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परिचय: अमेरिका में हाइब्रिड और GM गेहूं की प्रगति

अमेरिका के कृषि शोधकर्ता हाइब्रिड गेहूं की नई किस्में विकसित कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) गेहूं को बाजार में लाने की तैयारी में हैं। हाइब्रिड गेहूं, जो दो अलग-अलग आनुवंशिक माता-पिता से बनाया जाता है, उपज में 15-20% तक वृद्धि कर सकता है, जबकि GM गेहूं का लक्ष्य कीट प्रतिरोध और हर्बिसाइड सहनशीलता बढ़ाना है। अमेरिका का गेहूं बाजार लगभग 9 अरब डॉलर का है (USDA Economic Research Service, 2023) और 2023 में इसका निर्यात 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है (USDA Foreign Agricultural Service)। यह प्रगति भारत की सतर्क GM फसल नीति से अलग है, जहां 2002 से केवल Bt कपास ही व्यावसायिक रूप से स्वीकृत है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: बायोटेक्नोलॉजी – GM फसलों का नियमन, हाइब्रिड बनाम GM फसलें, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
  • GS पेपर 2: भारतीय राजनीति – GEAC जैसे नियामक निकाय, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
  • निबंध: भारत में कृषि जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा

जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें: परिभाषा और तकनीकें

GM फसलें वे पौधे हैं जिनका DNA आनुवंशिक इंजीनियरिंग के जरिए बदला जाता है ताकि उनमें हर्बिसाइड सहनशीलता (HT), कीट प्रतिरोध (IR) या पोषण सुधार जैसे गुण शामिल किए जा सकें। इस प्रक्रिया में उपयुक्त जीन की पहचान, पृथक्करण और उसे फसल के जीनोम में डालना शामिल है, जो gene gun, electroporation, microinjection या Agrobacterium-mediated transformation जैसी तकनीकों से किया जाता है। ये संशोधन ट्रांसजेनिक (विभिन्न प्रजाति के जीन), सिसजेनिक (एक ही प्रजाति के जीन), सबजेनिक या कई गुणों को एक साथ जोड़ने वाले (stacked traits) हो सकते हैं (ISAAA, 2022)।

  • मुख्य GM गुण: हर्बिसाइड सहनशीलता (HT), कीट प्रतिरोध (IR), और इनका संयोजन
  • 2022 में विश्वभर में GM फसलें 190.4 मिलियन हेक्टेयर में उगाई गईं (ISAAA, 2022)
  • हाइब्रिड फसलें पारंपरिक प्रजनन से माता-पिता की लाइनों को मिलाकर बनाई जाती हैं, जिनमें सीधे जीन प्रविष्टि नहीं होती

भारत में GM फसलों का नियामक ढांचा

भारत में GM फसलों का नियमन Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) के तहत होता है, जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत काम करता है। यह समिति पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3 और 5) एवं 1989 के नियमों के तहत फसलों की बायोसुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव और व्यावसायिक रिलीज के प्रस्तावों का मूल्यांकन करती है।

  • 2002 में स्वीकृत Bt कपास भारत में एकमात्र व्यावसायिक GM फसल है
  • अन्य GM फसलें जैसे Bt बैंगन और DMH-11 सरसों फिलहाल क्षेत्रीय परीक्षणों में हैं, लेकिन मंजूरी में देरी हो रही है
  • भारत में GM खाद्य फसलों के लिए स्पष्ट और समयबद्ध मंजूरी प्रक्रिया का अभाव है, जिससे लंबी अनिश्चितता बनी रहती है

अमेरिका में GM फसलों का नियामक ढांचा

अमेरिका में Coordinated Framework for Regulation of Biotechnology (1986) के तहत तीन एजेंसियां मिलकर GM फसलों का नियमन करती हैं: USDA की Animal and Plant Health Inspection Service (APHIS) पौधों के स्वास्थ्य के लिए, Environmental Protection Agency (EPA) पर्यावरण सुरक्षा के लिए, और Food and Drug Administration (FDA) खाद्य सुरक्षा के लिए। इस समन्वित व्यवस्था से जोखिम मूल्यांकन और व्यावसायीकरण की प्रक्रिया तेज होती है।

  • APHIS पौधों के कीट जोखिम और क्षेत्र परीक्षण अनुमति का आकलन करता है
  • EPA कीटनाशक गुणों और पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करता है
  • FDA GM फसलों के खाद्य और पशु आहार सुरक्षा का मूल्यांकन करता है
  • इस ढांचे ने हर्बिसाइड सहिष्णु सोयाबीन और कीट प्रतिरोधी मकई जैसी GM फसलों के त्वरित परिचय में मदद की है

अमेरिका में हाइब्रिड और GM गेहूं का आर्थिक प्रभाव

हाइब्रिड गेहूं की किस्मों ने पारंपरिक गेहूं की तुलना में 15-20% तक अधिक उपज दी है, जिससे किसानों की आय और लाभ बढ़ा है (USDA, 2023)। GM गेहूं, जिसमें हर्बिसाइड सहनशीलता और कीट प्रतिरोध जैसे गुण होंगे, उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में सहायक होंगे। अमेरिका का गेहूं निर्यात बाजार, जिसका मूल्य 2023 में 10.5 अरब डॉलर था, इन तकनीकों से अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

  • हाइब्रिड गेहूं अपनाने से उपज में स्थिरता आती है और जलवायु तनाव सहने की क्षमता बढ़ती है
  • GM गुण कीटनाशक उपयोग कम करते हैं और पर्यावरणीय जोखिम घटाते हैं
  • विश्व स्तर पर GM फसलों ने उत्पादन में वृद्धि दिखाई है; भारत में Bt कपास ने 2002 से 24% उपज बढ़ाई और 18 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ दिया है (ISAAA, 2022)

