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झारखंड में धार्मिक आंदोलन

झारखंड में धार्मिक आंदोलन - जैन धर्म और बौद्ध धर्मझारखंड, जो अपने जनजातीय और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, विभिन्न धार्मिक आंदोलनों से भी गहराई से प्रभावित रहा है। यहाँ जैन धर्म और बौद्ध धर्म जैसे आंदोलनों ने न केवल धार्मिक जीवन को आकार दिया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन धार्मिक धाराओं ने राज्य के लोगों के विचारों और आचार-व्यवहार पर गहरा असर डाला है, जिससे झारखंड की धार्मिक विविधता और समृद्ध हुई है।
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In brief

झारखंड में धार्मिक आंदोलन - जैन धर्म और बौद्ध धर्मझारखंड, जो अपने जनजातीय और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, विभिन्न धार्मिक आंदोलनों से भी गहराई से प्रभावित रहा है। यहाँ जैन धर्म और बौद्ध धर्म जैसे आंदोलनों ने न केवल धार्मिक जीवन को आकार दिया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन धार्मिक धाराओं ने राज्य के लोगों के विचारों और आचार-व्यवहार पर गहरा असर डाला है, जिससे झारखंड की धार्मिक विविधता और समृद्ध हुई है।

### झारखंड में धार्मिक आंदोलन – जैन धर्म और बौद्ध धर्म

झारखंड, ऐतिहासिक रूप से जनजातीय और सांस्कृतिक धरोहर में समृद्ध, विभिन्न धार्मिक आंदोलनों से भी प्रभावित रहा है, विशेष रूप से जैन धर्म और बौद्ध धर्म। इन धर्मों ने क्षेत्र पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे इसकी संस्कृति, कला और धार्मिक प्रथाओं का विकास हुआ। नीचे जैन धर्म के प्रभाव और झारखंड में इन आंदोलनों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्थलों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।

### जैन धर्म का प्रभाव

झारखंड के धार्मिक इतिहास में जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ Parasnath Hill जैनों के लिए सबसे पूजनीय तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। झारखंड में जैन धर्म का प्रभाव प्राचीन शताब्दियों BCE तक देखा जा सकता है, जहाँ यह माना जाता है कि कई जैन तीर्थंकरों ने इस क्षेत्र में निर्वाण प्राप्त किया।

#### Parasnath Hill (1,365 मीटर / 4,478 फीट)

स्थान: Parasnath Hill, गिरिडीह जिले में स्थित, जैनों के लिए एक पवित्र स्थल माना जाता है और इसका नाम भगवान पार्श्वनाथ, 23वें तीर्थंकर के नाम पर रखा गया है।
ऐतिहासिक महत्व:
– जैन ग्रंथों के अनुसार, भगवान पार्श्वनाथ ने इस पहाड़ी पर लगभग 717 BCE में निर्वाण प्राप्त किया।
– यह पहाड़ी प्रसिद्ध है क्योंकि 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 का यहाँ निर्वाण प्राप्त करने का विश्वास है।
– इस पहाड़ी को जैन धर्म की धार्मिक महत्वता के कारण “जैन धर्म का मक्का” कहा जाता है, जहाँ दुनिया भर से जैन भक्तों द्वारा तीर्थ यात्रा की जाती है।

![Religious Movements in Jharkhand](https://learnpro.in/wp-content/uploads/2024/11/image-99.jpg)

Parasnath Hills.

#### Parasnath Hill से जुड़े तीर्थंकर

Parasnath Hill पर निम्नलिखित जैन तीर्थंकरों ने निर्वाण प्राप्त किया, जिसने इसे एक प्रमुख धार्मिक स्थल बना दिया:

