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परिचय: प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पिता की अनुपस्थिति

भारत में प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े प्रयास मुख्य रूप से महिलाओं पर केंद्रित हैं, जबकि पिता की भूमिका अक्सर नजरअंदाज की जाती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में प्रजनन, मातृत्व, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) पर जोर दिया गया है, फिर भी पुरुषों को स्पष्ट रूप से शामिल करने की पहल बहुत कम है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के आंकड़ों के अनुसार केवल 15% RMNCH+A कार्यक्रमों में पिता शामिल होते हैं, जबकि NFHS-5 (2019-21) में पुरुषों की केवल 10% भागीदारी गर्भावस्था के दौरान साथी के साथ देखभाल में देखी गई है। इस तरह की उपेक्षा परिवार के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और प्रजनन स्वास्थ्य को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी मानने वाले लिंग आधारित रूढ़िवाद को बढ़ावा देती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य नीतियां, स्वास्थ्य में लिंग मुद्दे, परिवार की भूमिका
  • GS पेपर 1: सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य पर लिंग आधारित प्रभाव
  • निबंध: लिंग और स्वास्थ्य हस्तक्षेप, समावेशी परिवार स्वास्थ्य रणनीतियां

पुरुषों की उपेक्षा पर संवैधानिक और नीतिगत ढांचा

अनुच्छेद 21 स्वास्थ्य का अधिकार देता है, लेकिन लिंग समावेशी प्रजनन स्वास्थ्य पर स्पष्ट निर्देश नहीं देता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 RMNCH+A को प्राथमिकता देती है, लेकिन मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 और PCPNDT एक्ट, 1994 महिलाओं के स्वास्थ्य और भ्रूण संरक्षण पर ध्यान देते हैं, जबकि पुरुषों की भूमिका को नजरअंदाज करते हैं। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुष-केंद्रित रणनीतियां सीमित हैं, ज्यादातर महिलाओं के गर्भनिरोधक तरीकों पर फोकस है।

  • कानूनी ढांचा मातृत्व और बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है, जिससे महिलाओं-केंद्रित हस्तक्षेप मजबूत होते हैं।
  • पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य की स्पष्ट गारंटी वर्तमान कानूनों या नीतियों में नहीं है।
  • नीति दस्तावेजों में पिता की मनोवैज्ञानिक या व्यवहारिक भागीदारी के लिए प्रावधान नहीं हैं।

प्रजनन स्वास्थ्य में पुरुषों की उपेक्षा के आर्थिक पहलू

भारत का बजट 2023-24 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत RMNCH+A के लिए लगभग INR 28,000 करोड़ था, जिसमें पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के लिए 5% से कम राशि आवंटित है। The Lancet Global Health (2022) में प्रकाशित अध्ययन बताते हैं कि पिता की भागीदारी से मातृ और नवजात स्वास्थ्य देखभाल की लागत में 20% तक कमी आ सकती है। Frost & Sullivan (2023) के अनुसार, भारत में पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक बाजार USD 200 मिलियन का है, लेकिन मांग और जागरूकता की कमी के कारण यह कम विकसित है।

  • पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश की कमी कार्यक्रमों की पहुंच और प्रभावकारिता को सीमित करती है।
  • नीति की उपेक्षा के कारण पुरुषों की भागीदारी से होने वाली लागत बचत का लाभ नहीं उठाया जा रहा।
  • पुरुष गर्भनिरोधक बाजार की संभावनाएं अनछुई हैं, जो सांस्कृतिक और जानकारी के अंतर को दर्शाती हैं।

संस्थागत भूमिकाएं और कार्यक्रमगत कमियां

MoHFW प्रजनन स्वास्थ्य नीतियां बनाता है, जबकि NHM राज्यों में RMNCH+A कार्यक्रम लागू करता है। राष्ट्रीय सार्वजनिक सहयोग और बाल विकास संस्थान (NIPCCD) शोध और प्रशिक्षण करता है, लेकिन पिता पर ध्यान सीमित है। वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) पुरुषों की भागीदारी की वकालत करते हैं, लेकिन भारत के कार्यक्रम पिछड़ रहे हैं।

