगी। MoA&FW नीति निर्धारण और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा। CPCB पर्यावरणीय प्रभावों की निगरानी करेगा, खासकर मिट्टी और पानी में कीटनाशक अवशेषों पर। FSSAI खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेष सीमा का नियंत्रण करेगा, जिसने 2022 में लगभग 5.2% उल्लंघन दर दर्ज की (FSSAI वार्षिक रिपोर्ट 2023)। DGCI&S निर्यात-आयात आंकड़े प्रदान करता है, जो निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं। उद्योग की ओर से PMFAI नीति निर्माताओं के साथ सक्रिय संवाद करता है।
| संस्था | भूमिका | विधेयक के तहत मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| CIBRC | नियामक प्राधिकरण | पंजीकरण, लाइसेंसिंग, सुरक्षा मूल्यांकन |
| MoA&FW | नीति और कार्यान्वयन | मसौदा तैयार करना, प्रवर्तन, समन्वय |
| CPCB | पर्यावरण निगरानी | अवशेष निगरानी, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन |
| FSSAI | खाद्य सुरक्षा | खाद्य उत्पादों में अवशेष सीमा का प्रवर्तन |
| PMFAI | उद्योग निकाय | वकालत, अनुपालन प्रतिक्रिया |
| DGCI&S | व्यापार आंकड़े | निर्यात-आयात सांख्यिकी |
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम यूरोपीय संघ की कीटनाशक नियमन
यूरोपीय संघ का नियम (EC) संख्या 1107/2009 कीटनाशक नियमन का एक आदर्श उदाहरण है। इसमें कड़े पूर्व-बाजार अनुमोदन और बाद-बाजार निगरानी के साथ पर्यावरणीय जोखिम मूल्यांकन और सार्वजनिक पारदर्शिता, हितधारक परामर्श अनिवार्य हैं। इस ढांचे के कारण पिछले दशक में हानिकारक कीटनाशकों के उपयोग में 30% की कमी आई है (EU आयोग रिपोर्ट 2022)। इसके विपरीत, भारत का विधेयक पंजीकरण और लाइसेंसिंग पर जोर देता है, लेकिन सार्वजनिक परामर्श और केंद्र-राज्य नियामक समन्वय के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।
| पहलू | भारत: कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 | EU: नियम (EC) संख्या 1107/2009 |
|---|---|---|
| पूर्व-बाजार अनुमोदन | CIBRC के माध्यम से अनिवार्य पंजीकरण और लाइसेंसिंग | पर्यावरणीय जोखिम सहित कड़ा पूर्व-बाजार मूल्यांकन |
| बाद-बाजार निगरानी | सीमित स्पष्ट बाद-बाजार निगरानी | अनिवार्य बाद-बाजार निगरानी और रिपोर्टिंग |
| पर्यावरणीय जोखिम मूल्यांकन | वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक लेकिन सीमित समाकलन | व्यापक पर्यावरणीय जोखिम मूल्यांकन अनिवार्य |
| सार्वजनिक पारदर्शिता | अनिवार्य हितधारक परामर्श नहीं | अनिवार्य सार्वजनिक परामर्श और पारदर्शिता |
| केंद्र-राज्य समन्वय | अस्पष्ट प्रावधान, विखंडन का खतरा | केंद्रीकृत EU ढांचा और समन्वित नियम |
महत्वपूर्ण अंतराल और उद्योग की चुनौतियां
विधेयक केंद्र और राज्यों के बीच कीटनाशक नियमन को स्पष्ट रूप से समन्वित नहीं करता, जिससे नियामक विखंडन का खतरा रहता है। उद्योग के अनुसार, इससे अनुपालन बोझ बढ़ेगा और अनुमोदन में देरी हो सकती है। हितधारकों की सलाह और सार्वजनिक पारदर्शिता के स्पष्ट प्रावधानों का अभाव जवाबदेही को कमजोर करता है। साथ ही, बढ़े हुए अनुपालन खर्च छोटे और मध्यम उद्यमों पर अधिक प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे नवाचार में कमी आ सकती है। ये अंतराल सतत कृषि और व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे की राह
- केंद्र और राज्य कीटनाशक प्राधिकरणों के बीच स्पष्ट समन्वय तंत्र स्थापित करें ताकि नियामक ओवरलैप से बचा जा सके।
- हितधारक परामर्श और सार्वजनिक पारदर्शिता को अनिवार्य कर जवाबदेही बढ़ाएं।
- एमएसएमई को समर्थन देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए चरणबद्ध अनुपालन लागत संरचना लागू करें।
- अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बाद-बाजार निगरानी और पर्यावरणीय जोखिम मूल्यांकन को मजबूत करें।
- नियामक एजेंसियों की क्षमता बढ़ाएं ताकि समय पर और वैज्ञानिक निर्णय लिए जा सकें।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह विधेयक कीटनाशक अधिनियम, 1968 की जगह लेता है और कीटनाशक नियमन को पर्यावरण मंत्रालय के अधीन केंद्रीकृत करता है।
