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परिचय: प्रमुख घटनाएं और उनका संदर्भ

2024 में तमिलनाडु वन विभाग (TNFD) ने नीलगिरी ताहर के तीसरे समन्वित सर्वेक्षण की शुरुआत की, जिसमें सभी पांच आवासों को एक साथ कवर कर जनसंख्या के आंकड़े अपडेट किए गए। इसी समय, मई 2024 से अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अपनी पांच साल की प्रतिबंध छूट समाप्त कर दी। ये दोनों घटनाएं भारत की जैव विविधता संरक्षण के प्रति घरेलू कानूनी प्रतिबद्धता और क्षेत्रीय आर्थिक कूटनीति पर दोहरी फोकस को दर्शाती हैं।

नीलगिरी ताहर सर्वेक्षण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और संबंधित पर्यावरण कानूनों के तहत संरक्षण योजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं, अमेरिकी प्रतिबंध छूट के खत्म होने से भारत के चाबहार पोर्ट में 500 मिलियन डॉलर के निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति पर असर पड़ेगा, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सुनिश्चित करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण – वन्यजीव संरक्षण कानून, सर्वेक्षण पद्धतियां, पारिस्थितिक तंत्र सेवाएं
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत-ईरान संबंध, अमेरिकी प्रतिबंध प्रभाव, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाएं
  • निबंध: पर्यावरणीय शासन और भू-राजनीतिक आर्थिक रणनीतियों के बीच अंतर्संबंध

नीलगिरी ताहर संरक्षण: कानूनी और संस्थागत ढांचा

नीलगिरी ताहर (Nilgiritragus hylocrius) को International Union for Conservation of Nature (IUCN) द्वारा संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया गया है। तमिलनाडु का तीसरा समन्वित सर्वेक्षण सभी आवासों में एक साथ सही जनसंख्या आंकड़े उपलब्ध कराने का प्रयास है, जो Wildlife Protection Act, 1972 की धारा 2 और 9 के तहत शिकार पर रोक और आवास संरक्षण के लिए जरूरी है।

सर्वेक्षण की पद्धति, जो सभी आवासों को एक साथ कवर करती है, पहले के डेटा के टुकड़ों को जोड़ती है। Environment Protection Act, 1986 और Indian Forest Act, 1927 आवास प्रबंधन और वन संरक्षण के लिए सहायक नियमावली प्रदान करते हैं। तमिलनाडु वन विभाग इस कार्य के लिए लगभग ₹5 करोड़ प्रति वर्ष आवंटित करता है, जो सरकार की स्थायी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • 2021 के सर्वेक्षण में तमिलनाडु में 3,122 नीलगिरी ताहर पाए गए (TNFD)।
  • 2024 में तीसरा समन्वित सर्वेक्षण शुरू हुआ, जो सभी पांच आवासों को एक साथ कवर करता है (The Hindu, 2024)।
  • नीलगिरी ताहर आवासों से जुड़ा पर्यटन अनुमानित ₹50 करोड़ वार्षिक राजस्व उत्पन्न करता है (Tamil Nadu Tourism Department, 2022)।
  • पिछले तीन वर्षों में पर्यटन राजस्व में 12% वार्षिक वृद्धि हुई है (Tamil Nadu Tourism Statistics, 2023)।

चाबहार बंदरगाह: रणनीतिक और आर्थिक आयाम

चाबहार बंदरगाह, जिसे ईरान पोर्ट्स एंड मेरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (PMO) संचालित करता है, प्रति वर्ष लगभग 8 मिलियन टन कार्गो संभालता है, जिसमें भारत का हिस्सा 40% है (MEA Annual Report, 2023)। भारत ने 2016 से इस बंदरगाह में 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसका उद्देश्य ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया को जोड़ने वाला मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी कॉरिडोर विकसित करना है, जो पाकिस्तान के Gwadar पोर्ट को बायपास करता है।

