परिचय: झारखंड के शहरी कचरा परिदृश्य
झारखंड के शहरी क्षेत्र प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, जिसमें से अकेले रांची 350 MT/दिन का योगदान देता है (झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड [JSPCB], 2023)। इतनी बड़ी मात्रा के बावजूद, केवल 40% कचरा स्रोत पर अलग किया जाता है (झारखंड अर्बन डेवलपमेंट रिपोर्ट, 2023)। राज्य की शहरीकरण दर 24.05% है (जनगणना 2011), और वार्षिक कचरा उत्पादन 3-5% की दर से बढ़ रहा है। झारखंड के तेजी से बढ़ते शहरों में प्रभावी कचरा प्रबंधन शहरी स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
JPSC परीक्षा से संबंधित
- पेपर: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), झारखंड राज्य शासन
- उपविषय: शहरी स्वच्छता नीतियाँ, नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन, झारखंड म्युनिसिपल एक्ट प्रावधान
- पिछले प्रश्न: JPSC 2021 में शहरी स्वच्छता योजनाओं और कचरा पृथक्करण पहलों पर ध्यान
झारखंड में कचरा प्रबंधन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
झारखंड में कचरा प्रबंधन कई कानूनी नियमों के तहत नियंत्रित होता है। संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण और सुधार का निर्देश देता है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय [MoEFCC]) नगरपालिका कचरा प्रबंधन के लिए केंद्रीय नियमावली प्रदान करते हैं, जो स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और निपटान पर जोर देते हैं।
झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 (सेक्शन 136-140) शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी देता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (सेक्शन 3 और 5) पर्यावरण सुरक्षा लागू करने के लिए व्यापक अधिकार प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट के Municipal Corporation of Delhi v. Union of India (2014) मामले में कचरा प्रबंधन में नागरिक भागीदारी और जवाबदेही पर जोर दिया गया, जो झारखंड की शहरी प्रशासनिक व्यवस्था पर भी लागू होता है।
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016: पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान के मानक तय करना
- झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011: ULBs के अधिकार और कर्तव्य
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: केंद्रीय प्रवर्तन शक्तियां
- सुप्रीम कोर्ट (2014): जनता की भागीदारी और जवाबदेही पर बल
संस्थागत संरचना और भूमिकाएँ
झारखंड के कचरा प्रबंधन में कई संस्थाएं शामिल हैं जिनकी भूमिकाएं आंशिक रूप से ओवरलैप करती हैं। झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) पर्यावरणीय अनुपालन और प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी करता है। झारखंड म्युनिसिपल एक्ट के तहत ULBs कचरा संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान की अग्रिम एजेंसियां हैं।
झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO) शहरी अवसंरचना परियोजनाओं को लागू करता है, जिसमें कचरा प्रबंधन सुविधाएँ भी शामिल हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) केंद्रीय स्तर पर नीति दिशा-निर्देश और नियामक निगरानी प्रदान करता है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) झारखंड राज्य स्तर पर स्वच्छता और कचरा प्रबंधन कार्यक्रमों का समन्वय करता है, खासकर घर-घर कचरा संग्रह और जनजागरूकता पर केंद्रित।
- JSPCB: पर्यावरणीय नियमों का नियंत्रण और निगरानी
- ULBs: कचरा संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण, निपटान
- JUIDCO: शहरी सेवाओं के लिए अवसंरचना विकास
- MoEFCC: केंद्रीय नीति और नियामक ढांचा
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) झारखंड: स्वच्छता कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन का आर्थिक पक्ष
वित्त वर्ष 2023-24 के लिए झारखंड के बजट में शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन अवसंरचना के लिए लगभग ₹150 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र को प्राथमिकता देने का संकेत है (झारखंड बजट 2023-24)। अनौपचारिक कचरा पुनर्चक्रण क्षेत्र का वार्षिक योगदान लगभग ₹50 करोड़ का है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से मान्यता नहीं मिली है (JSPCB रिपोर्ट, 2022)। यह क्षेत्र संसाधन पुनःप्राप्ति में महत्वपूर्ण है, परन्तु सामाजिक सुरक्षा और आधिकारिक प्रणाली से जुड़ाव की कमी है।
