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माओवादी उग्रवाद का संक्षिप्त परिचय और दोहरी रणनीति

माओवादी उग्रवाद, जिसे लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) भी कहा जाता है, 1960 के दशक के अंत से भारत के मध्य और पूर्वी आदिवासी इलाकों में सक्रिय है। यह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में केंद्रित है। 2010 में माओवादी हिंसा अपने चरम पर पहुंची थी, जब 1,265 घटनाएं दर्ज हुईं (MHA Crime Records)। सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक संतुलित दोहरी रणनीति अपनाई, जिसमें Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) और Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 (AFSPA) जैसे कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत सुरक्षा अभियान शामिल थे, साथ ही आदिवासी कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम भी चलाए गए। इस रणनीति का उद्देश्य माओवादी उग्रवाद की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसकी सामाजिक-आर्थिक जड़ों को दूर करना था।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS Paper 3: आंतरिक सुरक्षा — लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म, कानूनी प्रावधान (UAPA, AFSPA), आदिवासी कल्याण कानून
  • GS Paper 1: सामाजिक मुद्दे — अनुसूचित जनजाति, वन अधिकार
  • GS Paper 2: राजनीति — केंद्र-राज्य संबंध, Article 355
  • निबंध: आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और विकास

माओवादी विरोधी कार्रवाई के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

केंद्र सरकार ने माओवादी उग्रवाद से उत्पन्न आंतरिक अशांति से राज्यों की सुरक्षा के लिए संविधान के Article 355 का सहारा लिया। UAPA, 1967 की धारा 15 और 16 आतंकवादी कृत्यों और आतंकवादी संगठनों की सदस्यता को अपराध मानती हैं, जिससे माओवादियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव हो पाई। AFSPA, 1958, जो कि LWE प्रभावित जिलों में लागू है, सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है ताकि वे कानूनी संरक्षण के साथ अभियान चला सकें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के People's Union for Civil Liberties v. Union of India (2011) के निर्देशों के तहत मानवाधिकारों की सुरक्षा और समय-समय पर समीक्षा अनिवार्य की गई है। इसी दौरान, Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006 (वन अधिकार अधिनियम) की धारा 3 और 4 ने आदिवासी समुदायों के भूमि और वन अधिकारों को कानूनी मान्यता दी, जो माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

  • Article 355 केंद्र को राज्यों में आंतरिक अशांति से सुरक्षा का अधिकार देता है।
  • UAPA की धारा 15 और 16 आतंकवादी कृत्यों और सदस्यता को अपराध घोषित करती हैं।
  • AFSPA प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों को कानूनी सुरक्षा और विशेष अधिकार प्रदान करता है, सुप्रीम कोर्ट के नियंत्रण में।
  • वन अधिकार अधिनियम आदिवासियों के भूमि अधिकारों को कानूनी रूप से सुरक्षित करता है, जिससे उनका वैमनस्य कम हुआ।

सुरक्षा अभियान और संस्थागत भूमिकाएं

गृह मंत्रालय (MHA) माओवादी विरोधी अभियानों का समन्वय करता है और 2015 से 2023 के बीच सुरक्षा और विकास के लिए ₹10,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) इस संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाता है, जबकि राज्य पुलिस बल स्थानीय स्तर पर साथ देते हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) माओवादी आतंक से जुड़े मामलों की जांच करती है ताकि नेतृत्व और नेटवर्क को खत्म किया जा सके। आदिवासी कार्य मंत्रालय कल्याण योजनाओं को लागू करता है, और नीति आयोग LWE प्रभावित जिलों में सामाजिक-आर्थिक प्रगति की निगरानी करता है। 2023 तक माओवादी प्रभावित इलाकों के 85% हिस्सों से AFSPA हटाया जा चुका है, जो सुरक्षा सुधार का संकेत है (MHA नोटिफिकेशन)।

  • CRPF लक्षित अभियानों से माओवादी काडरों को कमजोर करता है।
  • राज्य पुलिस स्थानीय खुफिया और कानून व्यवस्था बनाए रखती है।
  • NIA UAPA के तहत आतंकवाद से जुड़े मामलों की कानूनी कार्रवाई करती है।
  • MHA नीति निर्धारण, बजट आवंटन और समन्वय करता है।
  • नीति आयोग विकास सूचकांकों की समीक्षा कर प्रभाव मापता है।

