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विश्व बैंक की 'नौरिश एंड फ्लोरिश' रिपोर्ट का परिचय

विश्व बैंक ने 2024 में अपनी प्रमुख रिपोर्ट “Nourish and Flourish: Water Solutions to Feed 10 Billion People on a Livable Planet” जारी की। यह रिपोर्ट 2050 तक अनुमानित 10 अरब की वैश्विक जनसंख्या के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की चुनौती को उजागर करती है। इसमें जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए विश्व स्तर पर समेकित नीतिगत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध (वैश्विक पर्यावरण शासन, विश्व बैंक की पहलें)
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था (कृषि, जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण)
  • निबंध: सतत विकास, जल-खाद्य-ऊर्जा संबंध

जल और कृषि: आर्थिक एवं पर्यावरणीय संबंध

कृषि विश्वभर में लगभग 70-80% ताजे पानी की खपत करती है, जिससे यह सबसे बड़ा जल उपभोक्ता है (FAO, 2022)। भारत में सिंचाई कृषि जल उपयोग का लगभग 90% हिस्सा है, जिसमें जल-सघन फसलों का हिस्सा 70% तक है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)। जल संकट के कारण 2050 तक वैश्विक फसल उत्पादन में 30% तक की गिरावट का खतरा है, जो सीधे खाद्य उपलब्धता और कीमतों को प्रभावित करेगा (विश्व बैंक, 2024)।

  • वैश्विक जल बाजार 2027 तक 914 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान, 6.7% वार्षिक वृद्धि दर के साथ (विश्व बैंक, 2024)।
  • भारत में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति वर्ष ₹3.5 लाख करोड़ का आवंटन, जो सिंचाई दक्षता और जल संरक्षण पर केंद्रित है।
  • ड्रिप इरिगेशन जैसी जल-संरक्षण तकनीकों में निवेश से कृषि उत्पादन में 20-30% तक वृद्धि संभव (विश्व बैंक, 2024)।

भारत में जल प्रबंधन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत का कानूनी ढांचा जल संसाधनों समेत पर्यावरण संरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 48A के तहत अनिवार्य करता है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (1988 में संशोधित) के सेक्शन 3-5 जल प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को जल संसाधनों की सुरक्षा सहित पर्यावरणीय सुरक्षा लागू करने का अधिकार देता है।

राष्ट्रीय जल नीति 2012 सतत जल प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश प्रदान करती है, जिसमें मांग प्रबंधन और कुशल उपयोग पर जोर है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के सेक्शन 3 के तहत जल-सघन कृषि से जुड़े खाद्य वस्तुओं का नियमन संभव है, जो अप्रत्यक्ष रूप से जल उपयोग पैटर्न को प्रभावित करता है।

जल और कृषि नीतियों को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख संस्थान

  • विश्व बैंक: विश्व स्तर पर जल और कृषि परियोजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद प्रदान करता है।
  • फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO): खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र एजेंसी।
  • केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत: जल संसाधन प्रबंधन के लिए शीर्ष तकनीकी संस्था।
  • जल शक्ति मंत्रालय, भारत: जल नीति के क्रियान्वयन और संसाधन प्रबंधन के लिए जिम्मेदार।
  • इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (IWMI): जल और कृषि के संबंध में शोध करता है।
  • नीति आयोग: जल और कृषि क्षेत्रों में सुधारों के लिए नीति समन्वय करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और इज़राइल की कृषि में जल प्रबंधन रणनीति

मापदंडभारतइज़राइल
कृषि जल उपयोगकुल जल खपत का लगभग 90% (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)2000 के बाद से उन्नत तकनीकों से 50% तक कमी (FAO, 2023)
जल-संरक्षण तकनीकों की अपनाने की दरड्रिप इरिगेशन सीमित, PMKSY के तहत विस्तार को बढ़ावाड्रिप इरिगेशन और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण व्यापक
फसल उत्पादन पर प्रभावजल संकट के कारण 2050 तक 30% तक उत्पादन में कमी का खतरा2000 से फसल उत्पादन में 25% तक वृद्धि
नीतिगत ढांचाजल-खाद्य-पर्यावरण शासन में विखंडनजल और कृषि प्रबंधन के समेकित नीतियां

जल-खाद्य-पर्यावरण शासन में प्रमुख खामियां

मौजूदा नीतियों के बावजूद, भारत समेत कई देशों में जल उपयोग दक्षता, कृषि उत्पादन और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ संबोधित करने वाला समेकित शासन तंत्र नहीं है। संस्थागत भूमिकाओं का विखंडन संसाधनों के उचित आवंटन और नीतिगत समन्वय में बाधा डालता है। यह स्थिति जल-संरक्षण तकनीकों और सतत कृषि प्रथाओं के विस्तार में रुकावट बनती है।