International Emergency Economic Powers Act (IEEPA), 1977 के तहत अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट मई 2024 में समाप्त हो गई। इसके बाद व्यापार मात्रा में 30% की गिरावट आने की संभावना है, जो भारत के क्षेत्रीय आर्थिक कॉरिडोर और भू-राजनीतिक प्रभाव को प्रभावित करेगी।

  • छूट अवधि में भारत ने चाबहार के जरिए अफगानिस्तान के साथ $85 मिलियन का व्यापार किया (MEA, 2023)।
  • छूट समाप्ति के बाद व्यापार में 30% की कमी आने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी प्रभावित होगी।
  • चाबहार $1.6 बिलियन के मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है (NITI Aayog, 2023)।

कानूनी और नियामक ओवरलैप: पर्यावरण और आर्थिक क्षेत्र

Wildlife Protection Act, 1972 और Environment Protection Act, 1986 नीलगिरी ताहर संरक्षण के लिए नियम निर्धारित करते हैं, जबकि Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 विदेशी निवेश, विशेषकर चाबहार जैसे पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को नियंत्रित करता है। अमेरिकी प्रतिबंध प्रणाली, जिसे Department of Treasury के Office of Foreign Assets Control (OFAC) लागू करता है, भारत की विदेश नीति और आर्थिक हितों के साथ जुड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट के Centre for Environmental Law, WWF-India vs. Union of India (2013) जैसे फैसले पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक दायित्व को मजबूत करते हैं, जो नीलगिरी ताहर सर्वेक्षणों के लिए आधार हैं। इसके विपरीत, चाबहार से जुड़ा कानूनी ढांचा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रतिबंध कानूनों से जुड़ा है, जिसके लिए MEA और वित्तीय नियामकों के बीच समन्वय आवश्यक है।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की तुलना: चाबहार बनाम Gwadar

पहलूचाबहार पोर्ट (भारत-ईरान)Gwadar पोर्ट (चीन-पाकिस्तान)
निवेशभारत द्वारा $500 मिलियनचीन द्वारा $1 बिलियन से अधिक
वार्षिक कार्गो थ्रूपुटलगभग 8 मिलियन टन (2023)लगभग 12 मिलियन टन (2023)
रणनीतिक उद्देश्यपाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचचीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) कनेक्टिविटी बढ़ाना
2018 से व्यापार मात्रा वृद्धिप्रतिबंधों के कारण सीमित, छूट समाप्ति के बाद गिरावट की संभावनाक्षेत्रीय व्यापार में लगभग 25% वृद्धि
भू-राजनीतिक प्रभावभारत के क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ावा; अमेरिकी प्रतिबंधों से सीमितचीन-पाकिस्तान गठबंधन और क्षेत्रीय प्रभुत्व मजबूत

डेटा एकीकरण और संरक्षण चुनौतियां

मजबूत सर्वेक्षण तंत्र के बावजूद, तमिलनाडु के नीलगिरी ताहर संरक्षण में वन्यजीव एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच डेटा साझा करने में खंडितता है। यह कमी सामुदायिक भागीदारी वाले संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता को सीमित करती है, जो आवास संरक्षण और सतत पर्यटन विकास के लिए जरूरी हैं।

