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परिचय: भारत में ऊर्जा विविधीकरण की आवश्यकता

भारत की ऊर्जा व्यवस्था आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां बढ़ती मांग, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो गया है। केंद्र सरकार ने ऊर्जा मिश्रण को विविध बनाने के लिए तीन मुख्य रास्ते अपनाए हैं: नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार, ऊर्जा दक्षता को बढ़ाना, और रणनीतिक रूप से ईंधन का प्रतिस्थापन। यह रणनीति संविधान के अनुच्छेद 246 (संघ सूची) के तहत संसद को बिजली से संबंधित कानून बनाने का अधिकार देती है, और इसे बिजली अधिनियम, 2003 (संशोधित 2022) तथा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों से समर्थन मिलता है। 2008 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सौर मिशन, जो राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) का हिस्सा है, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: ऊर्जा, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था
  • निबंध: ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास
  • प्रारंभिक परीक्षा: Renewable Purchase Obligations, Energy Conservation Act
  • मुख्य परीक्षा: भारत का ऊर्जा संक्रमण और जलवायु प्रतिबद्धताएं

नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार: क्षमता और नीति ढांचा

मार्च 2024 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 121.4 GW तक पहुंच चुकी है, जिसमें सौर, पवन, लघु जल और जैव ऊर्जा परियोजनाओं की बड़ी भूमिका है (MNRE वार्षिक रिपोर्ट 2023-24)। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना है, जैसा कि NITI Aayog ऊर्जा रिपोर्ट 2023 में बताया गया है। बजट 2024 में नवीकरणीय योजनाओं, अवसंरचना और अनुसंधान एवं विकास के लिए ₹19,500 करोड़ आवंटित किए गए। बिजली अधिनियम, 2003 की धाराएँ 61-66 के तहत Renewable Purchase Obligations (RPOs) लागू हैं, जो वितरण कंपनियों को नवीकरणीय स्रोतों से न्यूनतम विद्युत खरीदने के लिए बाध्य करती हैं।

  • सौर ऊर्जा 60 GW से अधिक क्षमता के साथ प्रमुख है, जिसे राष्ट्रीय सौर मिशन ने बढ़ावा दिया है।
  • पवन ऊर्जा लगभग 40 GW योगदान देती है, जिसमें ऑफशोर क्षमता भी बढ़ रही है।
  • ग्रिड इंटीग्रेशन, ट्रांसमिशन की कमी और भंडारण की सीमाएं बड़ी चुनौतियां हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले (जैसे MC Mehta बनाम भारत संघ, 1987) पर्यावरण मंजूरी को अनिवार्य करते हैं, जो नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए जरूरी हैं।

ऊर्जा दक्षता: कानूनी प्रावधान और आर्थिक प्रभाव

ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 की धाराएँ 3-14, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) को विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा खपत मानक तय करने और लागू करने का अधिकार देती हैं। ऊर्जा दक्षता सुधारों से भारत की ऊर्जा खपत 2030 तक 15-20% तक कम हो सकती है (BEE रिपोर्ट 2023), जिससे आयात निर्भरता और प्रदूषण में कमी आएगी। सरकार मांग प्रबंधन, उपकरणों पर लेबलिंग, और औद्योगिक ऊर्जा ऑडिट को बढ़ावा दे रही है ताकि ऊर्जा का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

  • स्टैंडर्ड एंड लेबलिंग कार्यक्रम में एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और लाइटिंग जैसे उपकरण शामिल हैं।
  • Perform Achieve Trade (PAT) योजना उद्योगों को ऊर्जा बचत लक्ष्यों से ऊपर प्रदर्शन करने पर प्रोत्साहित करती है।
  • ऊर्जा दक्षता से पीक मांग कम होती है, जिससे उत्पादन और ट्रांसमिशन पर दबाव घटता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में 2030 तक 44% की CAGR की उम्मीद है (IEA Global EV Outlook 2023), जो परिवहन क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने का उदाहरण है।

रणनीतिक ईंधन प्रतिस्थापन: जीवाश्म ईंधन से संक्रमण

भारत का वर्तमान ऊर्जा मिश्रण कोयले पर भारी निर्भर है, जो लगभग 70% बिजली उत्पादन का स्रोत है, जबकि चीन में यह लगभग 40% है (IEA 2023)। ईंधन प्रतिस्थापन का मतलब कोयला और तेल से स्वच्छ विकल्पों जैसे प्राकृतिक गैस, जैव ईंधन और हाइड्रोजन की ओर संक्रमण है। सरकार ने परिवहन और उद्योग में संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) के उपयोग को बढ़ावा दिया है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जैव ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 2030 तक 6% से बढ़ाकर 15% करने का लक्ष्य है।
  • जैव ईंधन मिश्रण के तहत 2025 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण अनिवार्य किया गया है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन एक उभरता हुआ रणनीतिक ईंधन है, जिसके पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
  • अवसंरचना की कमी, मूल्य अस्थिरता और घरेलू उत्पादन की सीमाएं बड़ी चुनौतियां हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और चीन के ऊर्जा विविधीकरण

