अपडेट

परिचय: होरमूज जलडमरूमध्य पर IRGC का बयान

अप्रैल 2024 में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की कि होरमूज जलडमरूमध्य "कभी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा।" ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकीर्ण जलमार्ग फारस की खाड़ी को खाड़ी ऑफ ओमान और अरब सागर से जोड़ता है। IRGC के इस बयान से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के नियंत्रण और सैन्यकरण में रणनीतिक बदलाव का संकेत मिलता है, जो विश्व के लगभग एक-पांचवें पेट्रोलियम तरल पदार्थों के परिवहन का केंद्र है। यह घोषणा बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता के लिए चुनौतियों को रेखांकित करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध (समुद्री सुरक्षा, ईरान की क्षेत्रीय भूमिका)
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था (ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार)
  • निबंध: ऊर्जा परिवहन मार्गों की भू-राजनीति

होरमूज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा

होरमूज जलडमरूमध्य भारतीय संविधान क्षेत्राधिकार से बाहर है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून द्वारा नियंत्रित किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 इसका मुख्य कानूनी आधार है, खासकर:

  • भाग III – क्षेत्रीय समुद्र और संलग्न क्षेत्र: तटीय राज्य 12 नौटिकल मील तक क्षेत्रीय समुद्र पर संप्रभुता का दावा कर सकते हैं।
  • भाग V – विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ): तटीय राज्य 200 नौटिकल मील तक प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार रखते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में पारगमन मार्ग के अधिकार UNCLOS के तहत सुनिश्चित हैं, जिससे निरंतर और तेज़ी से गुजरने की अनुमति मिलती है।
  • 1958 का क्षेत्रीय समुद्र और संलग्न क्षेत्र सम्मेलन और प्रचलित अंतरराष्ट्रीय कानून भी नौवहन और सुरक्षा को नियंत्रित करते हैं।

हालांकि, IRGC के जरिए ईरान के दावे पारगमन मार्ग की पारंपरिक समझ को चुनौती देते हैं, जो एकतरफा नियंत्रण और सैन्यकरण की ओर बढ़ने का संकेत है।

आर्थिक महत्व: वैश्विक और भारतीय ऊर्जा सुरक्षा

होरमूज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम है। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) 2023 के अनुसार, लगभग 21 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल इस जलडमरूमध्य से गुजरता है, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल पदार्थों की खपत का लगभग 21% है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि यदि यह मार्ग 30 दिन बंद रहता है तो वैश्विक GDP वृद्धि 0.5% तक गिर सकती है और तेल की कीमतों में 10-20% की तेजी आ सकती है।

  • भारत का कच्चे तेल का आयात बिल वित्त वर्ष 2023 में $180 बिलियन था (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत)।
  • भारत के लगभग 60% कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्वी देशों से होता है, जो होरमूज मार्ग पर निर्भर हैं।
  • वैश्विक समुद्री LNG शिपमेंट का लगभग 30% भी इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है (IEA 2023)।
  • भारतीय नौसेना के लिए 2023-24 में समुद्री सुरक्षा पर बजट आवंटन ₹13,000 करोड़ था (संघीय बजट), जो समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

संस्थागत भूमिका और जिम्मेदारियां

  • इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC): होरमूज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य मौजूदगी का नियंत्रण करता है और ईरान के समुद्री दावों तथा सुरक्षा संचालन को लागू करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): समुद्री नौवहन और सुरक्षा मानकों को नियंत्रित करता है, नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है।
  • यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA): वैश्विक ऊर्जा प्रवाह का आंकड़ा प्रदान करता है और होरमूज के तेल परिवहन पर नजर रखता है।
  • इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA): वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाजार स्थिरता के जोखिमों का आकलन करता है।
  • भारतीय नौसेना: भारत के समुद्री हितों की रक्षा करती है, जिसमें होरमूज जैसे महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य शामिल हैं।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत: ऊर्जा आयात नीतियों और सुरक्षा रणनीतियों की देखरेख करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: होरमूज जलडमरूमध्य बनाम मलक्का जलडमरूमध्य

मलक्का जलडमरूमध्य, जो एक अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, ने सफल बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग देखा है, जो होरमूज के सैन्यीकृत माहौल से अलग है।

विशेषताहोरमूज जलडमरूमध्यमलक्का जलडमरूमध्य
भौगोलिक स्थितिईरान और ओमान के बीच, फारस की खाड़ी का निकासमलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर के बीच
सुरक्षा ढांचाIRGC द्वारा एकतरफा सैन्य नियंत्रण, उच्च तनावमलक्का स्ट्रेट पेट्रोल (MSP) के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग
हितधारकईरान, ओमान, खाड़ी के देश, वैश्विक ऊर्जा आयातकइंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड
डाकू गतिविधियों पर प्रभावसैन्यकरण और संघर्ष की संभावना के कारण उच्च जोखिम2004-2014 में डाकू घटनाओं में 50% की कमी (अंतरराष्ट्रीय समुद्री ब्यूरो)
वैश्विक व्यापार पर प्रभाववैश्विक तेल आपूर्ति का 21% के लिए महत्वपूर्ण, व्यवधान के प्रति संवेदनशीलपूर्वी एशियाई व्यापार के लिए आवश्यक, सहयोग से स्थिर

