पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक सर्किट बोर्ड आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया
2023 के अंत से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए जरूरी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भारत, जो तांबा और दुर्लभ धातुओं जैसे कच्चे माल के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर काफी निर्भर है, ने PCB उत्पादन में महत्वपूर्ण देरी और लागत वृद्धि देखी है। इस बाधा ने भारत के आयात-निर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कमजोरियां उजागर की हैं, जिसका वित्तीय वर्ष 2022-23 में 76 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात बिल था, जिसमें सर्किट बोर्ड लगभग 15% हिस्सा रखते हैं (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, 2023)। यह संकट भारत के लिए आपूर्ति स्रोतों को विविध करने और घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भू-राजनीतिक संघर्षों का व्यापार और कूटनीति पर प्रभाव
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, औद्योगिक नीति, आयात निर्भरता
- निबंध: भू-राजनीतिक संघर्षों और उनके भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर आर्थिक प्रभाव
भारत का कानूनी और संस्थागत ढांचा: व्यापार और संकट प्रबंधन
भारत अपने आयात-निर्यात कार्यों को Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 के तहत नियंत्रित करता है, जिसमें धारा 3 के माध्यम से केंद्र सरकार को वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार पर नियंत्रण का अधिकार दिया गया है। Customs Act, 1962 (धारा 11 और 28) आयात शुल्क और क्लीयरेंस प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जो आपूर्ति श्रृंखला की सुगमता के लिए जरूरी हैं। संकट की स्थिति में Disaster Management Act, 2005 (धारा 6) आपातकालीन प्रतिक्रिया समन्वय के लिए लागू किया जा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे कोई फैसले नहीं हैं जो सीधे पश्चिम एशिया संघर्ष के आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव को संबोधित करते हों, लेकिन 2016 के Union of India vs. M/s. Mohit Minerals मामले में सरकार को राष्ट्रीय हित में आयात नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया, जो भू-राजनीतिक संकट के दौरान व्यापार नियंत्रण के लिए मिसाल है।
- Directorate General of Foreign Trade (DGFT): व्यापार नीतियां बनाता है, लाइसेंस जारी करता है और आयात-निर्यात डेटा की निगरानी करता है।
- Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY): इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीतियों को संचालित करता है, जिसमें Production Linked Incentive (PLI) योजना शामिल है।
- Indian Electronics and Semiconductor Association (IESA): उद्योग हितों का प्रतिनिधित्व करता है और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव के आंकड़े प्रदान करता है।
- Reserve Bank of India (RBI): विदेशी मुद्रा और व्यापार वित्तपोषण की व्यवस्था देखता है।
- Ministry of External Affairs (MEA): पश्चिम एशियाई देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को संभालता है ताकि व्यापार बाधाओं को कम किया जा सके।
- Customs Department: जरूरी आयातों के अनुपालन और त्वरित क्लीयरेंस को सुनिश्चित करता है।
पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की PCB आपूर्ति श्रृंखला पर आर्थिक प्रभाव
वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात बिल 76 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें PCB का एक बड़ा हिस्सा शामिल है, जिनके कच्चे माल का लगभग 20% पश्चिम एशिया से आता है (DGFT, 2023)। इस संघर्ष के कारण आपूर्ति में देरी 12% बढ़ी है और इनपुट लागत में 9% की वृद्धि हुई है, जैसा कि IESA ने 2024 की शुरुआत में बताया। 2023 में वैश्विक PCB बाजार का मूल्य 62.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, और 2030 तक 7.2% की वार्षिक वृद्धि दर की उम्मीद है (MarketWatch, 2024), लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को चुनौती दी है। सरकार ने 2023-24 के लिए PLI योजना के तहत 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करना है (MeitY, 2023)।
| पैरामीटर | भारत | दक्षिण कोरिया |
|---|---|---|
| PCB कच्चे माल के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता | 20% (2020 से 5% की वृद्धि) | 25% से घटकर 10% (2022-2024) |
| संघर्ष के कारण आपूर्ति में देरी | 12% | विविधीकरण के बाद न्यूनतम |
| इनपुट लागत में वृद्धि | 9% | स्थिर |
| इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए सरकारी समर्थन | PLI के तहत 76,000 करोड़ रुपये (2023-24) | दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में रणनीतिक निवेश |
| रणनीतिक भंडार और बफर स्टॉक | नहीं है | मौजूद है |
तुलनात्मक विश्लेषण: दक्षिण कोरिया के आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण से सीख