मापदंडभारतचीन
नवीकरणीय क्षमता (2023)121.4 GW1,200 GW
कोयला निर्भरतालगभग 70% बिजली उत्पादनलगभग 40% बिजली उत्पादन
नीति उपकरणRPOs, NAPCC, ऊर्जा संरक्षण अधिनियमराज्य सब्सिडी, पंचवर्षीय योजनाएं, विनिर्माण क्षमता
ग्रिड इंटीग्रेशन चुनौतियांअवसंरचना की कमी के कारण महत्वपूर्ण कटौतीउन्नत ग्रिड और भंडारण निवेश
ऊर्जा आयात बिल (वित्त वर्ष 23)$180 बिलियनलगभग $400 बिलियन

मुख्य कमी: ग्रिड अवसंरचना और भंडारण की कमी

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के मुकाबले ग्रिड और भंडारण अवसंरचना का विकास धीमा है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा की कटौती होती है। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होती है और सिस्टम की लचीलापन कम होती है। नीति अधिकतर क्षमता लक्ष्यों पर केंद्रित है, जबकि समग्र सिस्टम इंटीग्रेशन, मांग प्रतिक्रिया और ऊर्जा भंडारण समाधानों पर कम ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सुधार शुरू किए हैं, लेकिन कार्यान्वयन धीमा है।

  • राजस्थान और तमिलनाडु जैसे नवीकरणीय ऊर्जा संपन्न राज्यों में ट्रांसमिशन लाइनों की कमी।
  • पंप्ड हाइड्रो और बैटरी भंडारण क्षमता सीमित, जिससे ग्रिड संतुलन प्रभावित।
  • मांग प्रबंधन और स्मार्ट ग्रिड तकनीकें अभी शुरुआती चरण में हैं।
  • ऊर्जा भंडारण के लिए नियामक ढांचे विकसित हो रहे हैं, लेकिन स्पष्टता नहीं है।

आगे का रास्ता: सतत ऊर्जा के लिए तीन रास्तों का समन्वय

  • ग्रिड आधुनिकीकरण और भंडारण निवेश तेज करें ताकि नवीकरणीय कटौती कम हो।
  • ऊर्जा दक्षता मानकों के अनुपालन को सख्त करें और PAT योजना का विस्तार करें।
  • ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन को वित्तीय प्रोत्साहन और अवसंरचना सहायता दें।
  • MNRE, BEE, CEA, और NITI Aayog के बीच समन्वय बढ़ाकर एकीकृत ऊर्जा योजना बनाएं।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वित्तपोषण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ उठाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में Renewable Purchase Obligations (RPOs) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. RPOs बिजली अधिनियम, 2003 (संशोधित 2022) के तहत अनिवार्य हैं।
  2. RPOs वितरण कंपनियों को नवीकरणीय स्रोतों से न्यूनतम बिजली खरीदने की आवश्यकता रखते हैं।
  3. RPO अनुपालन स्वैच्छिक है और इसके लिए कोई दंड नहीं है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि बिजली अधिनियम, 2003 (संशोधित 2022) की धाराएँ 61-66 RPOs का प्रावधान करती हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि वितरण कंपनियों को नवीकरणीय खरीद के लक्ष्य पूरे करने होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुपालन न करने पर नियामक दंड लगते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह अधिनियम ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को ऊर्जा खपत मानक निर्धारित करने का अधिकार देता है।
  2. अधिनियम 2025 तक सभी सरकारी भवनों में 100% नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग अनिवार्य करता है।
  3. अधिनियम ऊर्जा ऑडिट और उपकरणों की लेबलिंग के प्रावधान भी करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि BEE को अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त हैं। कथन 2 गलत है, ऐसा कोई 100% अनिवार्य प्रावधान नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि अधिनियम ऊर्जा ऑडिट और लेबलिंग को अनिवार्य करता है।

मुख्य प्रश्न

भारत में ऊर्जा विविधीकरण के तीन रास्तों पर चर्चा करें और ऊर्जा सुरक्षा तथा जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति में उनकी भूमिका का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और पर्यावरण)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की कोयला आधारित अर्थव्यवस्था के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण चुनौतिपूर्ण है; राज्य में सौर पार्क और ऊर्जा दक्षता के प्रयास शुरू हो रहे हैं।
  • मुख्य परीक्षा संकेत: झारखंड की कोयला निर्भरता, नवीकरणीय क्षमता, और औद्योगिक क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता उपायों को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
भारत का 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लक्ष्य क्या है?

भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जैसा कि NITI Aayog ऊर्जा रिपोर्ट 2023 में बताया गया है।

भारत में ऊर्जा दक्षता मानक किस अधिनियम के तहत लागू हैं?

ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 ऊर्जा दक्षता मानक लागू करता है और BEE को इन्हें लागू करने का अधिकार देता है।

Renewable Purchase Obligations का महत्व क्या है?

RPOs, बिजली अधिनियम, 2003 के तहत, वितरण कंपनियों को नवीकरणीय स्रोतों से न्यूनतम बिजली खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का समावेश बढ़ता है।

भारत की कोयला निर्भरता की तुलना चीन से कैसे होती है?

भारत अपनी बिजली उत्पादन का लगभग 70% कोयले पर निर्भर करता है, जबकि चीन में यह लगभग 40% है, जो ऊर्जा संक्रमण के विभिन्न चरण दर्शाता है।

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा समाकलन की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में अपर्याप्त ग्रिड अवसंरचना, सीमित ऊर्जा भंडारण क्षमता, और ट्रांसमिशन बाधाओं के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की कटौती शामिल हैं।

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