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विक्रम VT 21 DRDO की Combat Vehicles Research and Development Establishment (CVRDE) द्वारा विकसित एक स्वदेशी इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) है। इसे 2023 में पेश किया गया और 2024 में इसकी शुरुआती उत्पादन प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसका मकसद भारतीय सेना की 30 साल से अधिक सेवा में चल रही सोवियत युग की BMP-2 फ्लीट की जगह लेना है। लगभग 21 टन वजन वाले इस वाहन में 30 मिमी की स्वचालित तोप लगी है, जो एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) से भी लैस है। यह बेहतर फायरपावर, गतिशीलता और सुरक्षा प्रदान करता है। इस वाहन का स्वदेशी डिजाइन भारत की Defence Production Policy 2018 और Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के तहत आत्मनिर्भरता बढ़ाने की रणनीति से मेल खाता है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा उत्पादन, स्वदेशी रक्षा तकनीक, रक्षा खरीद नीति
  • GS पेपर 3: सशस्त्र बलों की सुरक्षा चुनौतियां और तकनीकी आधुनिकीकरण
  • निबंध: स्वदेशी रक्षा निर्माण और रणनीतिक स्वायत्तता

विक्रम VT 21 का तकनीकी और परिचालन विवरण

VT 21 का वजन लगभग 21 टन है, जो इसे मध्यम वजन वर्ग के ICV में रखता है, जो तेज तैनाती और विभिन्न प्रकार की जमीन पर काम करने के लिए उपयुक्त है। इसमें 30 मिमी की स्वचालित तोप लगी है, जो पैदल सेना और हल्के बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसके साथ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें भी लगी हैं, जो भारी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ प्रभावी हैं। यह वाहन 70 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चल सकता है, और उन्नत सस्पेंशन सिस्टम से लैस है, जो भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों में बेहतर गतिशीलता सुनिश्चित करता है। इसके डिजाइन में मॉड्यूलर कवच शामिल है, जो सुरक्षा बढ़ाने और भविष्य में उन्नयन के लिए उपयुक्त है। साथ ही, डिजिटल कम्युनिकेशन सूट भी इसमें शामिल है, जो सेना के फील्ड कमांड सिस्टम के साथ जुड़ने के लिए विकसित किया जा रहा है।

  • वजन: लगभग 21 टन (Indian Express, 2024)
  • हथियार: 30 मिमी स्वचालित तोप + ATGM (DRDO, 2023)
  • गतिशीलता: 70 किमी/घंटा; उन्नत सस्पेंशन (DRDO, 2023)
  • सुरक्षा: मॉड्यूलर कंपोजिट कवच; NBC सुरक्षा
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: फील्ड कमांड सिस्टम के साथ एकीकरण प्रगति पर

खरीद नीति और कानूनी ढांचा

VT 21 की खरीद Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के तहत होती है, जो रक्षा अनुबंधों में कम से कम 30% स्वदेशी सामग्री का प्रावधान करता है। नीतियों का पालन Ministry of Defence (MoD) और Defence Acquisition Council (DAC) के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है। संविधान के Article 246 और संघ सूची के Entry 54 के तहत संसद को रक्षा मामलों में कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है, जिससे खरीद और उत्पादन पर केंद्रीकृत नियंत्रण होता है। VT 21 का विकास और खरीद Defence Procurement Manual (DPM) 2020 के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए, जो पारदर्शिता और समय सीमा सुनिश्चित करता है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का इस कार्यक्रम पर सीधा प्रभाव नहीं है।

  • DPP 2020: खरीद प्रक्रिया, 30% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य
  • Defence Production Policy 2018: रक्षा निर्माण में मेक इन इंडिया को बढ़ावा
  • MoD और DAC: नीति निर्धारण और खरीद प्राधिकरण
  • कानूनी आधार: Article 246, Entry 54, संविधान की सूची I

आर्थिक पहलू और उत्पादन क्षमता

भारत का रक्षा बजट 2023-24 लगभग ₹5.94 लाख करोड़ है, जिसमें पूंजीगत व्यय लगभग ₹2.4 लाख करोड़ है। स्वदेशी खरीद का हिस्सा मूल्य के हिसाब से लगभग 65% है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। VT 21 के विकास पर ₹1,200 करोड़ का खर्च आया है, और उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद सालाना 100 यूनिट्स का लक्ष्य रखा गया है। प्रति वाहन लागत लगभग ₹15 करोड़ है, जो आयातित वाहनों की कीमत ₹25-30 करोड़ से काफी कम है। अगले दस वर्षों में भारतीय सेना को 1,000 से अधिक ICVs की जरूरत है, जिससे उत्पादन बढ़ाने और एकीकरण की चुनौतियों को हल करने पर बड़ा बाजार खुलता है।