1. अजीतनाथ – दूसरे तीर्थंकर
2. संभवनाथ – तीसरे तीर्थंकर
3. अभिनंदन नाथ – चौथे तीर्थंकर
4. सुमतिनाथ – पांचवे तीर्थंकर
5. पद्मप्रभु – छठे तीर्थंकर
6. सुपार्श्वनाथ – सातवें तीर्थंकर
7. चंद्रप्रभु – आठवें तीर्थंकर
8. सुविधिनाथ – नौवें तीर्थंकर
9. शीतलनाथ – दसवें तीर्थंकर
10. श्रेयांसनाथ – ग्यारहवें तीर्थंकर
11. वासुपुज्य – बारहवें तीर्थंकर
12. विमलनाथ – तेरहवें तीर्थंकर
13. अनंतनाथ – चौदहवें तीर्थंकर
14. धर्मनाथ – पंद्रहवें तीर्थंकर
15. शांतिनाथ – सोलहवें तीर्थंकर
16. कुंथुनाथ – सत्रहवें तीर्थंकर
17. अरनाथ – अठारहवें तीर्थंकर
18. मल्लिनाथ – उन्नीसवें तीर्थंकर
19. मुनिसुव्रतनाथ – बीसवें तीर्थंकर
20. पार्श्वनाथ – तेईसवें तीर्थंकर और Parasnath Hill के नाम के स्रोत

तीर्थ यात्रा और सांस्कृतिक महत्व:
– यह पहाड़ी जैन अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसे वे अत्यधिक आध्यात्मिक शक्ति और पवित्रता का स्थान मानते हैं।
– इस स्थल में तीर्थंकरों को समर्पित कई प्राचीन मंदिर शामिल हैं, और यह धार्मिक उत्सवों और अनुष्ठानों का केंद्र है।
– इसकी उच्च आध्यात्मिक मूल्य के कारण, Parasnath Hill को जैन धर्म में “शिखरजी” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “सम्मानित चोटी।”

### झारखंड में अन्य महत्वपूर्ण जैन स्थल और सांस्कृतिक प्रभाव

1. चोटानागपुर क्षेत्र (आधुनिक दिन धनबाद)
सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र: ऐतिहासिक रूप से, चोटानागपुर पठार जैन संस्कृति और साहित्य का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र ने जैन धार्मिक प्रथाओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों के विकास को बढ़ावा दिया।
प्रमुख व्यक्ति और कार्य: जैन साधु और विद्वान इस क्षेत्र में आते रहे, जिसने इसे ज्ञान और आध्यात्मिकता का केंद्र बनाने में योगदान दिया।
2. दमोदर और कसाय नदी घाटियाँ
पुरातात्त्विक अवशेष: दमोदर और कसाय नदियों की घाटियों में जैन धर्म से जुड़े कई अवशेष पाए जाते हैं, जिनमें प्राचीन मूर्तियाँ, शिलालेख और कलाकृतियाँ शामिल हैं।
प्रतीकात्मक महत्व: ये घाटियाँ जैन साधुओं और व्यापारियों द्वारा लिए जाने वाले मार्गों का हिस्सा थीं, और यहाँ पाए जाने वाले कलाकृतियाँ क्षेत्र में धार्मिक सामंजस्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दर्शाती हैं।
3. हनुमंद गांव (पालामू जिला)
प्राचीन जैन मूर्तियाँ: हनुमंद गांव पालामू में जैन धर्म के लिए एक और महत्वपूर्ण स्थल है। पुरातत्वविदों ने यहाँ प्राचीन जैन मूर्तियाँ और अन्य अवशेष खोजे हैं, जो दर्शाते हैं कि यह गांव एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र था।
संरक्षित कलाकृतियाँ: हुमाज में पाए गए मूर्तियाँ झारखंड में जैन धर्म के प्रारंभिक प्रसार को समझने में महत्वपूर्ण हैं और एक समृद्ध जैन समुदाय की उपस्थिति को इंगित करती हैं।
4. बवानादिह और बनश्री (सिंहभूम)
जैन और बौद्ध अवशेष: बवानादिह और बनश्री जैसे स्थलों में जैन धर्म से जुड़े पत्थर की स्लैब, पत्थर के औज़ार और अंगूठी के पत्थर पाए जाते हैं। ये खोजें क्षेत्र में जैन धर्म और बौद्ध धर्म के प्रभाव को दर्शाती हैं।
सांस्कृतिक संगम: ये क्षेत्र संभवतः जैन और बौद्ध समुदायों द्वारा साझा किए गए थे, जो धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक मिश्रण के एक युग को उजागर करते हैं।

