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परिचय: HAM परियोजनाओं में MoRTH की नियमावली में बदलाव

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 2024 की शुरुआत में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत चल रही सड़क परियोजनाओं के लिए बोली नियमों को कड़ा किया है। यह बदलाव पूरे भारत में HAM परियोजनाओं पर लागू होगा, जो सड़क निर्माण बजट का लगभग 30% हिस्सा हैं। इसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, बोलीदाताओं की वित्तीय मजबूती सुनिश्चित करना और HAM परियोजनाओं में लंबे समय से चली आ रही देरी को कम करना है।

HAM मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र दोनों निवेश करते हैं, जहां निर्माण के दौरान परियोजना लागत का 40% सरकार वहन करती है और बाकी 60% निजी पक्ष द्वारा पूरा किया जाता है, जिसे परियोजना पूरा होने के बाद एन्युटी के रूप में चुकाया जाता है। करीब 10,000 किलोमीटर HAM सड़कें ₹80,000 करोड़ के निवेश के साथ बन रही हैं, इसलिए बोली नियमों में सुधार से बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी में मदद मिलेगी।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: बुनियादी ढांचा विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल, खरीद सुधार
  • GS पेपर 2: केंद्रीय मंत्रालयों और संस्थाओं की भूमिका
  • निबंध: आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा दक्षता

HAM बोली नियमों का कानूनी और संस्थागत ढांचा

MoRTH, Ministry of Road Transport and Highways Act, 1988 के तहत काम करता है, जबकि बोली प्रक्रिया मुख्य रूप से General Financial Rules (GFR) 2017 की धारा 144 के अनुसार संचालित होती है। विवाद निपटान के लिए Arbitration and Conciliation Act, 1996 के सेक्शन 7 और 34 लागू होते हैं।

Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बोलीदाताओं की पात्रता को प्रभावित करता है, जिससे बुनियादी ढांचा निविदाओं में स्थानीय भागीदारी में 20% की वृद्धि हुई है (DPIIT रिपोर्ट, 2022)। Central Vigilance Commission (CVC) पारदर्शिता की निगरानी करता है, जबकि Public Procurement Portal (GeM) ई-टेंडरिंग और बोली जमा करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।

आर्थिक पहलू: बजट, बाजार आकार और कड़े नियमों का असर

संघीय बजट 2023-24 में MoRTH को ₹1.18 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनमें से लगभग ₹35,000 करोड़ HAM परियोजनाओं के लिए रखे गए हैं। भारत का सड़क निर्माण बाजार 2023 से 2028 तक 12% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद है (CRISIL रिपोर्ट, 2023)।

HAM परियोजनाओं में औसतन 18 महीने की देरी होती रही है, जिससे सालाना लगभग ₹5,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है (Indian Express, 2024)। बोली नियमों की कड़ाई से परियोजना लागत में 15% तक की कटौती संभव है, जिससे पूंजी दक्षता बढ़ेगी और परियोजनाओं का समय पर पूरा होना सुनिश्चित होगा।

  • वर्तमान में लागू HAM परियोजनाएं: लगभग 10,000 किलोमीटर, निवेश ₹80,000 करोड़ (MoRTH वार्षिक रिपोर्ट 2023)
  • औसत देरी: 18 महीने, आर्थिक नुकसान: ₹5,000 करोड़ प्रति वर्ष (Indian Express, 2024)
  • लागत वृद्धि में कमी की संभावना: 15% (CRISIL रिपोर्ट 2023)
  • सड़क निर्माण बाजार का CAGR: 12% (2023-28) (CRISIL रिपोर्ट 2023)
  • 2017 के बाद घरेलू बोलीदाता भागीदारी में 20% की वृद्धि (DPIIT रिपोर्ट 2022)

HAM परियोजनाओं में मुख्य संस्थाओं की भूमिका

MoRTH नीतियां बनाता है और क्रियान्वयन की निगरानी करता है। National Highways Authority of India (NHAI) HAM परियोजनाओं को लागू और मॉनिटर करता है, जिससे तकनीकी और वित्तीय मानकों का पालन हो।

Infrastructure Leasing & Financial Services Limited (IL&FS) वित्तीय सलाह और परियोजना वित्तपोषण में मदद करता है। Central Vigilance Commission (CVC) बोली प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जबकि Public Procurement Portal (GeM) ई-टेंडरिंग के जरिए प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही बढ़ाता है।

भारत के HAM बोली नियम बनाम दक्षिण कोरिया के PPP सड़क प्रोजेक्ट

पहलूभारत (HAM परियोजनाएं)दक्षिण कोरिया (PPP सड़क परियोजनाएं)
बोली नियम2024 में पारदर्शिता और वित्तीय मजबूती बढ़ाने के लिए कड़े किए गए2015 से सख्त पूर्व-योग्यता और पारदर्शी बोली प्रक्रिया
परियोजना देरीऔसत 18 महीने2015-2020 के बीच 25% कमी
लागत वृद्धिनियमों के बाद 15% तक कमी की उम्मीद2015-2020 के बीच 10% कमी
वित्तीय बंदोबस्तअपर्याप्त आवश्यकताओं के कारण चुनौतियांमानकीकृत जोखिम आवंटन और वित्तीय बंदोबस्त
पारदर्शिता और निगरानीCVC और GeM पोर्टल के जरिए बेहतरसमर्पित बुनियादी ढांचा सुरक्षा प्राधिकरण के तहत मजबूत निगरानी