  • रक्षा बजट 2023-24: ₹5.94 लाख करोड़; पूंजीगत व्यय ₹2.4 लाख करोड़
  • स्वदेशी खरीद: 65% मूल्य के हिसाब से (MoD 2023)
  • VT 21 विकास लागत: ₹1,200 करोड़
  • उत्पादन क्षमता: 100 यूनिट/साल (MoD, 2024)
  • प्रति यूनिट लागत: ₹15 करोड़ बनाम ₹25-30 करोड़ आयातित
  • मांग अनुमान: 1,000+ ICVs अगले 10 सालों में

विकास और तैनाती में संस्थागत भूमिका

VT 21 परियोजना DRDO के CVRDE द्वारा संचालित है, जो ट्रैक किए गए कॉम्बैट वाहनों में विशेषज्ञता रखता है। उत्पादन में Defence Public Sector Undertakings (DPSUs) जैसे Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) घटकों के लिए और Bharat Dynamics Limited (BDL) मिसाइल एकीकरण के लिए शामिल हैं। MoD नीति और खरीद की निगरानी करता है। भारतीय सेना अंतिम उपयोगकर्ता और परिचालन मूल्यांकनकर्ता के रूप में परियोजना में सक्रिय भूमिका निभाती है, जो सुधार के लिए फीडबैक देती है। यह सहयोग प्रोटोटाइप से बड़े पैमाने पर उत्पादन तक संक्रमण और जीवनकाल समर्थन के लिए जरूरी है।

  • DRDO-CVRDE: VT 21 का प्रमुख विकासकर्ता
  • DPSUs: BHEL (घटक), BDL (मिसाइल)
  • MoD: नीति और खरीद प्राधिकरण
  • भारतीय सेना: अंतिम उपयोगकर्ता, परिचालन मूल्यांकनकर्ता

तुलनात्मक विश्लेषण: विक्रम VT 21 बनाम रूस का BMP-3

विशेषताविक्रम VT 21 (भारत)BMP-3 (रूस)
सेवा में प्रवेश2023 (शुरुआती उत्पादन)1980 के अंत
वजन~21 टन18.7 टन
मुख्य हथियार30 मिमी स्वचालित तोप + ATGM100 मिमी तोप + 30 मिमी तोप + ATGM
गति70 किमी/घंटा70 किमी/घंटा
उन्नयन रणनीतिमॉड्यूलर कवच, इलेक्ट्रॉनिक एकीकरण जारीलगातार मॉड्यूलर अपग्रेड, निर्यात केंद्रित
उत्पादन पैमाना100 यूनिट/साल अनुमानितबड़े पैमाने पर, निर्यात उन्मुख
परिचालन फोकसBMP-2 का विकल्प, स्वदेशी स्वायत्ततामल्टी-रोल, निर्यात और घरेलू उपयोग

उत्पादन और एकीकरण में चुनौतियां

उन्नत डिजाइन के बावजूद, VT 21 कार्यक्रम को सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने में दिक्कतें आ रही हैं। मौजूदा संचार और फील्ड कमांड सिस्टम के साथ पूर्ण एकीकरण अभी बाकी है, जिससे परिचालन तत्परता सीमित हो रही है। सप्लाई चेन की बाधाएं और जीवनकाल रखरखाव की मजबूत व्यवस्था की जरूरत भी जोखिम पैदा कर रही है। इन समस्याओं के कारण BMP-2 की पुरानी फ्लीट को समय पर बदलना मुश्किल हो सकता है, जिससे पुराने प्लेटफॉर्म पर निर्भरता बनी रहेगी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए R&D, उत्पादन और उपयोगकर्ता प्रशिक्षण में समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

  • प्रारंभिक 100 यूनिट्स से अधिक उत्पादन बढ़ाना
  • सेना के डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ पूर्ण एकीकरण बाकी
  • सप्लाई चेन और घटक मानकीकरण की समस्याएं
  • जीवनकाल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स समर्थन की व्यवस्था