  • NHM कार्यक्रमों में केवल 15% प्रजनन स्वास्थ्य गतिविधियों में पिता शामिल होते हैं (MoHFW वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • NIPCCD के शोध से पिता-समावेशी कार्यक्रम डिजाइन में बहुत कम बदलाव होता है।
  • WHO के दिशा-निर्देश मातृ मानसिक स्वास्थ्य सुधारने और गर्भनिरोधक उपयोग बढ़ाने के लिए पुरुष भागीदारी पर जोर देते हैं।

पुरुषों की कम भागीदारी के आंकड़े और परिणाम

NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि केवल 10% पुरुष साथी के साथ प्रसवपूर्व देखभाल में जाते हैं, जबकि परिवार नियोजन में पुरुष भागीदारी 12% है, इसके मुकाबले महिलाओं की भागीदारी 88% है। केरल जैसे राज्यों में जहां पुरुषों की भागीदारी 25% है, मातृ स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हैं। 2022 के WHO रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की भागीदारी से माताओं में प्रसवोत्तर अवसाद 30% तक कम होता है। विश्व स्तर पर पिता-समावेशी नीतियों वाले देशों में पुरुष गर्भनिरोधक उपयोग 40% अधिक है (WHO, 2023)।

  • कम पुरुष भागीदारी से मातृ और नवजात स्वास्थ्य संकेतक खराब होते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक लाभों में मातृ अवसाद में कमी और परिवारिक संबंधों में सुधार शामिल है।
  • पिता-समावेशी नीतियां गर्भनिरोधक उपयोग और साझा जिम्मेदारी को बढ़ाती हैं।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम स्वीडन में पुरुषों की भागीदारी

पहलूभारतस्वीडन
नीति ढांचाRMNCH+A महिलाओं पर केंद्रित; पिता की अनिवार्य भागीदारी नहींParental Leave Act (1974) साझा मातृत्व अवकाश अनिवार्य करता है
प्रसवपूर्व देखभाल में पुरुष भागीदारी10% (NFHS-5)80% से अधिक
पुरुषों में गर्भनिरोधक उपयोग12%50% से अधिक
मातृ और बाल स्वास्थ्य परिणामराज्यों में भिन्न; जहां पुरुषों की भागीदारी अधिक है (जैसे केरल) बेहतरपरिवार स्वास्थ्य के समग्र दृष्टिकोण के कारण लगातार बेहतर

भारत के प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रमुख कमियां

वर्तमान नीतियां पिता की मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक भूमिका को नजरअंदाज कर केवल महिलाओं के जैविक स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं। इससे लिंग आधारित रूढ़िवाद बढ़ता है और व्यापक परिवार स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के मौके खो जाते हैं। पुरुषों की भागीदारी के लिए लक्षित कार्यक्रमों की कमी के कारण मातृ मानसिक स्वास्थ्य, गर्भनिरोधक उपयोग और स्वास्थ्य खर्चों में सुधार के लाभ कम उपयोग में आते हैं।

  • नीति दस्तावेजों में गर्भनिरोधक प्रचार के अलावा पुरुषों की भागीदारी की स्पष्ट रणनीतियां नहीं हैं।
  • स्वास्थ्य कर्मियों को पिता को शामिल करने की ट्रेनिंग बहुत कम मिलती है।
  • सांस्कृतिक मान्यताएं पुरुषों को प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल से दूर रखती हैं।