HAM बोली सुधारों में मुख्य चुनौतियां

कड़े नियमों के बावजूद दो बड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। पहली, जोखिम आवंटन के लिए मानकीकृत प्रणाली का अभाव, जिससे परियोजना की भविष्यवाणी कठिन होती है और देरी व विवाद होते हैं। दूसरी, वित्तीय बंदोबस्त की अपर्याप्त आवश्यकताएं, जो बोलीदाताओं के डिफॉल्ट और परियोजनाओं के ठहराव का कारण बनती हैं।

इन चुनौतियों को दूर करने के लिए केवल बोली नियमों में बदलाव पर्याप्त नहीं, बल्कि अनुबंध मानकीकरण और वित्तीय पात्रता मानदंडों को भी सख्त करना जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • बेहतर बोली नियमों से लागत वृद्धि और देरी कम हो सकती है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की दक्षता बढ़ेगी।
  • जोखिम आवंटन को मानकीकृत करना और वित्तीय बंदोबस्त को सख्ती से लागू करना जरूरी है।
  • GeM जैसे ई-खरीद प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार कम करने में मदद करेगा।
  • घरेलू बोलीदाताओं को प्रोत्साहित करना Make in India के लक्ष्य के अनुरूप है और स्थानीय निर्माण क्षेत्र को मजबूत करता है।
  • दक्षिण कोरिया जैसे देशों के PPP मॉडल से सीख लेकर निरंतर सुधार किया जाना चाहिए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) परियोजनाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. HAM के तहत निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का 40% वहन करती है।
  2. HAM परियोजनाएं Arbitration and Conciliation Act, 2017 के तहत संचालित होती हैं।
  3. Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में घरेलू बोलीदाताओं की भागीदारी बढ़ाई है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि HAM में निर्माण के दौरान सरकार 40% लागत वहन करती है। कथन 2 गलत है, Arbitration and Conciliation Act 1996 का है, 2017 का नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि 2017 के आदेश के बाद घरेलू बोलीदाताओं की भागीदारी 20% बढ़ी है (DPIIT रिपोर्ट 2022)।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
HAM परियोजनाओं के लिए बोली नियमों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. कड़े बोली नियम परियोजना लागत वृद्धि को लगभग 15% तक कम करने का लक्ष्य रखते हैं।
  2. HAM परियोजनाओं में औसत देरी 12 महीने से कम है।
  3. MoRTH, Ministry of Road Transport and Highways Act, 1988 के तहत कार्य करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है (CRISIL रिपोर्ट 2023)। कथन 2 गलत है क्योंकि औसत देरी 18 महीने है (Indian Express, 2024)। कथन 3 सही है क्योंकि MoRTH 1988 के अधिनियम के अंतर्गत काम करता है।

मुख्य प्रश्न

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाल ही में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) सड़क परियोजनाओं के लिए बोली नियमों में कड़ाई के प्रभावों पर चर्चा करें। ये सुधार बुनियादी ढांचे की डिलीवरी में मौजूद चुनौतियों को कैसे दूर कर सकते हैं? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - बुनियादी ढांचा विकास और राज्य की अर्थव्यवस्था
  • झारखंड की भूमिका: झारखंड में 1,200 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जहां कई HAM परियोजनाएं कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास के लिए चल रही हैं।
  • मुख्य बिंदु: बेहतर बोली नियमों से झारखंड में राजमार्ग परियोजनाओं की समय पर पूर्ति होगी, जिससे खनिज परिवहन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सड़क परियोजनाओं में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) क्या है?

HAM एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल है जिसमें सरकार निर्माण के दौरान परियोजना लागत का 40% देती है और बाकी 60% परियोजना पूरा होने पर एन्युटी के रूप में भुगतान किया जाता है।

HAM परियोजनाओं में बोली और विवाद निपटान के लिए कौन सा कानूनी ढांचा लागू है?

बोली प्रक्रिया General Financial Rules (GFR) 2017 के तहत संचालित होती है, खासकर नियम 144 के अनुसार, जबकि विवाद Arbitration and Conciliation Act, 1996 के तहत सुलझाए जाते हैं।

Public Procurement (Preference to Make in India) Order, 2017 ने HAM परियोजनाओं को कैसे प्रभावित किया है?

इस आदेश ने बुनियादी ढांचा निविदाओं में घरेलू बोलीदाताओं की भागीदारी 20% बढ़ाकर स्थानीय उद्योग को बढ़ावा दिया है।

कड़े बोली नियमों के बावजूद कौन सी मुख्य चुनौतियां बनी हुई हैं?

मुख्य चुनौतियां हैं जोखिम आवंटन का मानकीकरण न होना और वित्तीय बंदोबस्त की अपर्याप्त आवश्यकताएं, जो परियोजनाओं में देरी और बोलीदाता डिफॉल्ट का कारण हैं।

भारत के HAM बोली नियमों की तुलना दक्षिण कोरिया के PPP सड़क परियोजनाओं से कैसे की जा सकती है?

दक्षिण कोरिया का PPP मॉडल सख्त पूर्व-योग्यता, मानकीकृत जोखिम आवंटन और वित्तीय बंदोबस्त के साथ बेहतर निगरानी करता है, जिससे देरी और लागत वृद्धि में कमी आई है, जबकि भारत अभी भी इन क्षेत्रों में सुधार कर रहा है।

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