अपडेट

झारखंड के सतत विकास का संदर्भ और समीक्षा

2000 में बिहार से अलग होकर बने झारखंड में खनिज संसाधनों की भरमार है और यहां का 29.6% भौगोलिक क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित है (Forest Survey of India, 2023)। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खनन पर निर्भर है, जो इसके GDP का लगभग 40% हिस्सा बनाता है (Jharkhand Economic Survey 2023-24)। हालांकि, खनिज आधारित विकास और संवेदनशील वन पारिस्थितिकी तथा आदिवासी जीवन-यापन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। कमजोर नियम-पालन और सामाजिक-आर्थिक असमानताएं इस संतुलन को और जटिल बनाती हैं।

JPSC परीक्षा प्रासंगिकता

  • पेपर 1: झारखंड का भूगोल और पर्यावरण – वन आवरण, जैव विविधता, जल संसाधन
  • पेपर 2: शासन और विकास – खनन नीतियां, पर्यावरण नियम, आदिवासी कल्याण
  • पिछले वर्ष का प्रश्न (JPSC 2022): झारखंड में आर्थिक विकास और पारिस्थितिक स्थिरता के बीच संतुलन की चुनौतियां

झारखंड में पर्यावरण संबंधी कानूनी और संवैधानिक ढांचा

संविधान के धारा 48A के तहत राज्य को पर्यावरण संरक्षण और सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। झारखंड में पर्यावरण शासन केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत संचालित होता है: फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 वन भूमि के परिवर्तन को नियंत्रित करता है (सेक्शन 2), जबकि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है (सेक्शन 3-5)। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 जैव विविधता के संरक्षण का प्रावधान करता है (सेक्शन 18-38)। झारखंड के लिए विशेष नियम जैसे झारखंड माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 2017 खनन गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले जैसे T.N. Godavarman Thirumulpad v. Union of India (1996) ने वन संरक्षण नीतियों को दिशा दी है, जिसमें वन भूमि परिवर्तन और अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण पर जोर दिया गया है।

  • फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 आदिवासी और वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देता है, जो संरक्षण कानूनों से जुड़ा हुआ है।
  • पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार) अधिनियम, 1996 भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए आदिवासी सहमति अनिवार्य करता है।
  • झारखंड में इन कानूनों का कमजोर पालन अवैध खनन और वन अतिक्रमण को बढ़ावा देता है।

आर्थिक पहलू: खनन, वानिकी और आजीविका

खनन झारखंड की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, जहां खनिजों का योगदान GDP का लगभग 40% है (Jharkhand Economic Survey 2023-24)। यह क्षेत्र राजस्व उत्पन्न करता है लेकिन पर्यावरणीय क्षति और सामाजिक विस्थापन भी करता है। अवैध खनन से प्रति वर्ष लगभग ₹500 करोड़ का राजस्व नुकसान होता है (Jharkhand Mining Department Report 2022)। वन आधारित आजीविका ग्रामीण परिवारों के 30% से अधिक को सहारा देती है (Census 2011), जो वन संसाधनों पर सामाजिक-आर्थिक निर्भरता दर्शाता है।

  • राज्य बजट में 2023-24 के लिए पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण हेतु ₹1,200 करोड़ आवंटित किए गए।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2023 में 1,200 MW पहुंची है, जो 15% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही है (MNRE 2023), जो सतत ऊर्जा की ओर बढ़त दिखाती है।
  • केवल 35% गांवों में नल के पानी की सुविधा है (NITI Aayog 2023), जो बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाता है।

पारिस्थितिकी स्थिति: वन आवरण, जैव विविधता और प्रदूषण

झारखंड का वन आवरण 29.6% है, जो राष्ट्रीय औसत 33.9% से कम है (FSI 2023)। राज्य में 1,200 वनस्पति प्रजातियां और 450 पशु प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 15 संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं (Jharkhand Biodiversity Board 2022)। खनन और औद्योगिक गतिविधियों से वायु और जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। जमशेदपुर में सर्दियों का औसत AQI 120 (मध्यम प्रदूषण) दर्ज किया गया है (CPCB 2023)। जल स्रोतों की गुणवत्ता पिछले दशक में 12% घट गई है, जिसका कारण खनन से निकलने वाले प्रदूषक हैं (Jharkhand State Water Board 2022)।

  • प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 0.9 टन CO2 वार्षिक है, जो राष्ट्रीय औसत 1.9 टन से कम है (MoEFCC 2023)।
  • वन क्षरण जैव विविधता को खतरे में डालता है और आदिवासी आजीविका को प्रभावित करता है।
  • खनन इलाकों में प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

संस्थागत ढांचा और शासन की चुनौतियां

झारखंड में पर्यावरण शासन कई संस्थाओं के बीच बंटा हुआ है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) प्रदूषण की निगरानी और पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। झारखंड वन विभाग वन संरक्षण और वनीकरण कार्यक्रमों का संचालन करता है। झारखंड राज्य नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JSREDA) नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देती है। झारखंड आदिवासी विकास निगम आदिवासी आजीविका को समर्थन देता है। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टिट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) खनन योजना और पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन करता है।

  • इन संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा डालती है।
  • कमजोर निगरानी और स्थानीय मिलीभगत के कारण अवैध खनन जारी है।
  • संरक्षण योजना में समुदाय की भागीदारी सीमित है, जिससे सतत परिणाम प्रभावित होते हैं।

तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड बनाम क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया) खनन और संरक्षण में

पहलूझारखंडक्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया)
कानूनी ढांचाफॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980; माइनर मिनरल नियम 2017; कमजोर लागू करनापर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1994; सख्त पुनर्वास कानून
खनन प्रभावGDP में 40% योगदान; उच्च अवैध खनन; वन क्षरणमहत्वपूर्ण खनन; खनन के बाद अनिवार्य भूमि पुनर्स्थापन
जैव विविधता परिणामवन गुणवत्ता में गिरावट; 15 संकटग्रस्त प्रजातियां5 वर्षों में जैव विविधता सूचकांक में 25% वृद्धि (2022 रिपोर्ट)
समुदाय की भागीदारीसीमित आदिवासी सहभागिता; भूमि अधिकारों पर विवादसंरचित समुदाय परामर्श और लाभ साझा करना
नीति लागू करनाकमजोर निगरानी; वन भूमि परिवर्तन उल्लंघन आममजबूत निगरानी; गैर-अनुपालन पर दंड

झारखंड के सतत विकास में मुख्य अंतराल और चुनौतियां

  • पर्यावरण कानूनों का अपर्याप्त पालन, खासकर अवैध खनन और बिना अनुमति वन भूमि परिवर्तन के खिलाफ।
  • आदिवासी और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का संरक्षण और खनन निर्णयों में समुचित समावेशन का अभाव।
  • पर्यावरण, वन और खनन विभागों के बीच सीमित संस्थागत समन्वय।
  • पेयजल की कमी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों को बढ़ाती है।
  • पर्यावरणीय क्षरण दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और आदिवासी आजीविका के लिए खतरा है।

झारखंड के सतत विकास के लिए आगे का रास्ता

  • मौजूदा कानूनों के पालन को मजबूत करना, जिसमें खनन और वन क्षेत्रों की रियल-टाइम निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग शामिल हो।
  • फॉरेस्ट राइट्स एक्ट और PESA के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय की भागीदारी को संस्थागत बनाना।
  • JSPCB, वन विभाग और खनन प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि पर्यावरणीय शासन एकीकृत हो सके।
  • JSREDA के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करना ताकि कार्बन उत्सर्जन कम हो और अर्थव्यवस्था विविध हो।
  • खनन प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए जल संरचना में निवेश बढ़ाना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड में लागू फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह वन भूमि के गैर-वन उद्देश्यों के लिए परिवर्तन को नियंत्रित करता है।
  2. यह आदिवासी समुदायों के व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता देता है।
  3. वन भूमि परिवर्तन के लिए केंद्रीय सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि यह अधिनियम वन भूमि परिवर्तन को नियंत्रित करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि वन भूमि परिवर्तन के लिए केंद्रीय सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। कथन 2 गलत है; व्यक्तिगत वन अधिकार फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 के तहत मान्यता प्राप्त हैं, न कि फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 के तहत।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2023 में 1,200 MW हो गई है।
  2. यह क्षेत्र 15% की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है।
  3. नवीकरणीय ऊर्जा झारखंड की कुल ऊर्जा उत्पादन का 50% से अधिक योगदान देती है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 MNRE 2023 के अनुसार सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा अभी झारखंड की कुल ऊर्जा उत्पादन का 50% से अधिक हिस्सा नहीं देती।

झारखंड और JPSC की प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 (पर्यावरण और भूगोल), पेपर 2 (शासन और विकास)
  • झारखंड विशिष्ट पहलू: खनन का GDP में योगदान, वन आवरण, आदिवासी आजीविका, प्रदूषण स्तर आदि पर राज्य-विशिष्ट आंकड़े।
  • मेन्स के लिए सुझाव: कानूनी प्रावधान, संस्थागत अंतराल, आदिवासी समुदायों पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, और तुलनात्मक नीति विश्लेषण पर आधारित उत्तर तैयार करें।
झारखंड में वन आवरण की नवीनतम स्थिति क्या है?

वन सर्वेक्षण भारत 2023 के अनुसार, झारखंड का वन आवरण उसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.6% है, जो राष्ट्रीय औसत 33.9% से कम है।

झारखंड में वन भूमि परिवर्तन को कौन सा अधिनियम नियंत्रित करता है?

फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 झारखंड में वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तन को नियंत्रित करता है और इसके लिए केंद्रीय सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

खनन झारखंड के GDP में कितना योगदान देता है?

झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, खनन राज्य के GDP में लगभग 40% का योगदान देता है।

खनन से जुड़ी झारखंड की प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियां क्या हैं?

खनन के कारण वन क्षरण, जल प्रदूषण (पिछले दशक में जल गुणवत्ता में 12% गिरावट), वायु प्रदूषण (जमशेदपुर में सर्दियों में AQI 120), और जैव विविधता हानि जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा विकास को कौन सी संस्था बढ़ावा देती है?

झारखंड राज्य नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JSREDA) राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देती है।

मेन्स अभ्यास प्रश्न

झारखंड में खनिज आधारित आर्थिक विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने में आने वाली मुख्य सतत विकास चुनौतियों पर चर्चा करें। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए संस्थागत और नीतिगत उपाय सुझाएं।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us