महत्त्व और आगे का रास्ता

विक्रम VT 21 भारत की मेकैनिकल पैदल सेना क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। यह लागत बचत, रणनीतिक स्वायत्तता और भारतीय परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलन का वादा करता है। हालांकि, इन लाभों को पाने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने और फील्ड सिस्टम के साथ सहज एकीकरण सुनिश्चित करने की जरूरत है। MoD को DPP 2020 के तहत खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए, DPSUs और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए और सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी को प्राथमिकता देनी चाहिए। R&D और जीवनकाल समर्थन में निरंतर निवेश BMP-2 की पुरानी फ्लीट को प्रभावी ढंग से बदलने के लिए आवश्यक होगा।

  • निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी से उत्पादन क्षमता तेज करना
  • सेना के कमांड सिस्टम के साथ पूर्ण डिजिटल एकीकरण सुनिश्चित करना
  • सप्लाई चेन की मजबूती और मानकीकरण पर ध्यान देना
  • जीवनकाल समर्थन और रखरखाव प्रशिक्षण पर जोर देना
  • ऑफ़सेट नीतियों का उपयोग कर स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करना
📝 प्रारंभिक अभ्यास
विक्रम VT 21 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह एक आयातित इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल है जिसे ऑफसेट दायित्वों के तहत खरीदा गया है।
  2. इसमें 30 मिमी स्वचालित तोप लगी है जो एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल से जुड़ी है।
  3. वाहन का वजन लगभग 21 टन है और इसकी अधिकतम गति 70 किमी/घंटा है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि विक्रम VT 21 DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी वाहन है, आयातित नहीं। कथन 2 और 3 DRDO और Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह सभी रक्षा अनुबंधों में कम से कम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करता है।
  2. इसमें ऑफसेट दायित्व शामिल हैं, जिनके तहत विदेशी विक्रेताओं को भारतीय रक्षा उत्पादन में निवेश करना होता है।
  3. यह Ministry of Defence और Defence Acquisition Council द्वारा संचालित है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि DPP 2020 में न्यूनतम 30% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है, 50% नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

विक्रम VT 21 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल की भारत की पुरानी BMP-2 फ्लीट को बदलने की क्षमता का मूल्यांकन करें। इसके तकनीकी फायदे, उत्पादन संबंधी चुनौतियां और भारतीय सेना में शामिल करने पर प्रभाव डालने वाले नीतिगत ढांचे पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पेपर 3 - सुरक्षा और रक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: पूर्वी भारत में आर्डनेंस फैक्ट्रियां और DPSUs की मौजूदगी स्थानीय रोजगार और रक्षा निर्माण से जुड़ी कौशल विकास को प्रभावित करती है।
  • मेन पॉइंटर: स्वदेशी रक्षा निर्माण की भूमिका को क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता के संदर्भ में उत्तर में शामिल करें।
इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) जैसे विक्रम VT 21 और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर (APC) में क्या फर्क होता है?

ICV जैसे विक्रम VT 21 में भारी हथियार (जैसे 30 मिमी तोप, ATGM) होते हैं और ये पैदल सेना के साथ सीधे लड़ाई के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जबकि APC मुख्य रूप से सैनिकों के परिवहन के लिए होते हैं, जिनमें हल्का हथियार होता है और सुरक्षा व गतिशीलता पर जोर होता है।

Defence Procurement Procedure 2020 स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

DPP 2020 रक्षा अनुबंधों में कम से कम 30% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करता है और ऑफसेट दायित्वों के जरिए विदेशी विक्रेताओं को भारतीय रक्षा निर्माण में निवेश के लिए प्रेरित करता है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ती है।

विक्रम VT 21 की लागत आयातित इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल से कैसे तुलना करती है?

VT 21 की प्रति यूनिट लागत लगभग ₹15 करोड़ है, जो आयातित वाहनों की ₹25-30 करोड़ की कीमत से काफी कम है, जिससे यह एक किफायती विकल्प बनता है।

विक्रम VT 21 के विकास और उत्पादन के लिए मुख्य संस्थान कौन-कौन से जिम्मेदार हैं?

DRDO का CVRDE प्रमुख विकासकर्ता है; DPSUs जैसे Bharat Heavy Electricals Limited और Bharat Dynamics Limited घटक निर्माण और मिसाइल एकीकरण में मदद करते हैं; Ministry of Defence नीति और खरीद की निगरानी करता है।

विक्रम VT 21 के बड़े पैमाने पर शामिल होने में मुख्य बाधाएं क्या हैं?

मुख्य चुनौतियां हैं सीमित उत्पादन क्षमता, फील्ड कमांड सिस्टम के साथ पूर्ण एकीकरण का अभाव, सप्लाई चेन की समस्याएं और जीवनकाल रखरखाव के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।

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