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परिचय: इंडो-पैसिफिक रणनीति और पश्चिम एशिया की अनदेखी

भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति, जो मध्य 2010 के दशक में तैयार की गई और Indian Maritime Doctrine (2015) तथा SAGAR (Security and Growth for All in the Region) जैसे ढांचों के माध्यम से स्पष्ट की गई है, मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और व्यापक इंडो-पैसिफिक समुद्री क्षेत्र पर केंद्रित है। हालांकि, इस रणनीतिक दृष्टिकोण में पश्चिम एशिया को अक्सर किनारे कर दिया जाता है, जबकि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी संबंधों और समुद्री संपर्क के लिए बेहद अहम है। इंडो-पैसिफिक ढांचे से पश्चिम एशिया को बाहर रखना महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक संबंधों की अनदेखी है, जिससे भारत की क्षेत्रीय पकड़ अधूरी और प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के लिए कमजोर हो जाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की विदेश नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति, पश्चिम एशिया संबंध
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रेमिटेंस
  • निबंध: भारत की भू-राजनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय एकीकरण

भारत की विदेश नीति का कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत की विदेश नीति के लिए कोई स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है, लेकिन यह Article 253 से कानूनी अधिकार प्राप्त करती है, जो संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए विधायी शक्ति देता है। Ministry of External Affairs (MEA), जो Ministry of External Affairs Act, 1947 के तहत स्थापित है, विदेश नीति बनाने और लागू करने वाली मुख्य संस्था है, जिसमें इंडो-पैसिफिक और पश्चिम एशिया की रणनीतियां शामिल हैं। Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 विदेशी वित्त पोषण को नियंत्रित करता है जो कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करता है। Indian Maritime Doctrine (2015) और SAGAR जैसे नीति दस्तावेज भारत की समुद्री और क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टि को स्पष्ट रूप से मार्गदर्शित करते हैं।

भारत और पश्चिम एशिया के बीच आर्थिक परस्पर निर्भरता

भारत और पश्चिम एशिया के बीच आर्थिक संबंध व्यापक और बहुआयामी हैं। द्विपक्षीय व्यापार 2022-23 में लगभग USD 130 बिलियन तक पहुंच गया (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, 2023), जो इस क्षेत्र की वाणिज्यिक अहमियत को दर्शाता है। भारत अपनी कच्ची तेल की लगभग 85% जरूरतें मुख्य रूप से सऊदी अरब, इराक और यूएई से आयात करता है (Petroleum Planning & Analysis Cell, 2023), जिससे ऊर्जा सुरक्षा इस क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर हो जाती है। पश्चिम एशिया में बसे भारतीय प्रवासियों से भेजी गई रेमिटेंस 2022 में USD 87 बिलियन रही (वर्ल्ड बैंक, 2023), जो विदेशी मुद्रा का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा, भारत का पश्चिम एशिया में निवेश 2023 तक USD 20 बिलियन से अधिक है (RBI), जबकि रक्षा निर्यात में 2022 में 35% की वृद्धि हुई (रक्षा मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। ईरान के चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक विकास, जिसकी लागत USD 85 मिलियन है (MEA, 2023), भारत की इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की मौजूदगी का उदाहरण है।

भारत-पश्चिम एशिया संबंधों के लिए प्रमुख संस्थान

  • MEA: विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक-पश्चिम एशिया रणनीति का मुख्य समन्वयक।
  • NITI Aayog: आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों को जोड़ने वाली रणनीतिक नीति इनपुट प्रदान करता है।
  • IBSA संवाद मंच: त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से पश्चिम एशिया संबंधों का समर्थन करता है।
  • RBI: पश्चिम एशिया से रेमिटेंस और वित्तीय प्रवाह की निगरानी करता है।
  • DRDO: पश्चिम एशियाई देशों के साथ रक्षा तकनीकी सहयोग में मदद करता है।
  • Petroleum Planning & Analysis Cell (PPAC): भारत के पश्चिम एशिया से ऊर्जा आयात की निगरानी और विश्लेषण करता है।

भारत और चीन के पश्चिम एशिया संबंधों की तुलना

पहलूभारतचीन
निवेश का पैमाना~USD 20 बिलियन (2023)~USD 60 बिलियन (2023) (चीन वाणिज्य मंत्रालय)
रणनीतिक बुनियादी ढांचाचाबहार बंदरगाह (USD 85 मिलियन)चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, ग्वादर बंदरगाह, जिबूती बेस
ऊर्जा सुरक्षा85% कच्चा तेल पश्चिम एशिया सेव्यापक ऊर्जा गलियारे और पाइपलाइन
रक्षा सहयोग2022 में निर्यात में 35% वृद्धिबड़े पैमाने पर हथियार बिक्री और संयुक्त अभ्यास
नीति समन्वयMEA, पेट्रोलियम, रक्षा विभाग के बीच असंगठित समन्वयआर्थिक और रणनीतिक नीतियों का समग्र समन्वय

