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स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का परिचय

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स (FoF) 2.0 एक सरकारी पहल है, जिसे 2024 में स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुरू किया है। यह 2016 में शुरू हुए मूल फंड ऑफ फंड्स का अगला चरण है, जो स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान का हिस्सा था। FoF 2.0 का कुल कोष 10,000 करोड़ रुपये (लगभग 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो SEBI-रजिस्टर्ड Alternative Investment Funds (AIFs) में निवेश करता है। ये AIFs भारतभर के नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को पूंजी प्रदान करते हैं। इस फंड का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश को उत्प्रेरित कर स्टार्टअप इकोसिस्टम को व्यापक रूप से बढ़ाना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – स्टार्टअप इकोसिस्टम, सरकारी योजनाएं, निवेश प्रोत्साहन
  • GS पेपर 2: शासन – DPIIT, SIDBI, SEBI की नीति कार्यान्वयन में भूमिका
  • निबंध: भारत में आर्थिक सुधार और नवाचार आधारित विकास

फंड के कानूनी और संस्थागत ढांचे

फंड ऑफ फंड्स 2.0 एक जटिल कानूनी और नियामक ढांचे के अंतर्गत काम करता है। Companies Act, 2013 (Section 2(85)) स्टार्टअप की परिभाषा देता है, जबकि Limited Liability Partnership Act, 2008 LLP स्टार्टअप्स को नियंत्रित करता है। यह फंड केवल SEBI-रजिस्टर्ड AIFs में निवेश करता है, जिन्हें SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 के तहत नियंत्रित किया जाता है। स्टार्टअप्स को कर लाभ Income Tax Act, 1961 की धारा 80-IAC के तहत मिलते हैं। Small Industries Development Bank of India (SIDBI) फंड मैनेजर के रूप में कार्य करता है, निवेश करता है और फंड के उपयोग की निगरानी करता है। DPIIT नीति बनाता है और कार्यान्वयन देखता है, जबकि Invest India निवेश प्रोत्साहन में मदद करता है। NASSCOM उद्योग डेटा और इकोसिस्टम की जानकारी प्रदान करता है।

  • DPIIT: नीति निर्माण, स्टार्टअप मान्यता और कार्यान्वयन निगरानी।
  • SIDBI: फंड मैनेजर, निवेश वितरण और निगरानी।
  • SEBI: FoF से निवेश पाने वाले AIFs का नियमन।
  • NASSCOM: उद्योग भागीदार, डेटा और इकोसिस्टम समर्थन।
  • Invest India: निवेश प्रोत्साहन और स्टार्टअप प्रचार।

आर्थिक प्रभाव और फंड का विस्तार

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम, जिसकी कीमत 2023 तक 420 अरब डॉलर से अधिक है (NASSCOM 2023), में 90,000 से अधिक DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स और 70 से ज्यादा यूनिकॉर्न शामिल हैं। ये स्टार्टअप्स भारत के GDP में लगभग 3.5% का योगदान देते हैं और 50 लाख से अधिक रोजगार पैदा करते हैं (DPIIT 2024)। FoF 2.0, 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ, अगले पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश को उत्प्रेरित करके इस प्रभाव को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। 2023 तक, मूल FoF ने स्टार्टअप निवेश में 25,000 करोड़ रुपये उत्प्रेरित किए थे (SIDBI वार्षिक रिपोर्ट 2023)। सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में नवाचार के लिए बजट में 25% की वृद्धि की है, जो मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धता दर्शाती है।

  • FoF 2.0 के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष आवंटित (PIB, 2024)।
  • मार्च 2024 तक 90,000 से अधिक स्टार्टअप मान्यता प्राप्त।
  • 70+ यूनिकॉर्न, 420 अरब डॉलर मूल्यांकन।
  • स्टार्टअप GDP में 3.5% योगदान, 2030 तक 5% तक बढ़ने की संभावना (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)।
  • रोजगार सृजन 50 लाख से अधिक।
  • सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में नवाचार बजट में 25% वृद्धि की।

वैश्विक मानक से तुलना: इज़राइल का योज़्मा फंड

पैरामीटर स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 इज़राइल का योज़्मा फंड (1993)
कोष 10,000 करोड़ रुपये (~1.2 बिलियन डॉलर) शुरुआत में 100 मिलियन डॉलर; 1 बिलियन डॉलर के VC निवेश उत्प्रेरित
निवेश फोकस SEBI-रजिस्टर्ड AIFs जो विभिन्न सेक्टर्स के स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं तकनीकी स्टार्टअप्स पर केंद्रित वेंचर कैपिटल फंड्स
प्रभाव 70+ यूनिकॉर्न; 420 अरब डॉलर का इकोसिस्टम मूल्य; 50 लाख रोजगार 1,000 से अधिक स्टार्टअप्स; तकनीकी निर्यात में 15% वार्षिक वृद्धि
निकास तंत्र कम विकसित; फंड वितरण में देरी के कारण समय पर विस्तार में बाधा मजबूत निकास रणनीतियाँ, IPOs और अधिग्रहण को प्रोत्साहित किया गया
सरकारी भूमिका DPIIT और SIDBI द्वारा नीति निर्माण और फंड प्रबंधन सरकार ने निजी VC फंड्स के साथ सह-निवेश किया

