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परिचय: तीस्ता जल समझौते का संदर्भ और महत्व

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश के रांगपुर व दिनाजपुर जिलों में प्रवेश करती है। यह नदी दोनों देशों में 20 लाख से अधिक लोगों की सिंचाई का आधार है। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित जल वितरण समझौता, जो 2011 में तैयार हुआ था लेकिन अभी तक मंजूर नहीं हुआ, शुष्क मौसम में जल प्रवाह को संतुलित रूप से बांटने का लक्ष्य रखता है—भारत को 42.5%, बांग्लादेश को 37.5% और 20% जल बिना आवंटन के रखा गया है। बढ़ती जल संकट, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और दक्षिण एशिया के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर इस समझौते का पुनः सक्रिय होना बेहद जरूरी है।

यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, क्षेत्रीय जल सुरक्षा बढ़ाने और तीस्ता बेसिन के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बांग्लादेश की कृषि, जो देश की GDP में 13.5% योगदान देती है, तीस्ता सिंचाई पर निर्भर है, जबकि पश्चिम बंगाल सालाना ₹3,500 करोड़ सिंचाई अवसंरचना में निवेश करता है। इस समझौते के न बनने से जल प्रवाह में असंगति, आर्थिक नुकसान और राजनीतिक तनाव पैदा हुए हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंध, अंतरराष्ट्रीय नदी जल साझा समझौते
  • GS पेपर 3: जल संसाधन प्रबंधन, सीमा पार नदियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • निबंध: भारत की विदेश नीति और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग

तीस्ता जल साझा करने के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

तीस्ता जैसे सीमा पार नदी जल साझा समझौते Inter-State River Water Disputes Act, 1956 के दायरे से बाहर हैं, जो केवल भारत के भीतर राज्यों के बीच विवादों को नियंत्रित करता है। ये समझौते अंतरराष्ट्रीय संधि ढांचे और कूटनीतिक वार्ता के तहत आते हैं, जो भारतीय संविधान के Article 253 के अंतर्गत संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 का गंगा जल संधि एक कानूनी रूप से बाध्यकारी जल साझा समझौते का उदाहरण है। लेकिन तीस्ता समझौता अभी तक एक मसौदा है, जिसे औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए इसका कोई बाध्यकारी कानूनी दर्जा नहीं है। बांग्लादेश में Bangladesh Water Act, 2016 और Water Resources Planning Organisation (WARPO) Act, 1992 जल प्रबंधन और संसाधन योजना को नियंत्रित करते हैं, जो उसकी वार्ता की स्थिति को प्रभावित करते हैं।

तीस्ता नदी बेसिन का आर्थिक महत्व

तीस्ता बेसिन भारत और बांग्लादेश में लगभग 15 लाख हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि का समर्थन करता है। बांग्लादेश के रांगपुर जिले में 70% से अधिक आबादी तीस्ता सिंचाई पर निर्भर है, जो देश की GDP में 13.5% योगदान देती है (Economic Survey Bangladesh, 2023)। पश्चिम बंगाल का ₹3,500 करोड़ वार्षिक सिंचाई बजट इस नदी की भारतीय कृषि में अहमियत को दर्शाता है।

जल साझा करने में सुधार से दोनों क्षेत्रों में फसल उत्पादन 15-20% तक बढ़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय में बढ़ोतरी होगी। साथ ही, भारत-बांग्लादेश के बीच FY 2022-23 में 24.3 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जो जल और अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग से और बढ़ सकता है।

तीस्ता जल प्रबंधन में प्रमुख संस्थान

  • भारत का विदेश मंत्रालय (MEA): द्विपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक संपर्क का नेतृत्व करता है।
  • बांग्लादेश वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग ऑर्गनाइजेशन (WARPO): बांग्लादेश में जल संसाधन योजना और नीति का संचालन करता है।
  • भारत का केंद्रीय जल आयोग (CWC): नदी प्रवाह का तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी करता है।
  • बांग्लादेश वाटर डेवलपमेंट बोर्ड (BWDB): जल अवसंरचना परियोजनाओं को लागू करता है।
  • भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग (JRC): नदी जल मुद्दों और डेटा साझा करने के लिए द्विपक्षीय मंच।
  • पश्चिम बंगाल राज्य सिंचाई विभाग: क्षेत्रीय जल वितरण और अवसंरचना प्रबंधन करता है।