*

### झारखंड में जैन ग्रंथ और शब्दावली

लोहे-आयागदा: जैन ग्रंथों में, भगवान महावीर की यात्रा में “लोहे-आयागदा” का उल्लेख है, जहाँ “आयागदा” का अर्थ है लोहे का स्थान, जो झारखंड के समृद्ध खनिज संसाधनों के साथ मेल खाता है।
Parasnath Hill: जैन साहित्य में इसे एक पवित्र स्थान के रूप में जाना जाता है जहाँ कई तीर्थंकरों ने मुक्ति प्राप्त की। इस नाम और इससे जुड़ी श्रद्धा क्षेत्र के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है।

## झारखंड में जैन और बौद्ध स्थल

### जैन स्थल

1. सिंहभूम क्षेत्र
बेनिसागर:
– 7वीं शताब्दी की जैन मूर्तियाँ शामिल हैं।
स्थानीय विश्वास: सिंहभूम के प्रारंभिक निवासियों ने जैन धर्म में विश्वास किया, जिसे “सरक” जैन धर्म कहा जाता था। इस जैन समुदाय को अंततः स्थानीय हो जनजाति द्वारा बाहर निकाल दिया गया।
2. कोलकेश्वरी पहाड़ी (चतरा जिले में स्थित)
– इसे जैन धर्म से जुड़े एक पवित्र स्थल के रूप में माना जाता है।
– यहाँ कई जैन मंदिर और कलाकृतियाँ हैं।
– स्थानीय रूप से, इसे अन्य जनजातीय समूहों द्वारा भी पवित्र माना जाता है, जो इसे दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं।

*

### बौद्ध स्थल

1. मूर्ति्या गांव (पालामू जिला)
– इस गांव में भगवान बुद्ध की ध्यान मुद्रा में बैठे हुए एक मूर्ति है, जो सिंहासन पर है।
2. कासमार गांव
– इसमें बौद्ध महत्व की अवशेष शामिल हैं, जिनमें प्राचीन मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ हैं।
3. सूरजकुंड (हजारीबाग जिला)
– गर्म जल के झरनों और इस क्षेत्र में पाए गए महत्वपूर्ण बौद्ध मूर्तियों के लिए जाना जाता है।
4. बेलवटिका (देवघर जिला)
– बौद्ध अवशेषों से भरा एक महत्वपूर्ण स्थल।
5. कटुंबा गांव (हजारीबाग जिला)
– इसमें बौद्ध प्रथाओं से जुड़े अवशेष हैं, जो इसे एक बौद्ध केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण बनाते हैं।
6. पटना गुफा (रांची के निकट)
– प्राचीन बौद्ध अवशेषों और मूर्तियों का घर।
7. डिउरिया-कला गांव (देवघर जिले में स्थित)
– इसमें प्राचीन बौद्ध मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ शामिल हैं।
– यहाँ एक प्रसिद्ध स्तूप है जो पारंपरिक बौद्ध वास्तुकला शैली में निर्मित है, जो झारखंड में बौद्ध धर्म के प्रभाव को दर्शाता है।

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### अन्य उल्लेखनीय बौद्ध स्थल

1. घोलमारा
– उस क्षेत्र में स्थित है जहाँ एक टूटी हुई पत्थर की बुद्ध मूर्ति मिली, जो बौद्ध प्रभाव की उपस्थिति को दर्शाती है।
2. इचागढ़ (साराइकेला-खरसावान जिला)
तारा मूर्ति के लिए प्रसिद्ध, जो एक बौद्ध देवी को समर्पित है। यह मूर्ति रांची संग्रहालय में संरक्षित है।
3. सितागढ़ पहाड़ी (हजारीबाग जिला)
– बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण बौद्ध विहार।
– इसमें एक स्तूप भी है, जो इसे धार्मिक महत्व का स्थल बनाता है।

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### अतिरिक्त ऐतिहासिक नोट्स

पाला वंश के शासन के दौरान झारखंड में बौद्ध धर्म का विकास हुआ, विशेष रूप से वज्रयान संप्रदाय का।
– झारखंड में कुमार गुप्त गुफाएँ जैसे प्राचीन स्थल भी हैं, जो क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रभाव का प्रमाण प्रदान करते हैं।