सर्वेक्षण डेटा को स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग के साथ जोड़ना संसाधनों के बेहतर आवंटन, निगरानी में सुधार और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने वाले इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, साथ ही जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • समन्वित नीलगिरी ताहर सर्वेक्षण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुकूल संरक्षण प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण और विश्वसनीय डेटा प्रदान करते हैं।
  • संस्थागत समन्वय और डेटा साझा करने के प्लेटफॉर्म को मजबूत करने से संरक्षण परिणाम और समुदाय की भागीदारी बेहतर हो सकती है।
  • अमेरिकी छूट समाप्ति के बाद भारत को चाबहार रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करना होगा, प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाशने होंगे।
  • Gwadar की सफलता से सीख लेकर भारत क्षेत्रीय साझेदारियों का विस्तार कर मल्टीमोडल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर आर्थिक कॉरिडोर को स्थिर रख सकता है।
  • नीति निर्माण में पर्यावरण संरक्षण और भू-राजनीतिक आर्थिक रणनीतियों का समन्वय आवश्यक है ताकि क्षेत्रीय विकास सतत हो सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
नीलगिरी ताहर सर्वेक्षणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. तीसरा समन्वित सर्वेक्षण पहली बार सभी नीलगिरी ताहर आवासों को एक साथ कवर करता है।
  2. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, सभी संकटग्रस्त प्रजातियों के सर्वेक्षण हर पांच साल में कराने का प्रावधान करता है।
  3. तमिलनाडु वन विभाग नीलगिरी ताहर संरक्षण के लिए प्रति वर्ष ₹5 करोड़ से अधिक आवंटित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि 2024 का सर्वेक्षण पहली बार सभी पांच आवासों को एक साथ कवर करता है। कथन 2 गलत है; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम सभी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए नियत अंतराल पर सर्वेक्षण कराने का प्रावधान नहीं करता। कथन 3 सही है, जैसा कि तमिलनाडु वन विभाग के बजट आवंटन से स्पष्ट है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह छूट International Emergency Economic Powers Act (IEEPA), 1977 के तहत दी गई थी।
  2. छूट ने 2016 से भारत को चाबहार पोर्ट में $85 मिलियन के निवेश की अनुमति दी।
  3. छूट समाप्त होने से भारत के चाबहार के माध्यम से व्यापार मात्रा में 30% वृद्धि होगी।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि छूट समाप्त होने से व्यापार मात्रा में 30% की कमी आने की संभावना है, न कि वृद्धि।

मुख्य प्रश्न

तमिलनाडु द्वारा नीलगिरी ताहर के तीसरे समन्वित सर्वेक्षण की एक साथ शुरुआत और चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंध छूट के समाप्त होने से भारत की क्षेत्रीय नीति में पर्यावरण संरक्षण और भू-राजनीतिक आर्थिक रणनीतियों के अंतर्संबंध कैसे स्पष्ट होते हैं, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी; GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के वन क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण और डेटा एकीकरण में समान चुनौतियों का सामना करते हैं; नीलगिरी ताहर सर्वेक्षणों से मिली सीख स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन में मदद कर सकती है।
  • मुख्य बिंदु: वन्यजीव संरक्षण कानूनों और सर्वेक्षण पद्धतियों को रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जोड़कर उत्तर तैयार करें, जो क्षेत्रीय व्यापार और कूटनीति को प्रभावित करते हैं।
तीसरे समन्वित नीलगिरी ताहर सर्वेक्षण का महत्व क्या है?

2024 का सर्वेक्षण सभी पांच नीलगिरी ताहर आवासों को एक साथ कवर करता है, जिससे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रभावी संरक्षण योजना के लिए व्यापक और सटीक जनसंख्या आंकड़े मिलते हैं।

अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध छूट क्यों समाप्त की?

International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत दी गई यह छूट पांच साल की अवधि के बाद मई 2024 में समाप्त हो गई, जो अमेरिका की ईरान प्रतिबंध नीति में बदलाव को दर्शाती है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 नीलगिरी ताहर की कैसे रक्षा करता है?

अधिनियम की धारा 2 और 9 नीलगिरी ताहर को संरक्षित प्रजाति घोषित करती हैं, शिकार पर रोक लगाती हैं और आवास संरक्षण के उपाय लागू करने का प्रावधान करती हैं, जिन्हें राज्य वन विभाग लागू करता है।

चाबहार बंदरगाह का भारत पर क्या आर्थिक प्रभाव है?

भारत का $500 मिलियन का निवेश चाबहार के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापार को सक्षम बनाता है, जो लगभग 8 मिलियन टन कार्गो वार्षिक संभालता है और पाकिस्तान को बायपास करता है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ती है।

नीलगिरी ताहर संरक्षण प्रयासों में क्या चुनौतियां हैं?

वन्यजीव एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच डेटा साझा करने में खंडितता के कारण समेकित संरक्षण रणनीतियां और समुदाय की भागीदारी सीमित होती है, जिससे आवास संरक्षण और इको-टूरिज्म के अवसर प्रभावित होते हैं।

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