2021 विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु में राज्यपाल की सरकार गठन में देरी
मई 2021 में तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) गठबंधन ने 234 सीटों में से 159 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया (चुनाव आयोग भारत)। इसके बावजूद, तमिलनाडु के राज्यपाल ने DMK को सरकार बनाने का निमंत्रण देने में 12 दिन की देरी की (Indian Express, मई 2021)। इस देरी ने संवैधानिक रीतियों का उल्लंघन किया और भारतीय संविधान के तहत विवेकाधिकार के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए, जिससे लोकतांत्रिक जनादेश कमजोर पड़ा।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन – राज्यपाल के विवेकाधिकार, संवैधानिक रीतियां, सुप्रीम कोर्ट के फैसले
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – राजनीतिक स्थिरता का राज्य की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल पर प्रभाव
- निबंध: भारत में लोकतंत्र और संवैधानिक शासन
सरकार गठन से जुड़े संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह तब तक पद पर रहेगा जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो। अनुच्छेद 163 में राज्यपाल की भूमिका और विवेकाधिकार का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि राज्यपाल सामान्यतया मंत्रिपरिषद की सलाह से कार्य करता है, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों के।
सरकारिया आयोग (1988) ने सुझाव दिया था कि राज्यपाल को चुनाव परिणाम का सम्मान करते हुए बहुमत प्राप्त पार्टी को तुरंत सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने S.R. Bommai बनाम भारत संघ (1994) के फैसले में कहा कि सरकार गठन में राज्यपाल का कर्तव्य संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करना है, अनावश्यक देरी या मनमानी निर्णय से बचना चाहिए।
- अनुच्छेद 164(1): बहुमत प्राप्त मुख्यमंत्री की नियुक्ति
- अनुच्छेद 163: राज्यपाल के विवेकाधिकार और संवैधानिक भूमिका
- सरकारिया आयोग: चुनाव के बाद राज्यपाल की त्वरित कार्रवाई के निर्देश
- S.R. Bommai मामला: राज्यपाल के विवेकाधिकार पर न्यायिक नियंत्रण
तमिलनाडु में राजनीतिक देरी के आर्थिक प्रभाव
तमिलनाडु का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2022-23 में लगभग ₹20.5 लाख करोड़ था (तमिलनाडु आर्थिक सर्वेक्षण 2023)। विनिर्माण क्षेत्र इस GSDP में लगभग 30% योगदान देता है, जबकि 2023 में आईटी निर्यात ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंचा (NASSCOM रिपोर्ट 2023)। सरकार गठन में 12 दिन की देरी ने बजट अनुमोदन और नीतियों के क्रियान्वयन को बाधित किया, जिससे आर्थिक गति धीमी हो सकती है।
राज्य की GSDP वृद्धि दर 2021-22 में 7.5% से घटकर 2022-23 में 6.2% रह गई, जिसका एक कारण राजनीतिक अनिश्चितता भी है (तमिलनाडु आर्थिक सर्वेक्षण 2023)। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह, जो 2022 में $2.3 बिलियन था (DPIIT वार्षिक रिपोर्ट 2023), अस्थिरता के कारण घट सकता है, जिससे निवेशकों का भरोसा और दीर्घकालिक आर्थिक योजना प्रभावित होती है।
- GSDP 2022-23: ₹20.5 लाख करोड़; वृद्धि दर घटकर 6.2%
- विनिर्माण: GSDP में लगभग 30% योगदान
- आईटी निर्यात: वार्षिक ₹1.5 लाख करोड़
- FDI प्रवाह: 2022 में $2.3 बिलियन
- देरी का प्रभाव: बजट और नीतियों का क्रियान्वयन रुका
संस्थागत भूमिकाएं और जिम्मेदारियां
तमिलनाडु के राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जिनका कर्तव्य समय पर सरकार गठन सुनिश्चित करना है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) निष्पक्ष चुनाव कराता है और परिणाम घोषित करता है, जो लोकतांत्रिक जनादेश को स्थापित करता है। सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक विवादों का निपटारा करता है, जिसमें राज्यपाल के विवेकाधिकार से जुड़े मामले शामिल हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुने हुए प्रतिनिधियों से बनी है जो सरकार बनाते हैं। आर्थिक मामलों का विभाग (DEA) राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता का राज्य स्तर पर आर्थिक प्रभाव मॉनिटर करता है, जिससे शासन और आर्थिक परिणाम जुड़े होते हैं।
- राज्यपाल: संवैधानिक प्रमुख, सरकार गठन
- ECI: चुनाव कराना, परिणाम घोषित करना
- सुप्रीम कोर्ट: संवैधानिक मामलों पर न्यायिक निगरानी
- राज्य विधानसभा: चुने हुए प्रतिनिधि जो सरकार बनाते हैं
- DEA: आर्थिक निगरानी और नीति प्रभाव का आकलन
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम यूनाइटेड किंगडम में सरकार गठन
| पहलू | भारत (तमिलनाडु मामला) | यूनाइटेड किंगडम |
|---|---|---|
| संवैधानिक प्रमुख | राज्यपाल, अनुच्छेद 163, 164 के तहत विवेकाधिकार | राजा/रानी, मुख्यतः सांकेतिक भूमिका |
| सरकार गठन की समय सीमा | कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं; 12 दिन की देरी देखी गई | चुनाव के तुरंत बाद आमंत्रण; 2019 में 24 घंटे के अंदर |
| रीतियां | आंशिक रूप से संहिताबद्ध, आंशिक अस्पष्ट; विवेकाधिकार की गुंजाइश | मजबूत, स्पष्ट रीतियां जो त्वरित सरकार गठन सुनिश्चित करती हैं |
| राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव | देरी से अनिश्चितता और आर्थिक प्रभाव | निरंतरता और निवेशकों का भरोसा सुनिश्चित करती है |
संवैधानिक अस्पष्टताएं और लोकतांत्रिक जनादेश
भारतीय संविधान में राज्यपाल के सरकार गठन के निर्णय के लिए बाध्यकारी समयसीमा या स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं हैं, जिससे विवेकाधिकार के तहत देरी की संभावना बनी रहती है। यह कमी लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करती है क्योंकि इससे राजनीतिक अनिश्चितता और सत्ता के दुरुपयोग का खतरा बढ़ता है।
तमिलनाडु का मामला इस गंभीर अंतर को उजागर करता है, जहां संवैधानिक रीतियां पर्याप्त रूप से संहिताबद्ध नहीं हैं और न्यायिक हस्तक्षेप प्रतिक्रियात्मक हैं, न कि निवारक। यह अस्पष्टता यूके के संसदीय प्रणाली से विपरीत है, जहां रीतियां और सांकेतिक भूमिकाएं ऐसी देरी से बचाती हैं।
महत्व और आगे का रास्ता
- चुनाव के बाद राज्यपाल के सरकार गठन के निमंत्रण के लिए स्पष्ट समयसीमा और प्रक्रियाएं संहिताबद्ध करें ताकि विवेकाधिकार के तहत देरी रोकी जा सके।
- संवैधानिक रीतियों को विधायी या न्यायिक स्पष्टता के माध्यम से मजबूत करें ताकि लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान हो सके।
- राज्यपालों के लिए जवाबदेही तंत्र सशक्त करें ताकि वे संवैधानिक नैतिकता के अनुसार निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करें।
- राजनीतिक दलों और जनता में राज्यपालों की संवैधानिक भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाएं ताकि राजनीतिकरण कम हो सके।
- न्यायालय द्वारा सक्रिय दिशा-निर्देश या संवैधानिक संशोधन के माध्यम से विवेकाधिकार की अस्पष्टताओं को दूर करने का प्रयास करें।
- राज्यपाल को हमेशा सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए, चाहे वह बहुमत में हो या नहीं।
- अनुच्छेद 164(1) के अनुसार, बहुमत प्राप्त मुख्यमंत्री की नियुक्ति अनिवार्य है।
- सरकारिया आयोग ने बहुमत प्राप्त पार्टी को तुरंत सरकार बनाने का निमंत्रण देने की सलाह दी थी।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- सरकार गठन में राजनीतिक देरी बजट अनुमोदन को रोक सकती है, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होता है।
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह अल्पकालिक राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित नहीं होता।
- तमिलनाडु के GSDP में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान लगभग 30% है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत में सरकार गठन में राज्यपाल की भूमिका से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और रीतियों की समीक्षा करें। 2021 में तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत प्राप्त पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाने में हुई देरी के निहितार्थों का विश्लेषण करें। ऐसी देरी से बचने और लोकतांत्रिक जनादेश को मजबूत करने के लिए सुधार सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – राजनीति और शासन, राज्यपाल की भूमिका पर संवैधानिक प्रावधान
- झारखंड संदर्भ: झारखंड में भी सरकार गठन के दौरान राज्यपाल के विवेकाधिकार का प्रयोग हुआ है, जो राज्य-केंद्र संबंध और राजनीतिक स्थिरता समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
- मुख्य बिंदु: तमिलनाडु और झारखंड के अनुभवों की तुलना कर उत्तर तैयार करें, संवैधानिक अस्पष्टताओं और संहिताबद्ध प्रोटोकॉल की जरूरत पर जोर दें।
सरकार गठन में राज्यपाल की भूमिका को कौन से संवैधानिक अनुच्छेद नियंत्रित करते हैं?
राज्यपाल की भूमिका अनुच्छेद 163 और 164(1) के तहत निर्धारित है। अनुच्छेद 164(1) बहुमत प्राप्त मुख्यमंत्री की नियुक्ति का प्रावधान करता है, जबकि अनुच्छेद 163 राज्यपाल के विवेकाधिकार को परिभाषित करता है।
सरकारिया आयोग ने राज्यपाल की भूमिका के बारे में क्या सुझाव दिए थे?
सरकारिया आयोग (1988) ने राज्यपालों को चुनाव परिणाम का सम्मान करते हुए बहुमत प्राप्त पार्टी या गठबंधन को तुरंत सरकार बनाने का निमंत्रण देने की सलाह दी थी, ताकि देरी से बचा जा सके।
S.R. Bommai मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के विवेकाधिकार के बारे में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने S.R. Bommai बनाम भारत संघ (1994) के फैसले में कहा कि राज्यपाल के विवेकाधिकार का इस्तेमाल संवैधानिक नैतिकता के साथ होना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सम्मान हो और मनमानी या अनावश्यक देरी न हो।
सरकार गठन में देरी का आर्थिक प्रभाव क्या हो सकता है?
देरी से बजट अनुमोदन और नीतियों का क्रियान्वयन रुक सकता है, जिससे आर्थिक विकास धीमा पड़ता है, निवेशकों का भरोसा कम होता है और विनिर्माण तथा IT निर्यात जैसे क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ता है, जैसा कि तमिलनाडु के GSDP वृद्धि और FDI प्रवाह में देखा गया।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
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