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परिचय: BRICS सम्मेलन 2024 और प्रमुख प्रतिभागी

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14-15 मई 2024 को होने वाले BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह बैठक दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में आयोजित होगी, जिसमें पांच सदस्य देशों—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—की उपस्थिति होगी। यह सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह BRICS के बहुध्रुवीय वैश्विक शासन और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – BRICS की वैश्विक शासन में भूमिका, भारत की विदेश नीति
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – BRICS आर्थिक सहयोग, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
  • निबंध: विश्व राजनीति में बहुध्रुवीयता और भारत की रणनीतिक स्थिति

BRICS: संस्थागत ढांचा और भारत का कानूनी अधिकार

BRICS एक अंतर-सरकारी मंच के रूप में कार्य करता है, जिसके पास कोई बाध्यकारी संधि या स्थायी सचिवालय नहीं है, जिससे इसकी औपचारिक संस्थागत संरचना सीमित रहती है। भारत की भागीदारी विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया (एलोकेशन ऑफ बिजनेस) रूल्स, 1961 के तहत समन्वित की जाती है। इसके अलावा, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों जैसे BRICS घोषणाओं और पहलों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जो भारत की प्रतिबद्धताओं को संवैधानिक वैधता प्रदान करता है।

  • BRICS के पास कोई स्थायी सचिवालय या बाध्यकारी संधि नहीं है; समन्वय वार्षिक सम्मेलनों और मंत्री स्तरीय बैठकों के माध्यम से होता है।
  • MEA भारत की BRICS कूटनीति का समन्वय करता है, जो राष्ट्रीय विदेश नीति लक्ष्यों के अनुरूप होती है।
  • अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय सहयोग ढांचे जैसे BRICS के लिए विधायी समर्थन प्रदान करता है।

BRICS का आर्थिक महत्व और भारत के व्यापार संबंध

BRICS कुल मिलाकर विश्व की लगभग 42% आबादी और विश्व GDP का लगभग 25% हिस्सा रखता है (वर्ल्ड बैंक, 2023)। 2023 में BRICS के अंदरूनी व्यापार का अनुमानित मूल्य लगभग $500 बिलियन था (UN Comtrade)। भारत का चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार क्रमशः $125 बिलियन और $13 बिलियन रहा (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। BRICS द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने 2015 से अब तक $30 बिलियन से अधिक के ऋण मंजूर किए हैं, जो मुख्यतः सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए हैं।

  • BRICS का GDP हिस्सा: विश्व GDP का 24.8% (वर्ल्ड बैंक, 2023)।
  • भारत-चीन व्यापार: $125 बिलियन (2023), भारत-रूस व्यापार: $13 बिलियन (2023)।
  • NDB ने स्थापना के बाद से $30 बिलियन से अधिक के ऋण दिए, मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए।

तुलना: BRICS बनाम G7 और अन्य वैश्विक समूह

पहलू BRICS G7 यूरोपीय संघ (EU)
सदस्य संरचना उभरती अर्थव्यवस्थाएं: ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाएं: अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा, जापान 28+ यूरोपीय देश, सुप्रानैशनल शासन के साथ
राजनीतिक प्रणालियाँ विविध: लोकतांत्रिक, अधिनायकवादी, मिश्रित शासन लिबरल लोकतंत्र लोकतांत्रिक, साझा संप्रभुता के साथ
संस्थागत ढांचा ढीला मंच, कोई स्थायी सचिवालय नहीं अनौपचारिक सम्मेलन आधारित, कोई संधि नहीं औपचारिक संस्थाएं: यूरोपीय आयोग, संसद, न्यायालय
आर्थिक फोकस दक्षिण-दक्षिण सहयोग, NDB के माध्यम से बुनियादी ढांचे का वित्तपोषण वैश्विक आर्थिक शासन, उदार आर्थिक व्यवस्था एकल बाजार, कस्टम्स यूनियन, आर्थिक एकीकरण
वित्तीय संस्थान न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) – 2015 से $30B ऋण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक यूरोपीय निवेश बैंक (EIB)

वांग यी और लावरोव की भागीदारी के रणनीतिक मायने

चीन के वांग यी और रूस के सर्गेई लावरोव की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि BRICS पश्चिमी प्रभुत्व वाले संस्थानों के विरुद्ध एक मजबूत विकल्प के रूप में अपनी भूमिका को पुख्ता करना चाहता है। उनकी भागीदारी बहुध्रुवीयता के प्रति ब्लॉक की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो एकध्रुवीय अमेरिकी नेतृत्व वाले वैश्विक शासन को चुनौती देता है। भारत के लिए यह सम्मेलन रूस और चीन दोनों के साथ संबंधों में संतुलन बनाने, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधार की दिशा में कदम उठाने का अवसर है।

  • BRICS बहुध्रुवीयता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने का मंच है।
  • भारत BRICS के ढांचे में चीन और रूस के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाता है।
  • वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों में सुधार की मांग करने का अवसर।