तीस्ता नदी प्रवाह पर डेटा और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

तीस्ता नदी शुष्क मौसम में लगभग 1,200 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (cusecs) जल प्रवाह प्रदान करती है (CWC, 2022)। 2011 के मसौदा समझौते के अनुसार, भारत को शुष्क मौसम प्रवाह का 42.5%, बांग्लादेश को 37.5% और 20% जल बिना आवंटन के रखा गया है। जल संकट के कारण बांग्लादेश की वार्षिक GDP को तीस्ता बेसिन में लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान होता है (World Bank, 2021)।

जलवायु परिवर्तन के अनुमान बताते हैं कि 2050 तक तीस्ता नदी का प्रवाह 10-15% तक घट सकता है (IPCC छठा आकलन रिपोर्ट, 2023), जिससे जल संकट और गंभीर होगा और सहयोगी जल साझा ढांचे की आवश्यकता बढ़ेगी।

तीस्ता और महाकाली जल संधियों की तुलना

पहलूतीस्ता नदी (भारत-बांग्लादेश)महाकाली नदी (भारत-नेपाल)
संधि की स्थितिमसौदा समझौता (2011), मंजूर नहींकानूनी रूप से बाध्यकारी संधि (1996)
जल वितरणभारत 42.5%, बांग्लादेश 37.5%, 20% बिना आवंटनभारत 50%, नेपाल 50% (शुष्क मौसम प्रवाह)
संयुक्त अवसंरचनासीमित सहयोग, कोई बड़े संयुक्त प्रोजेक्ट नहींसंयुक्त जलविद्युत परियोजनाएं और समेकित प्रबंधन
राजनीतिक चुनौतियांराज्य स्तरीय विरोध (पश्चिम बंगाल), संवेदनशीलताएंकेंद्र सरकार का सहयोग, कम उप-राष्ट्रीय विवाद
आर्थिक प्रभावकृषि और व्यापार को बढ़ावा देने की संभावनाक्षेत्रीय विकास और ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि

तीस्ता समझौते को अंतिम रूप देने में मुख्य चुनौतियां

तीस्ता जल साझा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी और मंजूर समझौते के अभाव में जल प्रवाह प्रबंधन असंगत रहता है। राजनीतिक संवेदनशीलताएं, खासकर पश्चिम बंगाल सरकार का विरोध, अंतिम रूप देने में बाधा हैं। गंगा संधि के विपरीत, जो कानूनी रूप से स्थिर है, तीस्ता समझौता राजनीतिक उतार-चढ़ाव के प्रति कमजोर है, जिससे संयुक्त अवसंरचना विकास और आर्थिक लाभ सीमित रह जाते हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • तीस्ता जल साझा समझौते का औपचारिक अनुमोदन आवश्यक है ताकि जल वितरण न्यायसंगत और पूर्वानुमेय हो सके।
  • जल प्रबंधन योजनाओं में जलवायु परिवर्तन के अनुमान शामिल करने से भविष्य के जल संकट के लिए मजबूती आएगी।
  • भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग जैसे संस्थागत तंत्र को मजबूत कर डेटा साझा करना और विवाद समाधान आसान होगा।
  • राजनीतिक विरोध कम करने के लिए उप-राष्ट्रीय हितधारकों, खासकर पश्चिम बंगाल के साथ संवाद बढ़ाना जरूरी है।
  • संयुक्त अवसंरचना परियोजनाओं जैसे सिंचाई और जलविद्युत पर सहयोग से पारस्परिक आर्थिक लाभ बढ़ेंगे।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
तीस्ता जल साझा समझौते से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. तीस्ता जल साझा समझौता भारत और बांग्लादेश द्वारा कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि के रूप में मंजूर किया गया है।
  2. Inter-State River Water Disputes Act, 1956 तीस्ता जल साझा करने के लिए लागू होता है।
  3. भारतीय संविधान का Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है जैसे तीस्ता जल समझौता।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 3
उत्तर: (d)
कथन 1 गलत है क्योंकि तीस्ता जल साझा समझौता अभी तक मसौदा है और बाध्यकारी नहीं है। कथन 2 गलत है क्योंकि Inter-State River Water Disputes Act, 1956 केवल भारत के भीतर राज्यों के बीच विवादों के लिए है, सीमा पार संधियों के लिए नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
तीस्ता नदी बेसिन के आर्थिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. तीस्ता नदी बेसिन भारत और बांग्लादेश में लगभग 1.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए सिंचाई प्रदान करता है।
  2. बांग्लादेश के रांगपुर जिले में 30% से कम आबादी तीस्ता सिंचाई पर निर्भर है।
  3. तीस्ता बेसिन में बेहतर जल वितरण से फसल उत्पादन 15-20% तक बढ़ सकता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि तीस्ता बेसिन लगभग 1.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि रांगपुर की 70% से अधिक आबादी तीस्ता सिंचाई पर निर्भर है। कथन 3 सही है क्योंकि बेहतर जल वितरण से फसल उत्पादन 15-20% तक बढ़ सकता है।

मुख्य प्रश्न

वर्तमान भू-राजनीतिक और जलवायु परिस्थितियों के संदर्भ में भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल साझा समझौते को अंतिम रूप देने में आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और जल संसाधन प्रबंधन
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड सीधे तीस्ता से जुड़ा नहीं है, लेकिन राज्य के अपने पड़ोसी राज्यों के साथ जल साझा करने के मुद्दे हैं, इसलिए सीमा पार जल संधियों का अध्ययन प्रासंगिक है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर में सहयोगी जल प्रबंधन, कानूनी ढांचे और जलवायु सहिष्णुता के महत्व को उजागर करें, झारखंड के अंतर-राज्यीय जल विवादों के साथ तुलना करते हुए।
तीस्ता जल साझा समझौते की वर्तमान स्थिति क्या है?

तीस्ता जल साझा समझौता 2011 में तैयार हुआ था लेकिन भारत और बांग्लादेश दोनों द्वारा मंजूर नहीं किया गया है। राजनीतिक विरोध, खासकर पश्चिम बंगाल से, और तकनीकी मुद्दों के कारण इसका अंतिम रूप देना लंबित है।

भारत को तीस्ता जैसे अंतरराष्ट्रीय जल संधियों को लागू करने का संवैधानिक अधिकार कौन देता है?

भारतीय संविधान का Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जिसमें तीस्ता जल समझौता जैसे सीमा पार जल साझा समझौते शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन का तीस्ता नदी के प्रवाह पर क्या प्रभाव पड़ता है?

IPCC छठा आकलन रिपोर्ट (2023) के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक तीस्ता नदी का जल प्रवाह 10-15% तक कम हो सकता है, जिससे बेसिन में जल संकट और बढ़ेगा।

तीस्ता बेसिन में जल संकट का बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?

तीस्ता बेसिन में जल संकट से बांग्लादेश की वार्षिक GDP को लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान होता है, जो मुख्य रूप से कृषि उत्पादन में कमी के कारण है (World Bank Report, 2021)।

भारत और बांग्लादेश में तीस्ता जल संसाधनों का प्रबंधन कौन-कौन से संस्थान करते हैं?

भारत में विदेश मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और पश्चिम बंगाल राज्य सिंचाई विभाग प्रमुख हैं। बांग्लादेश में Water Resources Planning Organisation (WARPO) और Bangladesh Water Development Board (BWDB) जल संसाधन प्रबंधन करते हैं।

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