भारत में अधूरे कार्य (Work in Progress) परियोजनाओं की समझ
Work in Progress (WIP) परियोजनाएं उन इन्फ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को कहते हैं जिनका काम शुरू तो हो चुका है, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं हो पाया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, भारत में ₹4.5 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की अधूरी परियोजनाएं रुकी हुई हैं, जो कार्यान्वयन में गंभीर चुनौतियों को दर्शाता है। ये परियोजनाएं केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर फैली हैं, जहां केंद्रीय क्षेत्र की 35% परियोजनाएं तय समय से अधिक विलंबित हैं, जैसा कि Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) की रिपोर्ट में बताया गया है। इन अधूरी परियोजनाओं का प्रभावी प्रबंधन और समय पर पूरा होना पूंजी की दक्षता बढ़ाने और आर्थिक विकास को तेज करने के लिए बेहद जरूरी है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, आर्थिक विकास, सरकारी बजट
- GS पेपर 2: भारतीय संविधान (कानूनी ढांचे), शासन और जवाबदेही
- निबंध विषय: "भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास", "परियोजना निष्पादन और शासन में चुनौतियां"
अधूरी परियोजनाओं पर लागू कानूनी और संवैधानिक ढांचा
Indian Contract Act, 1872 अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी अनुबंधीय जिम्मेदारियों को नियंत्रित करता है और इसमें शामिल पक्षों के अधिकार और दायित्व निर्धारित करता है। Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए परियोजना खरीद में स्थानीय स्रोतों को प्राथमिकता देता है। रियल एस्टेट क्षेत्र में, Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA) की धारा 4 के तहत डेवलपर्स को परियोजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी करनी होती हैं, जिससे खरीदारों को देरी पर कानूनी राहत मिलती है।
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) की धाराएं 7 से 10 विशेष रूप से अधूरी और संकटग्रस्त परियोजनाओं के समाधान के लिए इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया और पुनर्गठन की व्यवस्था करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के Union of India vs. R. Gandhi (2010) के फैसले में परियोजना की समय सीमा का कड़ाई से पालन करने और न्यायपालिका की अनुबंध एवं कानूनी दायित्वों के पालन में भूमिका पर जोर दिया गया है।
- Indian Contract Act, 1872: अनुबंधीय कर्तव्य और उल्लंघन के परिणाम निर्धारित करता है।
- Public Procurement Order, 2017: घरेलू स्रोतों को प्राथमिकता देता है।
- RERA धारा 4: रियल एस्टेट परियोजनाओं की समय पर पूर्णता अनिवार्य करता है।
- IBC धाराएं 7-10: अधूरी परियोजनाओं के समाधान के लिए कानूनी ढांचा।
- Union of India vs. R. Gandhi (2010): परियोजना समय सीमा के न्यायिक पालन पर जोर।
अधूरी परियोजनाओं के आर्थिक प्रभाव
निर्माण क्षेत्र भारत की GDP में 8% का योगदान देता है और 40 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है (Labour Bureau, 2023)। अधूरी परियोजनाओं में देरी पूंजी उत्पादकता को प्रभावित करती है, लागत बढ़ाती है और निवेशकों का भरोसा कम करती है। केंद्रीय बजट 2024 में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹10.68 लाख करोड़ आवंटित किए गए जो पिछले वर्ष से 33% अधिक हैं, फिर भी निष्पादन में सुधार नहीं हुआ है। NITI Aayog का अनुमान है कि परियोजनाओं की पूर्णता दर में 20% सुधार से GDP विकास दर 0.5-1% तक बढ़ सकती है, जो देरी को दूर करने की आर्थिक अहमियत दिखाता है।