संस्थागत सीमाएं और चुनौतियां

अपनी आर्थिक ताकत के बावजूद BRICS के पास कोई स्थायी सचिवालय या औपचारिक निर्णय-निर्माण तंत्र नहीं है, जिससे समन्वित नीतिगत कार्रवाई में बाधाएं आती हैं। यह वैश्विक संकटों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने या सामूहिक निर्णय लागू करने में असमर्थ बनाता है, जो यूरोपीय संघ जैसे अधिक संस्थागत समूहों से अलग है। इसके अलावा, सदस्य देशों की राजनीतिक प्रणालियों और रणनीतिक हितों में विविधता गहरे एकीकरण में बाधा डालती है।

  • कोई स्थायी सचिवालय या बाध्यकारी संधि नहीं, जिससे संस्थागत एकरूपता सीमित।
  • विविध राजनीतिक प्रणालियां एकजुट नीति निर्माण में बाधक।
  • समन्वय की चुनौतियां वैश्विक शासन में प्रभावशीलता कम करती हैं।

आगे का रास्ता: BRICS की वैश्विक भूमिका और भारत के रणनीतिक लाभ

  • BRICS को स्थायी सचिवालय के साथ संस्थागत रूप देना ताकि समन्वय बेहतर हो सके।
  • NDB के दायरे को बढ़ाकर जलवायु और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के वित्तपोषण को शामिल करना।
  • भारत BRICS का उपयोग पश्चिम से परे आर्थिक साझेदारियों को विविध बनाने के लिए करे।
  • BRICS के सहमति से वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार को बढ़ावा देना।
  • BRICS के भीतर व्यापार और निवेश को मजबूत कर पश्चिमी बाजारों पर निर्भरता कम करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
BRICS और उसके संस्थागत ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. BRICS का स्थायी सचिवालय शंघाई में स्थित है।
  2. न्यू डेवलपमेंट बैंक का उद्देश्य BRICS देशों में बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण करना है।
  3. BRICS एक बाध्यकारी संधि के तहत संचालित होता है जिसे सभी सदस्य देशों ने अनुमोदित किया है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि BRICS का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि NDB सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि BRICS एक अनौपचारिक मंच है और इसके लिए कोई बाध्यकारी संधि नहीं है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने वाले कानून बनाने का अधिकार देता है।
  2. विदेश मंत्रालय के पास बिना संसद की मंजूरी के अंतरराष्ट्रीय संधियों को अनुमोदित करने का विशेष अधिकार है।
  3. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया (एलोकेशन ऑफ बिजनेस) रूल्स, 1961, BRICS समन्वय को MEA को सौंपते हैं।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि संधि अनुमोदन में संसद की मंजूरी आवश्यक हो सकती है। कथन 3 सही है क्योंकि Allocation of Business Rules के तहत BRICS समन्वय MEA को दिया गया है।

मुख्य प्रश्न

चीन के वांग यी और रूस के सर्गेई लावरोव की 2024 के BRICS सम्मेलन में भागीदारी भारत की विदेश नीति और वैश्विक व्यवस्था के लिए रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध और भारतीय विदेश नीति)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज निर्यात और औद्योगिक क्षेत्र BRICS के बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और व्यापार सहयोग से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: BRICS की आर्थिक पहलों का झारखंड के विकास और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रभाव।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) क्या है और BRICS में इसकी भूमिका क्या है?

न्यू डेवलपमेंट बैंक, जिसे 2015 में BRICS देशों ने स्थापित किया था, सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है। इसने $30 बिलियन से अधिक के ऋण मंजूर किए हैं, जिसका मकसद आर्थिक सहयोग बढ़ाना और पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर निर्भरता कम करना है।

क्या BRICS का कोई स्थायी सचिवालय है?

नहीं, BRICS एक ढीला अंतर-सरकारी मंच है जिसके पास कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। समन्वय वार्षिक सम्मेलनों और मंत्री स्तरीय बैठकों के जरिए होता है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 253 BRICS से कैसे जुड़ा है?

अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने वाले कानून बनाने का अधिकार देता है, जिसमें BRICS के तहत समझौते भी शामिल हैं। इससे भारत की प्रतिबद्धताओं को संवैधानिक वैधता मिलती है।

BRICS और G7 में क्या अंतर है?

BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें विविध राजनीतिक प्रणालियां हैं और जो बहुध्रुवीयता तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर जोर देता है। जबकि G7 उन्नत उदार लोकतंत्रों का समूह है जो वर्तमान उदार वैश्विक व्यवस्था को प्राथमिकता देता है।

BRICS के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में औपचारिक संस्थागत तंत्रों का अभाव, स्थायी सचिवालय की कमी, सदस्य देशों की राजनीतिक विविधता और रणनीतिक हितों में भिन्नता शामिल हैं, जो समन्वित नीतिगत कार्रवाई और गहरे एकीकरण में बाधा डालती हैं।

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