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SVEEP का परिचय

Systematic Voters’ Education and Electoral Participation (SVEEP) भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 2009 में शुरू किया गया एक कार्यक्रम है, जिसका मकसद चुनावों में मतदाताओं की जागरूकता और भागीदारी बढ़ाना है। SVEEP पूरे देश में लागू होता है और डिजिटल तथा ऑफलाइन अभियानों के जरिए सभी योग्य मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास करता है। यह Article 324 के तहत चुनाव आयोग को मिले संवैधानिक अधिकार के तहत संचालित होता है, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना शामिल है। SVEEP के लिए कोई अलग कानून नहीं है, बल्कि इसे आयोग के दिशा-निर्देशों और Model Code of Conduct के पालन से लागू किया जाता है।

SVEEP की खासियत इसकी बहुआयामी रणनीति है, जो मतदाताओं में उदासीनता, गलत जानकारी और मतदान से वंचित होने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए उनके अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया की जानकारी देता है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समूहों, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वालों के लिए लक्षित प्रयास करता है, जिससे मतदान प्रतिशत और लोकतांत्रिक भागीदारी में निरंतर सुधार देखने को मिला है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: राजनीति और शासन – चुनाव सुधार, चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता शिक्षा
  • GS पेपर 1: भारतीय समाज – राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक समावेशन
  • निबंध: भारत में लोकतंत्र और चुनावी भागीदारी

SVEEP का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत के संविधान का Article 324 चुनाव आयोग को चुनावों की निगरानी करने का अधिकार देता है। Representation of the People Act, 1951 चुनाव प्रक्रिया के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है, जिसमें मतदाता पंजीकरण और चुनाव संचालन शामिल हैं। SVEEP एक प्रशासनिक पहल है जो चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन इसका कोई अलग विधान नहीं है। इसे आयोग के सर्कुलर, दिशा-निर्देश और Model Code of Conduct के माध्यम से लागू किया जाता है।

SVEEP के लिए अलग कानून न होने से इसे लचीलापन मिलता है, लेकिन साथ ही कानूनी मजबूती की कमी भी होती है। यह काफी हद तक विभिन्न एजेंसियों के सहयोग और हितधारकों की स्वैच्छिक भागीदारी पर निर्भर करता है।

संस्थागत संरचना और हितधारक

  • चुनाव आयोग (ECI): SVEEP अभियानों की योजना बनाने और वित्तपोषण करने वाली शीर्ष संस्था।
  • राज्य चुनाव आयोग: स्थानीय स्तर पर SVEEP को लागू करते हैं और क्षेत्रीय सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ के अनुसार अभियान तैयार करते हैं।
  • कानून और न्याय मंत्रालय: कानूनी निगरानी करता है और चुनाव कानूनों के अनुरूपता सुनिश्चित करता है।
  • राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP): डिजिटल प्लेटफॉर्म जो मतदाता पंजीकरण, जानकारी प्रसार और शिकायत निवारण में मदद करता है, SVEEP के साथ जुड़ा हुआ।
  • मीडिया और नागरिक समाज संगठन: मतदाता शिक्षा संदेशों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने और Grassroots स्तर पर भागीदारी बढ़ाने में सहयोगी।

SVEEP के आर्थिक पहलू

चुनाव आयोग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में SVEEP गतिविधियों के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले तीन वर्षों में 15% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है (ECI बजट दस्तावेज 2021-24)। प्रभावी मतदाता भागीदारी से शासन लागत कम होती है क्योंकि चुनाव विवाद घटते हैं और निर्वाचित सरकारों की वैधता बढ़ती है, जिससे नीतिगत स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि मतदान प्रतिशत बढ़ने से सार्वजनिक नीतियों की जवाबदेही बेहतर होती है, जो समावेशी शासन और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के जरिए आर्थिक विकास को सकारात्मक दिशा में प्रभावित करता है।

SVEEP के प्रभाव का आंकड़ों से आकलन

  • 2014 के लोकसभा चुनाव में 66.38% मतदान से बढ़कर 2019 में 67.4% हुआ (ECI सांख्यिकी रिपोर्ट 2019)।
  • 2023 में SVEEP ने डिजिटल और ऑफलाइन अभियानों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाई (ECI वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • 2014 से 2019 के बीच महिलाओं का मतदान 2.5% बढ़ा (ECI जेंडर रिपोर्ट 2019)।
  • 2023 में NVSP के जरिए 1.5 करोड़ से ज्यादा नए मतदाता पंजीकृत हुए, जो SVEEP पहलों का परिणाम है (NVSP डेटा 2023)।
  • जिन राज्यों में लक्षित SVEEP अभियान हुए, वहां औसतन 4% अधिक मतदान हुआ बनिस्बत उन राज्यों के जहां सामान्य अभियान चले (Centre for Policy Research, 2023)।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और दक्षिण कोरिया

