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परिचय: भारत में ड्रोन निर्माण का परिदृश्य और रणनीतिक आवश्यकता

ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में भारत ने ड्रोन नियम, 2021 के लागू होने के बाद से तेजी से नियम और उद्योग विकास देखा है, जो एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत जारी किए गए हैं। फरवरी 2026 तक, 38,500 से अधिक ड्रोन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के साथ पंजीकृत हैं, और लगभग 40,000 प्रमाणित रिमोट पायलट मौजूद हैं। रक्षा मंत्रालय ने 2025-26 के बजट में स्वदेशी UAV अनुसंधान और विकास के लिए ₹500 करोड़ आवंटित किए हैं, जो ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देने का परिचायक है। इस पहल का मकसद भारत के 2024 के $200 मिलियन के UAV आयात बिल को घटाना, रक्षा क्षमता बढ़ाना और 2030 तक $90-100 बिलियन के वैश्विक ड्रोन बाजार में हिस्सेदारी हासिल करना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा उत्पादन, प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – UAV और AI का समावेश
  • निबंध: रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता और भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता

भारत में ड्रोन संचालन के लिए नियमावली

ड्रोन नियम, 2021, जो एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 की धारा 3 और 4 के तहत जारी हुए हैं, DGCA को ड्रोन प्रमाणन, पायलट लाइसेंसिंग और संचालन के नियम बनाने का अधिकार देते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) नागरिक ड्रोन उपयोग की नीति बनाता है, जबकि DGCA सुरक्षा मानकों और अनुपालन की देखरेख करता है। डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 के तहत मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत स्वदेशी निर्माण को प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें UAV भी शामिल हैं। ड्रोन संचालन में साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (धारा 66 और 69) के प्रावधान लागू होते हैं।

  • ड्रोन नियम 2021: ड्रोन पंजीकरण, पायलट प्रमाणन और संचालन क्षेत्र के लिए नियमावली
  • DGCA: रिमोट पायलट के लिए यूनिक आईडी नंबर (UIN) और लाइसेंस जारी करता है
  • DPP 2023: रक्षा UAV में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्राथमिकता
  • आईटी एक्ट धारा 66 और 69: ड्रोन डेटा की अवैध पहुँच और अवरोधन से सुरक्षा

आर्थिक पहलू: बाजार क्षमता और स्वदेशी क्षमता निर्माण

वैश्विक ड्रोन बाजार, जिसकी कीमत 2025 में $30 बिलियन थी, 25% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 2030 तक लगभग $90-100 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है (उद्योग अनुमान, 2026)। भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन और लगभग 40,000 DGCA-प्रमाणित पायलट शामिल हैं, जो 244 स्वीकृत प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा समर्थित हैं। सरकार ने 2025-26 में UAV के लिए ₹500 करोड़ रक्षा अनुसंधान बजट आवंटित किया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य है, जो 2024 में लगभग $200 मिलियन था। ग्रामीण नक्शांकन और फसल बीमा में ड्रोन के उपयोग को प्रमुख योजनाओं जैसे स्वामित्व और PMFBY में दिखाया गया है।

  • ड्रोन आयात बिल (2024): $200 मिलियन, ज्यादातर चीन और इज़राइल से
  • सरकारी योजनाएं: स्वामित्व में संपत्ति नक्शांकन के लिए ड्रोन; PMFBY में फसल नुकसान आकलन के लिए UAV का उपयोग
  • निजी क्षेत्र: ड्रोन निर्माण और AI एकीकरण में उभरते स्टार्टअप, परंतु पैमाना सीमित
  • प्रशिक्षण नेटवर्क: 2026 तक 244 DGCA-स्वीकृत ड्रोन प्रशिक्षण संस्थान

भारत की ड्रोन आत्मनिर्भरता में प्रमुख संस्थान

भारत के ड्रोन निर्माण और नियमावली तंत्र की रीढ़ कई संस्थान हैं। DGCA नागरिक ड्रोन संचालन का नियमन करता है, जबकि MoCA नीति निर्धारण करता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) सैन्य UAV के लिए स्वदेशी अनुसंधान का नेतृत्व करता है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर निर्माण करता है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देता है, और नीति आयोग ड्रोन तकनीक में AI और ऑटोमेशन के लिए नीति सलाह देता है।

  • DGCA: ड्रोन प्रमाणन, पायलट लाइसेंसिंग, संचालन निगरानी
  • MoCA: नागरिक ड्रोन नीति और नियमावली
  • DRDO और HAL: स्वदेशी रक्षा UAV अनुसंधान एवं निर्माण
  • DPIIT: उद्योग संवर्धन और विदेशी निवेश प्रोत्साहन
  • नीति आयोग: AI, 5G और ऑटोमेशन पर नीति सलाहकार

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन ड्रोन निर्माण में

मापदंड चीन भारत
वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 70% से अधिक, DJI और अन्य सरकारी समर्थित कंपनियों के नेतृत्व में 5% से कम, उभरता हुआ पारिस्थितिकी तंत्र और आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रौद्योगिकी एकीकरण उन्नत AI, 5G और ऑटोमेशन व्यापक रूप से लागू AI और 5G एकीकरण के शुरुआती चरण; नियमों में सुधार और स्वदेशी R&D पर ध्यान
निर्माण पैमाना बड़े पैमाने पर उच्च सटीकता वाले घटक निर्माण उच्च सटीकता निर्माण सीमित; प्रमुख घटकों के लिए आयात पर निर्भरता
नियामक माहौल केंद्रीकृत राज्य नियंत्रण, आसान अनुमोदन प्रक्रिया विकसित होता हुआ विकेंद्रीकृत तंत्र, DGCA और MoCA के तहत
रक्षा उपयोग व्यापक सैन्य UAV तैनाती और निर्यात DRDO और HAL के माध्यम से स्वदेशी रक्षा UAV परियोजनाओं का विकास