सामाजिक-आर्थिक विकास पहल

इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान (IAP) के तहत 2015 से LWE प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आजीविका कार्यक्रमों में ₹20,000 करोड़ से अधिक निवेश किया गया है। इन आदिवासी जिलों में साक्षरता दर में 15% की वृद्धि हुई है (2011 की जनगणना से NFHS-5 तक) और आदिवासी स्कूलों में नामांकन 25% बढ़ा है (UDISE 2022)। गांवों में विद्युतीकरण 2015 के 60% से बढ़कर 2022 तक 95% हो गया है (सौभाग्य योजना)। MGNREGA के तहत रोजगार 30% बढ़ा है, जिससे आजीविका में मजबूती आई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 90% से अधिक माओवादी प्रभावित गांव सड़क से जुड़े हैं। वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का निपटान 2015 से 2022 के बीच 40% बढ़ा है, जिससे आदिवासियों के भूमि अधिकार मजबूत हुए हैं।

सूचकांक20152022/2023स्रोत
आदिवासी LWE जिलों में साक्षरता दर में वृद्धिबेसलाइन (जनगणना 2011)+15%NFHS-5
माओवादी प्रभावित गांवों में विद्युतीकरण60%95%सौभाग्य योजना
माओवादी प्रभावित गांवों की सड़क संपर्कता~70%90%+PMGSY, 2023
LWE जिलों में MGNREGA रोजगार वृद्धिबेसलाइन (2016)+30%ग्रामीण विकास मंत्रालय
LWE क्षेत्रों में वन अधिकार अधिनियम दावों का निपटानबेसलाइन (2015)+40%आदिवासी कार्य मंत्रालय

माओवादी हिंसा और उग्रवाद की स्थिति पर प्रभाव

माओवादी हिंसा की घटनाएं 2010 में 1,265 से घटकर 2023 में लगभग 500 तक आ गई हैं (MHA Crime Records)। सुरक्षा अभियानों और विकास पहलों के संयुक्त प्रभाव से माओवादी उग्रवाद की सक्रियता और आदिवासी समुदायों से भर्ती की क्षमता दोनों में कमी आई है। AFSPA का अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों से हटना राज्य नियंत्रण की वापसी का संकेत है। हालांकि, कुछ शेष क्षेत्र अभी भी हैं, जहां सतत निगरानी और विकास आवश्यक है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और कोलंबिया की उग्रवाद विरोधी रणनीतियां

भारत की दोहरी रणनीति कोलंबिया में Fuerzas Armadas Revolucionarias de Colombia (FARC) के खिलाफ अपनाई गई रणनीति से मिलती-जुलती है, जहां सैन्य दबाव के साथ ग्रामीण विकास और शांति वार्ता को जोड़ा गया था। कोलंबिया में 2016 तक हिंसा में 70% की कमी दर्ज की गई (UNODC रिपोर्ट), जो सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक उपायों के संयोजन की सफलता को दर्शाता है। दोनों उदाहरण बताते हैं कि केवल सैन्य कार्रवाई से उग्रवाद की जड़ों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

पहलूभारत (माओवादी उग्रवाद)कोलंबिया (FARC उग्रवाद)
सुरक्षा रणनीतिUAPA, AFSPA, CRPF नेतृत्व में अभियानसैन्य अभियान, विमुद्रीकरण कार्यक्रम
विकास पर ध्यानआदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचा, वन अधिकार अधिनियमग्रामीण विकास, भूमि सुधार
कानूनी आधारसंवैधानिक प्रावधान, आतंकवाद विरोधी कानूनशांति समझौते, संक्रमणकालीन न्याय
परिणामहिंसा में 60% कमी (2010-2023)हिंसा में 70% कमी (2016 तक)