पहलूभारत (SVEEP)दक्षिण कोरिया (NEC कार्यक्रम)
मतदाता turnout (हालिया संसदीय चुनाव)67.4% (2019 लोकसभा)66.2% (2020 संसदीय)
युवा भागीदारीमध्यम; पहली बार मतदाताओं को लक्षित किया गया लेकिन फॉलो-अप सीमितउच्च; स्कूलों में अनिवार्य नागरिक शिक्षा से बढ़ी भागीदारी
मतदाता शिक्षा का तरीकामल्टी-चैनल: डिजिटल, प्रिंट, आउटरीच अभियान; सूक्ष्म लक्षित अभियान की कमीसमेकित पाठ्यक्रम आधारित नागरिक शिक्षा और डिजिटल पहुंच
डिजिटल उपकरणों का उपयोगNVSP और सोशल मीडिया अभियान; विस्तार की गुंजाइशउन्नत ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली

SVEEP के क्रियान्वयन में प्रमुख कमियां

  • बूथ और समुदाय स्तर पर सूक्ष्म लक्षित अभियान की कमी से विशेषकर हाशिए पर रहने वाले और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में जागरूकता असमान है।
  • प्रारंभिक मतदाता शिक्षा अभियानों के बाद फॉलो-अप तंत्र का अभाव निरंतर जुड़ाव को सीमित करता है।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल भेदभाव के कारण NVSP और ऑनलाइन मतदाता सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
  • केंद्र और राज्य चुनाव आयोगों के बीच समन्वय की कमी से अभियान की गुणवत्ता में असमानता आती है।

SVEEP के लिए आगे का रास्ता

  • डेटा एनालिटिक्स और सूक्ष्म लक्षित तकनीकों को शामिल कर बूथ स्तर पर मतदाता शिक्षा को बेहतर बनाया जाए, खासकर हाशिए पर रहने वाले समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल आउटरीच का विस्तार कर ग्रामीण-शहरी डिजिटल अंतर को कम किया जाए।
  • पंजीकरण के बाद निरंतर मतदाता जुड़ाव के लिए फॉलो-अप तंत्र को संस्थागत बनाया जाए।
  • स्थानीय, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील अभियानों के लिए नागरिक समाज और मीडिया के साथ सहयोग बढ़ाया जाए।
  • प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में नागरिक शिक्षा को शामिल कर चुनावी जागरूकता की नींव बचपन से मजबूत की जाए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
SVEEP के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. SVEEP संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एक वैधानिक योजना है।
  2. SVEEP संविधान के Article 324 के तहत संचालित होता है।
  3. SVEEP का मुख्य कार्य मतदाता पंजीकरण है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि SVEEP कोई अलग विधान नहीं है, यह एक प्रशासनिक पहल है। कथन 2 सही है क्योंकि SVEEP Article 324 के तहत संचालित होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि SVEEP का मुख्य फोकस मतदाता शिक्षा और भागीदारी है, मतदाता पंजीकरण केवल सहायक गतिविधि है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में मतदाता turnout के रुझानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. 2014 से 2019 के लोकसभा चुनावों में मतदाता turnout बढ़ा।
  2. 2014 से 2019 के बीच महिलाओं का मतदान घटा।
  3. लक्षित SVEEP अभियान वाले राज्यों में सामान्य अभियानों वाले राज्यों की तुलना में अधिक मतदान हुआ।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि मतदान प्रतिशत 66.38% से बढ़कर 67.4% हुआ। कथन 2 गलत है, महिलाओं का मतदान 2.5% बढ़ा। कथन 3 सही है, जैसा Centre for Policy Research 2023 के अध्ययन से पता चलता है।

मुख्य प्रश्न

SVEEP ने भारत में चुनावी भागीदारी बढ़ाने में क्या भूमिका निभाई है? इसके सामने आने वाली मुख्य चुनौतियां क्या हैं और लोकतांत्रिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)

चुनाव आयोग को SVEEP लागू करने का संवैधानिक अधिकार कौन सा है?

Article 324 चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार देता है और SVEEP जैसी पहलों को लागू करने की अनुमति देता है।

क्या SVEEP का कोई अलग विधान है?

नहीं, SVEEP चुनाव आयोग की एक प्रशासनिक पहल है, जिसका कोई अलग विधान नहीं है। इसे आयोग के दिशा-निर्देशों और Model Code of Conduct के माध्यम से लागू किया जाता है।

राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) का SVEEP में क्या योगदान है?

NVSP एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो SVEEP के साथ जुड़ा है और मतदाता पंजीकरण, जानकारी प्रसार और शिकायत निवारण में मदद करता है, जिससे पहुंच और भागीदारी बढ़ती है।

SVEEP ने हाल के चुनावों में महिलाओं के मतदान पर क्या प्रभाव डाला है?

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के बीच महिलाओं का मतदान 2.5% बढ़ा, जो SVEEP की लिंग समावेशन रणनीतियों की सफलता दर्शाता है।

SVEEP के वर्तमान दृष्टिकोण की सबसे बड़ी कमी क्या है?

SVEEP बूथ स्तर पर सूक्ष्म लक्षित अभियान और फॉलो-अप तंत्र की कमी से पीड़ित है, जिसके कारण हाशिए पर रहने वाले समुदायों और पहली बार मतदान करने वालों में जागरूकता असमान बनी रहती है।

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