- यह विधेयक कीटनाशकों और विक्रेताओं के पंजीकरण और लाइसेंसिंग को सेंट्रल कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति के माध्यम से अनिवार्य करता है।
- यह विधेयक कीटनाशक पंजीकरण से पहले सार्वजनिक हितधारक परामर्श को स्पष्ट रूप से आवश्यक बताता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि विधेयक कीटनाशक नियमन को पर्यावरण मंत्रालय के बजाय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीकृत करता है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक में CIBRC के माध्यम से पंजीकरण और लाइसेंसिंग अनिवार्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि विधेयक में सार्वजनिक हितधारक परामर्श के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।
भारत में कीटनाशक अवशेष नियंत्रण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी करता है।
- कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 में अवशेष निगरानी का दायित्व केवल सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को दिया गया है।
- 2022 में खाद्य नमूनों में कीटनाशक अवशेष उल्लंघन दर लगभग 5.2% थी।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि FSSAI खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि अवशेष निगरानी CPCB और FSSAI दोनों के बीच साझा है, केवल CPCB को नहीं दी गई। कथन 3 सही है, जैसा कि FSSAI वार्षिक रिपोर्ट 2023 में बताया गया है।
मुख्य प्रश्न
प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 को लेकर उद्योग हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं की आलोचनात्मक समीक्षा करें। इसके भारत के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभावों पर चर्चा करें और इन चिंताओं के समाधान के लिए सुझाव दें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (राजनीति और शासन), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और कृषि)
- झारखंड कोण: झारखंड की कृषि में धान और मक्का जैसे फसलों के लिए कीटनाशकों पर भारी निर्भरता है, जिससे नियामक बदलाव सीधे स्थानीय किसानों और कृषि रसायन व्यवसायों को प्रभावित करता है।
- मुख्य बिंदु: कीटनाशक नियंत्रण को राज्य स्तर पर लागू करने की चुनौतियों, छोटे किसानों पर प्रभाव और स्थानीय कृषि रसायन निर्माताओं के व्यापार प्रभावों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह विधेयक कीटनाशक अधिनियम, 1968 की जगह लेकर कीटनाशकों के निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपयोग को आधुनिक और सुव्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करने, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रावधानों को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।
विधेयक के तहत कीटनाशक पंजीकरण के लिए शीर्ष नियामक संस्था कौन है?
सेंट्रल कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) कीटनाशक पंजीकरण, लाइसेंसिंग और सुरक्षा मूल्यांकन की शीर्ष प्राधिकरण है।
विधेयक पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा कानूनों से कैसे जुड़ा है?
यह विधेयक पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरणीय निगरानी और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेष नियंत्रण से मेल खाता है।
कीटनाशक उद्योग ने विधेयक को लेकर कौन-कौन सी मुख्य चिंताएं जताई हैं?
उद्योग की मुख्य चिंताएं बढ़ी हुई अनुपालन लागत (15-20%), केंद्र और राज्यों के बीच नियामक ओवरलैप, पंजीकरण में देरी, और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर संभावित प्रभाव हैं।
भारत की कीटनाशक नियमन व्यवस्था यूरोपीय संघ के ढांचे से कैसे भिन्न है?
यूरोपीय संघ कड़े पूर्व-बाजार अनुमोदन, अनिवार्य सार्वजनिक परामर्श और पर्यावरणीय जोखिम के समेकित मूल्यांकन को लागू करता है, जिससे हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग कम हुआ है, जबकि भारत के विधेयक में ये व्यापक प्रावधान नहीं हैं।