*

यह जैन और बौद्ध स्थलों की विस्तृत सूची झारखंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को उजागर करती है, जहाँ जैन धर्म और बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं, जो पवित्र स्थलों, मंदिरों और अवशेषों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में फैली हुई हैं। ये स्थल न केवल झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं, बल्कि जैन धर्म और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए तीर्थ यात्रा के स्थल भी हैं।

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आधिकारिक वेबसाइट: [https://www.jpsc.gov.in/](https://www.jpsc.gov.in/)

UPSC के लिए अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

Parasnath Hill से जुड़े जैन तीर्थंकरों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. कथन 1: सभी 24 तीर्थंकरों ने Parasnath Hill पर निर्वाण प्राप्त किया।
  2. कथन 2: भगवान पार्श्वनाथ 23वें तीर्थंकर हैं और Parasnath Hill से एक महत्वपूर्ण संबंध है।
  3. कथन 3: Parasnath Hill को ‘जैन धर्म का मक्का’ कहा जाता है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

जैन धर्म में महत्व रखने वाले निम्नलिखित क्षेत्रों और उनके महत्व पर विचार करें:

  1. कथन 1: चोटानागपुर पठार जैन संस्कृति और साहित्य का केंद्र था।
  2. कथन 2: हनुमंद गांव मुख्यतः बौद्ध प्रभावों का प्रतिनिधित्व करता है।
  3. कथन 3: दमोदर नदी घाटी में जैन धर्म से संबंधित कलाकृतियाँ हैं।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

मेन्स अभ्यास प्रश्न

✍ मेन्स अभ्यास प्रश्न
झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में जैन धर्म की भूमिका की समालोचना करें।
250 शब्द15 अंक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Parasnath Hill का जैन धर्म में क्या महत्व है?

Parasnath Hill जैनों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है, जिसका नाम भगवान पार्श्वनाथ, 23वें तीर्थंकर के नाम पर रखा गया है। इसका ऐतिहासिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह माना जाता है कि 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 ने वहाँ निर्वाण प्राप्त किया, जिससे यह हजारों जैन भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति का केंद्र बन गया है।

झारखंड में जैन धर्म ने सांस्कृतिक प्रथाओं को कैसे प्रभावित किया?

झारखंड के सांस्कृतिक परिदृश्य पर जैन धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा, विशेष रूप से चोटानागपुर क्षेत्र में जहाँ यह फला-फूला। यह प्रभाव कलात्मक अभिव्यक्तियों, साहित्यिक योगदानों, और मंदिरों की वास्तुकला में स्पष्ट है, जो क्षेत्र में जैन धर्म की गहरी जड़ें दर्शाते हैं।

झारखंड में जैन धर्म की ऐतिहासिक उपस्थिति का समर्थन करने वाले पुरातात्त्विक साक्ष्य क्या हैं?

दमोदर और कसाय नदी घाटियों में पुरातात्त्विक स्थलों में जैन इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण मिलता है, जिसमें मूर्तियाँ, शिलालेख, और कलाकृतियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से, हनुमंद गांव जैसे स्थलों ने प्राचीन जैन मूर्तियों को उजागर किया है जो झारखंड में जैन समुदायों के प्रसार और प्रभाव को दर्शाती हैं।

झारखंड में जैन धर्म और बौद्ध धर्म के संगम को दर्शाने वाले अन्य उल्लेखनीय स्थल कौन से हैं?

Parasnath Hill के अलावा, बवानादिह और बनश्री जैसे स्थलों में पुरातात्त्विक खोजें हैं जो जैन और बौद्ध समुदायों के सह-अस्तित्व को दर्शाती हैं। ये खोजें क्षेत्र में धार्मिक सहिष्णुता और महत्वपूर्ण युगों के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान को उजागर करती हैं।

झारखंड के विकास में जैन साधुओं और विद्वानों की भूमिका क्या थी?

जैन साधुओं और विद्वानों ने प्राचीन काल में झारखंड को सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान ने धार्मिक प्रथाओं और कलात्मक विकास को बढ़ावा दिया, जिससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान पर गहरा प्रभाव पड़ा।

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