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जुलाई 2024 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष स्ज़ाबा कोरोज़ी ने न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री (EAM) एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस बातचीत का मुख्य विषय बढ़ती एकतरफा शांति पहलों के बीच बहुपक्षीयता को मजबूत करना था, खासकर अमेरिकी नेतृत्व वाली 'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' नीति की आलोचना की गई, जिसे संयुक्त राष्ट्र के स्थापित ढांचे को दरकिनार करने वाला माना जाता है। यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) के तहत बहुपक्षीय कूटनीति और एकतरफा शांति प्रयासों के बीच मौजूद तनाव को दर्शाती है, जो यूएन के नेतृत्व वाले वैश्विक शांति व्यवस्था के लिए चुनौतियां खड़ी करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – यूएन प्रणाली, कूटनीति, शांति मिशन
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – शांति मिशन, वैश्विक शासन
  • निबंध: वैश्विक शांति पहलों में बहुपक्षीयता बनाम एकतरफा पहल

यूएन चार्टर के प्रावधान और भारत का संवैधानिक दायित्व

यूएन चार्टर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए कानूनी आधार तय करता है। अनुच्छेद 1 के तहत संयुक्त राष्ट्र को सामूहिक उपायों से अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने का दायित्व दिया गया है, जबकि अनुच्छेद 24 के तहत यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) को शांति और सुरक्षा लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है। वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशन (1961) कूटनीतिक संबंधों को नियंत्रित करता है और कोरोज़ी-जयशंकर की बैठक जैसे संवादों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

भारत के अंदर, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जिससे भारत अपने यूएन कर्तव्यों को पूरा कर सकता है। यूएनजीए नियमावली विशेषकर नियम 39 महासभा की सामान्य बहस को नियंत्रित करता है, जो सदस्यों को शांति और सुरक्षा मुद्दों पर संवाद करने का ढांचा देता है।

यूएन शांति मिशनों में भारत की भूमिका और आर्थिक हिस्सेदारी

भारत यूएन शांति मिशनों में चौथा सबसे बड़ा सैनिक योगदानकर्ता है, जहां 2024 के यूएन डिपार्टमेंट ऑफ पीस ऑपरेशंस (DPKO) के आंकड़ों के अनुसार 6,000 से अधिक कर्मी तैनात हैं। आर्थिक रूप से, भारत प्रति वर्ष लगभग 60 मिलियन डॉलर यूएन शांति मिशन के बजट में योगदान देता है (2023)। ये प्रतिबद्धताएं भारत की बहुपक्षीय शांति तंत्र में रणनीतिक भागीदारी को दर्शाती हैं।

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 2023 में 119 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया (वाणिज्य मंत्रालय, भारत), जो मजबूत आर्थिक रिश्तों को दर्शाता है। बहुपक्षीय शांति मिशन द्वारा स्थिरता वैश्विक GDP वृद्धि से जुड़ी है, जिसे विश्व बैंक (2023) 2-3% आंका है, जो वैश्विक व्यापार और विकास के लिए आर्थिक प्रोत्साहन को रेखांकित करता है।

बहुपक्षीयता और एकतरफा शांति पहलों के बीच अंतर

'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' अमेरिकी नेतृत्व वाली एकतरफा शांति पहलों को संदर्भित करता है, जिनकी आलोचना यूएन के बहुपक्षीय ढांचे को दरकिनार करने और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया व वैधता को कमजोर करने के लिए की जाती है। इसके विपरीत, यूरोपीय संघ की सामान्य सुरक्षा और रक्षा नीति (CSDP) बहुपक्षीय कूटनीति का उदाहरण है, जिसने बाल्कन में शांति मिशनों की सफलता दर में 30% की वृद्धि दर्ज की है (EU External Action Service रिपोर्ट, 2023)।

पहलुअमेरिका 'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस'EU CSDPयूएन ढांचा
दृष्टिकोणएकतरफा शांति पहलबहुपक्षीय कूटनीतियूएन चार्टर के तहत सामूहिक सुरक्षा
वैधतायूएन को दरकिनार करने पर सवालसहमति पर आधारित उच्च वैधताअंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा समर्थित सर्वोच्च
प्रभावशीलताअल्पकालीन, खंडित परिणाममिशन की लंबी अवधि में 30% अधिक सफलताभिन्न, लेकिन विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त
समन्वययूएन के साथ कम समन्वययूएन के निर्देशों के साथ मेलकेंद्रीय समन्वयकारी संस्था

नीति में खामियां और चुनौतियां

मुख्य समस्या 'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' जैसी एकतरफा पहलों और यूएन के बहुपक्षीय शांति मिशन के बीच समन्वय की कमी है। यह विखंडन वैश्विक शांति प्रयासों की वैधता और प्रभावशीलता को कमजोर करता है, जिससे संघर्ष समाधान और पुनर्निर्माण जटिल हो जाता है। भारत की यूएनजीए अध्यक्ष के साथ कूटनीतिक बातचीत बहुपक्षीयता को मजबूत करने और इन चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता दिखाती है।

