परिचय: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की स्थिति
झारखंड के शहरी क्षेत्र प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, जिसमें अकेले रांची का योगदान करीब 400 MT/दिन है (झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB), 2023)। प्रति व्यक्ति कचरा उत्पादन 0.35 किग्रा/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 0.5 किग्रा/दिन से कम है (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), 2023)। इसके बावजूद, राज्य में इस कचरे के स्थायी प्रबंधन में कई चुनौतियां सामने हैं। शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) कचरा संग्रहण और निपटान के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन केवल 35% कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण या निपटान होता है; बाकी कचरा खुले डंपिंग स्थलों में फेंका जाता है, जिससे पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं, जैसे कि कुछ क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण बीआईएस मानकों से 40% अधिक पाया गया है (केंद्रीय भूजल बोर्ड, 2022)।
JPSC परीक्षा से प्रासंगिकता
- सामान्य अध्ययन पेपर III: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – झारखंड में शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की चुनौतियां
- JSPCB, ULBs की संस्थागत भूमिकाओं और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 की नीति विश्लेषण पर प्रश्न
- पिछले वर्षों के प्रश्न: JPSC 2019 और 2021 में शहरी कचरा प्रबंधन और शहरीकरण के पर्यावरणीय प्रभाव पर
कचरा प्रबंधन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
झारखंड में कचरा प्रबंधन एक बहु-स्तरीय कानूनी ढांचे के तहत संचालित होता है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016, जो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत बनाए गए हैं, स्रोत पर कचरे के पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान और पुनर्चक्रण को अनिवार्य करते हैं। इसके साथ ही जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (धारा 24-26) और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 कचरा निपटान से उत्पन्न प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं।
झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 शहरी स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन के दायित्व सौंपता है, जिससे वे नगरपालिका ठोस कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान कर सकें। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2017 में स्रोत पर पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान लागू करने के निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन झारखंड को करना आवश्यक है। संविधान के अनुच्छेद 243W (73वां संशोधन) के तहत ULBs को कचरा प्रबंधन कार्यों का संवैधानिक अधिकार दिया गया है, जो विकेंद्रीकरण पर जोर देता है।
संस्थागत संरचना और भूमिकाएं
- झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB): पर्यावरण कानूनों का पालन सुनिश्चित करना, प्रदूषण मानकों की निगरानी और प्रवर्तन।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): नगरपालिका ठोस कचरे का संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और निपटान के लिए मुख्य एजेंसियां।
- झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO): शहरी अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्वयन, जिसमें कचरा प्रबंधन सुविधाएं शामिल हैं।
- झारखंड राज्य शहरी विकास एजेंसी (JSUDA): शहरी विकास और स्वच्छता कार्यक्रमों का समन्वय, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के प्रयास भी शामिल हैं।
- राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान (NIUA): शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण।
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी): ठोस कचरा प्रबंधन के लिए अवसंरचना और जागरूकता हेतु केंद्र सरकार की योजना।
झारखंड में कचरा प्रबंधन के आर्थिक पहलू
राज्य ने 2023-24 के बजट में शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं (झारखंड वित्त विभाग, 2023)। लगभग 15,000 अनौपचारिक कचरा उठाने वाले इस क्षेत्र में काम करते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में करीब 50 करोड़ रुपये का योगदान करते हैं (JSUDA, 2023)। हालांकि, यह क्षेत्र ज्यादातर अनियमित है, जिससे कार्यक्षमता और श्रमिक सुरक्षा प्रभावित होती है।
झारखंड में कचरा से ऊर्जा उत्पादन बाजार 2023 से 2028 के बीच 8% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की संभावना है, जो बढ़ती शहरीकरण और सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा प्रोत्साहनों से प्रेरित है। इसके बावजूद, अवसंरचनात्मक कमियां और नीति के सही क्रियान्वयन की कमी ने इस तकनीक के व्यापक उपयोग में बाधा डाली है।
वर्तमान कचरा प्रबंधन प्रथाएं और आंकड़ों का विश्लेषण
शहरी केंद्रों में कचरा संग्रहण की दक्षता भिन्न है; रांची में संग्रहण दर लगभग 80% है (रांची नगर निगम, 2023)। हालांकि, केवल 20% शहरी परिवार स्रोत पर कचरा पृथक्करण करते हैं (स्वच्छ सर्वेक्षण, 2023), जिससे पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निपटान सीमित रहता है। अधिकांश कचरा खुले डंपिंग स्थलों में फेंका जाता है, जिससे भूजल प्रदूषण और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय नुकसान होते हैं।
| परिमाण | झारखंड शहरी क्षेत्र | राष्ट्रीय औसत | दक्षिण कोरिया (2022) |
|---|---|---|---|
| प्रति व्यक्ति कचरा उत्पादन (किग्रा/दिन) | 0.35 | 0.5 | 1.1 |