भारत और अमेरिका की GM फसल नीतियों की तुलना

पहलूभारतअमेरिका
नियामक निकायMoEFCC के तहत GEACUSDA-APHIS, EPA, FDA (Coordinated Framework)
कानूनी आधारपर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; 1989 के नियमCoordinated Framework for Regulation of Biotechnology, 1986
मंजूरी की गतिलंबित, कोई निश्चित समयसीमा नहींएजेंसियों के समन्वय से अपेक्षाकृत तेज
व्यावसायिक GM फसलेंकेवल Bt कपास (2002 से)मकई, सोयाबीन सहित कई; GM गेहूं लॉन्च के इंतजार में
सार्वजनिक धारणा और नीतिसतर्क, कड़ी नियामक समीक्षा और सार्वजनिक बहसवैज्ञानिक आधारित, अधिक उदार नियामक दृष्टिकोण

भारत के लिए महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत अमेरिका के समन्वित नियामक मॉडल से सीख लेकर विशेषकर गेहूं जैसी खाद्य फसलों की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बना सकता है
  • स्पष्ट, समयबद्ध जोखिम मूल्यांकन और एजेंसियों के बीच सहयोग से देरी और अनिश्चितता कम हो सकती है
  • ICAR के शोध सहयोग से भारत में हाइब्रिड गेहूं अपनाने से उपज बढ़ेगी, बिना GM फसलों की नियामक जटिलताओं के
  • सार्वजनिक जागरूकता और पारदर्शी बायोसुरक्षा डेटा से GM तकनीकों में विश्वास बढ़ेगा
  • नीति में आर्थिक लाभों के साथ बायोसुरक्षा और सामाजिक-सांस्कृतिक चिंताओं का संतुलन आवश्यक है
📝 प्रारंभिक अभ्यास
GM फसलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. GM फसलों में जीन इंजीनियरिंग तकनीक के जरिए जीन डाले जाते हैं।
  2. हाइब्रिड फसलें GM माता-पिता लाइनों को क्रॉस करके बनाई जाती हैं।
  3. हर्बिसाइड सहनशीलता GM फसलों में आम गुण है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि GM फसलों में बायोटेक्नोलॉजी द्वारा जीन डाले जाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि हाइब्रिड फसलें पारंपरिक क्रॉसिंग से बनती हैं, जरूरी नहीं कि GM माता-पिता लाइनों से। कथन 3 सही है, हर्बिसाइड सहनशीलता GM फसलों में सामान्य गुण है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
GM फसलों के नियामक निकायों के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. भारत में GEAC कृषि मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है।
  2. अमेरिका में USDA-APHIS पौधों के कीट जोखिम को नियंत्रित करता है।
  3. अमेरिका में EPA GM फसलों की पर्यावरण सुरक्षा देखता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि GEAC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आता है, कृषि मंत्रालय के नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

हाइब्रिड और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों में अंतर समझाइए और भारत व अमेरिका में इनके नियामक ढांचे की तुलना कीजिए। विशेषकर गेहूं के व्यावसायीकरण में अमेरिका के अनुभव से भारत क्या सीख सकता है?

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – कृषि और जैव प्रौद्योगिकी
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के गेहूं उत्पादन क्षेत्र स्थानीय जलवायु तनावों में उपज बढ़ाने के लिए हाइब्रिड गेहूं से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: जैव प्रौद्योगिकी की प्रगति को झारखंड के कृषि विकास और GM फसलों की नीति चुनौतियों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत में Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) की भूमिका क्या है?

GEAC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत सबसे उच्च नियामक निकाय है, जो भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों के व्यावसायिक रिलीज को मंजूरी देता है। यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत काम करता है।

हाइब्रिड गेहूं और GM गेहूं में क्या अंतर है?

हाइब्रिड गेहूं दो आनुवंशिक रूप से अलग माता-पिता की पारंपरिक क्रॉसिंग से बनता है, जिसका उद्देश्य उपज बढ़ाना है। जबकि GM गेहूं में सीधे विशिष्ट जीन डाले जाते हैं ताकि कीट प्रतिरोध या हर्बिसाइड सहनशीलता जैसे गुण प्राप्त किए जा सकें।

भारत ने GM खाद्य फसलों जैसे गेहूं को मंजूरी देने में सतर्कता क्यों बरती है?

भारत में GM खाद्य फसलों के लिए स्पष्ट, समयबद्ध नियामक प्रक्रिया का अभाव है, जिससे बायोसुरक्षा चिंताएं, सार्वजनिक विरोध और कड़ी नियामक समीक्षा के कारण लंबी देरी होती है, जबकि अमेरिका में अधिक समन्वित ढांचा है।

भारत में Bt कपास ने कौन से आर्थिक लाभ दिए हैं?

2002 से Bt कपास ने उपज में 24% की वृद्धि की है और कीटों से नुकसान व कीटनाशक उपयोग कम होने से लगभग 18 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ प्रदान किया है (ISAAA, 2022)।

अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को कौन-कौन सी एजेंसियां नियंत्रित करती हैं?

USDA की APHIS पौधों के कीट जोखिम का मूल्यांकन करती है, EPA पर्यावरण सुरक्षा देखती है, और FDA GM फसलों की खाद्य सुरक्षा की जांच करता है। यह सब 1986 के Coordinated Framework for Regulation of Biotechnology के तहत होता है।

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