शेष चुनौतियां और महत्वपूर्ण कमियां

प्रगति के बावजूद, आदिवासी समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और राजनीतिक समावेशन सुनिश्चित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। कई विकास योजनाएं क्रियान्वयन में देरी और स्थानीय भागीदारी की कमी से प्रभावित हैं, जिससे उनका प्रभाव सीमित होता है। अत्यधिक सैन्यकृत प्रतिक्रिया से आदिवासी जनता में दूरी बढ़ने का खतरा रहता है, जो दीर्घकालिक शांति के लिए हानिकारक हो सकता है। इन कमियों को दूर करने के लिए शासन व्यवस्था को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और स्थानीय संस्थानों को सशक्त बनाना जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • मानवाधिकारों और न्यायिक निगरानी के तहत संतुलित सुरक्षा अभियान जारी रखें।
  • आदिवासी कल्याण योजनाओं को समुदाय की भागीदारी के साथ तेजी से लागू करें ताकि उनमें स्वामित्व महसूस हो।
  • Article 355 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें।
  • MGNREGA के अलावा कौशल विकास और बाजार पहुंच जैसे आजीविका कार्यक्रम बढ़ाएं।
  • AFSPA के लागू क्षेत्र की नियमित समीक्षा कर सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रताओं का संतुलन बनाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
माओवादी उग्रवाद से निपटने के कानूनी ढांचे को लेकर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. UAPA माओवादी गतिविधियों में शामिल आतंकवादी संगठनों की सदस्यता को अपराध मानता है।
  2. AFSPA भारत के सभी माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में लागू है।
  3. वन अधिकार अधिनियम माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को भूमि अधिकार प्रदान करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि UAPA की धारा 15 और 16 आतंकवादी कृत्यों और सदस्यता को अपराध मानती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि AFSPA केवल निर्दिष्ट अशांत क्षेत्रों में लागू है, पूरे भारत में नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि वन अधिकार अधिनियम आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों को मान्यता देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
माओवादी विरोधी विकास योजनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को लेकर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में गांवों का विद्युतीकरण 2015 में 60% से बढ़कर 2022 में 95% हो गया।
  2. LWE जिलों में 2016 से 2023 के बीच MGNREGA रोजगार में गिरावट आई।
  3. PMGSY के तहत 2023 तक माओवादी प्रभावित गांवों की सड़क संपर्कता 90% से अधिक हो गई।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है (सौभाग्य योजना के अनुसार)। कथन 2 गलत है क्योंकि LWE जिलों में MGNREGA रोजगार 30% बढ़ा है। कथन 3 सही है (ग्रामीण विकास मंत्रालय, 2023 के अनुसार)।

प्रैक्टिस मेन्स प्रश्न

भारत की दोहरी रणनीति, जिसमें सुरक्षा अभियान और सामाजिक-आर्थिक विकास दोनों शामिल हैं, ने माओवादी उग्रवाद को कम करने में कैसे योगदान दिया है? इस दृष्टिकोण को सक्षम करने वाले कानूनी प्रावधानों पर चर्चा करें और शेष चुनौतियों की पहचान करें।

माओवादी अशांति के दौरान केंद्र सरकार को राज्यों में हस्तक्षेप का अधिकार कौन सा संवैधानिक प्रावधान देता है?

Article 355 केंद्र सरकार को राज्यों को आंतरिक अशांति से बचाने का अधिकार देता है, जिससे माओवादी विरोधी अभियानों का समन्वय संभव होता है।

माओवादी उग्रवादियों के खिलाफ अभियोजन के लिए UAPA की कौन-कौन सी धाराएं महत्वपूर्ण हैं?

Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 की धारा 15 और 16 आतंकवादी कृत्यों और सदस्यता को परिभाषित करती हैं, जो माओवादी अभियोजन के लिए आधार हैं।

वन अधिकार अधिनियम ने माओवादी उग्रवाद से निपटने में कैसे मदद की है?

Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006 ने आदिवासी समुदायों के भूमि और वन अधिकारों को कानूनी मान्यता दी, जिससे उनका वैमनस्य कम हुआ और माओवादी भर्ती आधार कमजोर हुआ।

माओवादी विरोधी रणनीति में गृह मंत्रालय की क्या भूमिका है?

गृह मंत्रालय सुरक्षा अभियानों का समन्वय करता है, ₹10,000 करोड़ का बजट आवंटित करता है, नीतियां बनाता है और दोहरी रणनीति के क्रियान्वयन की देखरेख करता है।

माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में किन प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ है?

साक्षरता दर में 15% की वृद्धि, गांवों का 95% विद्युतीकरण (पहले 60%), 90% से अधिक सड़क संपर्कता, MGNREGA रोजगार में 30% वृद्धि, और वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का 40% बढ़ना प्रमुख सुधार हैं।

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