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2025 में कक्षा में वस्तुओं की वृद्धि: परिचय और महत्व

2025 में, 315 अंतरिक्ष प्रक्षेपणों के माध्यम से पृथ्वी की कक्षा में 4,600 से अधिक वस्तुएं स्थापित की गईं, जो कक्षा में भीड़भाड़ का अभूतपूर्व स्तर दर्शाता है (The Hindu, 2025)। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण वाणिज्यिक उपग्रह तैनाती है, खासकर SpaceX का Starlink समूह, जो 2025 के मध्य तक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 4,000 से अधिक उपग्रहों का हिस्सा है (SpaceX डेटा)। साथ ही, ट्रैक किए जा सकने वाले अंतरिक्ष मलबे की संख्या 34,000 से ऊपर पहुंच चुकी है (ESA Space Debris Office Report, 2025), जिससे टकराव के खतरे बढ़ गए हैं और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन (STM) और भी जटिल हो गया है।

भारत ने 2025 में 9 प्रक्षेपण किए, जिनमें PSLV और GSLV जैसे लॉन्च वाहन शामिल थे (ISRO वार्षिक रिपोर्ट, 2025)। कक्षा में वस्तुओं की इस तेज़ वृद्धि ने अंतरिक्ष मलबे को कम करने और यातायात प्रबंधन के लिए मजबूत नियामक ढांचे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तत्काल जरूरत को रेखांकित किया है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पर्यावरण प्रदूषण (अंतरिक्ष मलबा)
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – बाह्य अंतरिक्ष संधियाँ, वैश्विक अंतरिक्ष शासन
  • निबंध: वाणिज्यिकीकरण का अंतरिक्ष सुरक्षा और स्थिरता पर प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा जो बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करता है

Outer Space Treaty, 1967 अंतरिक्ष में राष्ट्रों की गतिविधियों को शांति पूर्ण उपयोग के लिए नियंत्रित करता है और राष्ट्रीय अधिकार की मनाही करता है (UN Treaty on Principles Governing the Activities of States in the Exploration and Use of Outer Space)। Liability Convention, 1972 अंतरिक्ष वस्तुओं से हुए नुकसान के लिए राज्यों की जिम्मेदारी तय करता है, जो टकराव की घटनाओं से निपटने में अहम है।

भारत इन संधियों का सदस्य है और Indian Space Research Organisation Act, 1969 (Section 3) के तहत ISRO का गठन और कार्यविधि निर्धारित की गई है। हालांकि, भारत का घरेलू नियामक ढांचा अभी विकसित हो रहा है, जिसमें Space Activities Bill का मसौदा तैयार है लेकिन वह अभी पारित होना बाकी है, जो निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन सुनिश्चित करने का प्रयास है।

  • Outer Space Treaty, 1967: शांति पूर्ण उपयोग, गैर-अधिग्रहण और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के सिद्धांत निर्धारित करता है।
  • Liability Convention, 1972: अंतरिक्ष वस्तुओं से हुए नुकसान के लिए राज्य की जिम्मेदारी तय करता है।
  • ISRO Act, 1969: ISRO के अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास के लिए अधिकार निर्धारित करता है।
  • Space Activities Bill (मसौदा): निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करने और सुरक्षा तथा स्थिरता बढ़ाने का प्रयास।
  • ITU Radio Regulations: उपग्रह आवृत्ति आवंटन को नियंत्रित करता है ताकि सिग्नल हस्तक्षेप न हो।

अंतरिक्ष प्रक्षेपण में आर्थिक पहलू

वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2023 में लगभग USD 469 बिलियन के मूल्य की थी, जिसका अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6.7% 2028 तक बनी रहेगी (Bryce Space and Technology Report, 2024)। वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण अब कुल प्रक्षेपणों का 60% से अधिक हिस्सा बन गए हैं, जो दूरसंचार, पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन जैसी सेवाओं से अरबों डॉलर की आय उत्पन्न करते हैं।

भारत ने 2023-24 के लिए अपने अंतरिक्ष बजट में लगभग INR 13,949 करोड़ (~USD 1.7 बिलियन) आवंटित किए (Union Budget 2023-24), जो अंतरिक्ष अवसंरचना और क्षमताओं में निवेश को दर्शाता है। हालांकि, कक्षा में वस्तुओं की बढ़ोतरी ने उपग्रह ऑपरेटरों के बीमा प्रीमियम में 15-20% की वृद्धि की है, जो टकराव के जोखिमों के कारण है (Lloyd’s of London Space Risk Report, 2024)।

  • वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार: USD 469 बिलियन (2023), CAGR 6.7% 2028 तक।
  • भारत का अंतरिक्ष बजट: INR 13,949 करोड़ (~USD 1.7 बिलियन) 2023-24 के लिए।
  • वाणिज्यिक प्रक्षेपण: वैश्विक कुल प्रक्षेपणों का >60%।
  • बीमा प्रीमियम: मलबे से टकराव के खतरे के कारण 15-20% वृद्धि।
  • अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन बाजार: 2027 तक USD 3.5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान (MarketsandMarkets, 2024)।

अंतरिक्ष प्रक्षेपण और यातायात प्रबंधन में प्रमुख संस्थान

ISRO भारत की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी है जो उपग्रह प्रक्षेपण और अनुसंधान की जिम्मेदार है। Indian National Space Promotion and Authorization Centre (IN-SPACe) निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और नियंत्रित करने के लिए स्थापित किया गया है, जो लाइसेंसिंग और अनुपालन की देखरेख करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र का Office for Outer Space Affairs (UNOOSA) सहयोग और संधि क्रियान्वयन में मदद करता है। NASA और European Space Agency (ESA) मलबे की निगरानी और कम करने में अग्रणी हैं, जिसमें ESA ने कक्षा में 34,000 से अधिक ट्रैक किए जाने वाले मलबे की सूचना दी है। निजी कंपनियां जैसे SpaceX वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण में प्रमुख हैं, जिनका Starlink समूह नए उपग्रहों का बड़ा हिस्सा है।

  • ISRO: भारत सरकार की अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रक्षेपण एजेंसी।
  • IN-SPACe: भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों का नियामक।
  • UNOOSA: संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष सहयोग और संधि निगरानी संस्था।
  • NASA & ESA: मलबे की निगरानी और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन में अग्रणी।
  • SpaceX: सबसे बड़े वाणिज्यिक उपग्रह समूह वाला अमेरिकी निजी कंपनी।

अंतरिक्ष मलबा और यातायात प्रबंधन की चुनौतियां

कक्षा में वस्तुओं की वृद्धि से टकराव का खतरा बढ़ गया है, जिससे 2024 में 2023 की तुलना में टकराव से बचाव के लिए किए गए उपायों में 25% की वृद्धि हुई है (NASA Orbital Debris Program Office)। अंतरिक्ष मलबा परिचालन उपग्रहों, मानव मिशनों और दीर्घकालिक अंतरिक्ष स्थिरता को खतरे में डालता है।

वर्तमान में अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन (STM) असंगठित है, और कोई एकल वैश्विक प्राधिकरण नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर नियम और प्रवर्तन अलग-अलग हैं। भारत के पास अभी तक कोई व्यापक, कानूनी रूप से बाध्यकारी STM और मलबा नियंत्रण नीति नहीं है, जिससे निजी क्षेत्र के लिए नियामक अनिश्चितता बनी हुई है और अमेरिका व यूरोप की तुलना में प्रवर्तन सीमित है।

  • वैश्विक मलबे की संख्या: >34,000 ट्रैक किए गए वस्तुएं (ESA, 2025)।
  • टकराव से बचाव के उपाय: 2024 में 2023 की तुलना में +25% (NASA)।
  • STM बाजार: 2027 तक USD 3.5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान।
  • भारत का नियामक अंतर: अभी तक बाध्यकारी STM/मलबा नियंत्रण कानून नहीं।
  • निजी क्षेत्र की अनिश्चितता: Space Activities Bill लंबित है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन के अंतरिक्ष प्रक्षेपण और नियामक ढांचे

पहलूभारतचीन
2025 में प्रक्षेपण की संख्या9 कक्षा प्रक्षेपण (ISRO रिपोर्ट, 2025)55 प्रक्षेपण, चंद्र अन्वेषण और अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण पर केंद्रित
नियामक ढांचाSpace Activities Bill मसौदा लंबित; कोई व्यापक STM नीति नहींसंयुक्त राष्ट्र COPUOS के अनुरूप कड़ा राष्ट्रीय मलबा नियंत्रण दिशानिर्देश
निजी क्षेत्र की भूमिकाIN-SPACe द्वारा नियंत्रित; नियामक अनिश्चितता बनी हुईराज्य नियंत्रण में, कड़े निरीक्षण के तहत उभरते निजी साझेदारी
अंतरराष्ट्रीय सहयोगOuter Space Treaty और Liability Convention के हस्ताक्षरकर्ता; सीमित वैश्विक नेतृत्वUN COPUOS में सक्रिय भागीदारी; अंतरराष्ट्रीय मलबा नियंत्रण मानकों का पालन