भारत की इंडो-पैसिफिक नीति में पश्चिम एशिया के संबंध में महत्वपूर्ण कमियां

भारत की इंडो-पैसिफिक नीति में पश्चिम एशिया की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। ऊर्जा सुरक्षा, जो राष्ट्रीय हितों का केंद्र है, के लिए MEA, पेट्रोलियम मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच समेकित नीति समन्वय का अभाव है। प्रवासी कूटनीति भी पश्चिम एशिया को पूरी तरह से इंडो-पैसिफिक ढांचे में शामिल किए बिना संचालित हो रही है। SAGAR जैसी समुद्री कनेक्टिविटी पहलों में पश्चिम एशियाई तटीय राज्यों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया, जिससे रणनीतिक कमजोरियां बनी हैं। इसके विपरीत, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) पश्चिम एशिया को व्यापक रूप से समाहित करती है, जिससे उसकी भू-राजनीतिक और ऊर्जा पहुंच मजबूत होती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत को अपनी इंडो-पैसिफिक नीति में औपचारिक रूप से पश्चिम एशिया को शामिल करना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्र आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से केंद्रीय है।
  • MEA, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और NITI आयोग के बीच संस्थागत समन्वय मजबूत कर समेकित नीति निर्माण किया जाना चाहिए।
  • चाबहार बंदरगाह जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देकर और नए कनेक्टिविटी कॉरिडोर तलाशकर समुद्री संबंधों को गहरा किया जा सकता है।
  • पश्चिम एशिया में बसे भारतीय प्रवासियों को रणनीतिक संसाधन के रूप में उपयोग करने के लिए इंडो-पैसिफिक नीति में समन्वित प्रवासी कूटनीति अपनानी होगी।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत को पश्चिम एशिया में निवेश और रक्षा सहयोग बढ़ाना चाहिए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और पश्चिम एशिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में पश्चिम एशिया को मुख्य क्षेत्र के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
  2. भारत अपनी कच्ची तेल की 80% से अधिक जरूरतें पश्चिम एशिया से आयात करता है।
  3. चाबहार बंदरगाह चीन द्वारा वित्त पोषित एक रणनीतिक परियोजना है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में पश्चिम एशिया को मुख्य क्षेत्र के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। कथन 2 सही है; भारत अपनी कच्ची तेल की लगभग 85% जरूरतें पश्चिम एशिया से आयात करता है। कथन 3 गलत है; चाबहार बंदरगाह भारत की एक रणनीतिक परियोजना है जो ईरान में स्थित है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-चीन प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में पश्चिम एशिया पर विचार करें:
  1. चीन का पश्चिम एशिया में निवेश भारत से लगभग तीन गुना अधिक है।
  2. भारत का पश्चिम एशिया को रक्षा निर्यात 2022 में घट गया।
  3. चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पश्चिम एशिया को समाहित करता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; चीन का निवेश (~USD 60 बिलियन) भारत के लगभग तीन गुना (~USD 20 बिलियन) है। कथन 2 गलत है; भारत का पश्चिम एशिया को रक्षा निर्यात 2022 में 35% बढ़ा है। कथन 3 सही है; चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पश्चिम एशिया को व्यापक रूप से समाहित करता है।

मेन प्रश्न

विवेचनात्मक रूप से जांचिए कि क्यों भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति पश्चिम एशिया को शामिल किए बिना अधूरी है। इस बहिष्कार के आर्थिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा करें और भारत की इंडो-पैसिफिक रूपरेखा में पश्चिम एशिया को शामिल करने के उपाय सुझाएँ। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के खनिज और ऊर्जा क्षेत्र कच्चे तेल के आयात और प्रवासी रेमिटेंस पर निर्भर हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को पश्चिम एशिया के ऊर्जा और श्रम बाजार से जोड़ता है।
  • मेन प्वाइंटर: उत्तरों में इस बात को रेखांकित करें कि कैसे पश्चिम एशिया की ऊर्जा और प्रवासी कड़ियाँ झारखंड के आर्थिक विकास और रोजगार पर असर डालती हैं, जो भारत की व्यापक विदेश नीति प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत अपनी कच्ची तेल की लगभग 85% जरूरतें मुख्य रूप से सऊदी अरब, इराक और यूएई से आयात करता है, जिससे यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य बन जाता है (PPAC, 2023)।

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह, जिसे भारत ने USD 85 मिलियन की निवेश से विकसित किया है, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक रणनीतिक समुद्री पहुंच प्रदान करता है, जिससे पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ती है (MEA, 2023)।

पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासी भारत की विदेश नीति को कैसे प्रभावित करते हैं?

पश्चिम एशिया में बसे भारतीय प्रवासियों से 2022 में भेजी गई रेमिटेंस USD 87 बिलियन रही, जो भारत की आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है (वर्ल्ड बैंक, 2023)।

भारत को अपनी इंडो-पैसिफिक नीति में पश्चिम एशिया को शामिल करने में किन संस्थागत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

MEA, पेट्रोलियम मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच असंगठित समन्वय से समग्र नीति निर्माण बाधित होता है, जबकि चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पश्चिम एशिया को समेकित रूप से शामिल करता है।

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