झारखंड में शहरी कचरा प्रबंधन सेवाओं का बाजार 2027 तक 7% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है (FICCI 2023)। असंगठित कचरा निपटान से स्वास्थ्य संबंधी उत्पादकता में गिरावट के कारण लगभग ₹30 करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है (झारखंड स्वास्थ्य विभाग, 2021)। यह बेहतर कचरा प्रबंधन की आर्थिक आवश्यकता को दर्शाता है।
- ₹150 करोड़: शहरी स्वच्छता के लिए बजट आवंटन (2023-24)
- ₹50 करोड़: अनौपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र का योगदान (अमान्यता प्राप्त)
- 7% CAGR: कचरा प्रबंधन सेवाओं का अनुमानित विकास
- ₹30 करोड़: खराब कचरा निपटान से वार्षिक आर्थिक हानि
- शहरीकरण दर: 24.05%, कचरा उत्पादन में वृद्धि
वर्तमान कचरा प्रबंधन प्रथाएँ और आंकड़ों का विश्लेषण
झारखंड के शहरी क्षेत्र कचरा प्रबंधन में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। केवल 40% कचरा स्रोत पर अलग किया जाता है, जिससे आगे की प्रक्रिया की दक्षता सीमित होती है (झारखंड अर्बन डेवलपमेंट रिपोर्ट, 2023)। जैविक कचरे का 50% से अधिक हिस्सा होने के बावजूद, कंपोस्टिंग और बायो-मेथनेशन सुविधाएं 15% से भी कम जैविक कचरे को संसाधित करती हैं (JUIDCO 2023)।
लगभग 30% शहरी वार्डों में खुले में कचरा फेंकना और जलाना जारी है, जिससे हवा में प्रदूषण मान्य सीमाओं से अधिक हो जाता है (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड [CPCB], 2023)। घर-घर कचरा संग्रह की पहुंच 85% हो चुकी है (स्वच्छ सर्वेक्षण 2023), लेकिन पुनर्चक्रण की दर केवल 25% है, जो राष्ट्रीय औसत 60% से काफी कम है (MoEFCC, 2023)।
- 40%: स्रोत पर कचरा पृथक्करण
- <15%: जैविक कचरे का कंपोस्टिंग/बायो-मेथनेशन से प्रसंस्करण
- 30%: खुले में कचरा फेंकने/जलाने वाले शहरी वार्ड
- 85%: घर-घर कचरा संग्रह कवरेज
- 25%: झारखंड के शहरी क्षेत्रों की पुनर्चक्रण दर
तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड बनाम दक्षिण कोरिया कचरा प्रबंधन
| मापदंड | झारखंड शहरी क्षेत्र | दक्षिण कोरिया |
|---|---|---|
| स्रोत पर कचरा पृथक्करण | 40% | 90% से अधिक |
| पुनर्चक्रण दर | 25% | 59% |
| लैंडफिल उपयोग में कमी | महत्वपूर्ण नहीं | 5 वर्षों में 30% कमी |
| आर्थिक प्रोत्साहन | अभाव या सीमित | वॉल्यूम-आधारित कचरा शुल्क प्रणाली |
| प्रौद्योगिकी एकीकरण | कम (सीमित कंपोस्टिंग, बायो-मेथनेशन) | उन्नत पुनर्चक्रण और कचरा-से-ऊर्जा तकनीक |
दक्षिण कोरिया की वॉल्यूम-आधारित कचरा शुल्क प्रणाली घरेलू स्तर पर कचरा कम करने के लिए प्रोत्साहन देती है, जो उन्नत पुनर्चक्रण तकनीकों के साथ जुड़ी है। इस समग्र दृष्टिकोण से पांच वर्षों में 59% पुनर्चक्रण दर और 30% लैंडफिल उपयोग में कमी हासिल हुई है (OECD Environmental Performance Reviews, 2022)। झारखंड की कम पृथक्करण और पुनर्चक्रण दर आर्थिक प्रोत्साहन और तकनीकी अपनाने की आवश्यकता को दर्शाती है।
झारखंड के कचरा प्रबंधन में मुख्य खामियां और चुनौतियां
राज्य स्तर पर एक व्यापक, लागू करने योग्य एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन नीति का अभाव प्रमुख नीति खामी है, जिसमें स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तंत्र नहीं हैं। इससे ULBs के प्रयास बिखरे हुए हैं और JSPCB, JUIDCO तथा स्वच्छता एजेंसियों के बीच समन्वय कमजोर है।
अन्य चुनौतियों में जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए अपर्याप्त अवसंरचना, अनौपचारिक कचरा श्रमिकों की औपचारिक मान्यता की कमी, और खुले में कचरा फेंकने व जलाने की प्रथाएं शामिल हैं। कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण में जनभागीदारी जागरूकता और प्रवर्तन की कमी के कारण कम है।
- राज्य स्तर पर कोई समग्र एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन नीति नहीं
- ULBs, JSPCB और JUIDCO के बीच कमजोर संस्थागत समन्वय
- जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए अपर्याप्त अवसंरचना
- अनौपचारिक कचरा श्रमिकों की औपचारिक मान्यता और समावेशन का अभाव
- पृथक्करण और पुनर्चक्रण में कम जनभागीदारी और जागरूकता
आगे का रास्ता: झारखंड में सतत शहरी कचरा प्रबंधन के लिए रणनीतियाँ
- राज्य स्तर पर एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन नीति बनाएं और लागू करें, जिसमें ULBs और संबंधित एजेंसियों के लिए स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही हो।