नीति में कमी: बहुपक्षीय सुरक्षा तंत्र का अभाव

होरमूज जलडमरूमध्य में सभी तटीय राज्यों और प्रमुख हितधारकों को शामिल करने वाला मजबूत बहुपक्षीय सुरक्षा तंत्र नहीं है। मलक्का जलडमरूमध्य के सहयोगी पेट्रोल की तुलना में, होरमूज की सुरक्षा IRGC के एकतरफा सैन्य प्रभुत्व में है। इस कमी से संघर्ष के बढ़ने और वैश्विक ऊर्जा प्रवाह में बाधा का खतरा बढ़ जाता है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों को ईरान, ओमान, खाड़ी के देशों और प्रमुख ऊर्जा आयातकों को शामिल करते हुए बहुपक्षीय सुरक्षा तंत्र स्थापित करने पर जोर देना चाहिए ताकि होरमूज की स्थिरता बनी रहे।
  • भारत को खाड़ी के तटीय देशों और वैश्विक साझेदारों के साथ नौसैनिक सहयोग बढ़ाकर अपनी ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • UNCLOS के प्रावधानों का सख्ती से पालन और नौवहन की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय समुद्री नीति का केंद्र बनाना आवश्यक है।
  • ऊर्जा विविधीकरण और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार संभावित होरमूज व्यवधानों के जोखिम को कम कर सकते हैं।
  • बेहतर खुफिया साझेदारी और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता से संघर्ष की संभावना को पहले से रोकना संभव होगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
होरमूज जलडमरूमध्य और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. UNCLOS अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में पारगमन मार्ग के अधिकार सुनिश्चित करता है।
  2. 1958 का क्षेत्रीय समुद्र और संलग्न क्षेत्र सम्मेलन तटीय राज्यों को जलडमरूमध्यों में पारगमन रोकने की अनुमति देता है।
  3. होरमूज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि UNCLOS के भाग III और V में अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में पारगमन मार्ग के अधिकार दिए गए हैं। कथन 2 गलत है; 1958 का सम्मेलन तटीय राज्यों को अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों में पारगमन रोकने की अनुमति नहीं देता। कथन 3 सही है; होरमूज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IRGC ईरान की नियमित नौसेना है जो पारंपरिक समुद्री रक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।
  2. IRGC होरमूज जलडमरूमध्य में रणनीतिक सैन्य ऑपरेशनों को नियंत्रित करता है।
  3. IRGC ईरान की सशस्त्र सेनाओं की एक शाखा है जो नियमित सेना से अलग है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; IRGC ईरान की नियमित नौसेना से अलग है। कथन 2 और 3 सही हैं; IRGC होरमूज में रणनीतिक सैन्य ऑपरेशनों को नियंत्रित करता है और यह ईरान की सशस्त्र सेनाओं की एक अलग शाखा है।

मुख्य प्रश्न

IRGC के उस बयान के रणनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण करें जिसमें कहा गया है कि होरमूज जलडमरूमध्य कभी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत की समुद्री रणनीति पर इसके प्रभाव पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध), GS पेपर 3 (आर्थिक विकास)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड का औद्योगिक विकास स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर है; होरमूज में व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करता है जो राज्य के उद्योगों को प्रभावित करता है।
  • मुख्य बिंदु: वैश्विक समुद्री सुरक्षा को स्थानीय आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, ऊर्जा आयात निर्भरता और रणनीतिक नौसैनिक साझेदारी पर जोर दें।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होरमूज जलडमरूमध्य में पारगमन मार्ग की कानूनी स्थिति क्या है?

UNCLOS 1982 के तहत, अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में पारगमन मार्ग की गारंटी दी गई है। यह तटीय राज्यों द्वारा बिना बाधा के जहाजों और विमानों के सतत और त्वरित गुजरने की अनुमति देता है।

होरमूज जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है?

भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 60% आपूर्ति मध्य पूर्वी देशों से करता है, जो होरमूज मार्ग पर निर्भर हैं। इस मार्ग में व्यवधान से भारत के आयात खर्च और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

होरमूज जलडमरूमध्य में IRGC की क्या भूमिका है?

IRGC ईरान की एक विशेष सैन्य इकाई है जो होरमूज में रणनीतिक सैन्य ऑपरेशनों और समुद्री दावों को लागू करती है। इसका बयान इस जलडमरूमध्य के सैन्यकरण में बढ़ोतरी का संकेत देता है।

मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा व्यवस्था होरमूज से कैसे अलग है?

मलक्का जलडमरूमध्य में तटीय राज्यों के बीच बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग है, जिसने डाकू गतिविधियों को कम किया और व्यापार को स्थिर किया है। इसके विपरीत, होरमूज में IRGC का एकतरफा सैन्य नियंत्रण है, जो संघर्ष के जोखिम को बढ़ाता है।

होरमूज जलडमरूमध्य के बंद होने का वैश्विक आर्थिक प्रभाव क्या हो सकता है?

यदि यह मार्ग 30 दिन के लिए बंद हो जाए, तो वैश्विक GDP वृद्धि में 0.5% की कमी आ सकती है और तेल की कीमतों में 10-20% की तेजी आ सकती है, जिससे ऊर्जा आयातक देशों जैसे भारत की लागत बढ़ जाएगी।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us