MoSPI के अनुसार, केंद्रीय क्षेत्र की 35% परियोजनाएं देरी का सामना करती हैं, जिनका कारण भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है। विश्व बैंक की Ease of Doing Business 2023 रिपोर्ट में भारत को 63वां स्थान मिला है, जिसमें परियोजना देरी को निवेश और विकास में बड़ी बाधा बताया गया है।
- निर्माण क्षेत्र: GDP का 8%, 40 मिलियन रोजगार।
- ₹4.5 लाख करोड़ मूल्य की अधूरी परियोजनाएं (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)।
- 35% केंद्रीय परियोजनाएं विलंबित (MoSPI, 2023)।
- ₹10.68 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बजट 2024 (33% वृद्धि)।
- 20% सुधार से GDP में 0.5-1% वृद्धि (NITI Aayog)।
- Ease of Doing Business 2023 में भारत का 63वां स्थान (विश्व बैंक)।
संस्थागत भूमिकाएं और समन्वय की चुनौतियां
अधूरी परियोजनाओं की निगरानी और प्रबंधन कई संस्थाओं के बीच बंटी हुई है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आती हैं। Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) परियोजना प्रगति पर नजर रखता है और देरी की रिपोर्ट प्रकाशित करता है। NITI Aayog निष्पादन सुधार के लिए नीतिगत सुझाव देता है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) सरकारी परियोजनाओं का ऑडिट करता है।
Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) IBC के तहत अधूरी परियोजनाओं के समाधान की प्रक्रिया देखता है। Real Estate Regulatory Authority (RERA) रियल एस्टेट परियोजनाओं की समय पर पूर्णता सुनिश्चित करता है। Ministry of Finance बजट आवंटित करता है और खर्च की निगरानी करता है, लेकिन परियोजना निष्पादन पर सीधे नियंत्रण नहीं रखता, जो समन्वय की कमी को दर्शाता है।
- MoSPI: परियोजना निगरानी और डेटा प्रकाशन।
- NITI Aayog: निष्पादन सुधार के लिए नीति निर्माण।
- CAG: विलंब और अक्षमताओं का ऑडिट।
- IBBI: IBC के तहत परियोजना समाधान।
- RERA प्राधिकरण: रियल एस्टेट परियोजनाओं का नियमन।
- वित्त मंत्रालय: बजट आवंटन और खर्च की निगरानी।
परियोजना निष्पादन में भारत बनाम चीन: तुलनात्मक अध्ययन
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| संस्थागत ढांचा | कई एजेंसियां, अधिभार वाले अधिकार क्षेत्र | केंद्रीयकृत National Development and Reform Commission (NDRC) |
| औसत परियोजना विलंब दर | 35% केंद्रीय परियोजनाएं विलंबित (MoSPI, 2023) | 2010 में 25% से घटकर 2020 तक 10% से कम (NDRC रिपोर्ट) |
| GDP विकास प्रभाव | 5-6% वार्षिक वृद्धि, विलंब से बाधित | 6-7% स्थिर वार्षिक वृद्धि, कुशल परियोजना पूर्णता से समर्थित |
| निगरानी प्रणाली | वास्तविक समय निगरानी और जवाबदेही की कमी | केंद्रीयकृत मंजूरी और वास्तविक समय निगरानी |
| नीति फोकस | वित्तीय वृद्धि पर जोर, निष्पादन सुधार कम | संस्थागत सुधार और परियोजना प्रबंधन पर जोर |
भारत के परियोजना निष्पादन में संरचनात्मक कमजोरियां
भारत में परियोजना प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाओं का बिखराव, वास्तविक समय निगरानी की कमी और कमजोर जवाबदेही के कारण निर्णय लेने में देरी होती है और समन्वय जटिल होता है। नीतिगत सुधार मुख्य रूप से बजट वृद्धि पर केंद्रित रहे हैं, जबकि निष्पादन ढांचे में सुधार कम हुआ है। इस कमजोर संरचना से पूंजी की दक्षता प्रभावित होती है, परियोजनाओं की अवधि बढ़ती है, लागत बढ़ती है और निवेश पर लाभ कम होता है।
- संस्थागत ढांचा बिखरा हुआ और भूमिकाओं में ओवरलैप।
- वास्तविक समय परियोजना निगरानी और डेटा एकीकरण की कमी।
- कमजोर जवाबदेही और निर्णय में देरी।
- नीति फोकस वित्तपोषण पर, निष्पादन सुधार पर कम।
- परिणाम: लागत वृद्धि और परियोजनाओं का अटका रहना।
आगे का रास्ता: अधूरी परियोजनाओं की पूर्णता बढ़ाना