  • एकीकृत जल-खाद्य-पर्यावरण शासन के अभाव में नीतिगत टकराव होते हैं।
  • जल, कृषि और पर्यावरण मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी।
  • डेटा समेकन का अभाव निर्णय लेने में बाधा।
  • जल बचत तकनीकों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन अपर्याप्त।

महत्व और आगे का रास्ता

विश्व बैंक की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 2050 तक 10 अरब लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सतत जल प्रबंधन अनिवार्य है, बिना पृथ्वी के स्वास्थ्य को खतरे में डाले। भारत की सिंचाई दक्षता पर नीतिगत जोर (जैसे PMKSY) को जल, कृषि और पर्यावरण शासन के संस्थागत सुधारों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

  • संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए जल-खाद्य-पर्यावरण के समेकित शासन मॉडल अपनाएं।
  • इज़राइल के मॉडल से सीख लेकर जल-संरक्षण सिंचाई तकनीकों का व्यापक विस्तार करें।
  • अंतर-मंत्रालय समन्वय के जरिए डेटा आधारित नीतिगत निर्णय क्षमता बढ़ाएं।
  • जल बचत इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान में सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाएं।
  • जल प्रदूषण नियंत्रण की कानूनी कड़ाई को मजबूत कर जल गुणवत्ता की रक्षा करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह अधिनियम प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के गठन के माध्यम से जल प्रदूषण को नियंत्रित करता है।
  2. यह अधिनियम केंद्र सरकार को सीधे कृषि में जल उपयोग को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
  3. 1988 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया ताकि जल प्रदूषण नियंत्रण प्रावधानों को मजबूत किया जा सके।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की स्थापना करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह अधिनियम सीधे कृषि में जल उपयोग को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि जल प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि 1988 में संशोधन से प्रदूषण नियंत्रण प्रावधान मजबूत हुए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
राष्ट्रीय जल नीति 2012 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह नीति सभी क्षेत्रों में मांग प्रबंधन और जल उपयोग दक्षता की वकालत करती है।
  2. यह नीति केंद्र सरकार को राज्यों के सभी जल संसाधनों पर नियंत्रण का अधिकार देती है।
  3. यह नीति सतही और भूजल सहित समेकित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देती है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि नीति में मांग प्रबंधन पर जोर दिया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि जल विषय राज्य का है और केंद्र सरकार के पास सभी जल संसाधनों का नियंत्रण नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि नीति सतही और भूजल के समेकित प्रबंधन को प्रोत्साहित करती है।

मुख्य प्रश्न

भारत के जल प्रबंधन की चुनौतियों और कृषि उत्पादन लक्ष्यों के संदर्भ में विश्व बैंक की रिपोर्ट "Nourish and Flourish" का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। 2050 तक सतत खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से भारत के जल शासन को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (पर्यावरण और कृषि)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की बारिश पर निर्भर कृषि और भूजल पर निर्भरता के कारण जल प्रबंधन की दक्षता बढ़ाना आवश्यक है ताकि फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा में सुधार हो सके।
  • मुख्य बिंदु: राज्य विशेष जल संकट, आदिवासी कृषि समुदायों पर प्रभाव, और केंद्र की PMKSY योजना को स्थानीय जल संरक्षण प्रयासों के साथ जोड़ने पर चर्चा करें।
विश्व बैंक की 'Nourish and Flourish' रिपोर्ट का महत्व क्या है?

यह रिपोर्ट 2050 तक 10 अरब लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सतत जल प्रबंधन को अनिवार्य बताती है, जल-खाद्य-पर्यावरण के आपसी संबंध को रेखांकित करती है और कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रह के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए समेकित नीतियों की जरूरत बताती है।

भारत की राष्ट्रीय जल नीति 2012 जल प्रबंधन को कैसे संबोधित करती है?

यह नीति मांग प्रबंधन, जल उपयोग दक्षता और सतही व भूजल के समेकित प्रबंधन को बढ़ावा देती है, साथ ही संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए जल संसाधनों के केंद्रीकरण से बचती है।

PMKSY भारत के जल प्रबंधन में क्या भूमिका निभाता है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) सिंचाई ढांचे को बेहतर बनाने, जल-संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने और कृषि में जल संरक्षण को बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष ₹3.5 लाख करोड़ का आवंटन करता है।

जल और कृषि के लिए समेकित शासन क्यों जरूरी है?

समेकित शासन जल, कृषि और पर्यावरण क्षेत्रों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है, जिससे नीतिगत विखंडन रोका जाता है और संसाधनों का कुशल उपयोग एवं स्थिरता सुनिश्चित होती है।

इज़राइल ने कृषि में जल उपयोग दक्षता कैसे बढ़ाई है?

इज़राइल ने 2000 से ड्रिप इरिगेशन और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण के व्यापक इस्तेमाल से कृषि जल उपयोग को 50% तक कम किया और फसल उत्पादन में 25% तक वृद्धि की है।

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