मार्च 2024 में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने XYZ बनाम भारत संघ मामले में अधिकारिता अधिनियम 2016 (RPwD Act) की धारा 2(r) के तहत 'एसिड हमले के पीड़ित' की परिभाषा का विस्तार किया। कोर्ट ने माना कि एसिड हमले केवल शारीरिक विकृति ही नहीं, बल्कि मानसिक आघात और कार्यात्मक अक्षमताएं भी पैदा करते हैं, इसलिए पीड़ितों को व्यापक कानूनी संरक्षण और अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुरूप है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, और एसिड हमले के पीड़ितों के सम्मान और पुनर्वास को सुनिश्चित करता है, केवल शारीरिक चोट तक सीमित न रखते हुए।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शासन (विकलांगता अधिकार, न्यायिक सक्रियता)
- GS पेपर 2: राजनीति (मूल अधिकार, अनुच्छेद 21)
- GS पेपर 1: सामाजिक मुद्दे (विकलांगता, लैंगिक न्याय)
- निबंध: विकलांगता कानून और सामाजिक न्याय का संगम
एसिड हमले के पीड़ितों के लिए कानूनी ढांचा
RPwD अधिनियम, 2016 की धारा 2(r) में 'विकलांग व्यक्ति' की परिभाषा शुरू में शारीरिक अक्षमताओं तक सीमित थी। एसिड हमले के पीड़ित मुख्यतः दिखने वाली विकृति के आधार पर पहचाने जाते थे। जहर अधिनियम, 1919 और एसिड हमले पीड़ितों (चिकित्सा उपचार व पुनर्वास) नियम, 2023 चिकित्सा उपचार और दंड के प्रावधान करते हैं, परंतु विकलांगता अधिकारों के व्यापक दृष्टिकोण का अभाव है। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले ने मानसिक आघात और कार्यात्मक अक्षमताओं को विकलांगता में शामिल कर RPwD अधिनियम की पहुंच और सुरक्षा को बढ़ाया है।
- अनुच्छेद 21 सम्मान और पुनर्वास के अधिकार को सुनिश्चित करता है।
- RPwD अधिनियम, 2016 की धारा 2(r): अब मानसिक और कार्यात्मक अक्षमताओं वाले एसिड हमले के पीड़ित भी शामिल हैं।
- एसिड हमले पीड़ित नियम, 2023: मुख्य रूप से चिकित्सा उपचार पर केंद्रित, मानसिक पुनर्वास सीमित।
- जहर अधिनियम, 1919: एसिड की बिक्री नियंत्रित करता है, दुरुपयोग पर दंड देता है, विकलांगता अधिकारों को कवर नहीं करता।
आर्थिक प्रभाव और पुनर्वास की चुनौतियां
एसिड हमले पीड़ितों और राज्य दोनों पर भारी आर्थिक बोझ होता है। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय (MoSJE) ने 2023-24 के केंद्रीय बजट में पुनर्वास के लिए ₹50 करोड़ आवंटित किए। फिर भी, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार चिकित्सा खर्च और उत्पादकता के नुकसान से सालाना लगभग ₹200 करोड़ की हानि होती है। एसिड हमले के बाद रोजगार दर 30% से कम है, जबकि पुनर्निर्माण सर्जरी की मांग 12% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही है (IBEF 2023)। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विकलांगता पेंशन और व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच बेहतर हुई है, लेकिन मानसिक पुनर्वास और विभागों के बीच समन्वय में अभी भी कमी है।
- सालाना एसिड हमले के मामले: 1,000 से अधिक (NCRB 2023)।
- पीड़ितों में रोजगार दर: 28% बनाम अन्य विकलांगता वाले 45% (राष्ट्रीय विकलांगता सर्वेक्षण 2022)।
- पेंशन कवरेज 10% से बढ़कर 40% (MoSJE 2024)।
- सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद पुनर्निर्माण सर्जरी में 25% की वृद्धि (NIEPMD 2024)।
कार्यान्वयन में प्रमुख संस्थानों की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट विकलांगता की कानूनी मान्यता तय करता है। MoSJE कल्याण योजनाओं और विकलांगता प्रमाणन का प्रबंधन करता है। नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद मल्टीपल डिसेबिलिटीज (NIEPMD) पुनर्वास और कौशल विकास प्रदान करता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) एसिड हमलों का डेटा संग्रह करता है, जबकि एसिड सर्वाइवर्स फाउंडेशन इंडिया (ASFI) पीड़ितों के अधिकारों के लिए काम करता है। इन संस्थानों के बीच समन्वय की कमी से विशेषकर मानसिक देखभाल और रोजगार समावेशन में बाधा आती है।
- सुप्रीम कोर्ट: विकलांगता की परिभाषा का न्यायिक विस्तार।
- MoSJE: प्रमाणन, पेंशन, कौशल विकास के लिए वित्तपोषण।
- NIEPMD: चिकित्सा पुनर्वास और व्यावसायिक प्रशिक्षण।
- NCRB: एसिड हमलों का डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग।
- ASFI: वकालत, पीड़ित सहायता, जागरूकता अभियान।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम यूनाइटेड किंगडम
| पहलू | भारत | यूनाइटेड किंगडम |
|---|---|---|
| कानूनी मान्यता | RPwD अधिनियम के तहत 2024 के सुप्रीम कोर्ट फैसले से मानसिक और कार्यात्मक अक्षमताएं शामिल की गईं। | Equality Act 2010 में एसिड हमले के पीड़ितों को स्पष्ट रूप से विकलांग माना गया है। |