आगे का रास्ता: नीति और संस्थागत आवश्यकताएं

  • Space Activities Bill को पारित कर भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों और मलबा नियंत्रण के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा बनाना।
  • अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप राष्ट्रीय Space Traffic Management (STM) नीति विकसित करना ताकि कक्षा की भीड़ और टकराव से बचाव को नियंत्रित किया जा सके।
  • भारत की भागीदारी को UN COPUOS जैसे वैश्विक मंचों में बढ़ाना और मलबा नियंत्रण तथा STM पर बहुपक्षीय समझौतों को प्रोत्साहित करना।
  • भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा के लिए देशी मलबा ट्रैकिंग और हटाने की तकनीकों में निवेश करना।
  • IN-SPACe के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मजबूत करना ताकि सुरक्षा और स्थिरता के मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।

प्रश्न अभ्यास

📝 प्रारंभिक अभ्यास
Outer Space Treaty और Liability Convention के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Outer Space Treaty कक्षा में परमाणु हथियार रखने पर रोक लगाता है।
  2. Liability Convention पृथ्वी पर हुए नुकसान के लिए पूर्ण जिम्मेदारी निर्धारित करता है।
  3. Outer Space Treaty निजी कंपनियों को खगोलीय पिंडों पर संप्रभुता का दावा करने की अनुमति देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि Outer Space Treaty कक्षा में परमाणु हथियारों को प्रतिबंधित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Liability Convention दोष आधारित जिम्मेदारी तय करता है, पूर्ण जिम्मेदारी केवल पृथ्वी या उड़ान में विमान को हुए नुकसान पर लागू होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि Outer Space Treaty राष्ट्रीय या निजी संप्रभुता के दावों को मना करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के अंतरिक्ष शासन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ISRO भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों का नियमन करता है।
  2. IN-SPACe निजी अंतरिक्ष गतिविधियों का नियामक प्राधिकरण है।
  3. Space Activities Bill कानून बन चुका है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • dकेवल 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि ISRO अनुसंधान और प्रक्षेपण करता है, निजी गतिविधियों का नियमन नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि IN-SPACe निजी अंतरिक्ष गतिविधियों का नियामक है। कथन 3 गलत है क्योंकि Space Activities Bill अभी तक कानून नहीं बना है।

मुख्य प्रश्न

2025 में कक्षा में वस्तुओं की तेज वृद्धि से उत्पन्न चुनौतियों का मूल्यांकन करें और भारत को अपने अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन और मलबा नियंत्रण नीतियों को मजबूत करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए, इस पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय मुद्दे
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में ISRO के उपग्रह ट्रैकिंग स्टेशन हैं जो अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता में योगदान देते हैं।
  • मुख्य बिंदु: भारत के उभरते अंतरिक्ष नियामक ढांचे और झारखंड की भूमिका को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
Outer Space Treaty, 1967 का महत्व क्या है?

Outer Space Treaty, 1967 अंतरिक्ष में राष्ट्रों की गतिविधियों के लिए कानूनी ढांचा स्थापित करता है, जिसमें राष्ट्रीय अधिकार की मनाही, शांति पूर्ण उपयोग का प्रावधान और निजी संस्थाओं सहित राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए राज्यों की जिम्मेदारी शामिल है।

2025 में कितनी वस्तुएं कक्षा में भेजी गईं?

2025 में 315 अंतरिक्ष प्रक्षेपणों के बाद 4,600 से अधिक वस्तुएं कक्षा में स्थापित की गईं, जो कक्षा में भीड़भाड़ का नया रिकॉर्ड है (The Hindu, 2025)।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में IN-SPACe की भूमिका क्या है?

IN-SPACe भारत में निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित और बढ़ावा देता है, लाइसेंसिंग, अनुपालन और ISRO के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालता है।

अंतरिक्ष मलबा उपग्रह ऑपरेटरों के लिए क्यों चिंता का विषय है?

अंतरिक्ष मलबा टकराव के खतरे को बढ़ाता है, जिससे बीमा प्रीमियम में 15-20% की वृद्धि होती है और महंगे टकराव से बचाव उपाय करने पड़ते हैं, जो उपग्रह संचालन और अंतरिक्ष स्थिरता को प्रभावित करता है।

भारत का अंतरिक्ष नियामक ढांचा चीन से कैसे तुलना करता है?

भारत का ढांचा अभी प्रारंभिक चरण में है, Space Activities Bill लंबित है और सीमित STM नीतियां हैं, जबकि चीन ने 2025 में अधिक मिशन (55) लॉन्च किए हैं और संयुक्त राष्ट्र मानकों के अनुरूप कड़े मलबा नियंत्रण दिशानिर्देश लागू किए हैं।

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