महत्व और आगे की राह

  • एकतरफा और बहुपक्षीय शांति प्रयासों के बीच तालमेल बढ़ाकर दोहराव और विवाद से बचाव।
  • भारत की यूएन शांति मिशन में नेतृत्व क्षमता को सशक्त करना, सैनिक योगदान और आर्थिक सहायता का बेहतर उपयोग।
  • यूएन प्रणाली में सुधार को बढ़ावा देना ताकि बदलती वैश्विक राजनीति के अनुरूप सामूहिक निर्णय प्रक्रिया बनी रहे।
  • शांति मिशनों से जुड़े आर्थिक लाभों को प्रोत्साहित करना ताकि वैश्विक व्यापार और विकास निरंतर बना रहे।
  • कूटनीतिक संवाद को प्रोत्साहित करना जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में यूएन चार्टर की प्राथमिकता को दोहराए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
अंतरराष्ट्रीय शांति में यूएनजीए अध्यक्ष की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यूएनजीए अध्यक्ष को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी है।
  2. यूएनजीए अध्यक्ष यूएनजीए नियमों के तहत शांति से जुड़े मुद्दों पर विशेष सत्र बुला सकते हैं।
  3. यूएनजीए अध्यक्ष की भूमिका मुख्यतः सांकेतिक होती है और वे शांति मिशनों पर प्रभाव नहीं डालते।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय शांति की मुख्य जिम्मेदारी यूएन चार्टर के अनुच्छेद 24 के तहत सुरक्षा परिषद की है, न कि यूएनजीए अध्यक्ष की। कथन 2 सही है क्योंकि यूएनजीए अध्यक्ष यूएनजीए नियमों के तहत विशेष सत्र बुला सकते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि यूएनजीए अध्यक्ष बहुपक्षीय संवादों को प्रभावित करते हैं, हालांकि वे शांति मिशनों के संचालन में सीधे शामिल नहीं होते।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के अंतरराष्ट्रीय संधियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के बारे में विचार करें:
  1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है।
  2. भारत को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए राज्य विधानमंडल की मंजूरी चाहिए।
  3. अंतरराष्ट्रीय संधियां हस्ताक्षर होते ही स्वतः भारतीय कानून का हिस्सा बन जाती हैं।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bऔर (c) केवल
  • cकेवल
  • dकेवल 1 और 2
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राज्य विधानमंडल की मंजूरी आवश्यक नहीं होती। कथन 3 भी गलत है क्योंकि संधियां हस्ताक्षर होते ही स्वतः घरेलू कानून का हिस्सा नहीं बनतीं, इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी है।

मेन्स प्रश्न

यूएनजीए अध्यक्ष स्ज़ाबा कोरोज़ी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बैठक, साथ ही 'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' की आलोचना, बहुपक्षीय शांति कूटनीति में मौजूद चुनौतियों और अवसरों को कैसे दर्शाती है? भारत की यूएन शांति मिशन में भूमिका और वैश्विक शांति-सुरक्षा पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और भारतीय विदेश नीति
  • झारखंड का पहलू: झारखंड के लोग भारत के यूएन शांति मिशन में सैनिकों के रूप में योगदान देते हैं, जो स्थानीय मानव संसाधन की वैश्विक शांति प्रयासों में भागीदारी दर्शाता है।
  • मेन्स पॉइंटर: झारखंड की भूमिका और बहुपक्षीय कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा के महत्व पर जोर दें।
'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' क्या है?

'ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस' अमेरिकी प्रशासन के दौरान लागू एकतरफा शांति पहल है, जिसकी आलोचना यूएन के बहुपक्षीय ढांचे को दरकिनार करने और अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए की जाती है।

भारत को अंतरराष्ट्रीय संधियां लागू करने का संवैधानिक अधिकार कौन सा है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने के लिए आवश्यक कानून बनाने का अधिकार देता है, जो भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में सक्षम बनाता है।

भारत का यूएन शांति मिशनों में योगदान कितना महत्वपूर्ण है?

भारत यूएन के चौथे सबसे बड़े सैनिक योगदानकर्ता के रूप में 6,000 से अधिक कर्मियों को तैनात करता है और लगभग 60 मिलियन डॉलर वार्षिक रूप से शांति मिशन बजट में योगदान देता है, जो उसकी सक्रिय वैश्विक शांति भूमिका को दर्शाता है।

यूएनजीए अध्यक्ष की शांति मिशनों में क्या भूमिका होती है?

यूएनजीए अध्यक्ष बहुपक्षीय संवाद को सुविधाजनक बनाते हैं और शांति-सुरक्षा से जुड़े विशेष सत्र बुला सकते हैं, लेकिन शांति मिशनों के संचालन पर उनका कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता, जो सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी है।

बहुपक्षीय शांति मिशन वैश्विक आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करते हैं?

विश्व बैंक (2023) के अनुसार, प्रभावी बहुपक्षीय शांति मिशन संघर्ष क्षेत्रों में स्थिरता लाते हैं, जिससे वैश्विक GDP में 2-3% की वृद्धि होती है क्योंकि वे व्यापार और निवेश के लिए सुरक्षित माहौल बनाते हैं।

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