| पुनर्वास दृष्टिकोण | चिकित्सा और आंशिक मानसिक पुनर्वास; मानकीकृत प्रोटोकॉल की कमी। | व्यापक पुनर्वास जिसमें मानसिक समर्थन भी शामिल है। |
| रोजगार परिणाम | पीड़ितों में 28% रोजगार दर (राष्ट्रीय विकलांगता सर्वेक्षण 2022)। | कानून लागू होने के पांच वर्षों में रोजगार में 35% वृद्धि (UK Home Office 2022)। |
| कानूनी सुरक्षा | RPwD अधिनियम के तहत विकलांगता लाभ, पेंशन, भेदभाव विरोधी सुरक्षा। | मजबूत भेदभाव विरोधी कानून और समेकित समर्थन प्रणाली। |
महत्व और आगे की राह
- सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विकलांगता कानून को एसिड हमले के पीड़ितों की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाता है, जिससे सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण तक पहुंच बढ़ती है।
- मानसिक आघात को विकलांगता में शामिल करने से मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास के मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करना जरूरी हो गया है।
- स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और कानून प्रवर्तन विभागों के बीच बेहतर समन्वय से प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
- व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार समर्थन बढ़ाकर आर्थिक बहिष्कार को कम करना आवश्यक है।
- NCRB और NGOs के डेटा आधारित निगरानी से नीतिगत प्रतिक्रियाशीलता बेहतर होगी।
- अधिनियम ने मूल रूप से एसिड हमले के पीड़ितों को केवल शारीरिक विकृति के आधार पर विकलांग माना।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में परिभाषा का विस्तार कर मानसिक आघात और कार्यात्मक अक्षमताएं शामिल कीं।
- जहर अधिनियम, 1919 एसिड हमले के पीड़ितों को व्यापक विकलांगता अधिकार प्रदान करता है।
- सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय ने 2023-24 में पुनर्वास के लिए ₹50 करोड़ आवंटित किए।
- एसिड हमले के पीड़ितों में रोजगार दर अन्य विकलांगों से अधिक है।
- पुनर्निर्माण सर्जरी उद्योग 12% की CAGR से बढ़ रहा है, जिसमें एसिड हमले के पुनर्वास की मांग भी शामिल है।
मेन प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट द्वारा RPwD अधिनियम, 2016 के तहत 'एसिड हमले के पीड़ित' की परिभाषा के विस्तार से पीड़ितों के अधिकारों में कैसे प्रगति हुई है? इस विस्तारित परिभाषा को लागू करने में आने वाली चुनौतियों की चर्चा करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और सामाजिक न्याय
- झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में एसिड हमलों की रिपोर्ट राज्य स्तर पर विकलांगता आंकड़ों में शामिल होती हैं; स्थानीय NGOs पीड़ितों के पुनर्वास में सक्रिय हैं।
- मेन पॉइंटर: न्यायिक सक्रियता, राज्य स्तर पर कार्यान्वयन की चुनौतियां, झारखंड के एसिड हमलों और विकलांगता प्रमाणन के आंकड़ों को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का RPwD अधिनियम के तहत एसिड हमले के पीड़ितों के लिए क्या महत्व है?
इस फैसले ने मानसिक आघात और कार्यात्मक अक्षमताओं को परिभाषा में शामिल कर व्यापक विकलांगता लाभ और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की।
RPwD अधिनियम, 2016 के तहत एसिड हमले के पीड़ितों को 'विकलांग व्यक्ति' कैसे परिभाषित किया गया है?
शुरुआत में केवल शारीरिक विकृति को माना गया था, जबकि 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मानसिक और कार्यात्मक अक्षमताओं को भी शामिल किया।
भारत में एसिड हमले के पीड़ित आर्थिक चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं?
उच्च चिकित्सा खर्च, कम रोजगार दर (28%), और सीमित व्यावसायिक प्रशिक्षण के कारण आर्थिक बहिष्कार झेलना पड़ता है, हालांकि सरकार पुनर्वास प्रयास कर रही है।
एसिड हमले के पीड़ितों के विकलांगता अधिकारों के कार्यान्वयन में कौन-कौन सी संस्थाएं महत्वपूर्ण हैं?
सुप्रीम कोर्ट, सामाजिक न्याय मंत्रालय, NIEPMD, NCRB, और ASFI जैसी NGOs कानूनी मान्यता, पुनर्वास, डेटा संग्रह और वकालत में अहम भूमिका निभाती हैं।
भारत का एसिड हमले के पीड़ितों के प्रति दृष्टिकोण यूनाइटेड किंगडम से कैसे अलग है?
UK का Equality Act 2010 पीड़ितों को स्पष्ट रूप से विकलांग मानता है, व्यापक पुनर्वास और भेदभाव विरोधी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे रोजगार में बेहतर सुधार होता है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
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