| स्रोत पर कचरा पृथक्करण (%) | 20 | लगभग 40 | अनिवार्य, >90% |
| वैज्ञानिक निपटान/पुनर्चक्रण (%) | 35 | 60 | 60 से अधिक |
| डंपिंग स्थल पर निर्भरता (%) | 65 (अधिकांश) | 40 | 5 से कम |
| कचरा से ऊर्जा उत्पादन अपनाना | सीमित, उभरता हुआ | बढ़ रहा है | व्यापक |
तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड बनाम दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया का कचरा प्रबंधन मॉडल स्रोत पर अनिवार्य पृथक्करण, व्यापक पुनर्चक्रण और कचरा से ऊर्जा उत्पादन पर आधारित है, जिससे डंपिंग स्थल पर निर्भरता केवल 5% से कम है (OECD पर्यावरण डेटा, 2022)। झारखंड में कम पृथक्करण दर और डंपिंग स्थल पर भारी निर्भरता इस मॉडल से काफी भिन्न है, जो नीति सुधार और क्षमता निर्माण की जरूरत को दर्शाता है।
नीति और कार्यान्वयन में मुख्य कमियां
- अनौपचारिक क्षेत्र का समावेश: आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद, अनौपचारिक कचरा उठाने वालों को औपचारिक मान्यता और समावेशन नहीं मिला है, जिससे पुनर्चक्रण में कमी और श्रमिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है।
- अवसंरचना की कमी: वैज्ञानिक निपटान सुविधाओं और आधुनिक डंपिंग स्थलों की अपर्याप्तता प्रभावी कचरा प्रबंधन में बाधक है।
- जनजागरूकता का अभाव: स्रोत पर कचरा पृथक्करण की कम स्वीकृति जागरूकता और कड़ाई की कमी के कारण है।
- समन्वय की कमी: JSPCB, ULBs और राज्य एजेंसियों के बीच भूमिकाओं का अस्पष्टता और कमजोर समन्वय नीति के सही क्रियान्वयन में बाधा डालते हैं।
आगे का रास्ता: झारखंड के लिए लक्षित कदम
- अनौपचारिक कचरा उठाने वालों को क्षमता विकास, सामाजिक सुरक्षा और नगरपालिका कचरा प्रबंधन अनुबंधों में शामिल करके औपचारिक बनाना और समावेश सुनिश्चित करना।
- वैज्ञानिक निपटान के लिए अवसंरचना का विस्तार करना, जिसमें कम्पोस्टिंग, पुनर्चक्रण और कचरा से ऊर्जा संयंत्र शामिल हों, JSUDA और JUIDCO की विशेषज्ञता का लाभ उठाना।
- NGT के निर्देशों के अनुरूप स्रोत पर पृथक्करण के पालन को जागरूकता अभियानों और कड़े दंडों के माध्यम से मजबूत करना।
- JSPCB, ULBs और राज्य एजेंसियों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ समन्वय तंत्र को सुदृढ़ करना।
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं से वित्तीय और तकनीकी सहायता लेना।
- यह सभी शहरी परिवारों द्वारा स्रोत पर कचरा पृथक्करण को अनिवार्य करता है।
- यह नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए हैं।
- यह कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सौंपता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
- झारखंड प्रतिदिन लगभग 1,200 MT नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न करता है।
- इसमें से 50% से अधिक कचरा वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रित या निपटान किया जाता है।
- स्रोत पर पृथक्करण 25% से कम शहरी परिवारों द्वारा किया जाता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
मेन प्रश्न
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन की मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें। इन चुनौतियों से निपटने में मौजूदा कानूनी ढांचे और संस्थागत तंत्र की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें। झारखंड में कचरा प्रबंधन सुधार के लिए सुझाव दें।
झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: GS पेपर III – पर्यावरण और पारिस्थितिकी, शहरी विकास
- झारखंड विश्लेषण: राज्य विशेष कचरा आंकड़े, JSPCB, ULBs की संस्थागत भूमिकाएं, और स्वच्छता के लिए बजटीय आवंटन
- मेन पॉइंटर्स: कानूनी प्रावधान (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, झारखंड नगरपालिका अधिनियम), कचरा उत्पादन और निपटान के आंकड़े, और झारखंड की संस्थागत चुनौतियों को जोड़कर उत्तर तैयार करें।
झारखंड में कचरा प्रबंधन के मुख्य कानून कौन से हैं?
झारखंड में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत लागू हैं, साथ ही जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 भी लागू होते हैं। झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 ULBs को कचरा प्रबंधन का अधिकार देता है।
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन कितना नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न होता है?
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें रांची अकेले लगभग 400 MT/दिन उत्पन्न करता है (JSPCB, 2023)।
झारखंड में अनौपचारिक कचरा उठाने वालों की भूमिका क्या है?
झारखंड में लगभग 15,000 अनौपचारिक कचरा उठाने वाले हैं, जो पुनर्चक्रण गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था में करीब 50 करोड़ रुपये का योगदान करते हैं। हालांकि, इन्हें औपचारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है, जिससे पुनर्चक्रण की दक्षता और श्रमिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
झारखंड में अनुचित कचरा निपटान के मुख्य पर्यावरणीय प्रभाव क्या हैं?
खुले डंपिंग स्थलों में कचरा फेंकने से भूजल प्रदूषण बीआईएस मानकों से 40% तक अधिक पाया गया है, साथ ही वायु प्रदूषण और रोगजनक कीटों के प्रसार में वृद्धि हुई है।
झारखंड में स्रोत पर कचरा पृथक्करण की दर राष्ट्रीय औसत से कैसे तुलना करती है?
झारखंड के शहरी घरों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण की दर लगभग 20% है, जो राष्ट्रीय औसत लगभग 40% से काफी कम है (स्वच्छ सर्वेक्षण, 2023)।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई के लिए
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 12 March 2026 | अंतिम अपडेट: 8 April 2026
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