भारत के ड्रोन निर्माण क्षेत्र की चुनौतियां

भारत के ड्रोन क्षेत्र में उच्च सटीकता वाले घटकों के निर्माण में कमी है, जिससे उन्नत UAV उत्पादन में बाधा आती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित है क्योंकि पूंजी और तकनीक तक पहुंच कठिन है। AI और 5G प्रौद्योगिकी के अपनाने में चीन जैसे वैश्विक नेताओं से पिछड़ रहा है, जो नवाचार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है। रक्षा मंत्रालय के तहत सैन्य UAV के लिए नियमावली अभी विकसित हो रही है, जिससे DGCA के नागरिक नियमों के साथ समन्वय में दिक्कतें आती हैं।

  • सेंसर, एवियोनिक्स और प्रोपल्शन सिस्टम का सीमित घरेलू उत्पादन
  • उन्नत UAV अनुसंधान में निजी क्षेत्र का कम निवेश
  • वैश्विक मानकों की तुलना में AI और 5G का धीमा अपनाना
  • नागरिक और रक्षा ड्रोन नियमों के बीच समन्वय और स्पष्टता की कमी

महत्व और आगे का रास्ता

  • लक्षित प्रोत्साहनों और तकनीकी साझेदारी के जरिए उच्च सटीकता घटक निर्माण को मजबूत करें।
  • DPIIT और रक्षा मंत्रालय की योजनाओं के तहत FDI नियमों में ढील और R&D अनुदान से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाएं।
  • नीति आयोग, DRDO और उद्योग के बीच सहयोग से AI और 5G एकीकरण को तेज करें।
  • नागरिक और सैन्य ड्रोन नियमों को समेकित कर प्रमाणन और संचालन प्रक्रियाओं को सरल बनाएं।
  • ड्रोन का उपयोग सामाजिक-आर्थिक योजनाओं (स्वामित्व, PMFBY) में बढ़ाएं ताकि नागरिक उपयोग के उदाहरण स्थापित हों और बाजार में विश्वास पैदा हो।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के ड्रोन नियम, 2021 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ड्रोन नियम, 2021 को एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत लागू किया गया है।
  2. भारत में सभी ड्रोन संचालन के लिए मुख्य नियामक रक्षा मंत्रालय है।
  3. नियम DGCA-प्रमाणित रिमोट पायलट लाइसेंसिंग प्रदान करते हैं।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि ड्रोन नियम, 2021 एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत जारी किए गए हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि नागरिक ड्रोन संचालन के लिए मुख्य नियामक DGCA है, जो MoCA के अधीन है, रक्षा मंत्रालय नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि नियम DGCA-प्रमाणित रिमोट पायलट लाइसेंसिंग प्रदान करते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की ड्रोन आयात निर्भरता के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. भारत का UAV आयात बिल 2024 में लगभग $200 मिलियन था।
  2. भारत के 80% से अधिक ड्रोन घरेलू निर्माण के हैं।
  3. चीन का वैश्विक ड्रोन बाजार में 70% से अधिक हिस्सा है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है, जो रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत में 80% से अधिक ड्रोन आयातित हैं। कथन 3 सही है, चीन के पास वैश्विक बाजार में 70% से अधिक हिस्सेदारी है।

मेन प्रश्न

ड्रोन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता की पहल का रणनीतिक महत्व बताएं। इसके नियम, आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों का विश्लेषण करें और वैश्विक UAV बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और उद्योग)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में खनिज अन्वेषण और कृषि निगरानी में ड्रोन आधारित नई तकनीकों का उदय।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड में ड्रोन आधारित नक्शांकन और संसाधन प्रबंधन की संभावनाओं को उजागर करते हुए राज्य विकास को राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता से जोड़ना।
भारत में ड्रोन संचालन के लिए कौन से कानूनी प्रावधान हैं?

ड्रोन संचालन ड्रोन नियम, 2021 के तहत एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं। DGCA, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन है, प्रमाणन, पायलट लाइसेंसिंग और संचालन नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर 2023 ड्रोन आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ावा देता है?

DPP 2023 रक्षा उपकरणों, जिनमें UAV भी शामिल हैं, के लिए स्वदेशी निर्माण और अनुसंधान को प्राथमिकता देता है और मेक इन इंडिया के तहत आयात निर्भरता कम करने के लिए खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा देता है।

2026 तक भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र का आकार क्या है?

फरवरी 2026 तक भारत में 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन, लगभग 40,000 DGCA प्रमाणित रिमोट पायलट, और 244 DGCA-स्वीकृत प्रशिक्षण संस्थान हैं।

ड्रोन निर्माण और नियमावली के लिए भारत के प्रमुख संस्थान कौन से हैं?

प्रमुख संस्थानों में DGCA और MoCA (नियमन के लिए), DRDO और HAL (रक्षा UAV अनुसंधान और निर्माण), DPIIT (उद्योग संवर्धन), और नीति आयोग (AI और ऑटोमेशन नीति सलाह) शामिल हैं।

भारत के ड्रोन निर्माण क्षेत्र की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में उच्च सटीकता वाले घटकों का सीमित उत्पादन, निजी क्षेत्र में कम निवेश, AI और 5G तकनीक का धीमा अपनाना, तथा नागरिक और रक्षा ड्रोन नियमों में समन्वय की कमी शामिल है।

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