- कंपोस्टिंग और बायो-मेथनेशन अवसंरचना का विस्तार करें ताकि कम से कम 50% जैविक कचरे का प्रसंस्करण हो सके, JUIDCO की परियोजना प्रबंधन क्षमता का उपयोग करते हुए।
- आर्थिक प्रोत्साहन जैसे वॉल्यूम-आधारित कचरा शुल्क प्रणाली लागू करें, जिससे स्रोत पर पृथक्करण और कचरा कम करना बढ़ावा मिले।
- अनौपचारिक कचरा पुनर्चक्रण क्षेत्र को औपचारिक करें, सामाजिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और प्रबंधन श्रृंखला में समावेशन प्रदान करके।
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनजागरूकता अभियान तेज करें ताकि पृथक्करण बढ़े, खुले में कचरा फेंकना कम हो और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिले।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग करें ताकि कचरा संग्रह, पृथक्करण और निपटान की वास्तविक समय निगरानी हो और दक्षता तथा पारदर्शिता बढ़े।
झारखंड और JPSC से संबंधित
- JPSC पेपर: GS पेपर 3 (पर्यावरण), झारखंड राज्य शासन और शहरी विकास
- झारखंड दृष्टिकोण: कचरा उत्पादन के राज्य-विशेष आंकड़े, झारखंड म्युनिसिपल एक्ट के कानूनी प्रावधान, JSPCB और JUIDCO की संस्थागत भूमिकाएँ
- मेन्स पॉइंट: कानूनी ढांचे, संस्थागत खामियां, आर्थिक पहलू और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं से तुलना कर उत्तर तैयार करें
अभ्यास प्रश्न
- झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 सेक्शन 136-140 के तहत ULBs को ठोस कचरा प्रबंधन का अधिकार देता है।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 कचरा के स्रोत पर पृथक्करण को अनिवार्य करता है।
- झारखंड के शहरी क्षेत्रों में पुनर्चक्रण दर 50% से अधिक है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी करता है।
- झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO) सीधे कचरा संग्रहण का प्रबंधन करता है।
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) झारखंड राज्य स्तर पर स्वच्छता कार्यक्रमों का समन्वय करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मेन्स प्रश्न
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और सततता व जनभागीदारी बढ़ाने के लिए नीति सुझाव दें। अपने उत्तर में प्रासंगिक आंकड़े और संस्थागत ढांचे शामिल करें।
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
झारखंड में शहरी स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी देने का कानूनी आधार क्या है?
झारखंड म्युनिसिपल एक्ट, 2011 (सेक्शन 136-140) शहरी स्थानीय निकायों को नगरपालिका ठोस कचरा संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान की जिम्मेदारी कानूनी रूप से देता है। यह अधिनियम केंद्रीय कानून जैसे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का पूरक है।
झारखंड में प्रतिदिन कितना नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न होता है, और इसका कितना वैज्ञानिक रूप से संसाधन होता है?
झारखंड में प्रतिदिन लगभग 1,200 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा उत्पन्न होता है। जैविक कचरे का 15% से भी कम हिस्सा कंपोस्टिंग और बायो-मेथनेशन सुविधाओं से संसाधित होता है, जो वैज्ञानिक प्रसंस्करण की कम क्षमता दर्शाता है (JUIDCO 2023)।
झारखंड में अनौपचारिक कचरा पुनर्चक्रण क्षेत्र की क्या भूमिका है?
अनौपचारिक कचरा पुनर्चक्रण क्षेत्र वार्षिक लगभग ₹50 करोड़ का योगदान देता है, जो पुनःप्राप्त सामग्री से आता है। हालांकि, इसे औपचारिक मान्यता और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है, जिससे इसकी आधिकारिक कचरा प्रबंधन प्रणालियों में समेकन सीमित है (JSPCB रिपोर्ट, 2022)।
झारखंड के शहरी क्षेत्रों में गलत कचरा निपटान से मुख्य पर्यावरणीय समस्याएँ क्या हैं?
लगभग 30% शहरी वार्डों में खुले में कचरा फेंकना और जलाना से हवा में प्रदूषण मान्य सीमाओं से ऊपर हो जाता है, साथ ही मिट्टी प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं। ये प्रथाएं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी योगदान देती हैं और शहरी पर्यावरण की गुणवत्ता को खराब करती हैं (CPCB, 2023)।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ने के लिए
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 12 March 2026 | अंतिम अपडेट: 26 April 2026
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