आगे का रास्ता: प्रजनन स्वास्थ्य में पिता को शामिल करना

  • RMNCH+A दिशानिर्देशों में पिता-समावेशी हस्तक्षेप अनिवार्य करें, जिसमें परामर्श और प्रसवपूर्व यात्रा शामिल हों।
  • NHM के तहत पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता और सेवाओं के लिए बजट बढ़ाएं।
  • स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को पिता को जोड़ने और लिंग आधारित बाधाओं को दूर करने की ट्रेनिंग दें।
  • केरल जैसे राज्यों और स्वीडन जैसे देशों के सफल मॉडल से प्रेरणा लेकर सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील कार्यक्रम बनाएं।
  • पुरुष गर्भनिरोधक विकल्पों और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दें ताकि बाजार और स्वीकृति बढ़े।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पुरुषों की भागीदारी को लेकर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्पष्ट रूप से पिता-समावेशी प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों का निर्देश देती है।
  2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केवल लगभग 15% प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पिता शामिल होते हैं।
  3. NFHS-5 के अनुसार परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी महिलाओं की तुलना में काफी कम है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 RMNCH+A पर जोर देती है, लेकिन पिता-समावेशी कार्यक्रमों को स्पष्ट रूप से अनिवार्य नहीं करती। कथन 2 और 3 MoHFW वार्षिक रिपोर्ट 2023 और NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. यह मुख्य रूप से गर्भपात कराने वाली महिलाओं के अधिकार और स्वास्थ्य पर केंद्रित है।
  2. यह प्रजनन निर्णय में पुरुषों की भागीदारी के प्रावधान शामिल करता है।
  3. यह भारत में प्रजनन स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को प्रभावित करने वाले कानूनी ढांचे का हिस्सा है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 1 और 3
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 सही है क्योंकि यह अधिनियम महिलाओं के अधिकार और स्वास्थ्य पर केंद्रित है। कथन 2 गलत है क्योंकि अधिनियम में पुरुषों की भागीदारी के प्रावधान नहीं हैं। कथन 3 सही है क्योंकि यह प्रजनन स्वास्थ्य नीतियों को आकार देता है।

मेन प्रश्न

भारत में प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पिता की व्यवस्थित उपेक्षा के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इस उपेक्षा के परिवार के स्वास्थ्य परिणामों पर प्रभावों पर चर्चा करें और पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – स्वास्थ्य और परिवार कल्याण; लिंग और सामाजिक मुद्दे
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में प्रसवपूर्व देखभाल में पुरुषों की भागीदारी 10% से कम है, जो उच्च मातृ मृत्यु दर से जुड़ी है।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड में पुरुषों की भागीदारी में सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को उजागर करें; NHM के तहत राज्य-विशिष्ट पिता-समावेशी कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दें।
भारत में प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में पिता को क्यों बाहर रखा जाता है?

पिता को इसलिए बाहर रखा जाता है क्योंकि प्रजनन स्वास्थ्य को महिलाओं का क्षेत्र माना जाता है, नीतियां मातृत्व स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं, और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में पुरुषों की भागीदारी के लिए लक्षित रणनीतियों की कमी है।

भारत में परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी कितनी है?

NFHS-5 के अनुसार, परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी लगभग 12% है, जो महिलाओं की 88% भागीदारी से काफी कम है।

पुरुषों की भागीदारी मातृ स्वास्थ्य परिणामों को कैसे प्रभावित करती है?

2022 के WHO रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की भागीदारी से माताओं में प्रसवोत्तर अवसाद 30% तक कम होता है और नवजात देखभाल बेहतर होती है, जिससे परिवार का समग्र स्वास्थ्य सुधरता है।

भारत के किस राज्य में प्रजनन स्वास्थ्य में पुरुषों की भागीदारी अधिक है?

केरल में प्रजनन स्वास्थ्य गतिविधियों में लगभग 25% पुरुषों की भागीदारी है, जो बेहतर मातृ और बाल स्वास्थ्य संकेतकों से जुड़ी है।

कौन से वैश्विक उदाहरण पिता-समावेशी प्रजनन स्वास्थ्य नीतियों को दर्शाते हैं?

स्वीडन का Parental Leave Act (1974) साझा मातृत्व अवकाश अनिवार्य करता है, जिससे प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल में 80% से अधिक पुरुषों की भागीदारी होती है और परिवार के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं।

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