दक्षिण कोरिया ने 2022 के रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान समान आपूर्ति श्रृंखला झटकों का सामना किया और PCB कच्चे माल के स्रोतों को दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में विविध किया। इस रणनीति से उसने पश्चिम एशिया पर निर्भरता 25% से घटाकर 10% कर दी, जिससे उत्पादन लागत और आपूर्ति समय स्थिर हुए (Korean Ministry of Trade, Industry and Energy, 2024)। इसके विपरीत, भारत की पश्चिम एशिया पर बढ़ती निर्भरता और रणनीतिक भंडार की कमी ने आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को बढ़ा दिया है। दक्षिण कोरिया का मॉडल सक्रिय आपूर्तिकर्ता विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण के संयोजन से मजबूती बढ़ाने की प्रभावशीलता दिखाता है।
भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूती में महत्वपूर्ण कमियां
- PCB निर्माण के लिए आवश्यक तांबा और दुर्लभ धातुओं जैसे कच्चे माल की घरेलू उत्पादन क्षमता अपर्याप्त है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के इनपुट के लिए व्यापक रणनीतिक भंडार या बफर स्टॉक नीति का अभाव है।
- पश्चिम एशिया पर अत्यधिक निर्भरता है, जबकि वैकल्पिक वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में विविधीकरण नहीं है।
- भू-राजनीतिक जोखिमों का पूर्वानुमान और प्रबंधन के लिए व्यापार, औद्योगिक और विदेश मंत्रालयों के बीच समन्वय सीमित है।
आगे का रास्ता: भारत की PCB आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए रणनीतिक कदम
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से कच्चे माल की घरेलू खनन और शोधन प्रक्रिया को तेज करें।
- PLI योजना का दायरा बढ़ाएं और कच्चे माल की प्रोसेसिंग तथा आपूर्ति श्रृंखला लॉजिस्टिक्स को शामिल करें।
- भू-राजनीतिक झटकों से बचाव के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स इनपुट के लिए रणनीतिक भंडार नीति विकसित करें।
- दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता देशों के साथ कूटनीतिक संबंध मजबूत करें।
- DGFT और MEA के समन्वय में विदेशी व्यापार नीति में आपूर्ति श्रृंखला जोखिम मूल्यांकन को शामिल करें।
- Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 केंद्र सरकार को आयात-निर्यात नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
- Disaster Management Act, 2005 को आपूर्ति श्रृंखला संकट प्रबंधन के लिए लागू नहीं किया जा सकता।
- Customs Act, 1962 आयात शुल्क और क्लीयरेंस प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- भारत अपने PCB कच्चे माल का 50% से अधिक पश्चिम एशिया से आयात करता है।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए रणनीतिक कच्चे माल भंडार रखता है।
- Production Linked Incentive (PLI) योजना घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
चालू पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की प्रिंटेड सर्किट बोर्ड आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव का विश्लेषण करें और भविष्य में ऐसे भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए भारत को कौन-कौन से नीतिगत कदम उठाने चाहिए, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड एवं JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन, जिसमें तांबा और अन्य धातुएं शामिल हैं, उसे इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति के लिए संभावित केंद्र बनाते हैं।
- मुख्य बिंदु: झारखंड की भूमिका को आयात निर्भरता कम करने में उजागर करें और इसे राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूती रणनीतियों से जोड़ें।
भारत के PCB कच्चे माल का कितना हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है?
PCB निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तांबे और दुर्लभ धातुओं जैसे मुख्य कच्चे माल का लगभग 20% आयात पश्चिम एशिया से होता है, जो 2020 से 5% बढ़ा है (DGFT, 2023)।
भू-राजनीतिक संकट के दौरान भारत आयात नियंत्रित करने के लिए कौन से कानूनी प्रावधानों का उपयोग करता है?
Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 (धारा 3) केंद्र सरकार को आयात-निर्यात नियंत्रित करने का अधिकार देता है। इसके अलावा, Customs Act, 1962 आयात शुल्क और क्लीयरेंस को नियंत्रित करता है, और Disaster Management Act, 2005 को संकट प्रबंधन के लिए लागू किया जा सकता है।
पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय PCB निर्माताओं पर क्या आर्थिक प्रभाव पड़ा है?
पश्चिम एशिया से कच्चे माल के आयात में बाधा के कारण भारतीय PCB निर्माताओं को आपूर्ति में 12% देरी और इनपुट लागत में 9% वृद्धि का सामना करना पड़ा है (IESA, 2024)।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में Production Linked Incentive (PLI) योजना की भूमिका क्या है?
PLI योजना, जिसके लिए 2023-24 में 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देती है जिससे उत्पादन क्षमता बढ़े और आयात निर्भरता कम हो (MeitY, 2023)।
दक्षिण कोरिया ने भारत जैसी आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं को कैसे कम किया है?
दक्षिण कोरिया ने PCB कच्चे माल के स्रोतों को पश्चिम एशिया से दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में विविध किया, जिससे निर्भरता 25% से घटाकर 10% हो गई और लागत व आपूर्ति समय स्थिर हुए (Korean Ministry of Trade, Industry and Energy, 2024)।
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