- चीन के NDRC जैसे केंद्रीकृत परियोजना अनुमोदन और निगरानी प्राधिकरण की स्थापना, जिससे समन्वय बेहतर हो और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
- MoSPI, NITI Aayog और RERA के डेटा को एकीकृत करते हुए वास्तविक समय डिजिटल निगरानी मंच लागू करना, जिससे पारदर्शिता और समय पर हस्तक्षेप संभव हो।
- RERA और IBC के तहत कानूनी प्रवर्तन को मजबूत करना ताकि अधूरी परियोजनाओं का समाधान तेज हो और देरी पर दंड लगाया जा सके।
- मंत्रालयों के बीच स्पष्ट अधिकार क्षेत्र के साथ बेहतर समन्वय बढ़ाना ताकि नौकरशाही देरी कम हो।
- सरकारी एजेंसियों और ठेकेदारों में परियोजना प्रबंधन कौशल को मजबूत करना।
- RERA धारा 4 के तहत डेवलपर्स को परियोजनाएं तय समय में पूरी करनी होती हैं।
- RERA केवल वाणिज्यिक रियल एस्टेट परियोजनाओं पर लागू होता है।
- RERA खरीदारों को परियोजना देरी पर कानूनी राहत प्रदान करता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
- अधूरी परियोजनाएं वे हैं जिनका निर्माण शुरू नहीं हुआ हो।
- IBC की धाराएं 7-10 अधूरी परियोजनाओं के समाधान का ढांचा प्रदान करती हैं।
- MoSPI के अनुसार केंद्रीय क्षेत्र की एक तिहाई से अधिक परियोजनाएं विलंबित हैं।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
Mains प्रश्न: भारत में Work in Progress (WIP) इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी के कारण होने वाली प्रणालीगत चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और परियोजना पूर्णता दर सुधारने के लिए संस्थागत सुधार सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 - इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और शासन
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में कई अटकी हुई खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं हैं जो स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास को प्रभावित करती हैं।
- Mains पॉइंटर: भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी में राज्य-विशिष्ट देरी पर चर्चा करें और परियोजना पूर्णता के लिए राज्य-केंद्र समन्वय तंत्र प्रस्तावित करें।
Work in Progress (WIP) परियोजना क्या होती है?
WIP परियोजना वह होती है जिसका निर्माण या कार्य शुरू हो चुका हो लेकिन निर्धारित समय सीमा से बाहर अधूरा रह गया हो। यह स्टॉल्ड परियोजनाओं से अलग होती है, जो विभिन्न कारणों से निर्माण में पूरी तरह रुकी होती हैं।
IBC अधूरी परियोजनाओं में कैसे मदद करता है?
IBC की धाराएं 7-10 संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए इन्सॉल्वेंसी समाधान प्रक्रिया शुरू करने का कानूनी ढांचा प्रदान करती हैं, जिससे अधूरी परियोजनाओं का पुनर्गठन या परिसमापन कर उन्हें पुनर्जीवित या समाप्त किया जा सकता है।
परियोजना देरी में RERA की क्या भूमिका है?
RERA रियल एस्टेट परियोजनाओं की समय पर पूर्णता अनिवार्य करता है और खरीदारों को देरी पर कानूनी राहत प्रदान करता है, जिससे इस क्षेत्र में जोखिम कम होता है।
भारत का परियोजना निष्पादन ढांचा क्यों बिखरा हुआ माना जाता है?
कई एजेंसियों के अधिभार वाले अधिकार क्षेत्र, केंद्रीकृत वास्तविक समय निगरानी की कमी, समन्वय विफलता, निर्णय में देरी और कमजोर जवाबदेही के कारण निष्पादन में अक्षमता होती है।
परियोजना पूर्णता दर सुधार से भारत की GDP पर क्या प्रभाव पड़ता है?
NITI Aayog के अनुसार, परियोजना पूर्णता दर में 20% सुधार से भारत की GDP विकास दर 0.5-1% तक बढ़ सकती है, जो कुशल निष्पादन की आर्थिक अहमियत को दर्शाता है।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
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