फंड वितरण और प्रभाव मापन में चुनौतियाँ

FoF 2.0 को वास्तविक समय में प्रभाव मापन और फंड वितरण की दक्षता में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पूंजी वितरण में देरी स्टार्टअप्स को जरूरी विकास पूंजी समय पर नहीं मिल पाने देती, खासकर जब वे विस्तार के महत्वपूर्ण चरण में होते हैं। प्रभाव मापन के लिए पारदर्शी और मजबूत ढांचे की कमी नीति निर्माताओं को फंड की सफलता का सही आंकलन करने और रणनीति समायोजित करने में बाधित करती है। इज़राइल के योज़्मा फंड जैसे वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यासों की तुलना में, भारत के FoF 2.0 को बेहतर निकास तंत्र और वैश्विक बाजारों के साथ समेकन की जरूरत है ताकि रिटर्न और इकोसिस्टम की परिपक्वता बढ़ सके।

  • फंड वितरण में देरी से स्टार्टअप्स को समय पर मदद नहीं मिल पाती।
  • वास्तविक समय प्रभाव मापन ढांचे की कमी नीति सुधार में बाधा।
  • वैश्विक स्तर पर निकास तंत्र कम विकसित।
  • फंड वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत।
  • वैश्विक बाजारों से जुड़ाव सीमित।

आगे का रास्ता: फंड की प्रभावशीलता बढ़ाना

  • फंड वितरण और प्रभाव ट्रैकिंग के लिए वास्तविक समय डिजिटल डैशबोर्ड लागू करना।
  • फंड वितरण प्रक्रिया को सरल बनाकर देरी कम करना और पूंजी प्रवाह बेहतर करना।
  • IPO सुविधा और M&A समर्थन सहित संरचित निकास रणनीतियाँ विकसित करना।
  • अधिक पूंजी और विशेषज्ञता के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा देना।
  • स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार और तकनीक तक पहुंच दिलाने के लिए वैश्विक कनेक्शन को प्रोत्साहित करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. फंड सीधे DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करता है।
  2. SIDBI फंड ऑफ फंड्स का फंड मैनेजर है।
  3. 2024 तक फंड ऑफ फंड्स का कोष 10,000 करोड़ रुपये है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि फंड ऑफ फंड्स सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि SEBI-रजिस्टर्ड Alternative Investment Funds में निवेश करता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि SIDBI फंड मैनेजर है और कोष 10,000 करोड़ रुपये है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के नियामक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. Companies Act, 2013 स्टार्टअप्स को Section 2(85) में परिभाषित करता है।
  2. Income Tax Act स्टार्टअप्स को Section 80-IAC के तहत कर लाभ देता है।
  3. फंड ऑफ फंड्स सीधे SEBI के Alternative Investment Funds Regulations के तहत नियंत्रित है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 3 गलत है क्योंकि SEBI केवल उन AIFs को नियंत्रित करता है जिन्हें फंड ऑफ फंड्स निवेश करता है, लेकिन फंड ऑफ फंड्स खुद SIDBI और DPIIT द्वारा प्रबंधित है, न कि सीधे SEBI द्वारा।

मेन प्रश्न

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने में स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। इसके मजबूत पक्ष और सीमाओं पर चर्चा करें, और नवाचार आधारित आर्थिक विकास को उत्प्रेरित करने के लिए इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति
  • झारखंड कोण: रांची और जमशेदपुर जैसे उभरते स्टार्टअप हब फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से वेंचर कैपिटल प्रवाह से लाभान्वित हो सकते हैं, जिससे स्थानीय उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
  • मेन पॉइंटर: राष्ट्रीय स्टार्टअप नीतियों को राज्य स्तरीय औद्योगिक विकास से जोड़कर उत्तर तैयार करें, जिसमें SIDBI की भूमिका पर जोर दें जो झारखंड के स्टार्टअप्स तक फंड पहुंचाता है।
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का मुख्य निवेश तंत्र क्या है?

फंड ऑफ फंड्स 2.0 SEBI-रजिस्टर्ड Alternative Investment Funds (AIFs) में निवेश करता है, जो फिर नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को पूंजी प्रदान करते हैं। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता।

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का प्रबंधन कौन करता है?

Small Industries Development Bank of India (SIDBI) फंड मैनेजर है, जो FoF 2.0 के निवेश निर्णय और निगरानी का जिम्मा संभालता है।

स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत स्टार्टअप्स को कौन से कर लाभ मिलते हैं?

DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को Income Tax Act, 1961 की धारा 80-IAC के तहत 3 वर्षों का कर अवकाश मिलता है, बशर्ते वे 1 अप्रैल 2016 के बाद पंजीकृत हों।

फंड ऑफ फंड्स 2.0 रोजगार सृजन में कैसे योगदान देता है?

स्टार्टअप्स में निवेश को उत्प्रेरित करके यह फंड उनके विकास को बढ़ावा देता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। DPIIT के अनुसार, स्टार्टअप्स भारत में 50 लाख से अधिक रोजगार प्रदान करते हैं।

फंड ऑफ फंड्स 2.0 को किन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

मुख्य चुनौतियों में फंड वितरण में देरी, वास्तविक समय प्रभाव मापन की कमी, कम विकसित निकास तंत्र और वैश्विक बाजारों से सीमित जुड़ाव शामिल हैं।

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